
भारत की प्राकृतिक विरासत को लेकर एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। देश के सात प्राकृतिक स्थलों को UNESCO की विश्व विरासत स्थलों की संभावित सूची में शामिल कर लिया गया है। इससे भारत के संभावित विश्व विरासत स्थलों की कुल संख्या अब 69 हो गई है। इनमें 49 सांस्कृतिक, 17 प्राकृतिक, और 3 मिश्रित स्थल शामिल हैं।
ये कदम भारत की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहरों को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने और संरक्षित करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
कौन-कौन से स्थल हुए शामिल?
डेक्कन ट्रैप, पंचगनी और महाबलेश्वर (महाराष्ट्र):
दुनिया के सबसे बेहतरीन लावा प्रवाहों में से एक माने जाते हैं। ये क्षेत्र पहले से ही विश्व धरोहर स्थल "कोयना वन्यजीव अभयारण्य" के तहत आते हैं।
सेंट मैरी द्वीप समूह (कर्नाटक):
यहां की स्तंभाकार बेसाल्टिक चट्टानें लगभग 85 मिलियन साल पुरानी हैं यानी डायनासोर के जमाने की! भूवैज्ञानिकों के लिए यह किसी खजाने से कम नहीं।
मेघालय की गुफाएं:
खासतौर से माव्लुह गुफा, जो "मेघालय युग" का वैश्विक संदर्भ बिंदु मानी जाती है। इन गुफाओं में धरती की जलवायु और भूवैज्ञानिक बदलावों की परतें छिपी हैं।

नागा हिल ओफियोलाइट (नागालैंड):
ओफियोलाइट्स यानी महासागरीय परतें जो महाद्वीप पर पाई जाती हैं। ये स्थल प्लेट टेक्टोनिक्स और पृथ्वी की गहराई से जुड़ी जानकारी देते हैं।
एर्रा मट्टी डिब्बालु (आंध्र प्रदेश):
विशाखापत्तनम के पास की ये लाल रेत की पहाड़ियां पृथ्वी के जलवायु इतिहास को बयान करती हैं- बेहद अनोखी और दर्शनीय।
तिरुमला पहाड़ियां (आंध्र प्रदेश):
यहां की सिलाथोरनम नामक प्राकृतिक चट्टानी मेहराब और एपार्चियन नादुरुस्ती जैसी संरचनाएं करीब 1.5 अरब साल पुरानी हैं!

वर्कला चट्टानें (केरल):
समुद्र किनारे की ये खूबसूरत चट्टानें मायो-प्लियोसीन युग से जुड़ी हैं और पर्यटकों के साथ-साथ वैज्ञानिकों के लिए भी खास हैं।
भारत की वैश्विक धरोहर के प्रति प्रतिबद्धता
UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने के लिए, संभावित सूची में पहले शामिल होना जरूरी होता है। यानी अब ये सात स्थल नामांकन की दिशा में पहला कदम पार कर चुके हैं।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने इन स्थलों का नामांकन तैयार कर यूनेस्को को भेजा। भारत के यूनेस्को पेरिस में स्थायी प्रतिनिधि ने ASI के काम की सराहना की। भारत ने जुलाई 2024 में नई दिल्ली में विश्व विरासत समिति के 46वें सत्र की मेजबानी भी की थी। इसमें 140 देशों के 2000 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था।
क्या है इसका मतलब?
ये सिर्फ "सूची में नाम" भर नहीं है, बल्कि यह भारत के प्राकृतिक अजूबों को वैश्विक संरक्षण और पर्यटन के नक्शे पर लाने की दिशा में बड़ा कदम है। साथ ही, इससे इन स्थलों को अंतरराष्ट्रीय पहचान, रिसर्च और फंडिंग के नए रास्ते भी मिल सकते हैं। आने वाले समय में अगर ये स्थल यूनेस्को की मुख्य विश्व धरोहर सूची में शामिल होते हैं, तो ये न सिर्फ भारत के पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सफलता होगी, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी वरदान साबित हो सकते हैं।













