पांच का पंचनामा: चांदनी चौक दिल्ली के जायके

Tripoto

दोस्तों, मैं आज से अपने ब्लॉग पर पांच का पंचनामा नाम से एक नयी सीरीज शुरू कर रहा हूँ। इस सीरीज की हर पोस्ट में किसी स्थान विशेष के 5 प्रमुख आकर्षणों के बारे में अपने अनुभव साझा करूंगा।

पढ़िए इस सीरीज का पहला पोस्ट....

चांदनी चौक दिल्ली का सबसे बड़ा बाजार है। चांदनी चौक के अलावा यहाँ खारी बावली, सदर बाजार, चावड़ी बाजार जैसे अन्य बाजार भी हैं।

इस शनिवार, 10 नवम्बर 2018 को, मेरा परिवार सहित चांदनी चौक जाने का कार्यक्रम बना। आज का मुख्य उद्देश्य चांदनी चौक और खारी बावली से खरीदारी थी। इस अलावा चांदनी चौक के खास स्वादिष्ट व्यंजनों को चखना भी हमारी सूची में था।

3 दिन पहले दीपावली का त्यौहार था । इसलिए हम ये मान कर चल रहे थे कि चांदनी चौक में भीड़ कुछ कम मिलेगी। और ऐसा हुआ भी।

चांदनी चौक जाने के लिए दिल्ली मेट्रो बहुत ही उपयुक्त है इसलिए हमने भी मेट्रो से जाने का ही निर्णय किया। लगभग 12 बजे हम चांदनी चौक मेट्रो स्टेशन पर थे। आज मेट्रो में भी ज्यादा भीड़ नहीं थी। स्टेशन के चांदनी चौक की तरफ वाले गेट से बाहर निकले। तंग गलियों और कपड़ों के बाजार से होते हुए चांदनी चौक की मुख्य सड़क पर आ गए।

हमारा सबसे पहला पड़ाव नटराज था। नटराज दही भल्ले वाला चांदनी चौक की मुख्य सड़क पर सेंट्रल बैंक के पास स्थित है। लैंडमार्क के लिए यह गली परांठे वाली के विपरीत है। यह दुकान 78 वर्षों से अपने स्वादिष्ट दही भल्ले और करारी चटपटी टिक्कियों के लिए लोकप्रिय है। यहाँ देसी घी का प्रयोग होता है। इनका दही हल्की सी मिठास लिए होता है। दही भल्ले ख़ास मसाले और मीठी इमली चटनी व दही के साथ सर्व किये जाते हैं। दही भल्ले और टिक्की दोनों की कीमत 50 रुपये प्रति प्लेट है। एक प्लेट में 2 पीस सर्व होते हैं।

यहाँ बैठने की व्यवस्था नहीं है इसलिए बाहर सड़क पर खड़े हो कर ही खाना होता है। काउंटर से टोकन खरीदिये और सर्व करने वाले को टोकन दे अपनी प्लेट ले लीजिये। यहाँ लगातार भीड़ बनी रहती है और आपका नंबर आने में थोड़ा समय भी लगता है।

हमने एक प्लेट दही भल्ला और एक प्लेट टिक्की ली। दही भल्ले बहुत ही नरम थे वहीं टिक्की करारी और मसालेदार थी। दोनों चीजें एक दुसरे के स्वाद को अच्छे से संतुलित कर रही थीं। हमारा कुल बिल 100 रुपये हुआ।

नाश्ता हो चुका था। अब खरीदारी की बारी थी। अगले 2 घंटे हम चांदनी चौक में घूमते रहे और खरीदारी की । यहाँ से चले तो टाऊन हॉल और फतेहपुरी मस्जिद होते हुए खारी बावली पहुंचे। यह बाजार अपने मसालों, सूखे मेवों और अन्य किराना के लिए जाना जाता है। मुख्यतः यह एक थोक बाजार है लेकिन अब यहाँ बहुत से खुदरा खरीदार भी आते हैं। हम खरीदारी शुरू करने से पहले गोल हट्टी पहुंचे।

फतेहपुरी के बिलकुल सामने किनारे पर गोल हट्टी है। गोल इसलिए कि यह दुकान चौराहे के किनारे पर स्थित है और बाहर से इसकी बनावट थोड़ा गोलाई लिए हुए है। हट्टी यानि कि दुकान। गोल हट्टी एक फ़ास्ट फ़ूड रेस्टोरेंट है। आइये, बैठिये, आर्डर कीजिये, 5 मिनट से कम समय में आपका खाना मेज पर आ जाता है, खाना खाइये और काउंटर पर जा कर बिल दे दीजिये। यहाँ बैठने के लिए गिनी चुनी मेज हैं, इसलिए कोई हैरानी नहीं कि आपकी मेज पर आपके सामने कोई अजनबी भी खाना खा रहा हो।

यह दुकान छोले भठूरे, छोले कुलचे, समोसे, टिक्की, रसमलाई और गुलाब जामुन सर्व करती है। हमने एक प्लेट छोले कुलचे लिए। कुल्चे बढ़िया सिके हुए थे। छोले बहुत अच्छे से पके थे। मसाले एक दम सही मात्रा में थे। न ज्यादा तेज और न ही कम। कुल मिला कर कम्फर्ट फ़ूड था। बिल आया 60 रुपये। खाना बहुत ही बढ़िया था इसलिए दुकान ग्राहकों से भरी हुई थी।

यहाँ से निकल खारी बावली बाजार में घूमते रहे। पूरा वातावरण तरह के मसालों की खुशबु से भरा हुआ था। कई जगह तो ये गंध इतनी तेज थी कि बिना छींके वहां से निकलना मुश्किल था। मालूम नहीं कि दूकान वाले रोज इसी माहौल में कैसे बैठ लेते हैं।

यहाँ सूखे मेवों की भी बहुत दुकाने हैं। हर दुकान पर तरह तरह के मेवों का ढेर लगा था। हैरानी की बात है कि एक ही मेवे की 2 - 3 क्वालिटी थी और इनके दाम में मामूली सा ही अंतर था। न जाने खरीदार कैसे निर्णय करते होंगे कि उन्हें कौन सी क्वालिटी लेनी है। हमारी यहाँ की खरीदारी देर शाम पूरी हुई।

फतेहपुरी से पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन की तरफ जाओ तो बाएं हाथ पर काके दी हट्टी रेस्टोरेंट है। पुरानी दिल्ली के ज्यादातर रेस्टोरेंट्स की तरह यहाँ भी बैठने की ज्यादा जगह नहीं है। यहाँ शुद्ध शाकाहारी उत्तर भारतीय खाना परोसा जाता है। तंदूरी नान, दाल और पनीर की बहुत से व्यंजन उपलब्ध हैं। विशेषकर इनके नान बहुत ही लोकप्रिय हैं। यहाँ अलग अलग भरावन के नान मिलते हैं। एक जंबो नान भी बनता है जो 2 लोगों के खाने की लिए पर्याप्त होता है। रेस्टोरेंट के बाहर बहुत से लोग इंतजार में खड़े थे और काफी लोग खाना पैक कराकर भी ले जा रहे थे।

हमने एक बटर नान थाली ली। इसमें 1 नान के साथ दाल मखनी, शाही पनीर और रायता था। नान बिलकुल गरम और मक्खन से भरा था। दाल और पनीर बहुत ही बढ़िया थे। खाना थोड़ा मसालेदार भी था।

खाना ख़त्म कर बिल देने पहुंचे। 180 रुपये का बिल आया। कीमत भी सही है। इधर आना हो तो यहाँ खाना जरूर खाएं।

Gyani's आज एक बहुत बड़ी फ़ूड चैन है। ये अपनी आइसक्रीम, शेक्स व अन्य मीठे व्यंजनों के लिए जाने जाते है। आजकल 2 अलग अलग Gyani's के आउटलेट हैं। एक लाल लोगो वाले और दुसरे नीले लोगो वाले। दोनों के संस्थापक भाई हैं। शुरुआत लाल लोगो वाले सेटअप से हुई थी। बताते हैं कि इनका पहला आउटलेट चांदनी चौक में है। ये आउटलेट काके दी हट्टी से जरा सा पहले है। यहाँ रबड़ी फालूदा, पिन्नी (बालूशाही), दाल हलवा, गाजर हलवा इत्यादि मिलता है। आइसक्रीम यहाँ नहीं है। लेकिन बिलकुल पास में ही इनका छोले भठूरे का एक आउटलेट है, जहाँ छोले भठूरे के अलावा राजमा चावल और छोले चावल भी मिलते हैं। इनकी हर डिश लाजवाब है। रबड़ी फालूदा तो सुपरहिट आइटम है। हर वक़्त यहाँ बहुत भीड़ रहती है। हम लोग फालूदा नहीं खाना चाहते थे इसलिए 100 ग्राम दाल हलवा लिया। गरम, देसी घी का बना, मेवों से भरपूर हलवा बहुत ही स्वादिष्ट था। हमारी आज की खरीदारी पूरी हो चुकी थी। डिनर भी हो गया था। अब वापसी की तैयारी थी। Gyani's से चांदनी चौक की तरफ वापस चले तो हरियाणा पनीर एवं स्वीट्स के सामने से निकले। यह चांदनी चौक की काफी पुरानी दुकान है और ख़ास तौर पर दूध की मिठाइयों के लिए प्रसिद्द है। कीमतें वाजिब हैं, लेकिन हर कीमत 1 किलो न होकर 900 ग्राम की बताई जाती है।5. हरियाणा पनीर एवं स्वीट्स हमने यहाँ से कढ़े दूध की बर्फी पैक करवाई। दूध का मावा बना कर लाल होने तक भूनते हैं। इसलिए दूध की सौंधी सौंधी और इलाइची की खुशबु वाली ये बर्फी बहुत ही बढ़िया बनती है। बर्फी चौकोर या डायमंड आकर न हो कर फिंगर चिप्स के आकार में होती है। यहाँ से घूमते घूमते मेट्रो स्टेशन पहुंचे और फिर मेट्रो से घर। इस प्रकार आज का ये ट्रिप ख़त्म हुआ।

https://roadsidef.blogspot.com/

Be the first one to comment