Best sanctuary of U.P. जंगल का असली रोमांच देखना है तो इसे ज़रूर पढ़े ।

Tripoto
Photo of Best sanctuary of U.P. जंगल का असली रोमांच देखना है तो इसे ज़रूर पढ़े । by Afsarul haq

उत्तर प्रदेश का राष्ट्रीय उद्यान दुधवा अपने प्राकृतिक सौंदर्य और वैविध्यपूर्ण वन्यजीव के लिए मशहूर है। पड़ोसी नेपाल।से लगे इस तराई छेत्र में स्थित दुधवा नेशनल पार्क यूं तो जाना  जाता है टाइगर रिज़र्व के लिए, लेकिन यहां करीब 400 प्रजातियों के पक्षी पाए जाते है। इसके अलावा, सांपो की भी कई प्रजातियां यहां आपको देखने को मिल जाएगी। अगर कछुए, मगरमच्छ आपकी पसंद है तो आप उन्हें भी यहां देख सकते है।

Photo of Best sanctuary of U.P. जंगल का असली रोमांच देखना है तो इसे ज़रूर पढ़े । 1/1 by Afsarul haq
Day 1

पार्क का इतिहास

Photo of Dudhwa Tiger Reserve, Palia Kalan, Uttar Pradesh, India by Afsarul haq

लंबे अरसे तक दुधवा के ये जंगल स्थानीय रियासत के अधीन थे। यहां शाही शिकार के अनेक रोचक किस्से लोककथाओं का हिस्सा बन चुके है। राष्ट्रीय उद्यान बनने से पहले थारू जनजाति बहुल दुधवा छेत्र एक अभ्यारण था। इसकी स्थापना 1969 में हुई थी। उस समय इसका छेत्रफल सिर्फ 212 वर्ग किलोमीटर था, जो अब बढ़कर 498 वर्ग किलोमीटर हो गया है। फरवरी 1977 में इसे राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया। वर्ष 1973 में यहां बाघ परियोजना शुरू की गई थी।

बारासिंघा की सौगात

Photo of Dudhwa, Uttar Pradesh, India by Afsarul haq

सिर पर सींगो का मुकुट सजाये बारासिंघा दुधवा की एक बेशकीमती सौगात है। हिरणों की यह विशेष प्रजाति 'स्पेंड डियर' भारत और दक्षिण नेपाल के अतिरिक्त दुनिया में और कहीं नही पाई जाती है। नाम के अनूरूप सामान्यतः यह माना जाता है कि इस प्रजाति के हिरणों के बारह सींग होते होंगे। लेकिन वास्तव में ऐसा नही है। बारासिंघा के सिर पर दो सिंह होते है वे ऊपर जाकर अनेक शाखाओं में विभक्त हो जाते हैं। दुधवा के कीचड़ वाले दलदली इलाकों में बारासिंघा के झुंड नज़र आते है।

टाइगर का दीदार

Photo of Dudhwa, Uttar Pradesh, India by Afsarul haq

दुधवा में सबसे अधिक रोमांच और कौतूहल टाइगर हैवन पैदा करती है। पार्क के दक्षिणी छोर पर स्थित टाइगर हैवन बिली अर्जन सिंह नाम की एक स्वतंत्र वन्य जीव संरक्षणवादी का खूबसूरत आवास है। वर्ष 1959 में सेना की नौकरी छोड़ने के बाद से 'बिली' बिडाल परिवार के वन्य पशुओं विशेषकर तेंदुओं और बाघों की भलाई में जुटे रहे। उनकी पुस्तक 'टाइगर - टाइगर' बेहद लोकप्रिय हुई, जिसमे दुधवा के नरभक्षी बाघों का सजीव चित्रण है। बिली को चिड़ियाघरों में पैदा हुए या परित्यक्त वन्य प्राणियों को पाल - पोसकर बड़ा करने और उन्हें फिर से वन्यजीव में प्रविष्ट कराने की कला में महारत हासिल है।

थारू जनजाति

tharu Tribe Women

Photo of Best sanctuary of U.P. जंगल का असली रोमांच देखना है तो इसे ज़रूर पढ़े । by Afsarul haq

दुधवा के इलाके में थारू जनजाति के लोग निवास करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस जनजाति की महिलाएं राजस्थान के राजवंश से ताल्लुख रखती है। इनके पुरुष सदस्य युद्ध में मारे गए और ऐसी स्थिति में अनेक थारू महिलाओं ने अपने सेवकों को पति के रूप में स्वीकार कर लिया। दुधवा के इर्द - गिर्द थारुओं के अनेक गांव है, जिनके बीच पहुंचकर सैलानी अपनी वन पर्यटकता को और भी बढ़ा सकते है। यहां भ्रमण के लिए प्रिशिक्षित हाथी, सफारी वाहन और कुशल गाइड की समुचित व्यवस्था है। कौन - सा जानवर किस स्थान पर होगा इसका पता लगाने में इन्हें महारत हासिल है।

वन्यजीवों की प्रजातियां

Photo of Best sanctuary of U.P. जंगल का असली रोमांच देखना है तो इसे ज़रूर पढ़े । by Afsarul haq

दुधवा में बाघ देखना दूसरा अनेक राष्ट्रीय उद्यानों की अपेक्षा अधिक सुगम है। इसकी वजह यह है कि यहां बाघों की अच्छी - खासी आबादी है। अभ्यारण में 400 प्रजातियों के पक्षियों की चहचहट आपको एक नया अनुभव देगा। जंगल की सैर के समय कई अपरिचित पक्षियों सर मुलाकात हो जाती है। बारहसिंघों के अलावा, यहां हिरणों की छह और प्रजातियां भी पाई जाती है। मसलन - चीतल, सांभर, कला हिरण, काकड और पाडा। जंगली हाथी, सुअर, भालू, तेंदुआ, लकड़बग्घा, लोमड़ी, खरगोश, लंगूर समित कई अन्य जीव भी यहां देखे जा सकते है। यहां वर्ष 1984 में गैंडा पुनर्वास परियोजना शुरू की गई। हालांकि अभी गैंडों की संख्या में अनुमान के मुताबिक वृद्धि तो नही हुई। यह उम्मीद ज़रूर जगी है कि कुछ वर्षों में गैंडों की आबादी पहले की तरह ही निर्भय विचरण कर सकेंगे।

Photo of Best sanctuary of U.P. जंगल का असली रोमांच देखना है तो इसे ज़रूर पढ़े । by Afsarul haq
Photo of Best sanctuary of U.P. जंगल का असली रोमांच देखना है तो इसे ज़रूर पढ़े । by Afsarul haq

कब जाएं

यह पार्क आम लोगों के लिए 15 नवंबर से 15 जून तक खुला रहता है।

कैसे जाएं

निकटतम हवाई अड्डा लखनऊ है। यहां से आगे का सफर, बस या ट्रैन से तय कर सकते है। दुधवा दिल्ली, बरेली, पीलीभीत, मैलानी, सीतापुर, लखीमपुर खीरी और लखनऊ से रेलमार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है।

कहाँ ठहरें

उद्यान में पर्यटक के ठहरने की समुचित व्यवस्था है। वन विभाग का विश्रामगृह शांति और एकांत चाहने वालों के लिए उपयुक्त जगह है।

धन्यवाद !

Be the first one to comment