COMPLETE Guide To Orchha Under 500 A DAY #BESTOFTRAVEL #TRAVELGUIDE #TRIPOTO

Tripoto
3rd Oct 2018
Photo of COMPLETE Guide To Orchha Under 500 A DAY #BESTOFTRAVEL #TRAVELGUIDE #TRIPOTO by Afsarul haq
Day 1

जैसा कि ऊपर टाइटल से आपने देख ही लिया होगा के 500 में ट्रेवल ओरछा तो चलिए हम बताते है आपको कैसे आप सफर कर सकते है ओरछा का वो भी केवल 500 में ।

ध्यान रखे यह गाइड केवल ट्रेवलर्स के लिए है न की टूरिस्ट्स के लिए क्यूंकि ट्रैवलर ही जानता है पैसे कैसे बचाये जाते है।

तो सफर की शुरुआत करने से पहले हम आपको थोड़ा ओरछा से रूबरू कराना चाहते है।

ओरछा एक छोटा सा सहर है जो ( टीकमगढ़ ) जिले में पड़ता है, लेकिन अब मध्य प्रदेश के वज़ीरे आला जनाब शिवराज सिंह चौहान के हुकुम से इसे निवाड़ी जिले में तब्दील कर दिया है।

ओरछा शहर को बुंदेला राजा रुद्र प्रताप ने सन 1501 में बसाया था । और यह ओरछा के पहले राजा भी कहलाये ।

दूर तक फैले हरे भरे पेड़ो के बीच मे बसा ओरछा काफी खूबसूरत और खुशनुमा लगता है। और मानसून में तो यह और भी खुशगवार हो जाता है।

कुछ लोग कहते हैं कि सबसे पहले लोगों ने बुंदेलखंड में रहना शुरू किया था। यही वजह है कि इस इलाके के हर गांव और शहर के पास सुनाने को कई कहानियां हैं।

ओरछा झांसी से लगभग आधे घंटे की दूरी पर स्थित है।

स्पेन के पर्यटकों के साथ मेरा दोस्त फोटो खिचाता हुआ।

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इसका इतिहास 8वीं शताब्दी से शुरू होता है, जब गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज ने इसकी स्थापना की थी। इस जगह की पहली और सबसे रोचक कहानी एक मंदिर की है। दरअसल, यह मंदिर भगवान राम की मूर्ति के लिए बनवाया गया था, लेकिन मूर्ति स्थापना के वक्त यह अपने स्थान से हिली नहीं। इस मूर्ति को मधुकर शाह के राज्यकाल (1554-92) के दौरान उनकी रानी गनेश कुवर अयोध्या से लाई थीं। चतुर्भुज मंदिर बनने से पहले इसे कुछ समय के लिए महल में स्थापित किया गया। लेकिन मंदिर बनने के बाद कोई भी मूर्ति को उसके स्थान से हिला नहीं पाया। इसे ईश्वर का चमत्कार मानते हुए महल को ही मंदिर का रूप दे दिया गया और इसका नाम रखा गया राम राजा मंदिर। आज इस महल के चारों ओर शहर बसा है और राम नवमी पर यहां हजारों श्रद्धालु इकट्ठा होते हैं। वैसे, भगवान राम को यहां भगवान मानने के साथ यहां का राजा भी माना जाता है, क्योंकि उस मूर्ति का चेहरा मंदिर की ओर न होकर महल की ओर है।

मंदिर के पास एक बगान है जिसमें स्थित काफी ऊंचे दो मीनार (वायू यंत्र) लोगों के आकर्षण का केन्द्र हैं। जि्न्हें सावन भादों कहा जाता है कि इनके नीचे बनी सुरंगों को शाही परिवार अपने आने-जाने के रास्ते के तौर पर इस्तेमाल करता था। इन स्तंभों के बारे में एक किंवदंती प्रचलित है कि वर्षा ऋतु में हिंदु कलेंडर के अनुसार सावन के महीने के खत्म होने और भादों मास के शुभारंभ के समय ये दोनों स्तंभ आपस में जुड़ जाते थे। हालांकि इसके बारे में पुख्ता सबूत नहीं हैं। इन मीनारों के नीचे जाने के रास्ते बंद कर दिये गये हैं एवं अनुसंधान का कोई रास्ता नहीं है।

इन मंदिरों को दशकों पुराने पुल से पार कर शहर के बाहरी इलाके में 'रॉयल एंक्लेव' (राजनिवास्) है। यहां चार महल, जहांगीर महल, राज महल, शीश महल और इनसे कुछ दूरी पर बना राय परवीन महल हैं। इनमें से जहांगीर महल के किस्से सबसे ज्यादा मशहूर हैं, जो मुगल बुंदेला दोस्ती का प्रतीक है। कहा जाता है कि बादशाह अकबर ने अबुल फज़ल को शहजादे सलीम (जहांगीर) को काबू करने के लिए भेजा था, लेकिन सलीम ने बीर सिंह की मदद से उसका कत्ल करवा दिया। इससे खुश होकर सलीम ने ओरछा की कमान बीर सिंह को सौंप दी थी। वैसे, ये महल बुंदेलाओं की वास्तुशिल्प के प्रमाण हैं। खुले गलियारे, पत्थरों वाली जाली का काम, जानवरों की मूर्तियां, बेलबूटे जैसी तमाम बुंदेला वास्तुशिल्प की विशेषताएं यहां साफ देखी जा सकती हैं।

अब बेहद शांत दिखने वाले ये महल अपने जमाने में ऐसे नहीं थे। यहां रोजाना होने वाली नई हलचल से उपजी कहानियां आज भी लोगों की जुबान पर हैं। इन्हीं में से एक है हरदौल की कहानी, जो जुझार सिंह (1627-34) के राज्य काल की है। दरअसल, मुगल जासूसों की साजिशभरी कथाओं के कारण् इस राजा का शक हो गया था कि उसकी रानी से उसके भाई हरदौल के साथ संबंध हैं। लिहाजा उसने रानी से हरदौल को ज़हर देने को कहा। रानी के ऐसा न कर पाने पर खुद को निर्दोष साबित करने के लिए हरदौल ने खुद ही जहर पी लिया और त्याग की नई मिसाल कायम की।

बुंदेलाओं का राजकाल 1783 में खत्म होने के साथ ही ओरछा भी गुमनामी के घने जंगलों में खो गया और फिर यह स्वतंत्रता संग्राम के समय सुर्खियों में आया। दरअसल, स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद यहां के एक गांव में आकर छिपे थे। आज उनके ठहरने की जगह पर एक स्मृति चिन्ह भी बना है।

Day 2

देखने लायक जगहें ।

जहांगीर महल

बुन्देलों और मुगल शासक जहांगीर की दोस्ती की यह निशानी ओरछा का मुख्य आकर्षण है। महल के प्रवेश द्वार पर दो झुके हुए हाथी बने हुए हैं। तीन मंजिला यह महल जहांगीर के स्वागत में राजा बीरसिंह देव ने बनवाया था। वास्तुकारी से दृष्टि से यह अपने जमाने का उत्कृष्ट उदाहरण है।

राज महल

यह महल ओरछा के सबसे प्राचीन स्मारकों में एक है। इसका निर्माण मधुकर शाह ने 17 वीं शताब्दी में करवाया था। राजा बीरसिंह देव उन्हीं के उत्तराधिकारी थे। यह महल छतरियों और बेहतरीन आंतरिक भित्तिचित्रों के लिए प्रसिद्ध है। महल में धर्म ग्रन्थों से जुड़ी तस्वीरें भी देखी जा सकती हैं।

राम राजा मंदिर

भगवान श्रीराम का ओरछा में ४०० वर्ष पूर्व राज्याभिषेक हुआ था और उसके बाद से आज तक यहां भगवान श्रीराम को राजा के रुप में पूजा जाता है। यह पूरी दुनिया का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां भगवान राम को राजा के रूप में पूजा जाता है।

एक दिन ओरछा नरेश मधुकरशाह ने अपनी पत्नी गणेशकुंवरि से कृष्ण उपासना के इरादे से वृंदावन चलने को कहा। लेकिन रानी राम भक्त थीं। उन्होंने वृंदावन जाने से मना कर दिया। क्रोध में आकर राजा ने उनसे यह कहा कि तुम इतनी राम भक्त हो तो जाकर अपनेराम को ओरछा ले आओ। रानी ने अयोध्या पहुंचकर सरयू नदी के किनारे लक्ष्मण किले के पास अपनी कुटी बनाकर साधना आरंभ की। इन्हीं दिनों संत शिरोमणि तुलसीदास भी अयोध्या में साधना रत थे। संत से आशीर्वाद पाकर रानी की आराधना दृढ से दृढतर होती गई। लेकिन रानी को कई महीनों तक रामराजा के दर्शन नहीं हुए। अंतत: वह निराश होकर अपने प्राण त्यागने सरयू की मझधार में कूद पडी। यहीं जल की अतल गहराइयों में उन्हें रामराजा के दर्शन हुए। रानी ने उन्हें अपना मंतव्य बताया। रामराजा ने ओरछा चलना स्वीकार किया किन्तु उन्होंने तीन शतर्ें रखीं- पहली, यह यात्रा पैदल होगी, दूसरी- यात्रा केवल पुष्प नक्षत्र में होगी, तीसरी- रामराजा की मूर्ति जिस जगह रखी जाएगी वहां से पुन: नहीं उठेगी।

रानी ने राजा को संदेश भेजा कि वो रामराजा को लेकर ओरछा आ रहीं हैं। राजा मधुकरशाह ने रामराजा के विग्रह को स्थापित करने के लिए करोडों की लागत से चतुर्भुज मंदिर का निर्माण कराया। जब रानी ओरछा पहुंची तो उन्होंने यह मूर्ति अपने महल में रख दी। यह निश्चित हुआ कि शुभ मुर्हूत में मूर्ति को चतुर्भुज मंदिर में रखकर इसकी प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। लेकिन राम के इस विग्रह ने चतुर्भुज जाने से मना कर दिया। कहते हैं कि राम यहां बाल रूप में आए और अपनी मां का महल छोडकर वो मंदिर में कैसे जा सकते थे। राम आज भी इसी महल में विराजमान हैं और उनके लिए बना करोडों का चतुर्भुज मंदिर आज भी वीरान पडा है। यह मंदिर आज भी मूर्ति विहीन है।

यह भी एक संयोग है कि जिस संवत 1631 को रामराजा का ओरछा में आगमन हुआ, उसी दिन रामचरित मानस का लेखन भी पूर्ण हुआ। जो मूर्ति ओरछा में विद्यमान है उसके बारे में बताया जाता है कि जब राम वनवास जा रहे थे तो उन्होंने अपनी एक बाल मूर्ति मां कौशल्या को दी थी। मां कौशल्या उसी को बाल भोग लगाया करती थीं। जब राम अयोध्या लौटे तो कौशल्या ने यह मूर्ति सरयू नदी में विसर्जित कर दी। यही मूर्ति गणेशकुंवरि को सरयू की मझधार में मिली थी। यह विश्व का अकेला मंदिर है जहां राम की पूजा राजा के रूप में होती है और उन्हें सूर्योदय के पूर्व और सूर्यास्त के पश्चात सलामी दी जाती है। यहां राम ओरछाधीश के रूप में मान्य हैं। रामराजा मंदिर के चारों तरफ हनुमान जी के मंदिर हैं। छडदारी हनुमान, बजरिया के हनुमान, लंका हनुमान के मंदिर एक सुरक्षा चक्र के रूप में चारों तरफ हैं। ओरछा की अन्य बहुमूल्य धरोहरों में लक्ष्मी मंदिर, पंचमुखी महादेव, राधिका बिहारी मंदिर , राजामहल, रायप्रवीण महल, हरदौल की बैठक, हरदौल की समाधि, जहांगीर महल और उसकी चित्रकारी प्रमुख है। ओरछा झांसी से मात्र 15 किमी. की दूरी पर है। झांसी देश की प्रमुख रेलवे लाइनों से जुडा है। पर्यटकों के लिए झांसी और ओरछा में शानदार आवासगृह बने हैं।

राय प्रवीन महल

यह महल राजा इन्द्रमणि की खूबसूरत गणिका प्रवीणराय की याद में बनवाया गया था। वह एक कवयित्री और संगीतकारा थीं। मुगल सम्राट अकबर को जब उनकी सुंदरता के बार पता चला तो उन्हें दिल्ली लाने का आदेश दिया गया। इन्द्रमणि के प्रति प्रवीन के सच्चे प्रेम को देखकर अकबर ने उन्हें वापस ओरछा भेज दिया। यह दो मंजिला महल प्राकृतिक बगीचों और पेड़-पौधों से घिरा है। राय प्रवीन महल में एक लघु हाल और चेम्बर है।

लक्ष्मी नारायण मंदिर

यह मंदिर 1622 ई. में बीरसिंह देव द्वारा बनवाया गया था। मंदिर ओरछा गांव के पश्चिम में एक पहाड़ी पर बना है। मंदिर में सत्रहवीं और उन्नीसवीं शताब्दी के चित्र बने हुए हैं। चित्रों के चटकीले रंग इतने जीवंत लगते हैं जसे वह हाल ही में बने हों। मंदिर में झांसी की लड़ाई के दृश्य और भगवान कृष्ण की आकृतियां बनी हुई हैं।

चतुर्भुज मंदिर

राज महल के समीप स्थित चतुभरुज मंदिर ओरछा का मुख्य आकर्षण है। यह मंदिर चार भुजाधारी भगवान विष्णु को समर्पित है। इस मंदिर का निर्माण 1558 से 1573 के बीच राजा मधुकर ने करवाया था। अपने समय की यह उत्कृष्ठ रचना यूरोपीय कैथोड्रल से समान है। मंदिर में प्रार्थना के लिए विस्तृत हॉल है जहां कृष्ण भक्त एकत्रित होते हैं। ओरछा में यह स्थान भ्रमण के लिए बहुत श्रेष्ठ है।

फूल बाग़

बुन्देल राजाओं द्वारा बनवाया गया यह फूलों का बगीचा चारों ओर से दीवारों से घिरा है। पालकी महल के निकट स्थित यह बाग बुन्देल राजाओं का आरामगाह था। वर्तमान में यह पिकनिक स्थल के रूप में जाना जाता है। फूलबाग में एक भूमिगत महल और आठ स्तम्भों वाला मंडप है। यहां के चंदन कटोर से गिरता पानी झरने के समान प्रतीत होता है।

सुंदर महल

इस महल को राजा जुझार सिंह के पुत्र धुरभजन के बनवाया था। राजकुमार धुरभजन को एक मुस्लिम लड़की से प्रेम था। उन्होंने उससे विवाह कर इस्लाम धर्म अंगीकार कर लिया। धीर-धीर उन्होंने शाही जीवन त्याग दिया और स्वयं को ध्यान और भक्ति में लीन कर लिया। विवाह के बाद उन्होंने सुन्दर महल त्याग दिया। धुरभजन की मृत्यु के बाद उन्हें संत से रूप में जाना गया। वर्तमान में यह महल काफी क्षतिग्रस्त हो चुका है।

ओरछा छत्तरी (CENOTHAPS )

यह छत्तरी बेतवा नदी के किनारे पर है और राम राजा मंदिर से निकट स्थित है , यहाँ करीब 5 छत्तरी है जो यहाँ के राजाओ ने अपने अपने समय में बनवायी थी। इसके आपको कई प्रकार के फूल देखने को मिल जायेंगे।

नोट - इन सब महलों में प्रवेश के लिए टिकट आपको राजा महल पर स्थित मध्य प्रदेश पर्यटन के ऑफिस से मिल जायेगा जो सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक उपलध रहते है।

टिकट का शुल्क 10 रुपये भारतीय और 250 रुपये विदेशी पर्यटकों के लिए निर्धारित है।

यह टिकट ओरछा के सभी महलों और किलो में मान्य है। और इस टिकट की वैधता आपके खरीदने से लेकर शाम 5 बजे तक है।

Day 3

ओरछा नेचर रिज़र्व

बेतवा नदी के किनारे बसा ओरछा का नेचर रिज़र्व काफी खूबसूरत और मनमोहक है।

यह ओरछा की सबसे शांत जगह है यहाँ आप घंटों बैठ कर चिड़ियों, लंगूरों, बंदरों और भी कई प्रकार के जानवरों की आवाज़ें सुन सकते है। अगर आपने साल 2012 का स्लाइस का कमर्शियल टीवी पर देखा होगा तो आपको पता होगा के यह जगह कितनी खूबसूरत है। दरसल साल 2012 में कटरीना कैफ यहाँ स्लाइस के ऐड के लिए आयी थी और उस कमर्शियल की शूटिंग भी नेचर रिज़र्व में हुयी थी। आप भी वहां जाकर अपने हसीं लम्हो को कैमरे में कैद कर सकते है।

यह रिज़र्व सुबह 10 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक खुलता है।

टिकट 25 रुपये है नार्मल फोटोग्राफी के लिए कोई चार्ज नहीं देना पड़ता है, लेकिन आप प्रोफ़ेशनल फोटोग्राफी करना चाहते है तो आपसे 25 रुपये फोटोग्राफी और 20 0 रुपये वीडियोग्राफी के लिए चार्ज देना पड़ेगा।

बोनस टिप...................

रात से समय प्रतिदिन मध्य प्रदेश पर्यटन राजा महल में लाइट और साउंड शो का आयोजन करता है, जिसमे आप को ओरछा के इतिहास के बारे में अधिक जानकारी मिल सके और आप इस छोटे मगर खूबसूरत शहर को अच्छे सके। मैदान पर फैली कुर्सियों पर बैठे लोग और बगल में लगे बड़े बड़े स्पीकर से निकलती वीर योद्धाओं की गाथा आपके रोंगटे खड़े कर देगी। रात में रौशनी से जगमगाता महल आपको इसे अपने कैमरे में कैद करने मजबूर कर देगा।

इसका टिकट आपको वहीं महल के नीचे बने ऑफिस से प्राप्त हो जायेगा।

लाइट और साउंड शो के लिए टिकट शुल्क का बोर्ड

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रिवर राफ्टिंग ओरछा

बेतवा नदी में रिवर राफ्टिंग का एक बेहद रोमांच भरा दृश्य

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चाहे इतिहास के प्रेमी हो, प्रकृति प्रेमी हो, राम भक्त हो या एडवेंचर प्रेमी ओरछा किसी निराश नहीं करता है यहाँ आपको अपने मूड के हिसाब से सब कुछ करने को मिलेगा।

ऐसा ही एक रोमांच भरा सफर है रिवर राफ्टिंग का इसे मध्य्प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा और वहां की कई लोकल एजेंसी भी आयोजित करती है । इसमें आपको ओरछा के बेतवा नदी से 18 किलोमीटर दूर तक दूसरे घाटों का सफर कराया जाता है। अधिक जानकारी के लिए आप साइट विजिट कर सकते है।

MPTOURISM

RAMRAJA ADVENTURES

कैसे घूमे। ......

ओरछा की ख़ास बात यह है की आप इसे पैदल ही चलकर घूम सकते है। सारे किले और मंदिर थोड़ी - थोड़ी दुरी पर स्थित है। अगर ओरछा के जंगल का मज़ा लेना चाहते है तो आप एक साइकिल किराये पर ले सकते है, यहाँ कई दुकाने और होटल है जो साइकिल किराये पर देते है। आप चाहे तो ओरछा नेचर रिज़र्व से भी साइकिल किराये पर ले सकते है। इसका शुल्क 100 रुपये से लेकर 300 रुपये प्रतिदिन रहता है।

क्या खरीदे। .......................

Photo of ओरछा, Madhya Pradesh, India by Afsarul haq

वैसे ओरछा में खरीदने के लिए ज़्यादा चीज़ें नहीं है, मगर आप अपनी जर्नी यादगार बनाने के लिए यहाँ से तांबे,पीतल और अष्टधातु से बने सामन मूर्तियां वगैरह ले सकते है। यहाँ कुछ दुकाने कपड़ों की भी है जहाँ से आप इंडियन हैंडीक्रफ्ट कपडे भी ले सकते है।

कैसे पहुंचे ।।।।

ओरछा का नज़दीकी रेलवे स्टेशन झांसी है, जहां से इसकी दूरी करीब 18 किलोमीटर है। दिल्ली से यहां भोपाल शताब्दी के ज़रिए पहुंचा जा सकता है। झांसी स्टेशन देश के सभी बड़े स्टेशन से जुड़ा है।

हवाई मार्ग

ओरछा का नजदीकी हवाई अड्डा खजुराहो है जो 163 किलोमीटर की दूरी पर है। यह एयरपोर्ट दिल्ली, वाराणसी और आगरा से नियमित फ्लाइटों से जुड़ा है।

रेल मार्ग

झांसी ओरछा का नजदीकी रेल मुख्यालय है। दिल्ली, आगरा, भोपाल, मुम्बई, ग्वालियर आदि प्रमुख शहरों से झांसी के लिए अनेक रेलगाड़ियां हैं। वैसे ओरछा तक भी रेलवे लाइन है जहां पैसेन्जर ट्रैन से पहुंचा जा सकता है।

सड़क मार्ग

ओरछा झांसी-खजुराहो मार्ग पर स्थित है। नियमित बस सेवाएं ओरछा और झांसी को जोड़ती हैं। दिल्ली, आगरा, भोपाल, ग्वालियर और वाराणसी से यहां से लिए नियमित बसें चलती हैं।

कहाँ रुके। .............................

लोगो की सबसे बड़ी परेशानी होती है ठहरने का इंतेज़ाम, वैसे तो ओरछा में सस्ते से लेकर महंगे होटलों की भरमार है। लेकिन में आपको कुछ चुनिंदा होटलों के बारें में बता रहा हूँ जिसे आप अपने पसंद, पैसे और आराम के हिसाब से बुक कर सकते है।

BUDGET

TEMPLE VIEW GUEST HOUSE

SHRI MAHANT GUEST HOUSE

LUXURY

BUNDELKHAND RIVERSIDE

AMAR MAHAL ORCHHA

अधिक होटल्स के लिए आप इन साइट्स पर जाकर अपनी पसंद का होटल बुक कर सकते है।

TRIPOTO HOTELS

TRIVAGO HOTELS

Day 4

EXPEDIA HOTELS

MAKEMYTRIP HOTELS

GOIBIBO HOTELS

YATRA HOTELS

कहाँ खायें

अब जब सारी बातें हो गयी है तो थोड़ा खाने की भी बात हो जाये।

खाने के लिए यहाँ आपको कई सारे रेटोरेन्ट्स मिल जायेंगे जो इतालियन, फ्रेंच, चाइनीज़ जैसे तमाम सेहरों के खाने का लुत्फ़ ले सकते है। यह सारे रेस्टोरेंट्स सुबह 10 बजे से पहले नहीं खुलते है इसलिए अपने सुबह के ब्रेकफास्ट के लिए आप अपने होटल में आर्डर देकर अपना ब्रेकफास्ट कर सकते है।

कुछ चुनिंदा रेटोरेंट्स

OPEN SKY RESTAURANTS

CHINEESE / INDIAN

PHONE : +91 83491 71703

ADD : Orhha Road | opp. Canara Bank, Main road, Orchha, Orchha 472246

SHEESH MAHAL ORCHHA

INDIAN / ASIAN / VEGETARIAN FRIENDLY

PHONE : 07680 - 252624

ADD : Opposite Ramraja Mandir, Tikamgarh, Orachha, Madhya Pradesh 472246

BETWA RETREAT

INDIAN / ASIAN

PHONE : +91 76802 52618

ADD : Orchha Bypass Road, Orachha, Madhya Pradesh 472246

कितने पैसे खर्च करे।

खर्च करना आपके ऊपर निर्भर करते है, आप चाहे तो एक दिन में ही 5000 खर्च ले या उसे बचा कर 5 दिन तक चला सकते है। अब बात करते है मैंने कैसे 500 में इस सेहर को घूमा। झाँसी पहुँचने के बाद आप चाहे तो स्टेशन के बाहर से ही ओरछा के लिए ऑटो बुक कर सकते है। अगर आप अकेले है तो वो आपसे 200 से 300 रुपये डिमांड करेगा, अगर आप ग्रुप में है तो वो आपको करीब 40 - 50 रुपये हर व्यक्ति चार्ज करेगा। मगर इसके लिए आपके ग्रुप में कम से कम 5 - 7 लोगो का होना ज़रूरी है।

अब अगर आप अकेले है और इतने पैसे खर्च नहीं करना चाहते है तो, दूसरा ऑप्शन है की आप ऑटो से झाँसी बस्ट स्टैंड तक चले जाएँ इसका चार्ज स्टेशन से 15 रुपये है, पहले 10 था लेकिन डीज़ल महंगा होने की वजह से रेट बढ़ गए है।

यहाँ पहुँचने के बाद आपको तमाम ऑटो मिल जायेंगे जो ओरछा तक जाते और वापस आते है। ओरछा के लिए बसे भी चलती है लेकिन मानसून के मौसम में बसों का संचालन बंद क्र दिया जाता है। बस स्टैंड पर हर ऑटो अपने अपने नंबर पर जाती है जिसका नंबर पहला हो आप उसी पर बैठ जाएँ और मात्र 20 रुपये देकर आप ओरछा जा सकते है। मगर एक दिक्कत जो यहाँ होती है वो है की टैक्सी वाले तभी चलते है जब तक उनकी सवारी पूरी न हो जाएं, बाकी आपकी किस्मत के ऊपर है के कितने जल्दी सवारी फुल होती है। अगर आप सुबह 7 बजे से पहले वहां जाना चाहते है तो आपको काफी समय लग सकता है क्यूंकि इस वक़्त बहुत कम मुसाफिर ही मिल पाते है। इसलिए आप अपने समय का भी ख़याला रखे हाँ अगर पीक सीजन में जा रहे है तो आप किसी भी समय जा। सकते है होटल मैंने यहाँ 150 रुपये पर नाईट पर बुक किया था आप ऊपर दिए गए लिंक पर अपने लिए ऑफर देख सकते है खाने की बात करें तो यहाँ 100 रुपये में आप अच्छे से खा सकते है।

अगर कुछ छूट गया हो तो कमेंट बॉक्स नीचे है और आपकी उँगलियाँ स्क्रीन पे हमें ज़रूर बताएं और अगर आप भी ओरछा गये है तो हमें अपने अनुभव साझा करे।

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