हवा हवाई ! मुंबई वालो !

Tripoto
12th Feb 2019
Photo of हवा हवाई ! मुंबई वालो ! by oldskool_indian

मैं देख रहा हूँ, कुछ दिनों मे मेरे कहानिया और सफर के अनुभव को पढ़ने वालों की संख्या बढ़ी हैं !

मुझे फॉलो करने वालो में कई और भी कुछ लोग शामिल हुए हैं !

नोटिफिकेशन जभी देखता हूँ, कुछ लोगो ने मेरे एक लेख को पढ़कर उस जगह पर जाने की इच्छा सूचि की भी हैं !

धन्यवाद आप सबका !

मुझे लिख कर बताया भी करें की मेरे लेख आपको कैसे लगते हैं !

आपका प्रोत्साहन चाहिए होगा मुझे ! ताके मैं और लिख पाऊं !

आज मैं आपको एक मेरे एक अनोखे अनुभव को सामने लाना चाहता हूँ !

आप तो जान ही गए होंगे की, मैं पहाड़ो के तरफ खींचा चला जाता हूँ !

ऐसे ही पहाड़ की और मैं और मेरा दोस्त एक सवेरे निकल पड़े ! 

पढाई उस के विषय में की नहीं थी ! बस ऐसे ही चल पड़े ! यह पहाड़ हर वक़्त हमें लोनावला जाते समय मिलते थे ! हमें उस की ओर आकर्षित करते !

इसीलिए मन को मनवा लिए ओर सोचा हाल चाल पूछ आये !

सवेरे घर से निकले लगभग ५ बजे ! और तुरंत पहुंच भी गए आहिस्ते बात चीत करते ! कई बार आ चुके थे इस रास्ते पर तो पता भी नहीं चला की कब आ गए !

पहाड़ी की तलहटी गांव तक आना ज़्यादा मेहनत का कार्य तो नहीं था ! क्यूंकि गांव मोरबे बाँध के कच्चे रास्ते से जुड़ा हुआ था और पास ही बसा हुआ है !

अगर आप एक अनुभवी ट्रैक्केर हैं तो मोरबे बाँध का नाम सुनते ही आपको संकेत हुआ होगा !

शायद आपके मन में उस पहाड़ का नाम उछला भी होगा !

मैं बात कर रहा हूँ - इरशलगढ़ की !

यह एक ऐसा पहाड़ हैं जो शायद छत्रपति शिवजी महाराज ने आस पास के इलाके पर नज़र रखने के लिए उपयोग किया हो !

क्यूंकि महाराज या किसी भी राजा ने, इस पर किसी भी तरह का बांध काम नहीं किया हैं !

Photo of हवा हवाई ! मुंबई वालो ! 1/5 by oldskool_indian

हमने चलने की शुरुवात की ! ऊपर की ओर बढ़ने लगे !

हर कदम पर प्रकृति के दृश्य से, में तो चौक जाता !

कई समय तक हम फोटो खींचने में मग्न रहे !

एक तो जल्दी इतना जो आ गए थे ! थोड़ा समय बर्बाद तो किया ही जा सकता था !

मोरबे बाँध का चित्र !

आस पास उसकी खूबसूरती बढ़ाते हुए पेड़ ओर पौधे की बात ही कुछ और थी !

चडान पहली बार इतनी सौंदर्य से भरी हुई थी !

आवाज़ करती हवा, ऊपर काले बादल, निचे झील का पानी, पहाड़ो के पीछे से निकलते हुए सूरज की चमक, हलकी सी बारिश ! मैंने तो प्रकृति पंचरत्नों को एक साथ महसूस किया !

Photo of हवा हवाई ! मुंबई वालो ! 2/5 by oldskool_indian

थोड़े भीगे, थोड़े हवा खायी !

लेकिन आगे जो था हमारा इंतज़ार करता हुआ ! उसकी तो अपेक्षा उत्साह के चलते की ही नहीं !

पहाडियो के कच्चे रास्ते से घूमते घुमाते, कीचड से लड़ते हुए !

हम दोनों का काफिला तो चलता रहा, कई देर तक !

बादल भी हटने लगे ! पहाड़ी की ऊँची छोटी तो पास दिखने भी लगी थी !

Photo of हवा हवाई ! मुंबई वालो ! 3/5 by oldskool_indian

लेकिन उस तक पहुंचना और बाकी था !

इतने खूबसूरत दृश्य दिखाने के बाद, आखिर के लिए जो जादूगरी बचा के राखी थी ! उससे तो हमारा मिलाप होना बाकी था !

हम उस छोटी को देखते देखते आगे बढ़ते रहे ! की अब आएगा , अब आ जाएगा ! दोनों एक दुसरे को झूठे दिलासे देते चलते रहे !

परन्तु महाशय तो, हम पर ऊपर से देख कर हसने लगे ! इतना की हस्ते हस्ते रो पड़े !

आखिर कार हमें थोड़ा यकीं हुआ की हम तो पहुँच गए !

उसी वक़्त जो हवा चलायी, ऐसे जैसे की कोई हमें अपने घर के द्वार से भगा रहा हैं !

इतनी मेहनत के बाद ऐसा लगा की कोई हमारे आने से खुश बिलकुल भी नहीं था !

हवा इतनी ज़ोरो से चल रही थी, की हम दोनों को पत्थर का सहारा लेकर निचे रुकना पड़ा !

कई घंटो तक चलती रही !

ऐसा लग रहा था की हमें निचे ही जाना पड़ेगा ! लेकिन निचे जाना भी आसान नहीं था ! हवा हमें बहुत ही धक्के से निचे फेख रही थी !

डर लगने लगा की हम निचे गिर न जाए !

फिर हमने थाना की कुछ भी हो जाए लेकिन ऊपर तो पहुंचना हैं ! भले देरी हो तो हो !

हवा की तेज़ी में तो कोई कमी न हुई !

लेकिन एक अच्छी विचार आयी मेरी मन मे ! और हमने बैठकर आगे बढ़ने का सोचा !

बैठकर आगे बढ़ने लगे ! योजना काम भी आने लगी !

इतनी ज़िद्दी हवा तो मैंने नहीं देखी थी ! और वह भी मुंबई के पास !

बैठ बैठकर हम पहुंचे पहाड़ तक , आखिर कार !

देखिये खेल प्रकृति का,

जैसे पहुंचे वैसे ही हवा का चलना भी अचानक से बंद भी हो गया !

सब कुछ एक दम से शांत हो गया !

तभी मन मे बात पक्की हो गयी की, यह हवा हमें रोकने के लिए थी !

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अच्छी और कीमती चीज़ो के लिए मेहनत करना पड़ता हैं !

और वो जो मेहनत हैं ! वही हमें सिखाती हैं उस चीज़ को सम्मान करना !

यह एक बहुत ही बढ़िया तरीका था प्रकृति का हमें, ज़िन्दगी के अहम् पाठ को पढ़ाना !

सादर,

बोनी जॉन

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