पत्थरों पर उकेरी गयी कविता दिलवाड़ा मंदिर . #DILWARATEMPLE #TRIPOTOABHINDIMEIN 

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Photo of पत्थरों पर उकेरी गयी कविता दिलवाड़ा मंदिर . #DILWARATEMPLE #TRIPOTOABHINDIMEIN by Afsarul haq

अरावली की पहाड़ियों में प्राकृतिक सौन्दर्य को समेटे माउंट आबू राजस्थान का एक पर्वतीय छेत्र और लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। एक और यदि पहाड़ी की हरीतिमा पर्यटकों को आकर्षित करती है, तो दूसरी तरफ दिलवाड़ा मंदिर, स्थापय कला के बेजोड़ प्रतीक के रूप में यहाँ विध्मान है। आबू पर्वत समुद्रतल से लगभग 1219 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। माउंट आबू से करीब ढाई किलोमीटर की दुरी पर दिलवाड़ा गांव में सफ़ेद संगमरमर पे कलात्मक खुदाई के लिए जग प्रसिद्द दिलवाड़ा जैन मंदिर भारतीय संस्कृति की धरोहर है। पांच मंदिरो का यह पुंज आगामी पीढ़ियों के लिए एक उत्कृष्ट उपहार है।

Photo of Dilwara Temples, Delwara, Mount Abu, Rajasthan, India by Afsarul haq

ऐसा कहा जाता है कि चक्रवर्ती सम्राट भारत ने यहाँ आदिनाथ का मंदिर बनवाया था। प्राचीन पुस्तकों में इसे अर्बुदाचल व अर्बुदागरी कहते है। अंतिम तीर्थकार महावीर ने भी इस स्थान पर पदार्पण किया था। वर्तमान में यहाँ का सबसे प्राचीन मंदिर मंत्री विमलशाह द्वारा 11वीं सदी में निर्मित हुआ था। कहा जाता है कि विमलशाह को एक चंपक वृक्ष के पास यहाँ भू - गर्भ से आदिनाथ की प्राचीन प्रतिमा प्राप्त हुई थी, जो लगभग 2500 वर्ष पुरानी बताई जाती है। इससे यह सिद्द होता है कि यहाँ प्राचीन काल में जैन मंदिर हुए होंगे। विमलशाह ने इस मंदिर के निर्माण के लिए तत्कालीन सामंत धुंधुराज से जमीन प्राप्त करने के लिए जमीन पे सोने की मोहरे बिछाकर जमीन की खरीद की थी। इस मंदिर को विमलशाही कहते है। इसे बनवाने में 14 वर्ष लगे। इसमें 1500 कारीगरों एवं 1200 मजदूरों ने कार्य किया।

अन्य दर्शनीय स्थल

दिलवाड़ा मंदिर के अतिरिक्त यहाँ 4 और मंदिर है, जिन्हे लुणवशाही, ऋषभदेव, पाशर्वनाथ और महवीर स्वामी के मंदिर कहते है। विमलशाही मंदिर बनने के लगभग 200 वर्षों के बाद वस्तुपाल व तेजपाल ने विमलशाही मंदिर के सामने ही भव्य मंदिर बनवाया। मंदिर का नाम अपने छोटे भाई लुणवशाही के नाम पर रखा। इस मंदिर में नेमिनाथ की मूर्ति है। यह दोनों मंदिर 11वीं से 13वीं शताब्दी के मध्य के है। इनके अतिरिक्त और तीनो मंदिर 15वीं शताब्दी के बने माने जाते हैं।

Photo of Dilwara Road, Delwara, Mount Abu, Rajasthan, India by Afsarul haq
Photo of Dilwara Road, Delwara, Mount Abu, Rajasthan, India by Afsarul haq
Photo of Dilwara Road, Delwara, Mount Abu, Rajasthan, India by Afsarul haq
Photo of Dilwara Road, Delwara, Mount Abu, Rajasthan, India by Afsarul haq
Photo of Dilwara, Rajasthan, India by Afsarul haq
Photo of Dilwara, Rajasthan, India by Afsarul haq
Photo of Dilwara, Rajasthan, India by Afsarul haq

दिलवाड़ा मंदिरों का सादगी भरा प्रवेश दर्शकों के सामने एक सवाल खड़ा करता देता है कि यही जगप्रसिद्द मंदिर है, जिसे देखने आये है ? बाहर से यह मंदिर बिलकुल साधारण दिखाई देता है, पर जैसे ही प्रवेश द्वार से अंदर जाते है मंदिर का सौंदर्य देखकर एक पल को मानो अचंभित रह जाते है। विमलशाही मंदिर की छत, गुम्बदें, दरवाज़ों की नक्काशी बेहद आकर्षक दिखती है। यहां एक बड़ा कक्ष है जिसे रंगमंडप कहते है। इसमें 48 नक़्क़ाशीदार खंभे है। जो एक दूसरे से नक़्क़ाशीदार मेहराबों से जुड़े है। मंदिर में बीच में मूर्तियां है। नक़्क़ाशीदार मेहराब और बीच का गुम्बद आकर्षण का केंद्र है।

Photo of पत्थरों पर उकेरी गयी कविता दिलवाड़ा मंदिर . #DILWARATEMPLE #TRIPOTOABHINDIMEIN by Afsarul haq
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मंदिर के आगे 140 फ़ीट लम्बा और 110 फ़ीट चौड़ा आंगन है। आँगन के आस - पास 52 खंभों पर मूर्तियां तराशी गयी है। मंदिर 30 मीटर लम्बा और 10 मीटर चौड़ा है।

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लुणावशाही मंदिर में भी प्रस्तर पर उत्कीर्ण कला जीवंत है। इस मंदिर के मंडप के मुख्य द्वार के बाहर 9 चौकों में 2 गोखंडे है। इसमें 52 देवरियां है। छतों पर उस समय के प्रसिद्द स्थानों की यात्रा के सुन्दर दृश्य उकेरे गए है। गुंबद में जैन तीर्थकरों, जैन मुनियों और श्री कृष्ण जन्म के दृश्य अंकित है। आदीनाथ के मंदिर से यह मंदिर छोटा है पर इसका शिल्प सौंदर्य अधभुत है। ऋषभ देव, पाशर्वनाथ व स्वामी के मंदिर भी कला में पीछे नहीं है। इनमें से पाशर्वनाथ का मंदिर दिलवाड़ा मंदिरों के कारीगरों ने अपने खर्च से अपने खाली समय में बनाया था। इन मदिरों की शिल्प शैली अपने आप में अनूठी है। प्रसिद्द इतिहासकार कर्नल टाड ने मुख्त कंठ से इसकी प्रशंसा करते हुए कहा की यह कलाकृतियां अनुपम है। यह मंदिर भारतीय संस्कृति की धरोहर है। इस मंदिर से आबू पर्वत को वो मोहकता और महत्त्व मिलता है जो, पहाड़ी स्थलों के इतिहास में अपूर्व है। एक बार यहाँ जाने के बाद आप इसकी सुंदरता से मंत्रमुग्ध हो जायेंगे।

कैसे पहुंचे। ..............................

यहाँ पहुँचने के लिए रेल व बस सेवाएं उपलब्ध है। वायु - मार्ग से जाने पर आपको उदयपुर उतरना पड़ेगा। वहां से आप टैक्सी व बस की सहायता से माउंट आबू आ सकते है। उदयपुर से माउंट आबू की दुरी करीब 164 किलोमीटर है।

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