मैसूर महल का भ्रमण - कब और कैसे जाएँ | मिसफ़िट वांडेरेर्स

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Photo of मैसूर महल का भ्रमण - कब और कैसे जाएँ | मिसफ़िट वांडेरेर्स 1/1 by Abhishek Singh

शहर के बीचोबीच स्थित मैसूर महल (Mysore Palace) को अम्बा विलास पैलेस के नाम से भी जाना जाता है। यह मैसूर का सबसे प्रमुख पर्यटन स्थल है जो साल में लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता है।

यह ऐतिहासिक महल वाडियार राजवंश का आधिकारिक निवास हुआ करता था। मैंने पदयात्रा करते हुए महल के प्रवेश द्वार पर पहुंचा। मैसूर बस स्टैंड से चंद कदमों पर होने के कारण मुझे सिर्फ 5 मिनट का समय लगा।

मैसूर महल का इतिहास

यह इमारत वाडियार राजवंश का निवास स्थान हुआ करता था, जिन्होंने 1399 से 1950 तक शासन किया था। एक तरह से यह महल एक गढ़ माना जाता था।

यद्यपि मूल महल 14 वीं शताब्दी में बनाया गया था, लेकिन वह इमारत 1912 में समाप्त हो गई थी। इससे पूर्व का महल चंदन की लकड़ी से बना था जो एक दुर्घटना में बहुत बुरी तरह प्रभावित हुआ। इससे महल को बहुत नुकसान हुआ।

1897 में लकड़ी के महल को आग से नष्ट कर दिया गया था, जब महामहिम राजर्षि कृष्णराज वाडियार चतुर्थ की सबसे बड़ी बहन, राजकुमारी जयलक्ष्मी अमानी का विवाह समारोह हो रहा था। उस वर्ष खुद मैसूर के युवा सम्राट महारानी और उनकी मां महारानी वाणी विलास संनिधना ने एक नए महल का निर्माण करने के लिए ब्रिटिश वास्तुकार लॉर्ड हेनरी इरविन को सौंप दिया था। लॉर्ड इरविन एक ब्रिटिश वास्तुकार थे जिन्होंने दक्षिण भारत में ज्यादातर इमारतों को रूपरेखा दिया था। 1912 में 42 लाख रुपये की लागत से महल का निर्माण पूरा हुआ। इसका विस्तार 1940 में मैसूर साम्राज्य के अंतिम महाराजा जयचामाराजेंद्र वाडियार के शासन में किया गया था

मंदिर का वास्तुकला

मेरे अंदर एक विचित्र सी उत्सुकता हो रही थी। सुना तो बहुत था मैसूर महल की खूबसूरती के बारे में, आज देख भी लूँगा।

टिकटघर से टिकट लेने के बाद मैं प्रवेश द्वार पहुँचा जहाँ थोड़ी जाँच प्रक्रिया हुई। फिर अंदर जाने की अनुमति मिल गई। थोड़ी दूर चलने पर आपको बाएँ तरफ एक खूबसूरत मंदिर दिखाई देगा। यह मंदिर भी बाकी मंदिरों की तरह ड्रविडियन शैली में बना है।

महल तीन मंजिल का है, जो भूरे रंग की महीन ग्रेनाइट से बना है। इसके ऊपर गहरे गुलाबी रंग के संगमरमर के पत्थर लगे हैं और एक पाँच मंजिला मीनार है जिसकी ऊँचाई 145 फीट है। महल का आकार 245 फुट से 156 फीट है। गुंबद इंडो-सरैसेनिक वास्तुकला को चित्रित करते हैं जो 19 वीं शताब्दी के अंत में ब्रिटिश भारत में ब्रिटिश वास्तुकारों द्वारा लागू किया गया था।

इसमें भारतीय, इंडो-इस्लामिक, नियो-क्लासिकल और गोथिक पुनरुद्धार शैलियों के तत्व शामिल हैं। परिसर के तीन द्वार महल तक ले जाते हैं - सामने का द्वार (विशेष रूप से पूर्वी द्वार) वीवीआईपी के लिए और अन्यथा दशहरा के दौरान खुलता है; दक्षिण गेट को आम जनता के लिए नामित किया गया है; और पश्चिम द्वार आम तौर पर दशहरा में खुला रहता है। इनके अलावा महल के तहखाने में कई गुप्त सुरंगें हैं जो कई गोपनीय क्षेत्रों और श्रीरंगपटना शहर जैसे अन्य स्थानों की ओर ले जाती हैं। कई फैंसी मेहराब इमारत के अग्रभाग को दो छोटे मेहराबों से सुशोभित करते हैं जो मध्य एक के दोनों तरफ लंबे स्तंभों के साथ समर्थित हैं।

सौभाग्य, समृद्धि और धन की देवी गजलक्ष्मी की एक मूर्ति, जिसमें हाथी हैं, केंद्रीय मेहराब के ऊपर विराजमान हैं। चामुंडी हिल्स के सामने स्थित महल देवी चामुंडी के प्रति मैसूर के महाराजाओं की भक्ति का प्रकटीकरण दर्शाता है। महल के चारों ओर एक बड़ा, सुंदर और सुव्यवस्थित उद्यान है

जो इसकी सुंदरता में चार चांद लगाता है।

महल के अंदर की भव्यता

मैसूर पैलेस के सबसे उल्लेखनीय तत्व हैं- दरबार हॉल, अंबाविलासा, और कल्याण मंडप।

दरबार हॉल - यहाँ महाराजा जनता को संबोधित करते थे। यह डिजाइन में अंबाविलास हॉल के समान है लेकिन यह बहुत बड़ा है। यहाँ से मुख्य द्वार को देखा जा सकता है। महाराजा अपने लोगों से बात करने के लिए इस बालकनी का उपयोग करते थे और त्योहार और उत्सव भी बालकनी के सामने के क्षेत्र में मनाए जाते थे।

Photo of मैसूर महल, Sirsi Road, near Kanakpura, Roshan Nagar, Kanakpura, Jaipur, Rajasthan, India by Abhishek Singh
Photo of मैसूर महल, Sirsi Road, near Kanakpura, Roshan Nagar, Kanakpura, Jaipur, Rajasthan, India by Abhishek Singh

अंबाविलास - यह कमरा दरबार हॉल की तुलना में और भी शानदार है क्योंकि पत्थरों पर सोने की परत का इस्तेमाल किया गया है और कांच की छत जो कि एक उत्कृष्ट कृति है और चूंकि यह मुख्य आकर्षण है, इसलिए यहां स्थायी रूप से भीड़ होती है।

इस हॉल को पूरी तरह से चित्रों द्वारा सजाया गया है। चित्रित स्तंभों के साथ गुलाबी, पीले और फिरोजी रंगो से पूरी तरह से सजाया गया है।

कल्याण मंडप- कल्याण मंडप, जिसे मैरिज हॉल के नाम से भी जाना जाता है। यह आपको अवाक छोड़ देगा।

जैसा कि आप कमरे में चलते हैं, आपको एहसास होगा कि आप इसे केवल एक तरफ से देख सकते हैं लेकिन, जैसा कि आप यात्रा के मार्ग का अनुसरण करते हुए सीढ़ियों से नीचे उतरते हैं तो अपना सिर चारों ओर मोड़ना ना भूलें। कमरे के लिए खुलने वाला दरवाजा, जिसे सीढ़ी से पीछे से देखा जा सकता है, अपने आप में सुंदर है। इसकी हाथीदांत पर ध्यान अवश्य दें।

यह हॉल आकार में अष्टकोणीय है, इसकी गुंबददार छत और सोने का पानी चढ़ा स्तंभों के साथ उल्लेखनीय है। मोर के रूपांकनों के साथ सना हुआ शीशे के छत तक देखना आनंदमय होगा, जो फर्श पर भी परिलक्षित होते हैं।

कब और कैसे जाएँ

टिकट

वयस्कों के लिए ₹70 प्रति व्यक्ति। विदेशी पर्यटकों के लिए प्रति व्यक्ति ₹200 (ऑडियो किट शामिल)

मैसूर महल बैंगलोर शहर से 140 किमी की दूरी पर स्थित है। यहाँ पहुँचने के लिए आप बस या रेल का माध्यम के सकते है। आप किसी भी दिन सुबह 10:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक महल का भ्रमण कर सकते है । प्रवेश शुल्क निम्नवत हैं:-

सायं 07.00- 7:45 बजे - रविवार, राष्ट्रीय अवकाश और राज्य त्योहारों पर। सायं 07.40- 8:00 बजे - साउंड एंड लाइट शो के बाद वीकेंड (सोमवार से शनिवार)।

 मैसूर पैलेस की लाइटिंग देखने के लिए कोई शुल्क नहीं है महल में एक और मुख्य आकर्षण है वह लाइट शो, जो आमतौर पर शाम 7:00 बजे से शाम 7:40 बजे तक होता है, (सोमवार से शनिवार)।

महल की असली रौनक तब होती है जब महल शाम के दौरान रोशन किया जाता है। कई पर्यटक इस खूबसूरत नज़ारे को देखने के लिए आते हैं। यदि आप चमचमाते हुए महल की एक झलक देखने में रुचि रखते हैं, तो कृपया निम्नलिखित समय को संभाल कर रखें:-

महल में प्रवेश से पहले जूते चप्पल काउंटर पर जमा होते है।

आप कैमरा ले जा सकते है।

कम से कम 3-4 घंटे अवश्य दे, अगर आप अच्छे से सब घूमना चाहते है।

दशहरा के मौके पर महल की अच्छी तरह से सजावट की जाती हैं।

कुछ प्रमुख बिंदु

मै साउंड और लाइट शो का साक्षी नहीं बन सका। वक़्त की कमी के चलते कुछ चीज़े घूम नहीं पाया। यहाँ हर साल लाखों की संख्या में पर्यटक आते है। मेरा दावा है कि आप महल घूम के इसकी कलाकृति के दीवाने हो जाएँगे।

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