जानिए भारत की रहस्यमय जगहें ।

Tripoto
Photo of जानिए भारत की रहस्यमय जगहें । by Afsarul haq
Day 1

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भारत विविधताओं का देश है। इसी वजह से देश विदेश से लोग यहाँ घूमने आते है। यहाँ कुछ ऐसी भी जगह है , जो आपको रोमांच से भर देगी । तो आज हम आपको कुछ ऐसे ही रोमांच भरी जगहों के बारे में बताते है ।

💫 मैग्नेटिक हिल, लेह 💫

Magnetic Hill , Leh

Photo of जानिए भारत की रहस्यमय जगहें । by Afsarul haq

पहाड़ी ढलान पर अगर कोई गाड़ी खड़ी हो , तो यह देखा गया है कि गाड़ी रेंगने लगती है, लेकिन भारत का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर में बसा लेह में स्थित मैग्नेटिक पहाड़ी एक ऐसी जगह है, जहा पर अगर कोई गाड़ी न्यूट्रल करके भी खड़ी कर दी जाए, तो वह नीचे की और नही, बल्कि ऊपर की और 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पहाड़ी के ऊपर की और चलने लगती है ।
इस पहाड़ी का यह बेहद अजीब रहस्य है ।
सिर्फ गाड़िया ही नही बल्कि आसमान में उड़ने वाले प्लेन भी    अपने आप को इस गुरुत्वाकर्षण से नही बचा पाते।
इस जगह से गुज़रते वक़्त पायलट अपने प्लेन की स्पीड बढ़ा देते है, ताकि इसके चुम्बकीय प्रभाव में आने से बचा जा सके । इस स्थान की खास बात यह भी है कि जब कोई गाड़ी पहाड़ी से उतरती है तो, इसकी स्पीड सामान्य से 3 गुना ज्यादा अधिक हो जाती है। अगर आप गाड़ी को न्यूट्रल करके भी उतार रहे है तो, गाड़ी अपने आप 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ लेती है । हालांकि कुछ लोग इसे भ्रम मानते है, तो कुछ वेज्ञानिको ने इसके लिए  मैग्नेटिक फील्ड को दोषी ठहराया है लेकिन हक़ीक़त में में इसके पीछे की वजह किसी को पता नही। इस पहाड़ी को मैग्नेटिक या ग्रेविटी  हिल के नाम से भी जाना जाता है । और धीरे धीरे अब यह काफी लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेस बन गया है। इस रोमांच का अनुभव लेने के लिए देश विदेश से पर्यटक आते है ।
कैसे पहुंचे  ➡️
✈️जहाज़ से आप दिल्ली से लेह के लिए सीधी उड़ान ले सकते है ।
🚂ट्रैन से आपको पहले श्रीनगर जाना होगा और उसके बाद आप आसानी से बस से लेह तक जा सकते है ।

💫 बड़ा इमामबाड़ा, लखनऊ 💫

Bada Imamabada, Lucknow

Photo of Magnetic Hill, Srinagar - Ladakh Highway, Leh by Afsarul haq

लखनऊ में स्थित बड़ा इमामबाड़ा अपनी अध्भुत वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। इमामबाड़े की केंद्रीय संरचना काफी अनूठी है। 50 मीटर लंबा और 16 मीटर चौड़ा यह कक्ष किसी लोहे, लकड़ी या स्तम्भ के बिना सिर्फ ईंटों का जाल बनाकर बनाया गया है। इस तरह यह किसी बाहरी सहारे के बिना खड़ी अपने आप में एक अनूठी संरचना है। इसकी छत  बिना किसी बीम या गार्डर के सहारे मज़बूती से टिकी हुई है, जिसे देखकर आजके बड़े से बड़े इंजीनियर भी भौंचक्के रह जाते है। यही बात इस जगह को भारत के नक्शे में खास बनाती है। मुख्य द्वार से होते हुए जब आप बगीचे तक पोहोंचते है तो सीढ़ियों के ऊपर इमामबाड़े का केंद्रीय कक्ष नज़र आता है, अत्यंत विशाल है। इस कक्ष के एक तरफ मस्जिद है और दूसरी तरफ सीढ़ियों से नीचे की तरफ शाही बावली है।
सीढ़ियां चढ़कर ऊपर आने के बाद केंद्रीय कक्ष का द्वार देखा जा सकता है, जिसमे जालीदार नक्काशी के दरवाज़े और मेहराबनुमा बहुत सारे झरोखे है। इस भवन में तीन विशाल कक्ष है। इस दीवारों के बीच में छुपे हुए गलियारे है। इसे भूलभुलैया के नाम से जाना जाता है। अगर आपका दिल मज़बूत हो, तभी इसमे जाने की हिम्मत करना। इसमे 1000 से अधिक छोटे छोटे रास्तों के जाल है। अगर आप इस भूलभुलैया से बीने खोये वापस आना चाहते है तो, किसी जानकार की सहायता से जाए, नही तो आपको घंटो लग जाएंगे बाहर आने में।
कैसे पहुँचे ➡️
यह शहर सड़क और रेलमार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है ।

💫 करणी माता मंदिर, देशनोक 💫

Photo of जानिए भारत की रहस्यमय जगहें । by Afsarul haq

बहुत ही कम लोग होंगे जो इस मंदिर को ना जानते हो।
राजस्थान के बीकानेर जिले में बना यह मंदिर अपने चूहों के लिए मशहूर है। इसमे देवी करणी की मूर्ति रखी हुई है।
यह बीकानेर से 30 किमी दक्षिण दिशा में देशनोक में है।
इसे चूहों का मंदिर भी कहते है, यहाँ के काले चूहें देश विदेश में मशहूर है। इस मंदिर में लगभग 20,000 काले चूहें रहते है । गज़ब की बात यह है कि इतने चूहें होने के बावजूद इस मंदिर में बदबू नही आती और न ही यह किसी को नुकसान पहुंचाते हैं। आजतक यहाँ कोई बीमारी भी नही फैली है।
इस मंदिर के मुख्य द्वार पर सफेद संगमरमर से की गई नक्काशी लोगों को बेहद पसंद आती है। चांदी के गेट और सोने की छत के अलावा चूहों के प्रसाद के लिए रखी हुई चांदी की परात भी देखने लायक है। श्रद्धालुओ का मत है कि  करणी देवी साक्षात माँ जगदम्बा की अवतार थी। कहा जाता है कि जिस जगह पर यह मंदिर है यही एक गुफा में रहकर माँ पूजा अर्चना किया करती थी। यह गुफा आज भी मंदिर में बनी हुई है। बताते है कि माँ करणी के आशीर्वाद से ही बीकानेर और जोधपुर राज्य की स्थापना हुई। संगमरमर से बने इस मंदिर को बिना निहारे आप रह नही सकते। मंदिर के अंदर प्रवेश करते ही चूहों के हुड़दंग देख आप आश्चर्य में पड़ जाएंगे। यहां इतने चूहे है कि आप अपने अगले कदम को रखकर चलने की बजाय घसीटकर चल पाएंगे।
कैसे पहुंचे ➡️
यहां का नज़दीकी हवाई अड्डा जोधपुर में बना है।
आप रेलमार्ग के लिए बीकानेर या लालगढ़ का सहारा ले सकते है।
बीकानेर सड़क मार्ग द्वारा भी राजस्थान के कई बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है।

💫 लेक ऑफ स्केलटन, चमोली 💫

Photo of Karni Mata Temple, Deshnok, Rajasthan, India by Afsarul haq

उत्तराखंड में बसी हुई यह एक हिम् झील है, जो अपने किनारे पर पाए गए नरकंकालों के कारण चर्चित रही है, जो लगभग 16499 फ़ीट की ऊंचाई पर स्थित है।
वैसे, ट्रैकिंग करने वाले के लिए यह जगह बेहतरीन है। जब गर्मियों में हिमालय के ग्लेशियर पिघलने लगते है, तब यह छोटी सी झील बनती है। यह जगह चारो और से बड़े बड़े ग्लेशियर से ढकी हुई है। यहां तक जाने का रास्ता भी काफी रोमांच भर है । गर्मियों में बर्फ पिघलने के बाद नरकंकाल देखना शुरू हो जाते है। इन कंकालों के बारे में सबसे पहले 1942 में पता चला था। उस समय यह अनुमान लगाया गया था के यह कंकाल 19वीं सदी के उत्तरार्ध के है और सभी की मौत संभवत: महामारी, भूस्खलन या बर्फीले तूफान से हुई होगी। इन नरकंकालों को लेकर यह अलग-अलग कहानियां प्रचलित है।
इस झील को कुंड या रूपकुंड के नाम से भी जाना जाता है।
मान्यता है कि पांडव अज्ञातवास के दौरान इसी जगह से होकर गुज़रे थे और इसी कुंड में द्रौपदी ने अपना रूप निहारा था।
कैसे पहुँचे ➡️
इस रहस्मयी झील तक जाने का रास्ता लोहागंज से शुरू होता है, जो कर्णप्रयाग से 85 किमी की दूरी पर है।
काठगोदाम स्टेशन से लोहागंज के लिए आप टैक्सी ले सकते है।

💫 भीमबेटका, मध्य प्रदेश 💫

Pic by -mptourism

Photo of Chamoli, Uttarakhand, India by Afsarul haq

भीमबेटका पाषाणयुगीन आश्रय स्थल होने के साथ-साथ भारतीय उपमहाद्वीप में प्राचीन जीवन को दर्शाने वाली एक अध्भुत जगह है। यह भारतीय स्थापत्यकला का अनुपम खज़ाना है। यह भोपाल से 46 किमी दक्षिण में स्थित है। भारत के प्रसिद्ध पुरातत्व विशेषज्ञ डॉ. वीएस वाकांकर ने इन गुफाओं की खोज की थी। 1958 में नागपुर जाने के रास्ते में अचानक ही दूर की एक पहाड़ी से उन्होंने इन गुफाओं को चिन्हित किया। यह पूरा छेत्र गुफाओं से भरा है। यह करीब 600 गुफाएं है। इन्ही वजह से यह यूनेस्को की विशव विरासत स्थल में अपनी जगह बना पाया है। इन में से कुछ गुफाओं में बने चित्र हज़ारो वर्ष पुराने है। भीमबेटका में पाई जाने वाली कलकीर्तिया तो तकरीबन 30,000 साल पुरानी मानी जाती है।
कहते है भीमबेटका नाम महाभारत के भीम से जुड़ा हुआ है।इसकी उत्पत्ति भीमबैठका से हुई थी, जिसका अर्थ है भीम के बैठने की जगह। आर्कियोलॉजिकल सर्वे में पता चला है कि यहां बनी पत्थर की दीवारें दुनिया की सबसे प्राचीन दीवारों में से एक है। यहां के गुफाचित्र ही यहाँ का प्रमुख आकर्षण है। यह ऑस्ट्रेलिया के सवाना छेत्र और फ्रांस के आदिवासी शैल चित्रों से मिलते है, जो कालाहाड़ी मरुस्थल के बौनों द्वारा बनाये गए थे। इन गुफाओं का इस्तेमाल विभिन्न कालो में आदिमानवों ने अपने घर के रूप में किया था, इसीलिए यहां उकेरी गई पेंटिंग्स उनकी जीवनशैली और सांसारिक गतिविधियो को दर्शाती है। यह बड़े आस्चर्य की बात है कि इन पेंटिंग में जो रंग भरे गए थे वे वह कई युग होने के बाद भी वैसे ही बरकरार है।
कैसे पहुंचे ➡️
यहां का नज़दीकी हवाईअड्डा भोपाल है।
आप चाहे तो ट्रैन से भी भोपाल आकर टैक्सी से भीमबेटका जा सकते है।

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धन्यवाद ✍️

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