दक्षिण भारत में पहली काउचसर्फिंग - मिसफ़िट वांडेरेर्स

Tripoto
Photo of दक्षिण भारत में पहली काउचसर्फिंग - मिसफ़िट वांडेरेर्स 1/6 by Abhishek Singh

हम जब भी कहीं यात्रा करने की योजना बनाते है तो पहला ख्याल दिमाग में मंहगे होटलों का आता है। सोचिए अगर आपको मुफ़्त में रहने को मिल जाए तो? ये तो आपके ट्रिप को और भी मज़ेदार बना देगा। आप सोच रहे होंगे कि क्या मज़ाक कर रहा है। मैं मज़ाक बिल्कुल नहीं कर रहा हूँ।

दुनिया में एक ऐसी भी सेवा है जिसमें आप मुफ़्त में घर में रहने जैसा महसूस कर सकते है। ब्लॉग के अंत में मैं पूरी जानकारी संलग्न कर रहा हूँ।

मैसूर के बाद हमें मदिकेरी जाना था, जहाँ हमने होमस्टे बुक किया था। चूंकि मैंने काउचसर्फिंग का भी आग्रह किया था, जहाँ से सकारात्मक जवाब मिला था। बहुत लंबे बातचीत के बाद हमने काउचसर्फिंग वाले स्थान पर रुकने का सोचा।

मस्ती भरा सफ़र-

मैसूर से सायं 5 बजे सफर शुरू हुआ। मैं अपने मित्र (शेखर) से एक लंबे वक़्त के बाद मिला था तो हमारी ढेर सारी बाते होने लगी, थोड़ी लड़ाई, थोड़ी मस्ती में आधा सफ़र कब कट गया, पता भी नहीं चला। मौसम थोड़ा खराब होने लगा था।

बारिश की बौछार ने हमारा अच्छा स्वागत किया। आपको बता दूँ बरसात में दक्षिण भारत घूमना सबसे आनंदमय होता है। हर तरफ हरियाली आपके दिल की धड़कन को बढ़ने पर मजबूर कर देंगी। जैसे तैसे हम कुशालनगर पहुँचे।

मैंने आकर्षण देवानंद ( जिनके वहाँ हमे रुकना था) को फोन किया। किसी कारणवश उनका फोन नहीं लगा। उन्होंने मुझे एक ऑटोरिक्शा वाले भाई का नंबर दिया था। फोन करने पर रिक्शा वाले तुरंत हाज़िर हो गए। हमे हुदुगुर गाँव जाना था, जो वहाँ से 10 कि.मी. दूर था। गूगल मैप्स के सहारे हम जैसे तैसे पहुँच गए।

जोरदार स्वागत -

आकर्षण ने गर्मजोशी के साथ हमारा स्वागत किया। वीकेंड होने के कारण उनके कुछ मित्र भी आए थे। उनमें से एक का जन्मदिन था। थोड़ा परिचय देने के बाद हम एक रूम में बैठ के बातचीत करने लगे। वहाँ मेरी मुलाकात लियोनी ( जो जर्मनी से आयी थी) से हुई। देख के चौक गया कि इतनी दूर से काउचसर्फिंग करने आ गई और मैं हिचकिचा रहा था।

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मध्यरात्रि का जश्न -

हसीन मौसम होने की वजह से हम सब लोग छत पर बैठे थे। सब लोग बारी बारी से अपनी जीवन के सफर और उद्देश्य बता रहे थे। जश्न के लिए कूर्ग की होममेड वाइन भी थी। बातों बातों में 12 बज गए। फिर क्या था, केक काटा गया और बर्थडे बॉय पर लात घुसो की बरसात हुई। रात्रिभोज करके जल्दी सोने को बढ़े। दिनभर घूमने और सफर से हमारा शरीर थक गया था। हमें अच्छी नींद की सख्त आवश्यकता थी।

सुबह का नज़ारा

मेरी नींद सुबह जल्दी खुल गई। आकर्षण ने रात को बताया था कि उसके घर के ठीक सामने नदी है, जहाँ कुछ वक़्त बिताया जा सकता है। मैंने शेखर और तान्या को उठाने की कोशिश की। हमेशा की तरह शेखर नहीं उठा। मैं, तान्या और लियोनी नदी की ओर चल पड़े।

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नदी के किनारे पहुँच कर मैं तो जैसे मदहोश हो गया। इतनी शांत और सुंदर नदी अब तक नहीं देखी थी। लियोनी नहाने के मकसद से आयी थी तो उसने आते ही बिना विलंब किए नदी में छलांग मार दी। मैंने उस हसीन नज़ारे को कैमरे में कैद किया। मैं प्रकृति प्रेमी हूँ। प्रकृतिप्रेमियों के लिए ऐसा दृश्य किसी जन्नत से कम नहीं होता।

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मैंने अपने दोनों पैर नदी में डाले और आँखें मूँदकर चट्टान पर लेट गया। पक्षियों की आवाज़ और शांत माहौल कानों में मीठी मिश्री की तरह प्रतीत हो रही थी।

माँ के हाथों का प्यार -

वापस आने पर हमने पाया कि माँ ( आकर्षण की माँ) ने नाश्ता बना दिया था। गरम गरम पूडियाँ, आलू की सब्जी और कॉफी का सेवन किया। मैं भी उनको माँ कह के बुलाने लगा।

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आपको बता दूँ कि पास में ही उनका एक होमस्टे है, जहाँ की देख रेख़ मां और संदीप करते है। पूरे घर के लिए खाना बनाना, फ़िर होमस्टे में रुके लोगों के लिए उनके हिसाब का खाना तैयार करना कितना कठिन होता होगा। इतना करने के बाद भी माँ बिल्कुल नहीं थकती ना ही उनके व्यवहार में बदलाव आता था।

घर के आस पास भ्रमण -

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पूरे घर के अगल बगल प्राकृतिक सौंदर्यता की कमी नहीं थी। अच्छे खासे क्षेत्र में फैला छोटा बगीचा था जिसमें छोटे पौधों से लेकर लंबे नारियल के वृक्ष लगे थे। घर के पीछे छोटी गौशाला थी जहाँ कुछ गाएँ थी। उसके बगल में कुछ मुर्गियाँ भी पाली गई थी।

पर्यटन स्थलों की सैर -

हम सब जल्दी तैयार हुए और निकल पड़े आस पास के प्रमुख पर्यटन स्थलों की सैर पर। लियोनी भी हमारे साथ चल दी। उसको वहाँ से कोच्चि की बस पकड़नी थी। रिक्शा कर के कुछ घंटो में हमने वहाँ के कुछ जगहों का भ्रमण किया और शाम तक वापस आ गए।

हमने कहाँ कहाँ घुमा ये आपको अगले ब्लॉग में बताऊँगा। इस ब्लॉग का मुख्य उद्देश्य लोगों को काउचसर्फिंग के बारे में बताना है।

हंसी खुशी बिदाई -

आकर्षण के सभी मित्र शाम को वापस चले गए। उनके साथ एक अच्छा वक़्त बीता । गले मिलकर फिर मिलने की उम्मीद की। आकर्षण को भी उनके साथ जाना था। इतने अच्छे से मेहमाननवाजी के लिए मैंने उसका शुक्रिया अदा किया। उसने बोला की आपको पूरे कर्नाटक में कहीं भी दिक्कत का सामना करना पड़े, बेझिझक मुझे फोन करो। इसी के साथ उसने विदा ली।

सुबह सुबह प्रस्थान -

अगली सुबह जल्दी उठकर तैयार हुए क्योंकि हमें उस दिन मदिकेरी घूमना था। माँ ने नाश्ता परोसा। पेटभर नाश्ता करने के बाद हमने अपना बस्ता बांधा। मैं कुछ गुझिया ले गया था, जिसको मैंने माँ को दिया। उनके और दादी मां के आशीर्वाद लिए । माँ ने मुझे फिर से आने को बोला। वो बोली आकर्षण हो या ना हो, आप कभी भी आ जाना। इसी के साथ हम रवाना हुए।

काउचसर्फिंग - क्या है, कैसे करें और कितना सुरक्षित है

यह एक एप है जिसको आप अपने फोन पर इंस्टॉल कर के कुछ सामान्य जानकारी देकर प्रयोग कर सकते है। दुनिया भर के लोग इसपर है। सामान्य तौर पर कहे तो यह एक ऐसी सेवा है जो लोग निस्वार्थ भाव से करते है। यह पूर्णतया सुरक्षित है। आप जहाँ भी रुके है वहाँ उनकी कुछ कामों में मदद कर सकते है। उन्हें भी अच्छा लगेगा।

कुछ महत्वपूर्ण बातें -

आपको क्षेत्रीय संस्कृति जानने को मिलेगी। घर से दूर होकर भी घर जैसी भावना महसूस होगी। घर का बना स्वादिष्ट खाना मिलेगा। शायद लोकल खाना भी मिल जाए। आपको क्षेत्रीय लोगो से कुछ ऐसी जगहों के बारे में पता चलेगा जो गूगल मैप्स पर शायद ना हो। आपको और भी यात्री मिल जाएँगे जिनसे आप अपनी कहानियाँ साझा कर सकते है। आप उस जगह को एक ट्रैवलर के तौर से देख सकेंगे। वहाँ के लोगों से बातचीत, उनकी जीवनशैली आदि के बारे में जान सकेंगे।

अगर आपके मन में कोई भी सवाल है तो आप मुझसे बेझिझक पूछ सकते है।

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