NAVRATRI IN KOLKATA माँ काली कलकत्ते वाली जाने से पहले एक बार ज़रूर पढ़े। 

Tripoto
9th Oct 2018

durga maa

Photo of NAVRATRI IN KOLKATA माँ काली कलकत्ते वाली जाने से पहले एक बार ज़रूर पढ़े। by Afsarul haq

नवरात्री के त्यौहार के लिए मशहूर कलकत्ता पूरी तैयारी में लगा है माँ का दरबार सजाने में। हर तरफ रंग बिरंगे फूल और उसकी सुगंध इस बात का सबूत देती है की आ गया है माँ दुर्गा का त्यौहार ऐसे में आप सिटी ऑफ़ जॉय कहे जाने वाले कोलकाता की दुर्गा पूजा कैसे भूल सकते है। तो चलते है आज कोलकाता के सफर पे।

Day 1
Photo of Kolkata, West Bengal, India by Afsarul haq

कुमारटुली ( कुम्हार टोली ) की गतलियों में बनी माँ की मूर्तियां अब दरबारों में सजने के लिए तैयार हो गयी है। कुमारटोली कोलकाता की वह जगह है, जहाँ पूरे बंगाल से आकर लोगो ने एक बस्ती बना ली है इसे लिए इस जगह को कुम्हारटोली कहा जाता है। यहां आप पूरे वर्ष तक कुम्हारों को मूर्तियां बनाते पाएंगे यह मूर्तियां सिर्फ बंगाल तक ही सीमित नहीं रहती बल्कि इन्हे लेने वाले देश के कई कोनो से आते है, और अपने अपने सेहर ले जाते है। बंगाल के मूर्तिकार और उनकी मूर्तियां पूरे देश विदेश में प्रसिद्द है। इस समय यह गली माँ के दरबारों को सजाने की वस्तुओं से भर जाती है। अगर आप अभी बंगाल जाने का प्लान बना रहे है तो यह यात्रा आपके लिए एक यादगार लम्हा बन सकती है। यह गलियां इतनी सुन्दर और आकर्षक लगती है की आप यहाँ पूरे दिन गुज़र सकते है।

सन 1919 में कोलकाता की पहली दुर्गा पूजा बाघ बाजार में समपन्न हुयी थी, जिसे सबजनी दुर्गा पूजा कहा गया।

1868 में कोलकाता में एक हलवाई नोबिन चंद्रा दास ने रसगुल्ले का आविष्कार किया था।

1836 में कोलकाता के अलीपुर स्थापित नेशनल लाइब्रेरी देश की सबसे बड़ी लाइब्रेरी मानी जाती है। इस पुस्तकालय की सफ़ेद रंग की भव्य ईमारत कभी बेलवेडिर के नाम से जानी जाती थी, जो की ब्रिटिश काल में वायसराय का निवास स्थान था।

रानी विक्टोरिया की यादें समायें कोलकाता का विक्टोरिया मेमोरियल

Photo of Victoria Memorial, Kolkata, West Bengal by Afsarul haq

कोलकाता का नाम आते ही दुर्गा पूजा के बाद जो बात जेहन है आती है वो है, वो सफ़ेद भव्य ईमारत जिसका नाम है विक्टोरिया मेमोरियल। इंडो - सारसेनिक स्थापत्य शैली में बनी इस ईमारत का निर्माण सन 1910 में हुआ था। इस निहायती खूबसूरत ईमारत को बनाए वाले वास्तुकार थे विलियम एमर्सन। प्रसिद्द स्थापत्यकार विलियम ने देश में कई महान संरचनाये बनायीं थी, जिनमे मुंबई का क्रॉफोर्ड मार्किट तथा इलाहाबाद में ऑल सेंट्रल कैथेड्रल जैसी सुप्रसिध्द इमारते शामिल है। इस संरचना को ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया को समर्पित किया गया था। ब्रिटिश - भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड कर्ज़न ने दिवंगत महारानी विक्टोरिया की स्मृति में कवींस वे पर स्थित इस स्मारक के निर्माण की परिकल्पना की थी। इस महान स्मारक के निर्माण पर उस समय एक करोड़, पांच लाख का खर्च आय था। इस ईमारत में लगभग 28,394 कला वस्तुओं और 3,900 रंग चित्रों का संग्रह किया गया है। विक्टोरिया मेमोरियल हॉल के संग्रह में बोर्न एंड शेफर्ड के अनेक दुर्लभ फोटोग्राफ भी है। इन तस्वीरों के माध्यम से आप उस ज़माने को हकीकत से जान सकते है। यहाँ बौद्ध धर्म ग्रंथों से लेकर पांडुलिपियां भी बड़ी संख्या में संरक्षित है। आज भी यह कोलकाता का सबसे प्रमुख पर्यटन स्थल है। इस ईमारत का रख - रखाव संस्कृति मंत्रालय द्वारा किया जाता है। यहाँ आने से पहले आप इसका ऑनलाइन टिकट भी बुक करा सकते है। सोमवार और नेशनल हॉलिडे छोड़कर यह ईमारत हर रोज़ सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक खुली रहती है। माना जाता है की इस मेमोरियल को देखने प्रतिवर्ष लगभग 20 लाख लोग आते है।

Photo of NAVRATRI IN KOLKATA माँ काली कलकत्ते वाली जाने से पहले एक बार ज़रूर पढ़े। by Afsarul haq

बंगाल का आकर्षण रविंद्र सेतु यानी हावड़ा ब्रिज

Photo of Howrah Bridge, Howrah, West Bengal, India by Afsarul haq

बंगाल का सबसे बड़ा आकर्षण है हावड़ा ब्रिज दो सेहरों कोलकाता और हावड़ा को जोड़ने के लिए आज से 75 साल पहले हुगली नदी पर बनाया गया था। सन 1965 में इसका बदलकर प्रसिद्द कवी और नोबल पुरस्कार विजेता रवीन्द्रनाथ टैगोर के नाम पर 'रविंद्र सेतु' रखा गया। लेकिन आज भी लोगों की ज़ुबान पर जो नाम चढ़ा है वह हावड़ा ब्रिज ही है। यह एक ऐसा ब्रिज है जिसमे कहीं पे भी आपको नट - बोल्ट के नामो निशाँ नहीं मिलेंगे। यह दुनिया के सबसे लम्बे 6 सस्पेंशन वाले ब्रिजों में से एक है। इसका निर्माण 1942 पूरा हुआ और फरवरी 1943 में यह लोगों के लिए खोला गया। यह ब्रिज 705 मीटर लम्बा और 30 मीटर चौड़ा है। इसकी मज़बूती का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है की इस ब्रिज से रोज़ाना 80 हज़ार से अधिक वाहन और 10 लाख पैदल यात्री गुज़रते है। इसी ब्रिज के नीचे एक स्थल है जिसका नाम है - मलिक घाट फ्लावर मार्किट। सुबह के वक़्त इस मार्किट में आपको काफी चेहेल - पहल देखने को मिल जाएगी। यहाँ हर कदम पर आपको फूलों के दुकाने देखने को मिल जाएँगी। ब्रिज से देखने पर यह मार्किट काफी खूबसूरत लगता है।

प्रिंसेप घाट में ले नौका विहार का आनंद

Photo of Princep Ghat, Strand Road, Fort William, Hastings, Kolkata, West Bengal, India by Afsarul haq

विक्टोरिया मेमोरियल से थोड़ी दूर पर स्थित है सफ़ेद खंबों से सजी एक खूबसूरत संरचना प्रिन्सेप घाट। इसका निर्माण एंग्लो - इंडियन स्कॉलर जेम्स प्रिंसेप की याद में सन 1843 में हुगली नदी के किनारे करवाया गया था। यहाँ एक खूबसूरत गार्डन भी है। अगर आपको बोटिंग पसंद है तो शाम के वक़्त यहाँ आ सकते है। यहाँ से रात में जगमगाता विवेकानंद सेतु बहुत खूबसूरत नज़र आता है।

Day 2

परंपर और आधुनिकता का मेल है यह शहर

Photo of Kolkata, West Bengal, India by Afsarul haq

कोलकाता के दो चेहरे है। एक, कोलकाता बंगाल की प्राचीन परंपराओं का वाहक तो दूसरा, कोलकाता अंग्रेज़ों की छाप या प्रभाव वाला शहर। इसमें औपनिवेशिक ज़माने की यादे देखने को मिलती है। एक और कोलकाता में जहाँ प्राचीन मंदिर व मठ है तो दूसरी और विक्टोरिया मेमोरियल, हावड़ा ब्रिज जैसी आधुनिक संरचनाये भी है। इसी वजह से इसी 'सिटी ऑफ़ जॉय' का नाम मिला है। यहाँ पर खुशियां बहुत सरे पैसे की मोहताज़ नहीं। आप चाँद रुपये में भी इस खूबसूरत शहर का मज़ा ले सकते है।

ट्राम की सवारी लगे सबको प्यारी।

Photo of NAVRATRI IN KOLKATA माँ काली कलकत्ते वाली जाने से पहले एक बार ज़रूर पढ़े। by Afsarul haq

कोलकाता के ट्राम को एशिया के सबसे प्राचीनतम ट्रांसपोर्ट माना जाता है। इसकी शुरुआत 27 मार्च, 1902 को हुयी थी। पहली ट्राम सियालदाह और अर्मीनियन घाट स्ट्रीट पर चली थी। यह वो ज़माना था जब ट्राम को घोड़े खींचा करते थे। घोड़ों द्वारा खींचने वाली ट्राम को खासकर लंदन से आयत किया गया था। इसका उद्घाटन लॉर्ड रिपन ने किया था। वक़्त के साथ - साथ कोलकाता ट्राम को लोकोमोटिव इंजन मिला और तब से यह लगातार यहाँ की सड़को पर दौड़ रहा है। आज भले ही शहर ने टैक्सी और मेट्रो के साथ रफ़्तार पकड़ ली हो, लेकिन कोलकाता का पारंपरिक आकर्षण ट्राम के ज़रिये अभी भी बरक़रार है।

कोलकाता की कुछ देखने लायक जगहें

Day 3

कालीघाट काली मंदिर

कालीघाट काली मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से एक है। हुगली नदी के तट पर बना यह मंदिर पूरी दुनिया में मशहूर है। इस मंदिर से लगा घाट कालीघाट के नाम से जाना जाता है। वैसे तो इस मंदिर को सत्रहवीं शताब्दी का माना जाता है, लेकिन वर्तमान में मंदिर साबर्ना रॉय चौधरी परिवार के संरक्षण में पिछले 200 वर्षों से चल रहा है।

दक्षिणेश्वर काली मंदिर

दक्षिणेश्वर काली मंदिर गंगा के पूर्वी तट पर बना काली माँ का भव्य मंदिर है। इस मंदिर को देखने के पूरा का पूरा कोलकाता पार करने जाना पड़ेगा। अगर आपके पास समय है तो इस यात्रा को वाइस एही पूरा कीजिये, जैसे कोलकाता वाले किया करते है। कुछ दूर तक बस से जाइये, फिर हुगली नदी पर चलने वाले बड़े बड़े स्टीमर से आगे बढ़िए और अंत में ट्राम से कुछ दुरी तय कीजिये। इस सफर में आपको कोलकाता देखने का पूरा मज़ा आएगा। सन 1855 में रानी राश्मोनी ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। यहाँ मंदिर सटा हुआ एक घाट भी है, जहाँ दर्शन वाले लोग स्नान करते है।

मार्बल पैलेस

ठाकुर बाड़ी के नज़दीक मुक्तराम बाबू स्ट्रीट पर ही एक और दर्शनीय स्थल है, जिसका नामा मार्बल पल्स है। उत्तरी कोलकाता में 19वीं शताब्दी का बना यह भव्य मेन्शन कोलकाता के बीते युग की याद दिलाता है। यहाँ शाम 4 बजे से पहले जाए। कोशिश करे कि ठाकुर बड़ी से मार्बल पैलेस तक हाथ रिक्शा में जाए। यह एक छोटी दुरी है और इस बहाने आपको कोलकाता की एक हेरिटेज जगह से रूबरू होने को मिलेगा।

रविंद्र भारती म्यूजियम

Photo of Rabindra Bharati Museum, Jorasako Thakurbari, Raja Katra, Singhi Bagan, Jorasanko, Kolkata, West Bengal, India by Afsarul haq

लाल रंग के इस भवन का निर्माण वर्ष 1784 में हुआ था। आज यह एक संग्राहलय है, जिसे रविंद्र भारती म्यूजियम के नाम से भी जाना जाता है। इसमें 3 संघ्रालय मौजूद है। रवीन्द्रनाथ टैगोर ने अपने ने अपने जीवन की अंतिम सांस यही ली थी। यह एक खूबसूरत जगह है। इसे देखने के लिए 10 रुपये का टिकट लगता है। अंदर फोटो खींचना सख्त मन है।

इंडियन म्यूजियम

Photo of Indian Museum, Jawaharlal Nehru Road, Colootola, New Market Area, Dharmatala, Taltala, Kolkata, West Bengal, India by Afsarul haq

इस राष्ट्रिय संघ्रालय की स्थापना सन 1814 में एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल द्वारा पार्क स्ट्रीट पर की गयी थी। यह देश का सबसे बड़ा संग्राहलय है। इसे तसल्ली से देखने के लिए कम से कम आधा दिन लगता है। इस संग्राहलय में कई दीर्घाएं है, जैसे ब्रॉन्ज - गैलरी, सिक्कों की गैलरी, टेक्सटाइल, पेंटिंग,मास्क,बर्ड, डेकोरेटिव आर्ट, ममी आदि। यहाँ की गैलरी का प्रमुख आकर्षण है 4000 साल पुराणी मिश्र ममी। सैलानियों को देखने के लिए काफी आकर्षण का केंद्र है।

बिड़ला प्लैनिटोरियम

Photo of Birla Planetarium, Elgin, Kolkata, West Bengal by Afsarul haq

नक्षत्रों की जादुई दुनिया को देखने के लिए बच्चे खासतौर पर बिड़ला प्लैनिटोरियम ज़रूर आना पसंद करते है। इसकी ईमारत साँची के शांति स्तूप से प्रेरित है। ब्रह्माण्ड के कुछ अनछुए पहलुओं से रूबरू होना चाहते है तो यहाँ ज़रूर आये। यहाँ हिंदी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में शो दिखाए जाते है। इसका शुल्क मात्र 60 रुपये है।

Day 4

चटकारे ले यहाँ के स्ट्रीट फ़ूड के

Photo of कोलकाता, West Bengal, India by Afsarul haq

खानपान की बात करे तो कोलकाता का स्ट्रीट फ़ूड भारत का सबसे अच्छा स्ट्रीट फ़ूड माना जाता है। कोलकाता जाएँ और स्ट्रीट फ़ूड ट्राई न करे ऐसा हो ही नहीं सकता। यहाँ का पुचका जिसे अन्य जगहों पर पानीपुरी, बतासे और गोलगप्पे के नाम से भी जानते है। काफी निराला होता है। खट्टे - मीठे और तीखे स्वाद से भरपूर यह पानीपुरी आपको वहां से बिना खाये जाने नहीं देगी। न्यू मार्किट में काठी रोल्स की एक पूरी की पूरी श्रंखला मिलेगी। इन्हे ज़रूर ट्राई करे। यहाँ पर तले हुए स्नैकश का बड़ा चलन है, जिसे तालेभाजा कहा। फिश के शौक़ीन गोलपार्क - 5 पॉइंट क्रॉसिंग के नज़दीक एक शॉप है, जो मज़ेदार फ्राई फिश बेचती है। अगर आप पूर्वी बंगाल यानी बांग्लादेशी खाना का स्वाद लेना चाहते है तो न्यू मार्किट एरिया में मुश्ताक अहमद स्ट्रीट पर कस्तूरी रेस्टोरेंट जाएं। यहाँ आप बंगाल के ऑथेंटिक खाने का लुत्फ़ उठा सकते है। जैसे - भेटकी बेक्ड फिश, कोछू पत्ता चिंगरी भाप्पा, प्रॉन्स करी, प्रॉन्स मलाई करी, भेटकी पातूरी ( केले के पत्ते में लपेटकर स्टीम की हुई मछली ) आदि। जब आप प्रिन्सेप घाट या मिलेनियम पार्क जाएं तो वहां की झालमूरी ज़रूर खाएं।

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कोलकाता का मशहूर रसगुल्ला वैसे तो पूरे शहर में कहीं भी खाया जा सकता है, लेकिन भवानीपुर के बलराम मलिक और राधाराम मलिक के दूकान की बात ही निराली है। यहाँ की रसमलाई, राजभोग, संदेश खाकर आपकी आत्मा तक कहेगी एक और देना। इस मौसम में आपको गुड़ की चासनी वाले रसगुल्ले भी देखने को मिलेंगे, जो मुँह में जाते ही घुल जाते है। इसके कैरेमल का स्वाद भी बड़ा निराला है।

1001 रूपये वाला अनोखा पान !

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क्या आपने हज़ार रुपये का पान कभी खाया है ? किताबों के लिए मशहूर कोलकाता के कॉलेज स्ट्रीट में स्थित करीब आठ दशक पुरानी पान की दूकान कल्पतरु भंडार में आपको ऐसे पैन मिल जायेंगे। यहाँ पांच रुपये से लेकर 1001 रुपये तक के पान आपको खाने को मिल जायेंगे। इसके मुरीद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, डॉ. ज़ाकिर हुसैन, डॉ. वी पी गिरी और प्रणब मुखर्जी जैसे देश के पूर्व राष्ट्रपतियों से लेकर पूर्व प्रधनमंत्री इंदिरा गाँधी सहित कई अन्य हस्तियां रही है। इस दूकान की प्रसिद्दि इतनी है कि बंगाल ही नहीं, देशभर से लोग यहाँ पहुँचते है। दुकान के मालिक श्यामल दत्ता के मुताबिक, इस पान में डाला जाने वाला मसाला और सुपारी का स्वाद अनोखा होता है। इसके लिए भुवनेश्वर से मीठा पत्ता मंगवाया जाता है। यह पान खाकर मुँह लाल नहीं होता। एक बूँद भी थूकने को जी नहीं करता। पूरा पान पेट में जाने के साथ ही यह 100 फीसदी ऐन्ज़ाइम की तरह काम करता है।

शॉपिंग का हब कोलकाता के मार्किट

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कोलकाता में शॉपिंग का अपना अलग ही मज़ा है। यहाँ पर मिर्ज़ा ग़ालिब स्ट्रीट पर स्थित न्यू मार्किट शॉपिंग काम्प्लेक्स पर आप तमाम तरह के फैशनेबल कपड़ों से लेकर जूते, बैग, कॉस्मेटिक व अन्य सामान खरीद सकते है। यहाँ पर आप स्ट्रीट फ़ूड का भी आनंद ले सकते है। हैंडीक्राफ्ट के सामान के लिए दक्षिणायन शॉपिंग काम्प्लेक्स काफी अच्छा है। इस काम्प्लेक्स के बाहर भी लोग फुटपाथ पर दूकान लगाए मिल जायेंगे। यहाँ का बड़ा बाजार कोलकाता के सबसे पुराने बाज़ारों में से एक है, जिसकी तुलना आप दिल्ली के चांदनी चौक से कर सकते है। गरियाहाट मार्किट दक्षिणी कोलकाता में पड़ता है। इस मार्किट में आप बंगाल व अन्य सामान उचित दामों पर खरीद सकते है। इसी तरह पार्क स्ट्रीट कोलकाता की शान है। बड़े - बड़े होटल, रेस्टोरेंट्स, मार्केट्स आदि पार्क स्ट्रीट की पहचान है, यह जगह भी आपको दिल्ली के कनॉट पैलेस जैसी ही लगेगी। यह जगह अपनी नाइटलाइफ़ के लिए भी जाने जाती है। यहाँ का सबसे रोचक मार्किट है फ्लोटिंग यानी पानी पर तैरता बाजार।

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यह भारत का इस तरह का पहला मार्किट है। यहाँ पर 115 तैरती हुई नावों पर चलती है 280 दुकाने। कोलकाता के पातुली में एक विशाल झील पर स्थित इस फ्लोटिंग मार्किट को बैंगकॉक की तर्ज पर बनाया गया है। यहाँ प्रवेश निःशुल्क है। फ्लोटिंग मार्किट चार हिस्सों में है, जिसमे सब्ज़ी, मछली, मीट और किराने के सामान के लिए अलग - अलग हिस्सों में दुकाने है। इस बाजार में फल - सब्ज़ी, मछली और फूलों से लेकर सब कुछ नावों पर बिकता है। यह पूरा मार्किट 500 मीटर लंबा और 60 मीटर चौड़ा है।

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