Beauty Of North East Calling. नॉर्थ - ईस्ट के नजारे आपको पुकारे, जानिये कैसे जाए कितने पैसे में खर्च

Tripoto
11th Oct 2018
Photo of Beauty Of North East Calling. नॉर्थ - ईस्ट के नजारे आपको पुकारे, जानिये कैसे जाए कितने पैसे में खर्च by Afsarul haq

वैसे तो अरुणाचल प्रदेश की खूबसूरती से कोई भी अछूता नही रहा है। दूर दूर तक फ़ैली वादी और खुशमिज़ाज़ लोग आपके सफर को काफी यादगार बना देते है। अगर आपने अभी तक यहां का प्लान नही बनाया है तो चलिए हमारे साथ नॉर्थ - ईस्ट के सफर पे ।

Photo of Beauty Of North East Calling. नॉर्थ - ईस्ट के नजारे आपको पुकारे, जानिये कैसे जाए कितने पैसे में खर्च 1/1 by Afsarul haq
STUNNING VIEW OF SELA PASS

अरुणाचल प्रदेश में सेला दर्रा अद्धभुत स्थान है, जहां धरती और स्वर्ग आपस मे मिलते हुए प्रतीत होते है। माना जाता है कि सेला दर्रा के आसपास 101 झीलें है, जो कि प्राकृतिक संपदा का जीता जागता नमूना है। 4170 मीटर यानी 13700 फ़ीट की ऊंचाई पर अरुणाचल प्रदेश में हिमालय पर्वतमाला का वह हिस्सा है जो, पूर्व में म्यांमार, पश्चिम में भूटान व उत्तर, उत्तर - पूर्व में चीन से घिरा हुआ है।

अरुणाचल प्रदेश भारत का वह प्रदेश है जहाँ सबसे पहले सूर्योदय होता है। इस प्रांत की 60 प्रतिशत भूमि पर जंगल ही। कई नदियां व नाले जलक्रीड़ा का निमंत्रण देते है। ऊँचे पर्वत, वन्य प्राणी, दुर्लभ जड़ी बूटियां व सुंदर दृश्य राज्य की धरोहर है। शायद यही एक ऐसा प्रदेश है जहाँ एक ही छेत्र में तेंदुआ और क्लाउडेड तेंदुआ पाए जाते है। यहाँ के लोगों की प्राकृत शक्तियों में विशेष आस्था है। यहाँ के लोग बताते है है कि करीब 25 जनजातियां और उनकी उपजातियां यहाँ रहती है। मेले व पर्व यहां के जनजीवन का आधार है। पयटकों के आकर्षण का मुख्य स्थल तवांग है, जहाँ बहुत ठंड होती है। दिराग, बोमडिला, टिपी, मालुपकोंग, ईटानगर, दापोरीजो, आलोंग, पासीघाट, मालिनीथान, जीरो, तेजू आदि अन्य स्थान है।

Photo of अरुणाचल प्रदेश, India by Afsarul haq

मिजोरम की सुहानी जलवायु

मिज़ोरन की राजधानी आइजॉल है। यहां का प्राकृतक सौंदर्य, नृत्य, त्यौहार, जंगल, वन्य प्राणी, हस्तशिल्प वस्तुए व सुहानी जलवायु सबको बहुत भाति है। चपचार कुट, मिम कुट और पालकुट यहां के मुख्य पर्व हैं। तामदिल झील, झरनो के लिए वानतांग, ट्रैकिंग के लिए फांग्शुई, छिमतुईपुई नदी पर मछली के शिकार हेतु सैहा व लुंगली यहां के प्रमुख पर्यटन स्थल है। दंपा अभ्यारण, फांग्शुई व मुरलेन नेशनल पार्क और न्गेगंपुई अभ्यारण वन्यप्राणी प्रेमियों की पसंदीदा जगहें हैं।

Photo of Mizoram, India by Afsarul haq

अरुणाचल प्रदेश भारत का वह प्रदेश है जहाँ सबसे पहले सूर्योदय होता है। इस प्रांत की 60 प्रतिशत भूमि पर जंगल ही। कई नदियां व नाले जलक्रीड़ा का निमंत्रण देते है। ऊँचे पर्वत, वन्य प्राणी, दुर्लभ जड़ी बूटियां व सुंदर दृश्य राज्य की धरोहर है। शायद यही एक ऐसा प्रदेश है जहाँ एक ही छेत्र में तेंदुआ और क्लाउडेड तेंदुआ पाए जाते है। यहाँ के लोगों की प्राकृत शक्तियों में विशेष आस्था है। यहाँ के लोग बताते है है कि करीब 25 जनजातियां और उनकी उपजातियां यहाँ रहती है। मेले व पर्व यहां के जनजीवन का आधार है। पयटकों के आकर्षण का मुख्य स्थल तवांग है, जहाँ बहुत ठंड होती है। दिराग, बोमडिला, टिपी, मालुपकोंग, ईटानगर, दापोरीजो, आलोंग, पासीघाट, मालिनीथान, जीरो, तेजू आदि अन्य स्थान है।

मेघालय का अर्थ होता है बादलों का घर मेघ यानि (बादल ) और आलय यानी (घर ) बादलों और भारी वर्षा के कारण यहां की जलवायू में नमी बनी रहती है। विश्व में सबसे अधिक वर्षा वाल छेत्र चेरापूंजी है। वाडर्स लेक, लेडी हाइड्री पार्क, स्वीट व एलीफैंट फाल्स और गुफा यहां के मुख्य दर्शनीय स्थल है। बेंत, बांस हथकरधा तथा हस्तशिल्प की वस्तुए, फल उत्पाद आदि चीज़ों से यहां के बाजार भरे रहते है। मेघालय की ख़ास बात यह है की यह राज सूचना तकनीक में तेज़ी से विकास कर रहा है।

मिज़ोरन की राजधानी आइजॉल है। यहां का प्राकृतक सौंदर्य, नृत्य, त्यौहार, जंगल, वन्य प्राणी, हस्तशिल्प वस्तुए व सुहानी जलवायु सबको बहुत भाति है। चपचार कुट, मिम कुट और पालकुट यहां के मुख्य पर्व हैं। तामदिल झील, झरनो के लिए वानतांग, ट्रैकिंग के लिए फांग्शुई, छिमतुईपुई नदी पर मछली के शिकार हेतु सैहा व लुंगली यहां के प्रमुख पर्यटन स्थल है। दंपा अभ्यारण, फांग्शुई व मुरलेन नेशनल पार्क और न्गेगंपुई अभ्यारण वन्यप्राणी प्रेमियों की पसंदीदा जगहें हैं।

Day 3

मेघों का घर मेघालय

Photo of Meghalaya, India by Afsarul haq

दुनिया को पोलो खेल सिखाने वाला मणिपुर

Photo of मणिपुर, Assam, India by Afsarul haq

दुनिया को पोलो खेल सिखाने वाला सुन्दर राज्य है मणिपुर। 1891 में एंग्लो मणिपुरी युद्ध में यह राज्य अंग्रेज़ों के अधीन आ गया जिन्होंने मणिपुरियों से पोलो सीखी। मणिपुरी लोग वर्ष भर कोई न कोई त्यौहार मनाते रहते है। निंगोल,ईद, रमज़ान, चकाउबा, कुकी -चिन - मिजो त्यौहार, क्रिसमस तथा अन्य कई प्रमुख त्यौहार है। गीत- नृत्य इनकी जीवनशैली है। इस राज्य की 67 प्रतिशत भूमि पर जंगल है। कई दुर्लभ जड़ी - बूटियां भी यहां पायी जाती है। वन्यप्राणियों में क्लाउडेड तेंदुआ तथा नाचने वाला हिरण यहां के जंगल की विशेषता है। श्री गोविन्दा जी मंदिर, शहीद मीनार, मोइरंग, लोकतक झील वार सीमेट्री आदि अनेक स्थल मणिपुर की घाटियों में देखे जा सकते है।

भाषा

Photo of NORTH EAST INDIA TOURISM, Krishna Nagar, Chandmari, Guwahati, Assam, India by Afsarul haq

पूरे पूर्वोत्तर में असमी, हिंदी और अंगेज़ी भाषा से काम चल जाता है।

Photo of Beauty Of North East Calling. नॉर्थ - ईस्ट के नजारे आपको पुकारे, जानिये कैसे जाए कितने पैसे में खर्च by Afsarul haq

क्या खरीदे

पूर्वोत्तर भारत की की यात्रा की यादों को संजोये रखने के लिए आप वहां से कई अनोखी चीज़ें ले सकते है। हस्तशिल्प व हथकरघे पर बनी चीज़ें तो यहां हर राज्य में उपलब्ध मिलेगी। इसके अलावा हर राज्य की कुछ ख़ास चीज़ें भी है। असम से मूंगा व पाट रेशम पर्यटकों को विशेष रूप से पसंद आता है। यहाँ चाय और बांस से बनी वस्तुए भी बहुत बिकती है। नागालैंड की स्त्रियां कातने, बुनने और कपडा रंगने में माहिर है। अन्य वस्त्र के अलावा यहां तीन टुकड़ों में बनने वाली शॉल भी बेहद लोकप्रिय है। वहीं अरुणाचल प्रदेश में बेंत तथा बांस से बानी चूड़ियां लोकप्रिय है। यहां ज्यामितिक नमूने वाली शाले भी मिलती है। मणिपुर में हथकरघे पर बनी शाले, चादरें व कंबल मिलते है। मणिपुरी गुड़ियों का बाजार तो दूर - दूर तक फैला है। विशेषकर यहाँ की राधा व कृष्ण की बनी गुड्डे - गुड़ियाँ काफी।

पहनावा और रोज़मर्रा की चीज़ें

मिजोरम में पत्ते और बांस से बने वाटरप्रूफ हैट मिलते हैं। त्रिपुरा में भी रेशम तथा बेंत और बांस से बनी चीज़ें बहुतायत में बिकती है। सिक्किम में हाथ से बने गलीचे, कलाकृतियां, लेपचा शैली की शाले और टेबल खरीद सकते है। मेघालय में हाथ से बुनी शाले, टोकरियां, बेंत की चीज़े, शहद काली मिर्च, हल्दी, अनानास, संतरे, स्थानीय फल तथा फल उत्पाद मुख्य रूप से बिकते है।

कितना खर्च 

आप यहाँ आराम से 1000 दिन का बजट लेकर चल सकते है। 

   कैसे पहुंचे 

हवाई मार्ग 

असम, मणिपुर, नागालैंड और त्रिपुरा कोलकाता के साथ-साथ दिल्ली और कोलकाता से सीधी उड़ानों से जुड़े हुए हैं। जबकि, अन्य राज्यों से; आपको कई उड़ानें लेने की जरूरत है। पूर्वोत्तर भारत की उड़ानें आमतौर पर असम में सिलचर हवाई अड्डे और डिब्रूगढ़ एपोर्ट में उतरती हैं। गुवाहाटी में लोकप्रिया गोपीनाथ बोर्डोली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे भारत के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। आप वहां से मणिपुर तक पहुंच सकते हैं

बहुत सुविधाजनक संबंधित स्थानों से ऐजवाल और नहरलागुन को कई हेलीकॉप्टर सेवाएं भी उपलब्ध हैं। 

रेल मार्ग 

देश के प्रमुख शहरों में ट्रेन द्वारा अरुणाचल प्रदेश और असम में कुछ अच्छी कनेक्टिविटी है। नहरलागुन अरुणाचल प्रदेश में महत्वपूर्ण स्टेशन है जो गुवाहाटी और नई दिल्ली के बीच स्थित है। इसके अलावा, गुवाहाटी, लुमडिंग, बोंगाईगांव, डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया असम के महत्वपूर्ण स्टेशन हैं। राजधानी एक्सप्रेस, उत्तर-पूर्व एक्सप्रेस और ब्रह्मपुत्र मेल हैं जो दिल्ली से उत्तर पूर्व भारत तक चलती  हैं।

सड़क मार्ग 

सभी राज्यों में शहरी इलाकों में कई उत्तर-पूर्वी राज्यों से पश्चिम बंगाल तक नियमित लंबी दूरी की बसों के साथ सड़कों का अच्छा संबंध है। सुरक्षा कारणों से यहां स्वयं ड्राइविंग की सलाह नहीं दी जाती है। राष्ट्रीय राजमार्ग 31, 37, 38 और 40 असम को भारत के प्रमुख शहरों में जोड़ते हैं। चूंकि उत्तर-पूर्वी राज्यों में ज्यादा रेल कनेक्टिविटी नहीं है, इसलिए वहां से कई बसें हैं जो कि हैं

सिलीगुड़ी से सिक्किम, असम और गंगटोक को जाती ।  आप सबसे खूबसूरत विचारों की झलक पाने के लिए, अपने वाहन के साथ या ड्राइवर को भर्ती करके इस प्राचीन क्षेत्र का आनंद ले सकते हैं। उत्तर-पूर्वी राज्यों की सड़कों अधिकांश हिस्सों में काफी सुविधाजनक हैं, लेकिन यदि आप ऑफ-बीट गंतव्य तक पहुंचना चाहते हैं तो सभी बाधाओं के लिए खुद को बांधें।  ! यात्रा की अवधि: दिल्ली से सड़क तक पहुंचने में 48 घंटे से ज्यादा समय लगेगा। प्रति व्यक्ति अनुमानित लागत: बस के लिए टिकट मांग के आधार पर आपको 2000-3000 रुपये खर्च होंगे। यात्रा के लिए चुने गए मार्ग के आधार पर राष्ट्रीय राजमार्ग 31, 37, 38 या 40 लें। कोलकाता से शुरू होने पर पहुंचना आसान है। हालांकि, वहां कई भूस्खलन और अन्य खतरे होंगे जो सड़क से यात्रा नहीं करने के लिए सलाह देते हैं। 

उम्मीद करते है आपको पोस्ट पसंद आ रहे होंगे आगे और भी दिलचस्प जगहों के बारे में हम आपको बताते रहेंगे आप हमें ट्रिपोटो पर फॉलो भी कर सकते है। और हमसे अपने यात्रा से जुड़े सवाल पूछ सकते है, हमसे सोशल मीडिया पर भी जुड़े।

#MANIPUR #MEGHALAY #MIZORAM #TRIPOTOABHINDIMEIN #TRAVELGUIDE #NORTHEAST

WWW.TWITTER.COM

WWW.INSTAGRAM.COM

अगर आप भी है यात्रा के शौक़ीन और कोई दिलचस्प कहानी आपके दिल में है कैद तो शेयर करे इसे हमारे साथ और पाए मौका मुफ्त में घूमने का।

अपनी यात्रा के अनुभव साझा करने के लिए क्लिक करे।

Day 2

मेघों का घर मेघालय

मेघालय का अर्थ होता है बादलों का घर मेघ यानि (बादल ) और आलय यानी (घर ) बादलों और भारी वर्षा के कारण यहां की जलवायू में नमी बनी रहती है। विश्व में सबसे अधिक वर्षा वाल छेत्र चेरापूंजी है। वाडर्स लेक, लेडी हाइड्री पार्क, स्वीट व एलीफैंट फाल्स और गुफा यहां के मुख्य दर्शनीय स्थल है। बेंत, बांस हथकरधा तथा हस्तशिल्प की वस्तुए, फल उत्पाद आदि चीज़ों से यहां के बाजार भरे रहते है। मेघालय की ख़ास बात यह है की यह राज सूचना तकनीक में तेज़ी से विकास कर रहा है।

Be the first one to comment