आखिर 17 बार लूटने के बाद इस मंदिर का इतना महतत्व क्यू है।

Tripoto
27th Aug 2022
Photo of आखिर 17 बार लूटने के बाद इस मंदिर का इतना महतत्व क्यू है। by Lucky Goyal

हर हर महादेव
दोस्तो आज हम अपनी यात्रा के अगले पड़ाव की ओर चलते है।जैसे की स्टोरी शीर्षक से आपको पता चल गया होगा की आज हम सोमनाथ ज्योतिलिंग की यात्रा के बारे में बात करने वाले है। सोमनाथ ज्योतिलिंग के आसपास के कुछ और धार्मिक जगह के बारे में वी आपको बताएंगे। इन सबको का भ्रमण करने के लिए एक दिन पर्यपात है ।
हमने कुछ निम्न धार्मिक स्थान का भ्रमण किया है
सोमनाथ मंदिर, भालका तीर्थ,त्रिवेणी संगम,पांच पांडव गुफा,सूरज कुंड, सोमनाथ ज्योतिलिंग की आरती, सोमनाथ मंदिर लाइट शो।

Day 1

पिछली रात हम लोग द्वारका में रुके थे।आज हम लोग द्वारका से सोमनाथ ज्योतिलिंग के लिए जा रहे थे। हम लोग नहा कर अपना ब्रेकफास्ट कर के सोमनाथ के लिए तैयार हो चुके थे।टैक्सी आ चुकी थी अपना सामान रख कर हम लोग सोमनाथ के लिए रवाना हो चुके थे। द्वारका से सोमनाथ की दूरी करीब 240 km हैं टैक्सी से 4 घंटे में बड़े आराम से इसको कवर किया जा सकता है। 11 बजे निकलने के बाद करीब 3 बजे हम भगवान शिव के पहले ज्योतिलिंग की धरती में प्रवेश कर चुके थे। रोड को कंडीशन कुछ खास अच्छी नही थी इसलिए थकावट हो चुकी थी।सबसे पहले हमने प्रीबुक रूम में चेक इन किया थोड़ा आराम कर के अब हम लोगो ने सोमनाथ के आसपास कुछ धार्मिक स्थानों को देखने का निर्णय किया। इसके लिए सबसे पहले हमने सबसे सस्ता ट्रांसपोर्ट मोड को चुना जो को आप जानते है पहले को तरह ऑटो को हायर किया।500 rs में उसने हमको 5 स्थान घूमने को बोला जिसकी लिस्ट मैं आपसे उपर शेयर कर चुका हू।सबसे पहले हम लोग भालिका तीर्थ को गए। जिसके बारे में मैं थोड़ा डिटेल में आपको बताता हु।
भलिका तीर्थ
भलिका तीर्थ यही वो पावन स्थान है, जहां सृष्टि के पालनहार कृष्ण ने अपना शरीर त्यागा था. ये स्थान श्रीकृष्ण और उनके आखिरी लम्हों की गवाही देता है. इस मंदिर में बनी भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा उनके आखिरी वक्त को बयां करती है. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इसी जगह पर भगवान श्रीकृष्ण को एक बहेलिये के तीर ने भेद दिया था और उनके सामने ही स्थापित है उस बहेलिए की हाथ जोड़े, क्षमा मांगते हुए प्रतिमा, जो कृष्ण पर बाण चलाकर पछता रहा था. लेकिन कृष्ण तो अंतर्यामी थे. वो बखूबी जानते थे कि संसार को अपने इशारों पर भले वो चलाते हों लेकिन अब इस दुनिया से उनके चलने का समय आ गया है. तभी तो तीर चलाने वाले बहेलिए को उन्होंने माफ कर दिया भालका तीर्थ भले ही भगवान श्री कृष्ण के अंतिम दिनों का साक्षी है लेकिन आज भी ये पवित्र तार्थ स्थल भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला एक प्रमुख धार्मिक केंद्र है उनके होने का एहसास आज भी श्रद्धालुओं के मन में है. और इसकी गवाही देता है मंदिर परिसर में मौजूद ये 5 हजार साल पुराना पीपल का वृक्ष जो कभी नहीं सूखता है. भलिका तीर्थ के बाद हम लोग त्रिवेणी संगम की ओर गए इसका इतिहास कुछ निम्न प्रकार से है
त्रिवेणी संगम
त्रिवेणी संगम हिरन, कपिला और सरस्वती नदियों के संगम को चिह्नित करता है, जहां वे पश्चिमी तट पर अरब सागर से मिलते हैं। माना जाता है कि चंद्र देवता को सोम को श्राप देने के कारण अपनी चमक खोनी पड़ी थी और फिर उन्हें इसे पुनः प्राप्त करने के लिए इस स्थल पर सरस्वती नदी में स्नान किया। त्रिवेणी संगम के पास कुछ समुंद्री पक्षी   घूमते रहते है इनका नाम सीगल होता है स्थानीय लोग इसे ‘समुद्री घुमडो’ कहते हैं। त्रिवेणी संगम पर ये गांठिया भी खाते हैं। संगम क्षेत्र में सीगल के लिए स्थानीय लोग और पर्यटक रोजाना औसतन 30 से 40 किलो गांठिया ड़ालते हैं, जिसे ये चुग जाते हैं। मार्च में चले जाएंगे वापस: ठंड के मौसम में ये पक्षी यूरोप, चीन और कजाकिस्तान आदि देशों से गुजरात-भारत के समुद्र क्षेत्र में आते हैं। मार्च में ये वापस लौटने लगते हैं। इसके बाद हमारा अगला पड़ाव पांच पांडव गुफा था। इसके इतिहास की कुछ महत्वपूर्ण जानकारी आपसे सांझा करते है।
पंच पांडव गुफा
पंच पांडव गुफा सोमनाथ में स्थित एक तीर्थ स्थान है। त्रिवेणी संगम घाट के पास स्थित, यह सोमनाथ में घूमने के लिए पवित्र और दिलचस्प स्थानों में से एक है।हिंगलाज माता मंदिर के नाम से भी जाना जाता है ऐसा माना जाता है कि पांडवों ने अपने वनवास के दौरान यहां मां हिंगलाज की पूजा की थी। गुफा में पांडव भाइयों को समर्पित एक मंदिर है। शिव, सीता मां, राम-लक्ष्मण, भगवान हनुमान और देवी दुर्गा के सम्मान में मंदिर भी हैं। गुफा का प्रवेश द्वार बहुत ही संकरा और नीचा है। वयस्कों को नीचे झुकना पड़ता है और सचमुच सीढ़ियों से नीचे रेंगना पड़ता है। खड़ी और घुटन भरे प्रवेश द्वार के कारण वृद्धों और भारी शरीर वाले लोगों का प्रवेश करना थोड़ा मुश्किल है इसके बाद हम बात करते है सूर्य मंदिर की |
सूर्य मंदिर
सूर्य मंदिर गुजरात का सबसे पुराना सूर्य मंदिर है। मंदिर में सूर्य देव और छाया देवी मुख्य विग्रह हैं। यह माना जाता है कि अज्ञातवास के दौरान पंडवों ने यहां रहकर सूर्य देव की प्रार्थना किया करते थे।मंदिर के चारों ओर दीवारों पर श्री विष्णु, माता लक्ष्मी, ब्रह्मा जी, माता सरस्वती, सीता माता और माँ पार्वती के साथ सजाया गया है, शेरों, हाथियों और अन्य जानवरों की मूर्तियां लगी हुईं हैं। मंदिर के साथ ही एक सूर्य कुंड भी है सूर्य कुंड बहुत पुराना है।मान्यता है की सूर्य कुंड का पानी पीने से शारीरिक रोग दूर होते है।
सब स्थानों का भ्रमण करते करते 6 बज चुके थे इसलिए अब हम लोग सोमनाथ मंदिर की ओर जा रहे थे।मंदिर के पास ऑटो वाले ने हमको उतार दिया। सोमनाथ मंदिर में एंट्री से पहले मोबाइल, पर्स, बेल्ट इन सबको ले जाने की अनुमति नही है।इसलिए सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट द्वारा बनाए गए लाकर में आपको टोकन ले कर समान वहा रखना होगा। अब मंदिर परिसर में जाते ही मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है।आपका विचलित मन शांत होने लग जाएगा। जैसे जैसे मंदिर में प्रवेश करते जाओगे भगवान शिव का एहसास आपको होता जाएगा। सोमनाथ मंदिर के इतिहास के बारे में आपको कुछ महत्वपूर्ण जानकारी सांझा करते है
सोमनाथ मंदिर
सोमनाथ का अर्थ है, “भगवानों के भगवान”, जिसे भगवान शिव का अंश माना जाता है। गुजरात का सोमनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है।समुंदर किनारे स्थित सोमनाथ 12 ज्योर्तिलिंग में प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग है। चंद्रदेव का एक नाम सोम भी है। उन्होंने भगवान शिव को अपना नाथ स्वामी मन कर तप किया था। इसलिए इसका नाम सोमनाथ हो गया। सोमनाथ मंदिर उस लोकेशन पर स्थित है जहां अंटार्कटिका तक सोमनाथ समुद्र के बीच एक सीधी रेखा में कोई भूमि नहीं है। सोमनाथ मंदिर के प्राचीन इतिहास और इसकी वास्तुकला और प्रसिद्धि के कारण इसे देखने के लिए देश और दुनिया से भारी संख्या में पर्यटक यहां आते हैं इसका निर्माण स्वयं चंद्रदेव सोमराज ने किया था। इसका उल्लेख ऋग्वेद में किया गया है।वैसे तो इस मंदिर को बहुत बार लूटा गया है 600वी, 700वी, 800वी शताबादी में इसको अनेकों मुगलों द्वारा लूटा गया। पर महमूद गजनवी ने इसको 17 बार लूटा ।महमूद गजनवी ने सन 1024 में अपने पांच हजार सैनिकों के साथ सोमनाथ मंदिर पर हमला किया और उसकी सम्पत्ति लूटकर मंदिर को पूरी तरह नष्ट कर दिया।उस दौरान सोमनाथ मंदिर के अंदर लगभग पचास हजार लोग पूजा कर रहे थे, गजनवी ने सभी लोगों का कत्ल करवा दिया और लूटी हुई सम्पत्ति लेकर भाग गया।इसके बाद गुजरात के राजा भीम और मालवा के राजा भोज ने इसका दोबारा निर्माण कराया। सन् 1297 में जब दिल्ली सल्तनत ने गुजरात पर अपना कब्जा किया तो सोमनाथ मंदिर को पाँचवीं बार गिराया गया। मुगल बादशाह औरंगजेब ने 1702 में आदेश दिया कि यदि हिंदू सोमनाथ मंदिर में दोबारा से पूजा किए तो इसे पूरी तरह से ध्वस्त करवा जाएगा। आखिरकार उसने पुनः 1706 में सोमनाथ मंदिर को गिरवा दिया।इस समय सोमनाथ मंदिर जिस रूप में खड़ा है उसे भारत के गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने बनवाया था और पहली दिसंबर 1995 को भारत के राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया था।आमतौर पर सभी पर्यटन स्थलों और मंदिरों में कोई न कोई ऐसी विशेषता जरूर होती है जिसके कारण लोग उसे देखने के लिए जाते हैं। सोमनाथ मंदिर की भी अपनी विशेषता है। आइये जानते हैं इस मंदिर के बारे में कुछ रोचक तथ्य क्या हैं।आपको यह जानकर हैरानी होगी कि सोमनाथ मंदिर में स्थित शिवलिंग में रेडियोधर्मी गुण है जो जमीन के ऊपर संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। इस मंदिर के निर्माण में पांच वर्ष लग गए थे।सोमनाथ मंदिर के शिखर की ऊंचाई 150 फीट है और मंदिर के अंदर गर्भगृह, सभामंडपम और नृत्य मंडपम है।सोमनाथ मंदिर को महमूद गजनवी ने लूटा था जो इतिहास की एक प्रचलित घटना है। इसके बाद मंदिर का नाम पूरी दुनिया में विख्यात हो गया।मंदिर के दक्षिण में समुद्र के किनारे एक स्तंभ है जिसे बाणस्तंभ के नाम से जाना जाता है। इसके ऊपर तीर रखा गया है जो यह दर्शाता है कि सोमनाथ मंदिर और दक्षिण ध्रुव के बीच पृथ्वी का कोई भाग नहीं है पर्यटकों और भक्तों के लिए सोमनाथ मंदिर सुबह छह बजे से रात नौ बजे तक खुला रहता है। मंदिर में तीन बार आरती होती है। इस अद्भुत आरती को देखने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं।आरती देख कर मन मंत्र मुक्त हो जाता है। ऐसा एहसास मैंने अपनी जिंदगी में कभी अनुभव नही किया है।आरती टाइम आपके शरीर में वाइब्रेट होता है जो भगवान शिव के होने का सुखद एहसास देता है।सोमनाथ समुंदर किनारे हमने 3 बड़े शिवलिंग देखते जिसके बारे में ये कहा जाता है की महमूद गजनवी द्वारा इसको समुंदर में फेंका गया था उसके बाद ये शिवलिंग यही पर स्थापित हो गए। बड़ा सुंदर नजारा है। आपसे फोटो शेयर करूंगा ।सोमनाथ मंदिर परिसर में ही रात साढ़े सात बजे से साढ़े आठ बजे तक लाइट एंड साउंड शो चलता है।जिसमें सोमनाथ मन्दिर के इतिहास का बड़ा ही सुन्दर सचित्र वर्णन किया जाता है।लाइट शो में आपको सोमनाथ मंदिर के निर्माण और नष्ट करने का सारा इतिहास बड़े अच्छे तरीके से बताया जाता है लाइट शो सभी को जरूर देखना चाहिए। इसके बाद मंदिर से बाहर आने के बाद हम लोग डिनर करने के लिए रेस्ट्रेडेंट की ओर गए आपको सोमनाथ में सारे veg रेस्ट्राउडेन ही मिलेंगे , भोजन अच्छा ओर शाकाहारी मिलेगा रात हो चुकी थी इसलिए आपके रूम की ओर पैदल रवाना हुए जो की 10 मिनट के वॉकिंग डिस्टेंस पर ही था। कल सुबह आपको एक ओर नई यात्रा पर ले कर चलेंगे। उम्मीद है आप सब लोगो को ये वाला ब्लॉग पसंद आया होगा। शुभरात्रि कल सुबह मिलते है
हर हर महादेव

Photo of सोमनाथ by Lucky Goyal
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Photo of सोमनाथ by Lucky Goyal
Photo of सोमनाथ by Lucky Goyal
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