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About Jageshwar Dham

कैसे पहुँचें: अल्मोड़ा से 36 किलोमीटर दूर स्तिथ इस मंदिर में कार , टैक्सी या बस के माध्यम से पहुंच सकते हैं।जागेश्वर मंदिर से जुडी पौराणिक कथा: जागेश्वर का मंदिर प्रांगण 8 से 18वी शताब्दी के बीच बना था। यहाँ के स्थानीय लोग मानते हैं की शिव भगवान् ने यह स्थान अपने ध्यान के लिए चुना था। उनकी तपस्या के समय पर यहाँ राक्षशों ने उनकी तपस्या भंग करने की कोशिश की। तब भगवान् सैम से त्रिनेत्र का रूप लिया और अपने गणों को राक्षसों के नाश के लिए भेजा। यह भी मlना जाता है की भगवान् सैम कलयुग में मानव जाती की उद्धार के लिए कोट लिंग नाम के इस मंदिर में दर्शन देंगे। आदि शंकराचार्य ने यहाँ पर एक भव्य मंदिर बनाने की कोशिश की पर यह चेष्टा सफल नहीं हो सकी। लोग मानते हैं की भगवान् सैम चाहते थे की जागेश्वर की यह भूमि बस शिव भगवान् की तपस्या के लिए प्रयोग में आये। इस पुराने मंदिर के अवशेष आज भी कोटलिंग में देखे जा सकते हैं। यहाँ के लोग आज भी मानते हैं की कलयुग में मानव जाती का उद्धार करने हेतु यहाँ पर सैम या लकुलीश नाम से भगवान् दर्शन देंगे और जागेश्वर में कॉलिंग मंदिर का निर्माण करेंगे। (क्रेडिट्स: विकिपीडिया)

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