अगर ये डिशें चख लीं तो आप भी बोलोगे, 'जम्मू कश्मीर के खाने का जवाब नहीं'

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खाने का जब भी ज़िक्र आता है तो मैं बहुत ठहर सा जाता हूँ। ज़हन में ख़ूब सारा स्वाद डोल रहा होता है। रैटट्विल फ़िल्म का खाना बनाने वाला चूहा हो जाता हूँ मैं। स्वाद की गलियों में घूमते हुए लिखना अपनी प्रेमिका को सामने बिठा के उसकी तस्वीर बनाने जैसा होता है। तस्वीर कैसी भी बने, वो लम्हात मुझसे कोई नहीं छीन सकता।

बात करें जम्मू कश्मीर की, तो मेरे हिसाब से एक ट्रिप सिर्फ़ वहाँ का स्वाद चखने के लिए जाना चाहिए। देखिए जम्मू कश्मीर की वो लज़ीज़ डिशें, जिनका ज़ायका आपके ट्रिप को पूरा बना देगा।

जम्मू

1. राजमा चावल- जम्मू के लोग इसको डोगरी भाषा में राजमा चौल बोलते हैं। जैसे यूपी के लोग गर्मियों में अरहर की दाल और चावल के दीवाने हैं, वैसा ही रंग यहाँ राजमा चावल को लेकर है। हफ़्ते में हर चौथे दिन घरों में यह बनता ही है। राजमा चावल और उसके संग दही। फिर जो नींद आती है न, क्या कहने। जम्मू आएँ तो यहाँ का स्वाद ज़रूर लें।

2. कलाड़ी कुल्चा- कलाड़ी कुल्चा का ज़िक्र मैंने अपने दूसरे आर्टिकल में भी किया है। जम्मू, रियासी और साँभा के नज़दीकी ज़िले की बहुत प्रसिद्ध डिश में है कलाड़ी कुल्चा। दूध को मथ कर उसकी परत बनाते हैं, जिसे ब्रेड को सैंडविच बना कर खाया जाता है। जम्मू में इसका स्वाद का आनंद ज़रूर लें।

3. मंथल का चिकन- चिकन होना बहुत बड़ी बात नहीं है। लेकिन अगर जम्मू कश्मीर आने का मौक़ा लगता है तो जम्मू से उधमपुर जाने वाली बस आपको मंथल पर छोड़ देगी। अगर कटरा से जम्मू आ रहे हैं तो दोमेल पर उतर जाइएगा। वहाँ से उधमपुर के लिए बस जाती है। वो भी आपको मंथल पर उतार देगी। जिस पर सबसे ज़्यादा पब्लिक हो, बस वही दुकान आपकी मंज़िल है।

मंथल दो चीज़ों के लिए प्रसिद्ध है। एक तो चिकन, और दूसरा अचार। एक खाएँ, दूसरा पैक करा ले जाएँ।

4. अंबल की सब्ज़ी- अंबल को लोग कद्दू के नाम से जानते होंगे। जम्मू में इसे अंबल बोलते हैं। इसकी मीठी सब्ज़ी बनती है जो आप खाने जा सकते हैं। घर पर भी इसे बना सकते हैं।

जम्मू की खाई जाने वाली डिश में इसे कम शुमार किया जाता है, पर एक बार स्वाद लेने के लिए थोड़ी मेहनत करनी पड़ सकती है।

5. पहलवान की मिठाई- पहलवान की मिठाई की दुकान जम्मू में है और बहुत प्रसिद्ध भी। ये दुकान आपको कभी निराश नहीं करती। जम्मू की प्रसिद्ध मिठाइयों में एक चॉकलेटी बर्फ़ी का स्वाद लोगों को बहुत याद रहता है। इसके अलावा भी खाने के लिए पहलवान की दुकान बढ़िया है।

कश्मीर

जम्मू में जहाँ मिठाइयाँ और राजमा चावल जैसा वेज स्वाद है, वहीं घाटी की तरफ़ बढ़ते हुए ये नॉन वेज हो जाता है। कश्मीरी पंडित शैव धर्म को मानने वाले होते हैं और कुछ लोग अपने भगवान को मछली का भोग भी चढ़ाते हैं। कश्मीरियों में यह अन्तर सिर्फ़ ठण्ड के कारण आया है या कोई और वजह, नहीं पता। लेकिन बहुत हद तक चिकन, मटन का स्वाद यहाँ के खाने में मिल जाता है।

6. रोगन जोश- इस कश्मीरी डिश का नाम आपने सुना होगा। मटन से बनने वाली यह डिश न जाने कितने देशों का सफ़र तय कर चुकी है। शिकारे पर बैठकर धूप में रोगन जोश की उठती हुई गर्म भाप संग नज़ारे देखना जन्नत से कम नहीं है। कोई भी आपको ये बात नहीं बताएगा।

7. तबक माज़- कश्मीर की प्रसिद्ध डिशों में तबक माज़ भी आता है। पारसी ज़ायके से लबरेज़ इस डिश को कश्मीर की आत्मा भी कहा जाता है। कश्मीर के सांस्कृतिक क्विज़ीन में कश्मीरी तबक माज़ का भी नाम शुमार है। शादी में तबक माज़ न हो तो शादी मुकम्मल नहीं मानी जाती है। यहाँ की लोक संस्कृति का स्वाद लेने के लिए इसका नाम ज़रूर याद रखें।

8. यख़नी- धीमी-धीमी आँच पर पकने वाली यख़नी पुलाव के साथ ज़ायके भरती है। पुलाव में काजू, बादाम और दूसरे सूखे मेवे होते हैं। इसके साथ एक रूमानी ख़ुशबू आती है इस पुलाव से, वहीं यख़नी मेमने के माँस से बनती है। एक हड्डी भी इसके ज़ायके का हिस्सा है जिस पर पारसी मसाले बहुतायत में होते हैं। यह डिश कश्मीर के अलावा कई यूरोपियन देशों में भी इसी नाम से मिलती है, लेकिन ज़ायका एकदम अलग होता है। वहीं कश्मीरी पंडित इस डिश को अलग ही स्वाद से जानते हैं। कारण सब जगह मसालों का है। किसी भी कारण से कश्मीर जाएँ तो यहाँ यख़नी का स्वाद ज़रूर लें।

9. फ़िश विद रदिश- मछली के साथ रदिश का नाम कश्मीर के स्वादघर में बहुत प्रसिद्ध है। इस डिश में मछली को ग्रिल करके पकाया जाता है। और फिर इसको करी की तरह परोसा जाता है। नीचे दिए लिंक में आप समझ सकते हैं।

इन डिशों में जम्मू की टिंब्रू की सब्ज़ी, हक़ साग और ख़ुबानी की सब्ज़ी का भी नाम है। वहीं कश्मीर में नद्रू यख़नी का भी ज़ायका फ़रमाते हैं।

जम्मू एवं कश्मीर स्वयं में बहुत विस्तृत है, अपने हर बार के नए अंदाज़ के कारण जम्मू कश्मीर हमेशा ज़िन्दा रहता है। ख़ासकर कश्मीर ने जिस तरह से अपनी विरासत को सँभाल कर रखा है, तारीफ़ के क़ाबिल है। लोगों को अपनी संंस्कृति के बारे में इतनी जानकारी है कि कोई भी सामान्य आदमी अपने बारे में इतनी जानकारी शायद ही बता सके।

तो कहीं पर भी अगर इतना अच्छा स्वाद मिले तो देर न करें, साथ ही हमें कमेंट बॉक्स में बताएँ इस लेख के बारे में।

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