आखिर तटों के अलावा और क्या है खास केरल में? ( Kerala Backwaters) - Travel With RD

Tripoto
18th Jun 2015
Photo of आखिर तटों के अलावा और क्या है खास केरल में? ( Kerala Backwaters) - Travel With RD by RD Prajapati

केरल दर्शन के पहले चरण में मैं आपको ले चला था इसकी सुकूनभरी तटों की और। तटों के अलावा भी भला ऐसा क्या है केरल में जो बेहद खास है? जी हाँ! अप्रवाही जल या यूँ कहें बैकवाटर जो की अनेक नदियों, झीलों, नहरों और सागरीय जल से बना एक अनूठा जलतंत्र है। अल्लेप्पी बैकवाटर पर्यटन का मुख्य गढ़ है, परन्तु मैं आपको ले चलूँगा कोवलम से 16 किमी दूर स्थित पूवार के बैकवाटर की ओर।

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यूँ तो समूचे केरल में ही बैकवाटर

का जलतंत्र फैला पड़ा है, उनमे से कुछ पर्यटन हेतु विकसित किये गए हैं तिरुवनंतपुरम से 16 किमी की दुरी पर पूवार एक छोटा सा जगह है, जो की अल्लेप्पी का विकल्प है। यहाँ पर पानी के इस विशाल तंत्र में रातें गुजारने के लिए हाउसबोट उपलब्ध रहते हैं। दिसंबर-जनवरी के महीने में तो यह यात्रा काफी महँगी हो जाती है। लेकिन साथ ही जल-विहार हेतु छोटे मोटरबोट भी उपलब्ध हैं।

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वैसे जून में तो ऑफ-सीजन के वजह से हमें सिर्फ पंद्रह सौ रूपये में ही बोट मिल गयी, वरना जाड़े के मौसम में इनका भाव पच्चीस सौ से ऊपर ही होता है। ज्यों ही हमारी जलयात्रा प्रारम्भ हुई, दोनों तरफ से झुके हुए नारियल के वृक्ष मानो हमारा स्वागत कर रहे हों।

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अनेक प्रकार के रंग-बिरंगे पक्षीयों की चहचाहट सन्नाटे को चीरते हुए मधुर संगीत का एहसास करा रही थी। कही कही झाड़ियों के बीच से नाव गुजरती तो कही खुले आसमान के नीचे से। यहाँ जीने वाले जलीय जीवों में से कुछ खतरनाक व विषैले भी हो सकते हैं, फिर भी स्थानीय लोग इस जल में भी उतर कर अपना काम करते जाते हैं।

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अचानक मेरा ध्यान गया एक विशेष प्रकार के घने पेड़ों की ओर, जो की मैंग्रोव (Mangrove) थे। मैंग्रोव तटीय इलाकों में पाये जाने वाले वे वन हैं, जिनमे हजारों किस्म के तटीय जीव-जंतु आश्रित हैं। आज के युग में पर्यावरण को बचाने के लिए इनका बहुत महत्व है। कुछ ही दुरी पर हमने पाया तैरते हुए रेस्टॉरंटों की कतार।

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इतना ही नहीं बल्कि, यहाँ इतने गहरे पानी में भी एक से एक पांच सितारा होटलों की भी पूरी भरमार थी।

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इनके अलावा कुछ अन्य किस्म के रेस्तरां भी उपलब्ध थे।

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इतने गहरे पानी में किसी घर का होना बड़ा ही विचित्र अनुभव करा रहा था। रास्ते के कुछ बड़े बड़े चट्टान हाथी जैसे शक्ल में बड़े रोचक लग रहे थे।

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इस हाथीनुमा चट्टान से नजरें हटी भी की नही, अचानक मरियम दिखाई पड़ी-

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इसी बीच इस बैकवाटर तंत्र और समुद्र का मिलन अद्भुत था, शांत जल के साथ लहरों से भरे समुद्र का संगम।

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अब केरल-तमिलनाडु की इसी सीमा पर बैकवाटर की वापसी यात्रा शुरू होने को थी, इस पुलिया के इस ओर था केरल तो दूसरी ओर तमिलनाडु।

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हमारे नाविक के मुताबिक दो घंटे की यह सुखद यात्रा अब समाप्त होने वाली थी और पहले से भी काफी तेज चाल से उसने एक नए रास्ते से वापस जमीं पर उतार दिया।

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