'दक्षिण ' का बनारस

Tripoto
18th May 2019
Day 1

नदी और नारियल के खेत के साथ मुस्कुराती सड़के, जो की दो पवित्र नदियो के संगम 'तुंगभाद्रा' के किनारे बसे 'कूडलि' गाव तक पहुचाती हैं l शांत स्वागत करती नदी के तट पे रूबरू होंगे पावन पवित्र गाव से, ….

सबसे पहले गांव के लोगो से मिली , उन्होंने सांस्कृतिक सुंदरता और परंपरा के बारे में बाते साँझा की

गांव से थोड़ी उचाई पर (अगर पैदल जाती तो ट्रैकिंग के लिए सही वक़्त था) ऑटो से जाने पर पार्किंग के २० रुपये लगे. दो मंदिर हैं एक रामेश्वर मंदिर जहा दूर से ही सवागत के लिए नंदी महाराज उपस्थित हैं , इस मंदिर की बनावट , शिल्प शैली , इतिहास की कई भूली- बिसरि बातो में ले जा रही थी मंदिर को अपनी छाव में लिए खड़ा पीपल का पेड , बड़ी बड़ी बिना काटी गई पथरो से बने इसके दरवाजे , बगल से हो कर शांति से बहती थी तुंगभद्रा नदी

मंदिर व्यवस्था इतनी अच्छी हैं की प्रतीत ही नहीं होता हैं की यहाँ कोई आता भी हैं, नदी मैं नहाने, छणिक विश्राम करने, कपडे बदलने सबकी अपनी अपनी साफ सुथरी जगह हैं

रामेश्वर मंदिर के साथ ही हैं द्रोणाचार्य मठ, जहा गुरु अभी भी अपने भेष में पाए गए , वेद , ग्रन्थ , संस्कृत, द्रोणाचार्य जी के दर्शनशात्र से अवगत कराया जाता हैं.

साथ ही मिला प्रह्लाद के द्वारा( स्थानियो के मान्यता के अनुसार ) स्थापित किया हुआ श्री चिंतामणि नर्शिमा मंदिर l

ऊपर से गांव का नज़ारा ऐसा लगता हैं जैसे प्रकृति ने अपने सारे रंग यही भर दिए हो (गांव की तस्वीर आप भी यहाँ देख सकते हैं) l

गांव के लोग इतने मिलनसार की उनके खान पान से भी उन्होंने की अवगत कराया l

शक्ति दीदी वही मठ में फूल देने आती हैं ,अकेले घूमता देख पास में ही रहती हैं और वो थांबली ( दही से बनाया एक प्रकार का व्यंजन) और अक्की रोटी ( चावल के आटे की मसाले दार रोटी ) अच्छा बनती है मुझे जरूर स्वाद लेना चाहिए,ऐसा कह कर अपने साथ चलने के लिए राज़ी किया I

पड़ोसियों से मिलवाया , ऑटो वाले और मुझे दोनों को खाना खिलाया ,सबसे रोचक तो ये रहा की हम दोनों को एक दुसरे की भाषा न के बराबर आती आती थी फिर भी काफी वक़्त साथ गुज़ारा I

३.३० की ट्रैन भी थी बैंगलुरु के लिए तो मैं सब से विदा लेकर दुबारा आने का वादा कर के वापस आई.

ऑटो को पूरे ४५० रुपये दिए l

स्टेशन पर जिन्होंने सुबह कूडलि से अवगत कराया उनको भी व्योरा दिया, तब तक ट्रैन आ गई थी और मैं वापस बैंगलुरु l

Rameshwara temple

Photo of Koodli, Karnataka, India by Inhouse_Sunshine

Tungbhadra

Photo of Koodli, Karnataka, India by Inhouse_Sunshine
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Tungbhadra

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Rameshwara

Photo of Koodli, Karnataka, India by Inhouse_Sunshine
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Photo of Koodli, Karnataka, India by Inhouse_Sunshine
Photo of Koodli, Karnataka, India by Inhouse_Sunshine
Photo of Koodli, Karnataka, India by Inhouse_Sunshine

प्रकृति से स्वीकृति पाना , स्वागत पाना , कितना सुखमय होता हैं I

मेट्रो की तेज रफतार वाली ज़िन्दगी से नदारत होके , जहरिले हवा से सास छुपा कर , मैने फैसला किया की कर्नाटक का कोई गांव देखा जाए . मलाल बस इतना की एक ही दिन की छूट्टी

पड़ोसी ने सुझाव दिया की शिवमोग्गा देखा जा सकता हैं I कर्नाटक का ही एक जिला (district) हैं, बैंगलुरु से करीब ३५० किलोमीटर

शिवमोग्गा में निहारने जैसी खूब खूबसुरती निकल पडे बैंगलुरु से शुक्रवार रात 11 की भारतीय रेल से I

सुबह इससे पहले की सूरज धूप खिलाते हम शिवमोग्गा में चाय की चुस्की ले रहे थे l

वाह! क्या साफ -सुथरा स्टेशन , वेटिंग रूम में सारी सुविधाये.

फ्रेश वगैरह होने के बाद एक महिला कर्मचारी से सलाह मांगी की कैसे घूमा जाये शिमोगा . बातो बातो में पता चला की वह यही शिवमोग्गा डिस्ट्रिक्ट के ही एक गाव कूडलि में रहती हैं . इस गाव को लोग 'दक्षिण ' का बनारस कहते हैं I छोटे से गाव मे भिन्न प्रकार के मंदिर हैं (जीसकी चर्चा अगली बार ) शांकारचार्य द्वारा स्थापित मठ जहाँ संस्कृत पढाई जाती हैं और अन्य तरह के पौराणिक पाठ और इस तरह कूडलि घूमने की लालसा बढ़ी ..

स्टेशन से ही लोकल बस जाती हैं कुछ ५००म की दूरी पे I मैने स्टेशन से ही ऑटो करना बेहतर समझा जो की सही फेसला सबित हुआ .

Photo of Koodli, Karnataka, India by Inhouse_Sunshine
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