नैनीताल : तीन ऋषियों की प्यास से अस्तित्त्व में आया ये शहर

Tripoto
19th Apr 2017
Day 1

नैनीताल को भारत का झीलों वाला कस्बा भी कहा जाता है। यह हिमालयन बेल्ट में स्थित है। यह कुमाऊँ की पहाड़ियों के मध्य में स्थित है और इसे खूबसूरत झीलों का आशीर्वाद प्राप्त है। नैनीताल को श्री स्कन्द पुराण के मानस खंड में ‘तीन संतों की झील’ या ‘त्रि-ऋषि-सरोवर’ के रूप में उल्लेखित किया गया है। तीन संत जिनके नाम अत्री, पुलस्त्य और पुलाह थे, अपनी प्यास मिटाने के लिए, नैनीताल में रुके थे पर उन्हें कहीं भी पानी नहीं मिला तब उन्होंने एक गड्ढा खोदा और मानसरोवर झील से लाए गए जल से इस गड्ढे को भर दिया। तब से यह ‘नैनीताल’ नमक प्रसिद्ध झील अस्तित्व में आई। एक अन्य कथा में कहा गया है कि हिंदू देवी सती (भगवान शिव की पत्नी) की बाईं आंख इस जगह पर गिर गई थी जिससे इस आँख के आकार की नैनी झील का निर्माण हुआ।
पर्यटकों के लिए स्वर्ग - नैनीताल के आस पास के स्थान
नैनीताल अपने खूबसूरत परिदृश्यों और शांत परिवेश के कारण पर्यटकों के स्वर्ग के रूप में जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि ब्रिटिश व्यापारी, पी. बैरून ने 1839 में, यहाँ की सम्मोहित कर देने वाली खूबसूरती से प्रभावित होकर ब्रिटिश कॉलोनी स्थापित करके नैनीताल को लोकप्रिय बना दिया। जो पर्यटक नैनीताल भ्रमण की योजना बना रहे हैं वे हनुमानगढ़ की यात्रा भी कर सकते है जो कि भगवान हनुमान को समर्पित एक मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। इसके अलावा नैनीदेवी मंदिर एक महत्त्वपूर्ण धार्मिक स्थल है जो भारत के 51 शक्ति-पीठों में गिना जाता है।

Photo of नैनीताल : तीन ऋषियों की प्यास से अस्तित्त्व में आया ये शहर by Faisal Ansari
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