10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा

Tripoto
23rd Nov 2019
Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़
Day 1

पहला दिन- 24 अगस्त 2019

मेरे पिछले यात्रा स्मरण में आपने पढ़ा हमारी थाईलैंड, कम्बोडिया की यात्रा तैयारियों, तथा हवाई जहाज, बस, हॉटेल, और दोनों देशों के वीजा प्राप्ति के उपायों के बारे में।

चलिए अब चलते हैं 10 दिवसीय विदेश यात्रा और 1 दिन की देशीय यात्रा जी हाँ, अपने ओड़िसा के पुरी इस्थित श्री जगन्नाथ मंदिर एवं गोवर्धन मठ पुरी में आचार्य: जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज श्री के श्री चरणों के दर्शन कर घर (दिल्ली) लौटने तक के सफ़र पर।

तो दोस्तों वो दिन भी आ गया, जिसका हम चारों क्रमशः मैं अजय ठाकुर, अखिलेश सिंह (छोटू), सुजीत मिश्रा, और दास बाबू बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहे थे।

वैसे तो मैं, सुजीत, और दास बाबू एक दूसरे को दशकों से जानते पहचानते हैं, और मैं व्यक्तिगत अखिलेश सिंह (छोटू) को दास बाबू के माध्यम से करीब 5 वर्षों से जानता, खाता, पीता, लड़ता, झगड़ता हुँ, आप हमें All Weather Friends भी कह सकते हैं।

औऱ मैं जानता हुँ हमारी आने वाली पीढ़ियाँ भी हमारी तरह ही होंगी हम सबके बच्चे लगभग समान उम्र के हैं।

मैं बात कर रहा हुँ, आरुष ठाकुर (लालू), भास्कर मिश्रा (अंशु), देवांश सिंह (टून टून) और आकर्ष दास (बुद्धा), मैं आकर्ष को प्यार से बुद्धा बुलाता हुँ क्योंकी जब वो करीब 6 माह का था तो दास बाबू ने अपबे व्हाट्सएप की डिसप्ले पिक्चर में उसकी फोटो लगाई थी जो की हु बहु लाफिंग बुद्धा से मिलती जुलती थी।

मेरी दिली तमन्ना है की, ये चारों जीवन में सर्वदा खुश रहें, अच्छे इंसान बने और हमारे इस यात्रा स्मरण को कभी अवश्य पढ़ें।

Four of us with our kids

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

हमारी यात्रा से दो-तीन दिन पहले ही हम सब अपने इस दो दिन बाद शुरू होने वाले यात्रा के बारे में फोन पर तैयारियों औऱ इस यात्रा के दौरान अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारियों के बारे में पूछ लिया करते थे।

हमने आपसी सहमति से कुछ महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां ली थी जैसे:

दास बाबू यात्रा संबंधित सभी कागज़ात की बागडोर संभाले हुए थे।

छोटू जी हमारे यात्रा के लेखा अधिकारी, और वापसी में भुबनेश्वर से पुरी और पुरी से भुबनेश्वर तक हमारे वाहन के मुख्य चालक थे। औऱ सबसे महत्वपूर्ण, ये हमारे यात्रा बीमा के लिए भी जिम्मेदार थे।

पंडित सुजीत मिश्रा जी का काम था, हम सबको यात्रा के दौरान समय सारणी, और पहले से ही तय जगहों पर जहाँ हमें जाना था का स्मरण करवाते रहें। और यात्रा के उद्देश्यों से हमें भटकने से बचायें।

अब बचे हम, तो भईया, हम ठहरे एक नंबर के आलसी और निक्कमे, हमें कुछ नही आता और इन महानुभावों ने हमे बस बकैती करने को रखा था।

उदहारण के तौर पर:

जुलाई-अगस्त महिने में उपरोक्त सभी मुझे जब कभी 10-20 बार किसी आरक्षण को आरक्षित करने हेतु कहते तो कंहीं जा कर मैं कुछ आरक्षण कर देता था।

सच कहूँ तो इन तीन लोगों के साथ आने से, विशेष कर छोटू के साथ आने से मैं कुछ ज़्यादा ही निश्चिन्तता की इस्थिती में था, औऱ इसके कई प्रमाण आपको आने वाले अंकों में मिलेंगें।

यात्रा से एक दिन पहले हम सब ने तय किया की हम लोग घर से दोपहर 2:00 बजे निकल जाएंगे, और मेरी जिम्मेदारी थी, हमारे घर से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन तक के लिए उबर की आरक्षण करके सबको उनके घरों से उठाना।

दिन था शनिवार, तारीख 24 अगस्त 2019 सब कुछ तय अनुसार हो रहा था।

औरों का तो पता नही मैं बहुत उत्सुक था, सुबह जल्दी सो कर उठा, अपना बैगपैक और उसमें सारे सामान को दोबारा निरीक्षण किया, और स्नान आदि कर भोजन करने बैठा ही था कि दास बाबू का फोन आया, पता चला वो घर के बाहर हैं, मैंने कहा दरवाजे खुले हैं, अंदर आओ, साथ में सुजीत भी थे, समय करीब 11:50 का रहा होगा, मुझे लगा ये लोग भी नाहा धो कर तैयार होंगें लेकिन लगा जैसे अभी ये दोनों सो कर ही उठे थे।

मेरे मन में कई आशंकाओं ने डेरा डाल दिया, (पता नही क्या हुआ, इनमें से किसी का प्लान तो रद्द न हो गया हो, आदि आदि) मैंने पूछा क्या हुआ? दास बाबू बोले "हम विमानपत्तन तक कैसे जाएंगे", हमने कहा "सारी बातें तो हो चुकि, दोबारा पूछने का क्या तात्पर्य है"?

दरअसल दास बाबू हम तीनों के घरों से लगभग 6-7 कीमी दूर रहते हैं, और हमारा विमानपत्तन तक का रास्ता उनके घर से 3-4 किमी दूर से गुजरता है, वो चाहते थे, हम उन्हें भी उनके गृहद्वार से उठाएं, हमने साफ साफ मना कर दिया, और उन्हें कहा "अब निकल लो, हम निर्धारित समय औऱ, निर्धारित स्थान पर आपका आवश्यकता अनुसार ही प्रतीक्षा करेंगें, यदि आप समय पर नही आये तो हम निकल लेंगें, आप खुद ही विमानपत्तन तक अकेले आएंगे।

बेचारे मुँह लटकाए निकल लिए, फिर हमें याद आया की हम उन्हें कुछ और कहना भूल गए, औऱ तुरंत हमने फोन लगाया, दास बाबू को लगा शायद हम मान गए, उन्होंने फोन उठाते ही कहा "थैंक्स दोस्त, मुझे पता था, तू दोबारा फोन करेगा" हमने कहा "ज्यादा खुश होने की आवश्यकता नहीं है, अपना DSLR Camera पैक करना मत भूल जाना, इसलिए फोन कर के याद दिला रहें हैं, अभी फटा-फट पहुंचो और हाँ समय का ध्यान रहे"!!

दास बाबू ने गुस्से से फोन काट दिया।

भोजन आदि पश्चात मैंने थोड़ा आराम किया, पत्नी को कहा एक प्याली कॉफी पिला दो, अब 12 दिन बाद ही माँगेंगे।

कॉफी खत्म कर, हमने अपने व्हाट्सएप झुंड "Mission Thailand" में उल्टी गिनती शुरू कर दिया। औऱ तय समय से उबेर की प्रीमियम श्रेणि में वाहन की बूकिंग कर चालक महोदय को फोन किया उन्हें हमारे घर का सीधा रास्ता समझाया, औऱ फोन काटते ही बूकिंग का स्क्रीन शॉट भी व्हाट्सएप झुंड में डाल मित्रों को कह दिया तैयार रहो वाहन आपके द्वार पर मात्र 10 मिनटों में पहुँच जाएगी।

छोटू और सुजीत ने तुरंत सेल्फी के माध्यम से झुंड में खुदके तैयार होने की सूचना प्रसारित कर दिया।

थोड़ी देर बाद वाहन हमारे द्वार पर थी, मैंने घर से निकलने से पुर्व, अपने दोनों बेटों को थोड़ा दुलार किया, आँखों ही आँखों में पत्नी को अलविदा कह, माता पिता के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद ले वाहन में बैठ गया।

मेरी अगली मंजिल थी छोटू और सुजीत का घर, मैंने उनके घरों के समीप पहुंचने से पहले उन्हें फोन किया और कहा "भाई लोग बाहर आ जाओ"!! ये दोनों महाश्य एक ही गली में आमने सामने रहते हैं।

थोड़ी देर प्रतिक्षा किया, लेकिन कोई निकल ही नही रहा था, मुझे लगा चल कर देखना चाहिए।

जब मैं गली में पहुँचा तो अचंभित रह गया, सुजीत अपना बैग घर के बाहर रखे छोटू के घर से निकलने की प्रतीक्षा कर रहा था, और सुजीत को उसके माता जी, छोटू के माता-पिता, बड़े भाई, सुजीत का बेटा और 2 छोटी भतीजियों ने घेर रखा था।

एक पल को तो लगा मानो बेटी बिदा होकर जा रही है, इतने में छोटू के बड़े भईया आदरणीय कमलेश सिंह जी (मुन्ना भईया) ने मुझे देखा, मैंने उनको नमस्ते भईया कह कर अभिवादन किया, उन्होंने मुझे यात्रा की शुभकामनाएं देते हुए मजाकिया अंदाज में कहा "ये तो ऐसे ही बिगड़ा हुआ है, तूने और बिगाड़ दिया", फिर तनिक विराम दे कर बोले खूब मस्ती करना लेकिन सावधान रहना" छोटू अभी भी नही निकला था।

मैं उसके दरवाजे तक गया तो भाई साहब की महारानी जी दरवाजे पर ही मिल गई, हमे देखते ही बोली "इन्हें ठीक से वापस ले आना"। मैंने मन ही मन कहा "ये बहुत बड़ी चुनौती होगी मेरे लिए"।

इतने में भाई साहब बाहर निकले, माता-पिता औऱ बड़े भाई के पैर छू कर आशीर्वाद लिया।

इतने में सुजीत के पिता जी आचार्य श्री घूरन मिश्र जी जो की विद्यालय से सेवानिवृत्त एवं समाज में अति सम्मानित व्यक्तित्व है, घर से निकले औऱ पहला सवाल पूछा "वहां दाल चावल मिलेगी आप लोगों को" मैंने कहा "चाचा जी, निश्चित रहें, मैं स्वम शाकाहारी हुँ"।

फिर सुजीत ने अपने माता पिता के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया, औऱ आशीर्वाद लेते हुए सामूहिक फोटो जिसमे मैं, छोटू, और सुजीत के परिजन थे।

Our Family Picture

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

ये फोटो मेरे लिए सदैव यादगार फ़ोटो होगी, जब आप कंही जा रहें हों औऱ इतने आशीर्वाद आपके साथ हों तो आपकी यात्रा निश्चित ही सफल होगी।

अब हम सब वाहन में बैठ कर, दास बाबू को उठाने निर्धारित स्थान रोहिणी सेक्टर 22 के पॉकेट 16 के चौक की ओर निकल पड़े।

वहां पर लगभग 5 मिनट प्रतीक्षा करने के बाद दास बाबू एक ऑटो रिक्शा से अस्त व्यस्त हालत में बाहर निकले, मुझे तिरछी नज़रों से देखा, और बिना कुछ बोले वाहन में बैठ गए।

मुझे दास को छेड़ने में बड़ा आनंद आता है, तो मैंने थोड़े अकड़ू लहज़े से पूछा "कैमरा लाया बे", दास बाबू का धैर्य लगभग टूट गया, किन्तु फिर भी बड़ा सहज हो कर बोले "ये पकड़, औऱ पूरे ट्रिप में तू ही ढोएगा इसे" और कैमरा मुझे थमा दिया।

वाहन के भीतर का वातावरण सामान्य हो चला था, हम सब आने वाले यात्रा के बारे में काफी उत्साहित थे और लगभग 1 घंटे 05 मिनट में दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन पर थे।

हम सब विमानपत्तन के निर्गमन टर्मिनल के द्वार संख्या 5 पर सुरक्षा अधिकारियों को अपना टिकट औऱ पहचान पत्र दिखाकर टर्मिनल के भीतर प्रवेश कर गए।

At Indira Gandhi International Airport Delhi

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

हमें दिल्ली से बैंकाक जाने के लिए भुबनेश्वर के बिजू पटनायक अन्तराष्ट्रीय विमानपत्तन तक जाना था, भुबनेश्वर तक जाने के लिए हम सब विस्तारा एयरलाईन्स की उड़ान संख्या UK781 में आरक्षित थे, इसका निर्धारित समय शाम के 5:45 दिल्ली और रात के 7:50 बजे भुबनेश्वर था।

हम विस्तारा एयरलाईन्स के बोर्डिंग पास वितरण डेस्क पर लाईन में लगे और अपनी बारी की प्रतीक्षा करने लगे।

कुछ ही देर बाद हमारे बोर्डिंग पास हमे दे दिए गए, और हमारे बड़े बैग को विमान के सामान कक्ष की ओर रवाना कर दिया गया।

बोर्डिंग पास लेने के तुरंत बाद, हम पास ही में बने पैसे बदलने के लिए एक सरकारी बैंक के काउंटर पर गए, और पूछा क्या हमें 40,000 थाई भाट मिलेंगें? जी जैसा की मैंने अपने पिछले अंक में लिखा था, यदि आप थाईलैंड जाते हैं, और वीजा ऑन अराईवल लेना चाहते हैं, तो आपके पास स्वदेश वापसी का हवाई आरक्षण, हॉटेल बुकिंग और 10,000 थाई भाट प्रतिव्यक्ति होने अनिवार्य है।

काउंटर पर तैनात महोदय ने कहा हमारे पास इतने थाई भाट नही हैं, हमने उन्हें धन्यवाद किया और वंही पर बने अगले पैसे बदल काउंटर पर गए।

यहां हमारा अभिवादन एक सुंदरी ने बेहद पेशेवर तरीक़े से किया, उनके व्यवहार से ही मैं समझ गया की यहां हमें 40 क्या 50,000/- भाट भी मिल सकता है।

हमने उन्हें अपना पासपोर्ट, पैन कार्ड, बोर्डिंग पास, और भारतीय मुद्राओं के बदले करीब 400 अमरीकी डॉलर और 30,400/- थाई भाट ले लिए।

तय हुआ की हम अमरीकी डॉलर रखेंगे औऱ बांकी सब 10,000/- थाई भाट।

पैसे बदलने के पश्चात हम सुरक्षा जांच के लिए अग्रसरित हुए, औऱ सुरक्षा जांच के बाद हमारे विमान के उड़ान के लिए निर्धारित द्वार संख्या 42 पर कुछ पेय पदार्थ (कॉफी, जूस) सहित प्रतीक्षा करने लगे, अभी विमान में दाखिल होने में क़रीब 25-30 मिनट औऱ शेष थे, और उड़ान भरने में लगभग 1 घंटे।

ये 25-30 मिनट मेरे मित्रों ने मुखपुस्तक (फेसबुक) के माध्यम से सभी को हमारे विमानपत्तन पर होने और थाईलैंड तक के यात्रा से अवगत करवाया, कुछ सेल्फियाँ ली गई, और इतने में हमारे विमान पर सवार होने की घोषणा भी हो गई।

हम चारों, सबसे अंत में विमान के द्वार तक पहुँचे, अपना बोर्डिंग पास निरीक्षण करवाया औऱ सवार हो गए दिल्ली से भुबनेश्वर तक कि यात्रा के लिए।

विमान में हम चारों के सीट एक साथ ही थे, जो की विमान के 7वी रेखा के C, D, E, F थे।

In Vistara's Aircraft at Delhi Airport

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

विमान में बैठते ही, हल्की बूंदाबांदी शुरू हुई, जो की मैं विमान में बैठें साफ़ साफ़ देख रहा था, विमान के मुख्य चालक ने अपनी औपचारिक घोषणाओं के दौरान मौसम के खराब होने की जानकारी प्रदान करते हुए, पेटी बांधे रखने के निर्देश भी दे दिए।

विमान अपने निर्धारित समय से उड़ान भरने को तैयार था, हमलोग अपनी-अपनी सीट की पेटी बांध कर विमान चालक दल के कर्मियों द्वारा सुरक्षा निर्देशों को देखने लगे, औऱ इसके कुछ ही समय बाद विमान रनवे पर था और आसमान की तरफ़ बढ़ने लगा।

कुछ ही देर बाद विमान अपने निर्धारित ऊँचाई पर था, और अब विमान की सभी बत्तियाँ जल उठी थी, उस हल्के प्रकाश में मैं अपने मित्रों के चेहरों पर उत्सुकता देख रहा था जिसे मैंने दास बाबु के कैमरे में कैद कर लिया।

इतने में चालक दल के सदस्यों द्वारा जलपान वितरण शुरु किया गया, हमें जलपान नही मिलना था क्योंकी हमारी टिकट कम शुल्क की थी, किन्तु जल, चाय, या कॉफी मिलना तय था।

जब चालक दल की सदस्य हमारी लाईन में आई तो उन्होंने पूछा "श्रीमान अखिलेश सिंह जी, आप वेज लेंगें या नॉन वेज"? मुझे लगा कुछ गड़बड़ है।

अखिलेश ने कहा "वेज" और विमान कर्मी महिला ने उन्हें एक थाली सौंप दी, लेकिन मात्र एक, क्योंकी मेरे तीनों मित्रों की टिकट एक ही PNR के अंतर्गत थी तो मैंने उनसे पूछा, "व्हाई ओन्ली अखिलेश, वि आर थ्री पैसेंजरस इन सेम PNR"?

उन्होंने अखिलेश से उनका बोर्डिंग पास मांगा, और बोली "सॉरी इट्स ओनली हिम" इतने में अखिलेश जिसको मालूम था, के ये भोजन नही मिलना था, लेकिन मिल गया औऱ मैं उसे भी रद्द करने पर तुला था। मन ही मन मुझे कोसने लगा औऱ बोला "कैसा दोस्त हैं बे तू" और उसने ये बात लगभग सभी को बताई की मैं उसका भोजन रद्द करवाना चाहता था।

खैर, हम चारों ने थाली मिल बाँट कर खाई और 3 अतिरिक्त पोहे भी ऑर्डर किये।

भोजन वितरण के पश्चात, मैं कॉफी वितरण की प्रतीक्षा कर ही रहा था की, विमान के चालक दल ने पेय पदार्थ के वितरण को रद्द करने का फ़ैसला किया औऱ घोषणा हुईं की मौसम ज्यादा खराब होने के कारण हम पेय पदर्थों का वितरण रद्द करने को विवश हैं, यात्रियों से अनुरोध है की अपनी सीट पर लौट जाएं औऱ पेटी बांध लें।

क़रीब 30-35 मिनटों तक हवा में ऊबड़ खाबड़ (टर्बुलेंस) रास्तों का एहसास होता रहा, औऱ इसी के साथ घोषणा हुईं की अब विमान भुबनेश्वर के अन्तरदेशीय हवाईअड्डे पर उतरने को तैयार है, औऱ क़रीब 15-16 मिनटों में हम भुबनेश्वर के विमानपत्तन पर थे। मुझे अभी भी विमान में कॉफी न मिलने का मलाल था।

हम जल्दी से उठे, अपनी सीट के ऊपर बने सामान कक्ष से अपना बैग लेकर, विमान से बाहर निकल अपने बड़े बैग के बेल्ट पर आने की प्रतीक्षा करने लगे।

Orissa's Biju Patnaik Domestic Airport

Photo of Indira Gandhi International T3 Road, New Delhi, Delhi, India by बिहारी घुमक्कड़

कुछ ही देर बाद हमे हमारा सामान एक साथ बेल्ट पर आते हुए दिखाई दिया। हमने अपना सामान उठाया, और विमानपत्तन के आगमन द्वार से होते हुए बाहर आ गए। यहां भी बारिश की बूंदें पड़ चुकि थी, और कुछ पड़ने वाली थी।

हमनें विमानपत्तन पर कार्यरत एक कर्मचारि से अंतरराष्ट्रीय टर्मिनल की ओर जाने वाले रास्ते के बारे में पूछा, और उसकी ओर प्रस्थान कर दिया।

समय था रात के 8:10 बजे का औऱ टर्मिनल पर पहुंच कर जानकारी मिली की थाईलैंड के बैंकाक जाने वाली एयर एशिया उड़ान संख्या FD 113 जिसका निर्धारित समय रात्री 12:05 बजे था के यात्रियों को 9 बजे से पहले टर्मिनल के भीतर जाने की अनुमति नहीं है। हमनें करीब 50 मिनट बाहर बने शेड के नीचे पनाह ली, औऱ प्रतीक्षा करने लगे।

ठीक 9:00 बजे विमानपत्तन के सुरक्षा कर्मियों ने हमें अंदर आने के लिए आमंत्रित किया। हम अपना पासपोर्ट, और यात्रा टिकट दिखा कर प्रवेश कर गए, भीतर जाकर जानकारी मिली के अभी बोर्डिंग पास वितरण, 9:40 बजे से शुरु किया जाएगा।

हमने सोचा क्यूँ न भोजन कर लिया जाय अभी तो बहुत समय था, तो हम पहुँचे पास ही में बने फूड कोर्ट में इसे देखकर लगा यहां कुछ नही मिलने वाला, क्योंकि ये विमानपत्तन पर होने के बावजूद भी एक सूनसान जगह थी। हमने काउन्टर पर जाके पूछा, कुछ खाने को मिलेगा??

काउंटर पर कार्यरत बंधु ने मेनू पकड़ाते हुए कहा "जी कहिए, क्या खाएंगे"?

मेरे मित्रों ने 3 वेज थाली और मैंने एक मसाला डोसा ऑर्डर किया और जाकर एक कोने वाली टेबल पर बैठ गए।

करीब 10-15 मिनट बाद हमारा खाना आ गया, हमने खाना शुरू किया, वाक़ई बहुत स्वादिष्ट व्यंजन थे।

खाना खाने के तुरंत बाद ही बोर्डिंग पास वितरण की प्रक्रिया शुरू हो गई, हम भी तुरंत जा कर लाइन में लग गए।

हमारी बारी आने पर हमने अपना पासपोर्ट, औऱ टिकट दिखाया, अपना-अपना बोर्डिंग पास लिया और अपने सामान को विमान की ओर जाते देखने लगे।

बोर्डिंग पास लेने के बाद हम सब सामने की कुर्सीयों पर बैठ गए, और बैंकाक के डॉन मेउँग विमानपत्तन पर वीजा लेने की प्रक्रिया के बारे में बात करने लगे। तभी सुजीत को याद आया की वीजा आवेदन के लिए पासपोर्ट साइज फ़ोटो जो वो लाया था वो चेकिंग बैग में रह गया है।

उसने मुझे ये बताते हुए पूछा "कोई दिक्कत तो नही", हमने कहा "ये तो बहुत बड़ी दिक्कत है, क्योंकि सामान तक तो बिना वीजा के हम पहुँच भी नही सकते, और बैंकाक विमानपत्तन पर एक फोटो का करीब 200 थाई भाट चुकाने पड़ेंगे।

अब क्या करें? सबके मन में यही प्रशन था।

तभी छोटू बोला "एयरलाइन स्टाफ को रिक्वेस्ट कर के देखें? क्या पता बैग वापस लाया जा सकता है?"?

बात तो सही थी, हमनें कहा जाओ औऱ देखो, तभी वो बोला "ये काम तू ही कर सकता है" हमने कहा ठीक है चलो, देखते हैं।

बोर्डिंग पास वितरण डेस्क पर जा कर वहां कार्यरत्त एक महिला को हमने सारी बात बताई, वो बोली "ठीक है सर्, आप अपना बोर्डिंग पास दीजिए"। सुजीत ने झट से पास निकाला और उन्हें दे दिया, उन्होंने बोर्डिंग पास से एक विशेष कोड के माध्यम से बेतार रेडियो पर संदेश प्रसारित किया और सुजीत के बैग को वापस लाने के निर्देश दिए"। फिर हमें बोली 15 मिनट बाद बैग आएगा, आप तब तक प्रतीक्षा कीजिये, हम वहाँ सुजीत और दास बाबू को छोड़कर वापस अपने सीट पर आकर बैठ गए।

कुछ देर बाद सुजीत और दास मुश्कुराते हुए अपनी फोटो हाथ में लिए आ गए।

इसके तुरंत बाद ही एयर एशिया के विमान संख्या FD112 के भुबनेश्वर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर थाईलैंड की राजधानी बैंकाक से आगमन की घोषणा हुईं, दरअसल इसी विमान को भुबनेश्वर से बैंकाक तक FD113 के रूप में वापस बैंकाक जाना था।

विमान के आगमन के साथ ही हमारी प्रवास जाँच प्रक्रिया प्रारंभ हुई, जहाँ हमारे पॉसपोर्ट पर निर्गमन का मोहर लगा दिया गया और हमें अधिकारिक रूप से प्रवास की आज्ञा दे दी गईं।

इसके ठीक बाद हमारी सुरक्षा जाँच की प्रक्रिया आरम्भ हुईं, और हम चारों अपना छोटा बैग, घड़ी, कैमरे, मोबाइल फोन, बेल्ट, पर्स आदि एक ट्रे में रख कर खाली हाथ सुरक्षा जाँच करवाने हेतु लाईन में लग गए।

सुरक्षा जाँच के करीब 30 मिनट बाद यात्रीयों को विमान की ओर द्वार संख्या 1 से प्रस्थान करने की घोषणा हुई, उसके बाद बस द्वारा हमें विमान तक ले जाया गया।

फिर हम एक बार विमान में सवार थे, जैसा कि मैं पहले बता चुका हूँ, ये एयर एशिया की उड़ान संख्या FD113 जो कि भुबनेश्वर के बीजू पटनायक अन्तराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 12:05 बजे, थाईलैंड की राजधानी बैंकाक के डॉन मेउँग हवाई अड्डे तक सुबह 4:30 बजे तक निर्धारित थी।

इस बार हमारी सीट काफी ईधर उधर थी, सुजीत और दास बाबू साथ थे, उनके पिछे वाली लाइन में छोटू था, और इन सबसे करीब 7-8 लाइन पीछे थे हम।

बोर्डिंग प्रक्रिया के तुरंत बाद, विमान का गेट बंद कर दिया गया, और सुरक्षा निर्देश जारी किया गया क्रमशः अँग्रेजी एवं थाई भाषाओं में।

अब विमान फिर से रनवे पर था, और हवा को चीरता हुआ आसमान की ओर बढ़ते हुए, अपनी मंजिल बैंकाक की ओर बढ़ चला।

विमान में हमें, जलपान के तुरंत बाद एक प्रवास पत्र दिया गया जिसे हमें ठीक ठीक भर कर वीजा आवेदन फॉर्म और अन्य कागज़ातों के साथ देना था।

पहला दिन समाप्त......

आगे आपको 10 दिनों तक थाईलैंड और कम्बोडिया के महत्वपूर्ण स्थानों पर ले चलूँगा......

Day 2

बैंगकॉक आगमन, और कंबोडिया के लिए प्रस्थान

दूसरा दिन 25 अगस्त 2019

सुबह के करीब 3 बज कर 45 मिनट हुए थे जब मुझे विमान चालक दल के एक कर्मी ने नींद से जगाया और कहा "Sir, We are about to Land in Bangkok, please straight your seat and fasten your seat belt"

मैंने उन्हें धन्यवाद कहा, और विमान के खिड़की से बाहर झांक कर देखा, अभी भी अँधेरा पसरा हुआ था, किन्तु आधुनिक लाइट के रौशनी में पूरा बैंकाक शहर जगमगा रहा था।

मैंने अपने दोस्तों से अपने सीट पर बैठे बैठे ही संपर्क किया, उन सभी के आंखों में एक अजीब सी चमक थी, और मैं इस चमक का काऱण समझ सकता था।

कुछ ही देर बाद हमारे विमान चालक महोदय ने विमान के कर्मी दल को निर्देश दिया "Cabin Crew, prepare the cabin for landing".

जैसे जैसे समय बीत रहा था, विमान पृथ्वी के औऱ निकट जा रहा था, औऱ फिर करीब 4 बज कर 02 मिनट पर विमान थाइलैंड की राजधानी बैंगकॉक के डॉन मुइंग अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बने हवाई पट्टी पर सरपट दौडे जा रहा था।

विमान के भीतर यात्रियों ने अपने कुर्सी की पेटी खोल दिए थे, और अपने अपने मोबाइल को ऑन कर रहे थे।

थोड़ी देर में विमान अपने निर्धारित पड़ाव पर रुक गया, विमान से यात्रियों के उतरने के लिए सीढ़ी लगाई गई, दरवाजे खोले गए, हम चारों भी अपने सीट से उठे ऊपर सामान कक्ष से अपना बैग पैक लिया औऱ विमान से नीचे उतर गए, विमान के ठीक सामने यात्रीयों को हवाई अड्डे के टर्मिनल तक ले जाने के लिए एक बस प्रतीक्षा कर रही थीं।

हम भी बस में सवार हो कर टर्मिनल की ओर1 चल पड़े।

Air Asia's Shuttle to Bangkok's Don Mueang Airport Terminal

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

टर्मिनल के द्वार पर बस रुकी, हम सभी अन्य यात्रीयों के साथ बस से उतरे, औऱ सीधे सीधे वीजा लेने हेतु वीजा आवेदन काउंटर की ओर दौड़े, किन्तु उस से पहले हमें वीजा आवेदन पत्र भी हासिल करना था।

At Don Mueang International Airport, Bangkok

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

वीजा आवेदन काउंटर के ठीक सामने एक कोने में प्लास्टिक के टोकरियों में बहुत सारे वीजा आवेदन पत्र रखे हुए थे, हमने चार आवेदन पत्र लिया, और अपना अपना पासपोर्ट फ़ोटो निकाल कर आवेदन पत्र भरने लगे, बहुत ही आसान पत्र होता है, बाद ध्यान रखें की आप सभी जानकारियां ठीक ठीक दें।

हमने अपना वीजा आवेदन पत्र साफ़ साफ़ भर कर अपनी फोटो चिपकाई, और अपने सभी कागजातों को दोबारा जाँच कर वीजा आवेदन के लिए बनी पंक्ति में खड़े होकर अपनी बारी की प्रतीक्षा करने लगे।

हमारी बारी आते ही हमने अपने सभी कागजातों के साथ अपना पासपोर्ट कागजात जाँच अधिकारी को सौंपी, उन्होंने सभी कागजातों की गहनता से जाँच पड़ताल करने के बाद हमे एक अतिरिक्त रसीद के साथ हमारे कागजात हमें सौंप दिया और उनके पिछे बने प्रतीक्षालय में प्रतीक्षा करनें को कहा, हमने उनका धन्यवाद किया और काउंटर के पीछे बने प्रतीक्षालय में बैठ गए।

क़रीब 10 से 15 मिनट प्रतीक्षा के उपरांत हमारी बारी आई, हम सब फिर उसी काउंटर पर गए, अपने सभी कागजातों समेत अपना पासपोर्ट दिया, उन्होनें हमारे सभी कागजात हमें लौटा दिए और हमारे पासपोर्ट पर वीजा आगमन पर का मोहर लगा दिया।

हम अब आज़ाद थे, और अब हम प्रवास जाँच काउंटर पर गए, अपना पासपोर्ट दिया, उन्होंने हमारे हाथों का निशान, और फ़ोटो खींचा और हमारे पासपोर्ट पर आगमन का मोहर लगा दिया।

Free Visa On Arrival- Thailand

Photo of Don Mueang International Airport (DMK), Vibhavadi Rangsit Road, Sanambin, Don Mueang, Bangkok, Thailand by बिहारी घुमक्कड़

हम बाहर निकल कर आये, जहाँ हमारा सामान हमारी प्रतिक्षा कर रहा था।

हमने लगभग सभी सामान वाले बेल्ट्स पर देखा, और सबसे अंत वाले बेल्ट संख्या 1 पर हमारा सामान किसी सज्जन ने उतार कर रख दिया था।

हमने अपना सामान लिया, और बाहर निकलने लगे की तभी मुझे Starbacks Coffee ke बगल में Seven Eleven (7/11) दिखाई दिया।

Seven Eleven सिंगापुर, मलेशिया, और थाईलैंड में एक अत्यंत प्रचलित छोटा किराने की दुकान है, जहाँ आपको लगभग सभी जरूरत की चीज़ें मिल जाएगी, साथ ही हल्का फुल्का भोजन एवं चाय कॉफ़ी भी मिल जाती है।

मैंने दोस्तों को पूछा अँग्रेजी नाश्ता करोगे?

सबने हाँ कहा, और मैं Seven Eleven में घुस गया।

वहाँ मैंने 4 coffee, 3 जूस, के साथ कुछ Croisant और सिनमन raisin लिया औऱ सबको गर्म करने के लिए वहाँ कर्यरत एक सुंदरी को दे दिया।

गरमा गरम नाश्ते के साथ हमनें आज का पूरा दिन कैसे व्यतीत करना है के विषय में चर्चा करने लगे, क्योंकि हमें रात 12:30 बजे कंबोडिया के Seim Reap के लिए बस भी पकड़नी थी, अतः हमने आज रात और दिन के लिए बैंगकॉक शहर में हॉटेल का आरक्षण नही किया था।

हमारी बस Siem Reap के लिए 12:30 पर Khao San रोड़ से जाने वाली थी अतः विचार विमर्श के बाद निर्णय हुआ की हम सब बहुत थक गए हैं, और विश्राम आवश्यक हो गया है, तो Khao San रोड़ के निकट कोई हॉटेल/हॉस्टल ले लिया जाय।

बस फ़िर क्या था, निर्णय सर्वसहमति से था तो हम सब बाहर निकले Grab नामक app से Khao San रोड़ के लिए टैक्सी बुक किया, करीब 5 मिनट बाद टैक्सी आ गई, हम सब टैक्सी में बैठे औऱ चल दिए Khao San रोड़ की तरफ।

गाड़ी चलाते हुए, चालक महोदय ने हमसे पूछा Khao San रोड़ पर हमें कहाँ जाना है? तो मैंने कहा हमे एक साफ सुथरे हॉस्टल की तलाश है।

आप यदि कोई जानते हो तो ले चलिए, बस उन्होंने कहा ठीक है, और वे ले आये हमें Khao San रोड़ से करीब 800 मीटर की दूरी पर इस्थित Vivit Hostel.

A Buddhist Temple next to Vivit Hostel, Bangkok

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

मैं गाड़ी से उतरा उन्हें 120 थाई भाट दिया, और उन्हें धन्यवाद किया।

हॉस्टल के स्वागत काउंटर पर जाकर मैंने उनसे एक दिन के लिए 4 लोगों के लिए डोम्स की उपलब्धता के विषय में पूछा, किन्तु वहाँ बैठी सुंदरी ने अफसोस व्यक्त करते हुए कहा "Sorry Not Available".

मैं बाहर आया, दोस्तों से कहा यहाँ तो कुछ नही है, आगे चलकर देखते हैं।

करीब 300 मीटर Khao San रोड़ के तरफ चलते हुए, रास्ते में हमें d Bangkok Hostel दिखाई दिया, हम उसकी तरफ बढ़े, अंदर जा कर स्वागत काउंटर पर एक अत्यंत भयंकर न महिला न पुरूष से दिखने वाले मनुष्य से सामना हुआ।

d" Hostel Bangkok (We Stayed here on 25th August 2019)

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

हमने हमारी जरूरत बताई, उस भयंकर मनुष्य ने, बड़ा अजीब सा चेहरा बनाते हुए कहा 1500 थाई भात।

मुझे लगा, यहाँ पैसों से बात नहीं बनेंगी। फिर थोड़ा सोच कर मैंने कहा "No... too much, we can pay 800 Bhat"?

उन्होंने कहा.... "No... too less, 1000 Bhat at least"

दास बाबू तपाक से बोले "छोड़ना ठाकुर, दे दे, ठीक है।

हमने भी कहा चलो फिर..... और 1000 थाई भाट भुगतान किया, फिर उस महा मानव ने कहा 200 "Bhat more as Security, as returnable" मैंने उन्हें 200 भाट और दिया और उन्होंने हमें एक एक तौलिया जो की बेहद साफ़ सुथरा था हमें दिया और कहा, "If Towel missing you have to pay 200 Bhat"

हमने कहा ठीक है। और अपने कमरे की ओर चल पड़े, करीब चौथे मंजिल तक सीढ़ियों से चढ़कर हमें एक कमरा दिया गया जिसमें 4 साफ़ सुथरे डोम्स बेड थे, AC चल रहा था, हमारा सामुहिक बाथरूम दिखाया गया औऱ वो महामानव हमें वंही छोड़ चल दिये।

इतने में अखिलेश सिंह अपने हिसाब से एक बिस्तर पर हमलावरों की भांति लपक पड़ा, मैंने सोचा ये क्या? ये बिस्तर तो मुझे चाहिए था, मैंने कहा "भाई सफ़र से आते ही बिस्तर पर बिना नहाये धोये नही चढ़ना चाहिए" लेकिन वो कहाँ सुनने वाला था, वो मुझे बहुत अच्छी तरह जानता है, उसे पता है मेरी नज़र इसी बिस्तर पर है, और बोला "भांड में गया तेरा साफ सुथरा बेक्टेरिया रहित वाला आईडिया, मैं न उठता अब" और सोने का अभिनय करने लगा।

अब बचा 3 डोम्स बिस्तर नीचे वाले पर दास बाबू ने कब्जा कर लिया, और उसके ठीक ऊपर सुजीत मिश्रा जी ने। हमारे पास अखिलेश के बिस्तर के ऊपर वाले डोम्स बिस्तर के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं था। तो हमने टूटे मन से वही स्वीकार किया।

थके हारे, बिना नहाये धोये हम चारों सो गए।

समय था सुबह के 8:50 मिनट।

मेरे मोबाइल फोन का आलार्म जोर ज़ोर से बाज रहा था, समय क़रीब 11:20 मिनट था।

मैं उठा, और सब को उठाने लगा, तभी अखिलेश ने पूछा "क्या टाइम हो रहा है"? मैंने कहा "12 बज गए उठ, सोने नही आये यहाँ हम"!

ये कहते हुए मैंने बैग से अपना शेविंग किट निकाला और बाथरूम में चला गया, मैं फ़्रेश होकर शविंग कर ही रह था की, सुजीत अंदर आया और शेव करने लगा, उसके पीछे पीछे दास बाबू भी आये।

मैं अब नहा चुका था, तो अखिलेश अंदर आया और मुझे बोला "अभी 12 नही बजे हैं" मैंने उसकी तरफ़ तिरछी नज़रों से देखा और कहा "तो जा कर सो जा, 12 बजे उठा दूँगा"।

हम सब नहा धोकर क़रीब 12:30 बजे अपने हॉस्टल के रूम को लॉक कर के बाहर निकल, अब भुख लग चुकी थी, पैदल चलने का बिल्कुल भी मन नही था, मेरे दोस्तों का.... मैं तो पैदल ही घूमता हूँ।

On the Road towards Khao San Road from d" Hostel Bangkok

Photo of d HOSTEL BANGKOK, Bunsiri Road, San Chao Pho Sua, Phra Nakhon, Bangkok, Thailand by बिहारी घुमक्कड़

दास बाबू ने अपने फोन पर गूगल के नक्शे पर Khao San रोड़ लगाया, और गूगल के दिशा निर्देश अनुसार चलने लगे।

लगभग 10 मिनट चलने के बाद हम पहुँचे Khao San रोड़।

Khao San रोड़ अंतरराष्ट्रीय स्तर के पार्टी के लिए मशहूर है, यहाँ शाम होते ही कब सुबह हो जाती है पता ही नही चलता।

Khao San Road at Night

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

पार्टी तो हमें भी करनी थी, लेकिन आज की रात नही, जब हम वापस कंबोडिया से लौटेंगे तब होगा धमाल।

फिलहाल हमारा मकसद एक भरतीय रेस्टोरेंट ढूंढ़ना था और पेट पूजा करना था।

थोड़ा आगे गए और Khao San रोड़ आ कर खत्म हो गया एक रोड़ पर जिसका नाम था Soi Ram Butri, इसी रोड़ पर आगे चलकर हमें दिखा "Rainbow" जहाँ लिखा था "Thai and Indian Food" बस हमारी तलाश ख़त्म, हम अंदर गए, अंदर हमारा अभिवादन एक भरतीय जैसी दिखने वाली सुंदरी ने किया, हमने पूछा "खाना मिलेगा"? वे बोली "आइये बैठिए, क्या खाएंगे आप लोग"? और कहते हुए वहाँ की मेनू हमें थमा दिया।

An Indian Restaurant on Khao San Road

Photo of Khao San Road, Charlotte Street, Toronto, ON, Canada by बिहारी घुमक्कड़

मेनू देख कर हमारी खुशी का ठिकाना न रहा, और हमने बिना समय गवाए हम सब के लिए खाने का आर्डर दे दिया।

फिर मैंने उस सुंदरी से पूछा "भारत में कहाँ से हैं आप"?

वे बोली, "जी, क्षमा कीजिए मैं भारत नही वर्मा (म्यामांर) से हूँ, लेकिन लगती भरतीय हूँ"।

उन्होंने हमें बताया की यहाँ लगभग 1 लाख लोग वर्मा से हैं, और सभी व्यवसायी हैं।

उन्होंने हमें ये भी बताया की वर्मा में भारतीय कपड़े, और हिंदी सिनेमा बहुत प्रचलित और सराही जाती है।

हमने उन्हें बताया की भोजन के बाद हम लोग आस पास ही घूमना चाहते हैं, कहाँ जाएँ और क्या देखें?

उन्होंने हमें कहा आस पास रॉयल प्लेस, थाईलैंड की राष्ट्रीय संग्रहालय और राष्ट्रीय थिएटर है, पास में ही सिक्कों का बहुत बड़ा संग्रहालय भी है।

इतने में हमारा भोजन हमारे सामने था, हमने बड़े चाव से भोजन किया, पैसे भुगतान करते हुए हमने कहा "खाना बहुत स्वादिष्ट था, और हम रात को भी यहीं भोजन करेंगें।

उन्होंने कहा "आपका स्वागत है" 12 बजे से पहले कभी भी आइये, आपको टेबल जरूर मिलेगी।

फिर हम उन्हें धन्यवाद करके निकल आये, और रॉयल प्लेस की तरफ चलने लगे, करीब 100 मीटर ही चले होंगे तो हमने Coin Mesuim देखा, थोड़ा और आगे गए तो एक चौराहे पर एक तरफ रॉयल प्लेस होटल के सामबे एक संगमरमर के स्तंभ पर समाजवादी पार्टी का चुनाव चिन्ह बहुत ही आकर्षक लग रहा था।

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

हमने वहीं फोटोग्राफी करनी शुरू कर दी, वहीं सड़क पर चारों तरफ वहाँ के राजा की बड़ी बड़ी तस्वीर लगी थी।

Golden Jubilee Monument was erected in 1996 in the Honor of Thai King Rama IX

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

मौसम इतना सुहाना था, की हमें थकान का एहसास ही नही हो रहा था।

हम थोड़ा और आगे गए तो हमने देखा थाईलैंड का "सर्वोच्च न्यायालय" जो की आकर्षक और विशाल भवन था।

The Supreme Court of Thailand

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

हम वहीं फोटोग्राफी कर ही रहे थे की अचानक जोर जोर से बड़ी बड़ी बूंदों ने हमे भिगोना शुरू कर दिया, ये क्या यहाँ जबरदस्त बरसात की शुरुआत हो चुकी थी।

हमने दौड़ कर न्यायालय के सामने बने दुकानों के बरामदे में शरण ली और भीगने से बच गए।

The Supreme Court of Thailand front view

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

करीब 3 बज रहा था, और हम वहीं बरसात का आंनद भी ले रहे थे, लेकिन हमें जल्द से जल्द हॉस्टल पहुँच कर थोड़ा और विश्राम करना था।

क्योंकि रात 12:30 बजे Khao San Road के Travel Mart से हमें कंबोडिया के Siem Reap के लिए बस पकड़नी थी।

लगभग आधे घण्टे बाद बारिश बंद हुई और हम अपने हॉस्टल d Bangkok Hostel की ओर बढ़े।

हॉस्टल पहुँच कर हमने आपस में बात चित किया कि रात 9:00 बजे से पहले हमें हॉस्टल छोड़कर वहीं Rainbow Restaurent में भोजन करना है, अपना सामान वहीं रख कर थोड़ा घूमना है, और बस में बैठ जाना है।

हम सब फिर अपने-अपने बिस्तर पर आकर फैल गए।

रात लगभग 8:00 बजे मेरी नींद फिर से, मेरे मोबाइल पर बज रहे अलार्म की वजह से टूटी। मैंने मोबाइल उठाया, टाइम देखा और फिर सबको उठाने लगा, सब लगभग आलार्म से ही उठ गए थे।

उठने के बाद मुझे एहसास हुआ की बारिश में भिगने से और बदलते मौसम की वजह से मेरा गला भारी हो रहा है, और मुझे सिर में दर्द के साथ-साथ खाँसी भी हो रही थी।

हमने झटपट अपना सामान पैक किया, और कमरे से बाहर स्वागत काउन्टर पर उसी महामानव के समीप खड़े हो गए, हमने अपने अपने तौलिये और कमरे की चावी वापस दिया, अपना 200 थाई भाट वापस लिया और निकल पड़े "Rainbow Restaurent" की ओर।

रास्ते में वही सब कुछ था जिसका दीदार हम दिन में कर चुके थे, लेकिन सामने फिर मुझे Seven Eleven दिखाई दिया, मैंने दोस्तों से पूछा कोई कॉफी पियेगा? बस दास बाबू और अखिलेश ने हाँ कहा, सुजीत मिश्रा बोले "भाई जूस मिलेगा यहाँ"?

हम सब अंदर गए, मैंने 3 कॉफी बनाई, और 2 पानी की बोतलें, और रास्ते के लिए कुछ स्नैक्स भी ले लिया।

और अब हम बढ चले "Rainbow Restaurant" की तरफ, अभी भी हल्की बूंदाबांदी हो रही थी, हम भी थोड़ा तेज चल रहे थे, और अपनी मंज़िल पर आ कर ही रुके।

हमने अपना सामान रखा, खाने का ऑर्डर दिया और कंबोडिया जाने वाली बस स्टैंड के बारे में पूछताछ करने लगे।

भोजन के आने तक वहाँ कार्यरत महाशय ने बाताया रेस्टोरेंट के पिछे वाली गली में ही ट्रैवेल मार्ट है।

फिर हमारा भोजन हाजिर था, हमने आराम से भोजन किया, पैसे दिए और सामान वहीं छोड़कर चल पड़े ट्रेवल मार्ट का बस पड़ाव ढूंढ़ने, रास्ते में हमने देखा Khao San रोड़ पर जबरदस्त उत्साह से अनेकों देश के घुमक्कड़ बारिश में भी मस्त पार्टी कर रहे थे, चारों ओर तीव्र ध्वनि में वेस्टर्न गाने पर हज़ारों नौजवान थिरक रहे थे, मेरे साथ दास बाबू थे, वो बोले "भाई क्या है ये"? मैंने कहा "यही है नाईट लाइफ ऑफ बैंगकॉक"! एन्जॉय कर वापस आकर दोगुना मज़े करेंगें, फिलहाल अभी बस ढूंढ़।

हम पूरा थक हार कर वापस आ गए लेकिन कंही ट्रेवल मार्ट का कार्यालय नही मिला।

यहाँ सुजीत और अखिलेश हमारी प्रतीक्षा कर रहे थे, अब निर्णय हुआ कि गुगल देवता से मदद ली जाय और वो जहाँ ले जाएं चलो।

फिर दास बाबू ने अपने मोबाइल पर ट्रेवल मार्ट का लोकेशन डाल कर चल दिये गूगल देवता के दिशा निर्देश पर।

करीब 30 मिनट पैदल चलने के बाद भी कोई सफलता प्राप्त नही हुई और अब हमें डर लगने लगा, क्या करें?

तभी अखिलेश बोला "भाई टिकट पर अंकित बस सर्विस के फोन न पर फोन करते हैं"। आइडिया अच्छा था, तो तुरंत फ़ोन लगाया गया, लेकिन फिर निराशा ये फ़ोन न कंबोडिया का था, और उस तरफ से कोई फोन नही उठा रहा था।

अब क्या करें?? फिर हम थक हार कर वहीं Rainbow रेस्टॉरेंट आ गए, हमने और थोड़ा पूछताछ किया, तभी वहां एक सज्जन जो की इस रात्री बस से कंबोडिया जा चुके थे ने हमें कहा, आप परेशान न हों, क़रीब 12:15 बजे बस के कर्मचारियों का दल आपको ढूंढ़ना शुरु करेंगें और फिर 12:30 तक आपको आराम से बस में बिठाएंगे।

आप लोग Khao San रोड पर पुलिस स्टेशन के सामने खड़े रहिये बस के कर्मचारि खुद आयेंगे।

In Front of Khao San Road Police Station

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

हमने उनका धन्यवाद किया, और बढ़ गए पुलिस स्टेशन की ओर, वहाँ गए तो देखा 2 फ़्रांसिसी सुंदरियां भी उसी बस की प्रतिक्षा कर रही थीं, मैंने पुख्ता करने हेतु उनमें से एक से पूछा "Hey Girls, are we waiting for bus to Some Reap"?

दोनों ने कहा "ya, you too"? मैंने कहा, "ya, We were told to wait here".

फिर मुझे लगा अब हम सही जगह पर है, और बस और उसके कर्मचारियों का प्रतीक्षा करने लगे।

Khao San रोड़ पर चल रही पार्टी ने सुजीत और अखिलेश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया, उन्होंने पूछा "क्या है यहाँ"? मैंने उन्हें छेड़ते हुए कहा, "मैं और दास बाबू देखकर आ चूके हैं, अब चाहो तो तुम लोग भी एक चक्कर लगा आओ।

दोनों ने तुरंत अपना अपना बैग हमें थमाया और घुस गए रंगीन गली में।

Party in the Rain, Khao San Road, Bangkok

Photo of Khao Kho Police Station, 5 Khao Kho, Khao Kho District, Phetchabun, Thailand by बिहारी घुमक्कड़

लगभग 15-20 मिनट बाद दोनों चमकती हुई आँखों के साथ वापस आये, और बोले, "मस्त है बे" यहाँ पार्टी करेंगे पक्का।

थोड़ी देर बाद एक व्यक्ति अपनी scooty पर कंबोडिया जाने वाले यात्रियों को ढूंढ़ता वहाँ पहुंच गया, और सबके टिकट की जांच करने लगा, टिकट की जांच के बाद बोला "Follow me".

सब उसके पीछे पीछे....

कॉइन संग्रहालय के बिल्कुल सामने एक गोल चक्कर जिसके हमने लगभग 3-4 चक्कर लगा चुके थे, वहीं हमारी Siem Reap जाने वाली बस प्रतीक्षा कर रही थी।

Bus to Siem Reap, Cambodia

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

बस कर्मी दल के एक बंधु ने हमारा सामान बस की डिग्गी में रखा, और बोला "Go, take your Seat"

Boys are Ready to Board

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

लेकिन जब हम अंदर आये तो ये क्या दो गोरे पहले से ही हमारी सीट पर कब्जा जमाए बैठे थे।

वैसे गोरे प्रोसेस ओरिएंटेड होते हैं, तो मैं समझ गया कुछ तो गड़बड़ है, फिर हमने बस चालक दल से सम्पर्क किया, तो पता चला की उनको भी किसी महान व्यक्ति ने वही सीट दे दी है जो हमने ऑनलाइन बुक किया था, अतः अब उन्हें उठाना हमें भी ठीक नही लग रहा था, सो हमने किया एडजस्ट, और उनके पिछे की 2 सीट्स हम चारों ने घेर लिया, इस बार मैंने विंडो सीट पर कब्जा किया, मेरे बगल में बैठे सुजीत मिश्रा, और एक विंडो सीट पर कब्जा किया अखिलेश ने, और उनके बगल में बैठे दास बाबू।

थोड़ी देर कुछ और यात्रियों के प्रतीक्षा करने के बाद लगभग 1:30 बजे रात को जो की निर्धारित समय से एक घंटा देरी से बस चालक ने बस के दरवाज़े बंद करते हुए बस को स्टार्ट किया, बस ठीक ठाक थी, बस में ही बाथरूम था।

हमें रात को ओढ़ने के लिए एक साफ कंबल, एक पानी की बोतल, और एक पैकेट बंद केक दिया गया।

Blanket, Water and Cake

Photo of Soi Rambuttri, Talat Yot, Phra Nakhon, Bangkok, Thailand by बिहारी घुमक्कड़

हम सब ने केक को स्वीट डिश की तरह ग्रहण किया, पानी पिया, और सो गए।

बस हवा की रफ़्तार से अपनी मंज़िल की ओर बढ़ने लगी थी।

न जाने थके हारे हमें कब निंद आ गईं......

आगे के अंक में आपको अत्यंत प्राचीन एवं एक अनोखे शहर Siem Reap की सैर करवाऊंगा और ले चलूँगा Siem Reap के अनोखे पानी पर तैरते गांव और विश्व के सबसे पुराने और बड़े मंदिर अंगकोर वाट के दर्शन करवाने...

Day 3

कंबोडिया आगमन, और वीजा आवेदन प्रक्रिया।

तीसरा दिन 26 अगस्त 2019

सुबह करीब 4:50 बजे जब मेरी नींद खुली तो, मैंने देखा की बस रुकी हुई है, मैं बस से नीचे उतरा मेरे दोस्त वहीं नीचे चहल कदमी कर रहे थे, आस पास देखा, तो लगभग लोग जाग गए थे, सड़क पर चहल पहल थी, हमारे बस के आगे एक ठेले पर बहुत ज्यादा मात्रा में मछलियों से भरा प्लास्टिक का बैग था, उसके आगे फलों से भरा ठेला, और फिर हरी सब्जियों का ठेला, सब के सब बॉर्डर खुलने की प्रतीक्षा कर रहे थे।

अभी हम थे थाईलैंड और कंबोडिया के थाईलैंड बोर्डर शहर आरण्यप्राथत में।

Star Plaza, Aranyaprathet, Thailand Cambodia Boarder

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

आरण्यप्राथत भी थाईलैंड का मशहूर शहर और मुख्य पर्यटक स्थलों में से एक है।

यहाँ आपको थाई सभ्यता-संस्कृति और प्राचीन शिल्प कला देखने को मिलती है, साथ ही प्रकृति ने आरण्यप्राथत को कई रत्नों से भी नवाजा है।

कुल मिलाकर आरण्यप्राथत आपको बहुत अच्छा लगेगा।

हमें अभी यहाँ से आगे जाने की अनुमति नहीं थी, क्योंकि बस के चालक दल प्रवास जाँच प्रक्रिया में जुटे हुए थे।

फिर एक व्यक्ति जो बस चालक दल के गाइड थे आये, हम सभी यात्रियों का बेहद पेशेवर तरीके से अभिवादन किया और हमें प्रवास जाँच प्रक्रिया से अवगत कराने लगे।

उन्होंने हमें बताया की सभी आगंतुक जिनके पास e-visa नहीं है, उन्हें आगमन के पश्चात वीजा देने की सुविधा उपलब्ध है जिसका शुल्क 30 अमरिकी डॉलर है, किंतु यदि यात्री स्वम आवेदन करने के लिए लाईन में लगतें हैं तो, यदि यात्री चाहते हैं की बस चालक दल इसमें उनकी सहायता करें तो शुल्क 40 अमरिकी डॉलर होगा। यदि यात्री स्वयं आवेदन करते हैं, तो समय ज्यादा लगेगा और बस को बिना मतलब ऐसे यात्रियों की प्रतीक्षा करनी पड़ती है।

अतः समय और जटिल प्रवास जाँच प्रक्रिया से बचना चाहते हैं तो 10 अमरिकी डॉलर अधिक दे कर, आराम से बस में बैठे रहें, उन्हें वीजा बस में ही दे दिया जाएगा।

ये सब मेरे लिए थोड़ा अटपटा सा था, लेकिन मैंने देखा की लगभग सभी यात्रियों ने अपने अपने पासपोर्ट के साथ, एक पासपोर्ट साइज फ़ोटो और 40 अमेरिकी डॉलर उस गाइड को देने लगे।

तो हम भी इस भीड़ का हिस्सा बनते हुए, हम चारों ने भी अपना अपना पासपोर्ट, एक पासपोर्ट साइज फ़ोटो और 160 अमरिकी डॉलर उन महाशय को दे दिये।

वो महाशय ये सब लेकर चले गए, और क़रीब 30 मिनट बाद लौटे, फिर हमारा पासपोर्ट हमें देते हुए बोले "Ok Everyone, come with me, we are going for Thai Immigration first"

सभी यात्री इन महाशय के पीछे पीछे चल दिये, करीब 200 मीटर पैदल चलने के बाद हम सभी प्रवास जांच कक्ष में दाखिल हुए, यहाँ किसी विमानपत्तन की ही भांति प्रवास जाँच के लिए 5-6 काउंटर बने थे, और सभी काउंटर खुले और कर्यरत थे।

सभी लाइन में अलग अलग काउंटर पर अपनी बारी की प्रतीक्षा में लग गए, और करीब 5 मिनट में ही प्रक्रिया समाप्त हो गई, और बस के सभी यात्री प्रवास जाँच कक्ष से बाहर निकल कर 100 मीटर पैदल चले और अब सब के सब कंबोडिया में थे।

Korang Poipet, Cambodia Thailand Boarder

Photo of Aranyaprathet Boundary Post, Aranyaprathet, Aranyaprathet District, Sa Kaeo, Thailand by बिहारी घुमक्कड़

कंबोडिया के इस बॉर्डर का नाम कोरंग पोइ-पेट है, और पोइ-पेट कंबोडिया का तीसरा सबसे बड़ा शहर है।

वैसे तो इस शहर को थाईलैंड से सटे होने का जबरदस्त फ़ायदा है, और आप इसे आसानी से महसूस कर सकते हैं, हालाँकि इसका अभी पुर्णतः शहरीकरण नही हो पाया है, लेकिन आप देखेंगे की शहर तरक्की करने में दिन रात जुटा हुआ है।

जैसे ही हम थोड़ा आगे कंबोडिया में प्रवास जाँच कक्ष की ओर बढ़ रहे थे हमने एक विशालकाय इमारती पुल देखा, और इसी पुल के नीचे हमारी बस भी खड़ी थी।

Immigration Check Point, Poi-pet Cambodia

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

ये विशाल पुल सड़क के दोनों ओर बने मॉल को आपस में जोड़ते हैं।

हमें नित्यक्रियाओं के लिए एक मॉल में ले जाया गया, इसी मॉल के ऊपर हॉटेल, कैसीनो और सिनेमाघर भी था।

सुबह के 7 बजकर 10 मिनट का समय था, नित्यक्रिया के बाद, अब मुझे कॉफी और नाश्ते की तलब लग रही थी।

मैंने गाईड से पूछा, यदि हमें जल्द वीजा मिल जाए तो मैं एक कप कॉफी पीना चाहूँगा, उन महाशय ने कहा, चलिए मैं आपको कॉफी शॉप ले चलता हूँ।

हम चारों उन महाशय के पीछे पीछे चल दिये, करीब 5 मिनट पैदल चलने के बाद हम पहुँचे थाईलैंड इस्थित कॉफी हाउस #ChaoDoiCoffee.

ये बॉर्डर से 200 मिटर दूर एक छोटा कॉफ़ी हाउस था, यहाँ एक महिला कार्यरत थी, उन्होंने पेशेवर तरीक़े से हमारा अभिवादन किया, हमनें भी उन्हें अंग्रेजी में "शुभप्रभात" कहा और हम सबकी सहमति से 4 कप कॉफी, और एक जुस कैन सुजीत के लिए खरीदा।

जबतक उस महिला ने हमारी कॉफी बनाई, हमारे गाइड महाशय को बस चालक महोदय का फ़ोन आ गया, वे कंबोडिया की ज़ुबान खैमर में बातचीत कर रहे थे।

फोन काटने के बाद गाईड महोदय ने कहा, "आप सबके वीजा आ गए हैं, और अब बस चलने को तैयार है, आपकी प्रतीक्षा हो रही है, जल्दी चलिए"

हमनें अपनी अपनी कॉफी ली, और बस की ओर चल दिए।

बस में प्रवेश द्वार पर ही हमें हमारे पासपोर्ट दे दिए गए, हमने अपना पासपोर्ट जाँच किया, पासपोर्ट में एक पन्ने पर स्टिकर वीजा, और दूसरे पर कंबोडिया में आगमन का मुहर लगा हुआ था।

Cambodia Visa On Arrival

Photo of Cambodia-Thai Border, Krong Poi Pet, Cambodia by बिहारी घुमक्कड़

हम सब अपने अपने सीट पर बैठ गए, बस चल पड़ी अपने आख़री पड़ाव विश्व के सबसे बड़े मंदिर "Angkor Wat" के शहर Siem Reap की ओर, समय हुआ था 8 बज कर 05 मिनट और यहाँ से अभी 4 घंटे का सफर अभी भी बाँकी था।

बस के चलते ही गाईड महाश्य ने अँग्रेजी में सभी यात्रियों का आधिकारिक रूप से हमें कंबोडिया आगमन पर धन्यवाद दिया, हम सब की यात्रा मंगलमय हो और पुनः आगमन की कामना करते हुए हमसे अलविदा कह बस रुकवा कर उत्तर गए।

एक बात जो मुझे अच्छी लगी: कंबोडिया के लोग थाई लोगों की अपेक्षा अधिक विश्वशनीय, सहज, मित्रवत एवं व्यवहारिक लगे।

बस आगे अपने रफ्तार से बड़े बड़े लह लहाते खेतोँ के बीच बने समान्य सड़क पर सरपट दौड़े जा रही थी।

एक बार देखने में तो ऐसा लगा जैसे मैं अपने पैतृक निवास बिहार या उतर प्रदेश आ गया हूँ।

वैसे ही खेत, घरों के सामने आम, अमरूद, अनार, और केले के पेड़ पौधे, घरों की बनावट, सड़कों के किनारे क्यारियों में पानी, और सिंगल लाईन रेल पथ आपको हिंदुस्तान के किसी राज्य जैसा ही लगेगा।

इन सभी नयनाभिराम दृश्यों को देखते देखते न जानें मुझे कब नींद आ गई और जब आँख खुली तो देखा, हम अपनी मंज़िल Siem Reap पहुँच गए थे।

In Front Of Virak Buntham Bus Service Office

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

Siem Reap कंबोडिया का दूसरा सबसे प्रसिद्ध एवं विश्व के सबसे बड़े हिन्दू मंदिर (लगभग 402 एकड़ भूमि पर बना हुआ है) के लिए जाना जाता है। इसका निर्माण राजा सूर्यवर्मन द्वितीय ने 12वीं शताब्दी में आरंभ करवाया था, और इसका निर्माण कार्य दो अतिरिक्त मंदिर अंगकोर थोम और बायोन मंदिर निर्माण के साथ राजा जयवर्मन सप्तम ने 12वीं शताब्दी के अंत में करवाया था।

हमारी बस अपने निर्धारित एवं बस संचालन कार्यालय विरक बुंथम (Virak Buntham) के सामने जा कर रुक गई। समय हुआ था 12 बजकर 30 मिनट।

In Front Of Virak Buntham Bus Service Office

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

सभी यात्री बस से उतरते उस से पहले ही बहुत सारे टुक टुक (रिक्शा) चालकों ने यात्रियों को मुफ़्त में हॉटेल तक पहुंचाने की पेशकश कर दिया।

क्योंकि मैं दिल्ली से हूँ, तो मूझे मुफ्त के चीज़ों की असली क़ीमत, हमारी मौजूदा आम आदमी पार्टी के सरकार की वजह से अच्छी तरह पता थी, फिर भी कोई किसी को बिना बात के मुफ्त सेवायें क्यों दे रहा था?

मुझे थोड़ा गड़बड़ लगा, इतने में मेरे दोस्त दास बाबू ने एक टुक टुक चालक को पूछा, "Why are you Driving us for Free to Hotel"?

चालक महोदय ने टुटी फुटि अँग्रेजी में कहा "क्योंकि आप मेरे साथ कल अंगकोर वाट दर्शन करने के लिए जाने को भी बाध्य होंगे"...!

हमने उनका धन्यवाद किया और कहा, हमारा हॉटेल मात्र 600 मीटर दूरी पर है, हम पैदल ही जाएंगे, और गूगल बाबा के दिशा निर्देश अनुसार अपने हॉस्टल "Funky Flashpacker" की ओऱ चल पड़े।

गुगल बाबा के दिशा निर्देशानुसार क़रीब 10 मिनट पैदल चलकर हम पहुँचे अपनी मंज़िल Funkey Flashpacker हॉस्टल।

हॉस्टल के स्वागत कक्ष में कुछ गोरे लड़के लड़कियां यहाँ कार्यकारी घुमक्कड़ हैं जो इस हॉस्टल की देख रेख और प्रबंधन का कार्य करतें हैं और बदले में इन्हें मिलता है मुफ़्त रहना खाना, जी हां, एक घुमक्कड़ को और क्या चाहिए??

इनमें से एक ने हमारा अभिवादन किया, हमारी बुकिंग टिकट देखी, और पुछा, "Would you like to have some Water"?

हमनें कहा "yes, please".

हमें सब को क़रीब 200 मिलि की 4 पानी की बोतलें दी गई, और फिर हमें बताया "Sir, the room isn't ready yet, and the check-in time is 1400 hours, you guys have to wait"

अभी समय हुआ था 12:50 यानी हमें तकरीबन 1 घंटा 10 मिनट और प्रतीक्षा करना था, हमें भूख भी लग गई थी, तो मैंने उनसे पूछा, "Can we Keep our Luggage here untill we get our room"?

उन महाशय ने कहा, "Sure, in our clock room." औऱ उसके बाद हमसे हमारे सामान उन्होंने ले कर क्लॉक रूम में रख कर हमें एक टोकन दे दिया, और कहा, "Show this when you will come back".

हमनें टोकन लिया और हॉस्टल के स्वागत कक्ष से बाहर आ गए।

बाहर आ कर विचार किया गया की, हम Pub Street जाएंगे और वंही भोजन करेंगे।

पब स्ट्रीट हॉस्टल से क़रीब 15 मिनट का पैदल रास्ता था, हमने फिर गूगल बाबा को दिशा दिखाने को कहा और चलने लगे पब स्ट्रीट की ओर।

क़रीब 12-13 मिनट पैदल चलकर हम पहुँचे पब स्ट्रीट, पब स्ट्रीट बैंगकॉक के Khao San रोड़ की ही तरह Siem Reap का फेमस पार्टी डेस्टिनेशन है।

Pub Street

Photo of Funky Flashpacker Party Hostel - Siem Reap, Steung Thmei, Krong Siem Reap, Cambodia by बिहारी घुमक्कड़

करीब 15 मिनट में हमारा ऑर्डर आ गया, देखने में सबकुछ ठीक ठाक ही था, हमने श्री गणेश किया।

स्वाद आदि भी सब ठीक था, मगर हमारे इडली में कुछ छोटे जानवर दिखाई दिए, ये क्या ये तो चींटिया थी।

हमने वहाँ कार्यरत बंधु को बुलाया, और दिखाया, उन्होंने तुरंत दोनों प्लेट इडली बदल दिया, लेकिन वो भी वैसा ही था।

अब तो हमारा कुछ खाने पीने का बिल्कुल भी मन नही था, हमने अपना बिल मँगवाया, भुगतान किया और वहाँ से निकल पड़े।

थोड़ा आगे गए तो एक और भारतीय रेस्टॉरेंट दिखाई दिया "Old Delhi", यहाँ दिवारों पर चाय की तस्वीर थी, हम गए और वहाँ कर्यरत एक कम्बोडियन महिला को पूछा "यहाँ भारतीय शैली की चाय मिलेगी"?

उन्होंने कहा " जी हाँ", मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ, ये तो हिंदी में वार्तालाप कर रही थी।

हम बैठ गए, और 2 कप चाय मँगवाई।

क़रीब 10 मिनट बाद तश्तरियों में दो कप चाय हमारे टेबल पर परोसा गया, चाय देख कर ही लग रहा था, मज़ा आने वाला है।

वाकई चाय की पहली चुस्की में ही पुरानी दिल्ली का स्वाद आ गया था।

हमने 2 चाय और मँगवाई, आराम से 30 मिनट तक चाय का आनंद लिया गया और फिर हमने 4 चाय के $4 का भुगतान किया और वापस अपने हॉस्टल "Funky Flashpacker" की ओर चल पड़े।

हॉस्टल पहुँच कर हमने, उन्हें टोकन दिया, हमारा सामान हमें सौंप दिया, हमारे पासपोर्ट की कॉपी लेकर उन्होंने हमें इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों वाला कमरे की चाबी सबको अलग अलग जारी किया, साथ ही हमें 4 साफ तौलिये भी सौंपे गए, और उन्होंने कहा जब भी हम तौलिये बदलना चाहें, बदल सकतें हैं।

हम सब को 10 डोम्स विस्तर वाले कमरे में 4 अन्य गोरों के साथ ठहराया गया था।

इस कमरे में दो बाथरूम थे जो की मेंटेंड और साफ सुथरे थे।

हमने बिस्तारों के नीचे बने रैक्स में अपना सामान रखा, और स्विमिंग पूल में नहाने के अनुकूल कपड़े निकाल कर आ गए ग्राउंड फ्लोर पर बने स्विमिंग पूल पर।

स्विमिंग पूल के एक तरफ पूल बार है, जो कि प्रीपेड और सेल्फ सर्विस बार है।

हम चारों ने इस पूल में तक़रीबन 2-3 घण्टे खूब कलाबाजियां खाई, और भी तरह तरह के गेम्स की व्यवस्था होने से हमें समय का पता ही नही चला, यहाँ वाक़ई बहुत आनंद आ रहा था, हमने तरह तरह के हिंदी, पंजाबी और भोजपुरी गीतों को बजवाया और गोरों को इन गीतों पर नाचने के लिए मज़बूर कर दिया।

पहले तो हमें लगा की पूरे हॉस्टल में हम चार ही भारतीय हैं, किन्तु जैसे ही पंजाबी और भोजपुरी भाषाओं में गीत बजना शुरू हुआ सब के सब भारतीय घुमक्कड़ बाहर निकल कर पूल पर आ गए।

इन्हीं में से एक थे विपुल गोयनका जी, विपुल जी वियतनाम से कंबोडिया अंगकोर वाट घुमने निकले थे।

बातों बातों में उन्होंने हमारे आगे की यात्रा के विषय में पूछा, और हमने कहा "हम लोग दिल्ली से थाईलैंड और थाईलैंड से कंबोडिया आज ही सुबह बस से आये हैं और 2 दिन बाद यहीं से वापस बैंगकॉक बस द्वारा चले जाएंगे"। इस पर उन्होंने पूछा, "वीजा कौन सा है आपके पास", हमने कहा, "वीजा की क्या ज़रूरत, वो तो मुफ्त है वो भी आगमन पर"।

उन्होंने कहा "आप लोगों की वापसी बस की टिकट बुक कर चुकें हैं" हमने कहा, "बिल्कुल", अब वे बोले, "आप लोग थाईलैंड बस से वापस नहीं जा सकते, भारतीय नागरीकों के लिए पोइ-पेट बॉर्डर से थाईलैंड मुफ्त तो क्या वीजा आगमन देती ही नही"।

पहले तो मुझे लगा, इन्हें शायद पता नहीं है, औऱ ऐसा कुछ होगा भी तो देखी जाएगी।

करीब 5:30 बजे हमें लगा अब बहुत हुआ, और अब निकलना चाहिए, हम सब पूल से बाहर निकले ऊपर तीसरे मंज़िल पर अपने कमरे में गये, थोड़ा शावर लिया, कपड़े पहन कर बाहर आ गए।

हॉस्टल के ठीक सामने करीब एक महीने पहले एक भारतीय, उत्तराखंड निवासी बंधु ने भारतीय रेस्टॉरेंट खोला था। बस, यही तो हम ढूंढ रहे थे।

हमने पूछा, "दाल चावल मिलेगा"? उन्होंने कहा "आपका जो खाने का मन करे बस आदेश कीजिये सब मिलेगा"।

हमने मेनू देखा, यहाँ भी हमें चाय की फ़ोटो दिखी, हमने पूछा, "क्या भारत जैसी चाय बनाएंगे"?

उन्होंने कहा, "बिल्कुल"... हमने कहा, "तो चार कप बनाइये"।

करीब 15 मिनट में हमें चाय परोस दिया गया, और अब हमने चाय पर चर्चा आरंभ किया, औऱ निर्णय हुआ, की अभी चाय पीने के बाद रात्रि भोजन यहीं किया जाएगा, उसके बाद हम रात को पार्टी करने पब स्ट्रीट जाएंगे।

रात 2-3 बजे तक पार्टी करेंगे, और फिर सुबह 10 बजे तक सो कर उठेंगे, खाएँगे, पीएंगे और फ्लोटिंग विलेज (पानी पर तैरता हुआ गांव) देखेंगे, रात को आराम करेंगे और फिर अगले दिन अंगकोर वाट देखने जाएंगे।

बस, अब हमें अगले 2 दिनों तक इसी योजना पर अमल करना था।

हम रात 8:30 तक यहीं बात चीत करते रहे, और अब हमने रात का भोजन ऑर्डर किया, भोजन किया और करीब 9:30 बजे, निकल पड़े Siem Reap की पार्टी डेस्टिनेशन पब स्ट्रीट की ओर।

Road Side Cart Bar on our way to Pub Street.

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

रोज शाम होते ही यहाँ, की गालियाँ रंगीन हो उठती है।

दुनियाँ भर से सैलानी Siem Reap आकर अंगकोर वाट के दर्शन करते हैं, और पार्टी पब स्ट्रीट में करतें हैं।

हम पब स्ट्रीट की ओर बढ़ ही रहे थे की हमने रास्ते में इंडिया गेट (भरतीय रेस्टॉरेंट) देखा।

बस फिर क्या था, हम घुस गए, वहाँ कार्यरत एक भरतीय बंधु ने हमारा अभिवादन किया, और हमें एक चार लोगों के बैठने के लिए बने टेबल पर बैठाया, और हमें मेनू भी दिया।

हमने 2 पानी की बोतलें मँगवाई, और कहा 5 मिनट में ऑर्डर देंगेमेनू खोलते ही मेरी नज़र उत्तर भारतीय भोजन पर पड़ी बस फिर क्या था।

हमने तुरंत 2 प्लेट इडली और 2 मसाला डोसा ऑर्डर कर दिया।

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

Idly Dosa of Cambodia

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

कारण 10 मिनट पैदल चल कर हम पहुँचे पब स्ट्रीट, पब स्ट्रीट दिन में हमने जैसा सोच था वैसा बिल्कुल भी नहीं था, गिन के 2-3 पब्स में धूम धड़ाका था, वो भी स्तर हीन।यहाँ Khao San रोड़ की तरह न तो रौनक़ थी, और न ही ढंग के लोग ही दिख रहे थे।हम थोड़ा घूमे, आस पास जायजा लिया, और निर्णय हुआ की वापस हॉस्टल चलने में ही भलाई हैं।यहाँ, जहाँ तहाँ या तो ड्रग्स डीलर थे या तो वेश्यावृत्ति में लिप्त लोग।

Pub Street at 12:30 AM

Photo of Pub Street Siem Reap, Street 08, Krong Siem Reap, Cambodia by बिहारी घुमक्कड़

हमें माहौल थोड़ा ठीक नहीं लग रहा था, तो हम निकल लिए, वापस हमारे हॉस्टल "Funky Flashpacker" की ओर।

पब स्ट्रीट से बढियाँ पार्टी तो हमारे हॉस्टल में चल रही थी।

यहाँ, पब स्ट्रीट से ज्यादा लोग, पश्चमी गानों पर थिरक रहे थे।

लेकिन अब हम चारों में से किसी का मन पार्टी करने का नही था।

तो हम चारों अपने कमरे में घुसे, अपने अपने बिस्तारों पर आ कर फैल गए।

Day 4

कंबोडिया में दूसरा दिन- दुविधा, असमंजस, फिर भी घुमक्कड़ी का जबरदस्त आनंद फ्लोटिंग विलेज का भ्रमण और बैंगकॉक वापस जाने की तैयारियाँ।

चौथा दिन 27 अगस्त 2019

हम सब सुबह 7:00 बजे सो कर उठ गए थे, नित्यक्रिया से निवृत हो कर नहा धो कर हम सब हॉस्टल से बाहर निकले हॉस्टल के सामने ही भारतीय रेस्टोरेंट में हमने उत्तर भारत का पसन्दीदा नास्ता परांठा और दही का सेवन किया, एक एक कप चाय पिया और चल दिये विरक बुंथम बस संचालन कार्यालय।

Virak Buntham Chowk

Photo of Funky Flashpacker Party Hostel - Siem Reap, Steung Thmei, Krong Siem Reap, Cambodia by बिहारी घुमक्कड़

हमें जानना था की हम वापस बैंगकॉक बस के द्वारा जा सकते हैं या नही?

करीब 10 मिनट पैदल चलकर हम बस संचालन कार्यालय पहुँच गए।

वहाँ कार्यरत 3 महिलाओं में से मात्र 1 को ही अँग्रेजी बोलने आती थी।

हमने उन्हें अपना आरक्षित टिकट दिखाया, उस महिला ने टिकट देखते ही पूछा, "Where is your Visa"?

मैं समझ गया, गोयल साहब ठीक कह रहे थे, फिर भी मैंने उनसे कहा, "We have Indian Passport, we get Visa on Arriaval"।

उन्होंने कहा, "No we won't allow boarding without valid Visa, also for your information Indian Citizens don't get visa on arrival at poipet border". "Please check on Google".

मैंने तत्काल फोन निकाला और गूगल द3व जी से पुछा तो पाया की भारतीय पर्यटकों को मात्र थाईलैंड के सभी हवाई अड्डों पर ही वीजा प्रदान करने की सुविधा उपलब्ध है।

फिर मैंने उनसे कहा, "Ok, please cancel our tickets".

उन्होंने कहा, "Sorry, you booked it online, and you have to cancel the tickets online only.

हमनें तुरंत फोन निकाल कर 12goasia.com login कर दिया, अपनी टिकट के निचे cancel वाले विकल्प पर क्लिक किया, तो पता चला टिकट तो cancel हो जाएगी लेकिन हमारे $118 में से $1 भी रिफंड नही होगा, क्योंकि हमारी यात्रा में अब 72 घंटे से कम समय बचा था।

मुझे स्वयं पर क्रोध हो रहा था, और थोड़ा दास बाबू पर भी जो मुझ पर इन सभी आरक्षणों के लिए बहुत पहले से दवाब बना रहे थे।

मैं थोड़ा दुखी था आखिर $118 का नुकसान हुआ था, वो भी सिर्फ मेरी गलती से हुुुआ था।

तभी अखिलेश बोला, "देखो भाई लोग, जो होना था सो हो गया, अब हमें उसकी चिंता छोड़कर बैंगकॉक लौटने की चिंता करनी चाहिये, और मुझे लगता है चिंता छोड़ो फ्लाइट बुक करो।

मैंने अपना फोन निकाला और ixigo.com से Siem Reap से बैंगकॉक के लिए Airasia की रात 9:45 बजे की टिकट बुक कर लिया, इस टिकट के लिए लगभग 26000 रुपए का हर्जाना चुकाया गया।

हम सभी भारी मन से कार्यालय के बाहर आये, तो सामने एक टुक टुक चालक महोदय ने हमें फ्लोटिंग विलेज घुमा कर वापस लाने की पेशकश कर दी।

हमें फ्लोटिंग विलेज जाना तो था ही, मैंने उनसे पूछा, "How Much"??

उन्होंने कहा, "4 people $10".

हमने कहा, "No... too much, $5 only"

वो भाई साहब मान गए..

हम चारों मित्र टुक टुक पर सवार हुए, और चल पड़े फ्लोटिंग विलेज देखने।

हमारे टुक टुक चालक महोदय टुक टुक चलाते हुए, Siem Reap शहर को पार करते हुए अब एक बिल्कुल देहात में प्रवेश कर गए थे, यहाँ जन जीवन अति प्राचीन प्रतीत हो रहा था, ऐसा लगा मानो हम भारत के किसी गाँव में आ गए हों।

फिर कुछ देर बाद आवादी समाप्त और सामने था दूर तक फैला बंजर मैदान, जिस सड़क पर हम जा रहे थे, वो भी चारकोल का था, सड़क के किनारे क्यारियों में पानी भरा हुआ था, जिसमें बच्चे मछलियां पकड़ रहे थे।

Somewhere on the way to Floating Village

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़
Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

लकगभग 25 किमी टुक टुक चलाकर हमारे चालक महोदय ने हमें फ्लोटिंग विलेज में प्रवेश टिकट लेने को कहा, हम टिकट काउंटर पर पहुँचे, और 4 लोगों के लिए टिकट मांगा, उन्होंने झट से 4 टिकट निकाल कर दिया और बोले, "$81"

थोड़ा आश्चर्य हुआ, इतना महँगा...??, चलो अब इतनी दूर आ गए हैं तो पैसों की खातिर तो बिल्कुल नहीं छोड़ा जा सकता है।

हमने चार टिकट खरीदी और फिर टुक टुक में सवार होकर आगे चल पड़े।

करीब 2-3 किमी ही चले होंगे की हम पहुँचे एक ऐसी जगह जहाँ बहुत मोटर चलित नावें खड़ी थी, पानी की गहराई करीब 5-6 फीट होगी।

Main Boat Pick-up Point

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

फिर हमें हमारे टुक टुक चालक महोदय ने एक नाविक के हवाले कर दिया, ये नाविक साहब हमारी ही प्रतिक्षा कर रहे थे।

With the Captain of our Motor boat

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

फिर इन्होंने हमें एक नाव पर बैठाया, इंजिन स्टार्ट किया, और चल पड़े फ्लोटिंग विलेज की ओर...

रास्ते में हमने पानी पर खंबो के सहारे बने ऊंचे ऊंचे झोपड़ियों को देखा, जिसमें लोग (मछुआरे) आराम से रह रहे थे देखे।

इसी तरह की झोपड़ियाँ लगभग सारे रास्ते पानी के दोनों ओर थे।

Jungle Hut

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

सबसे कमाल की बात की, इन झोपड़ियों में बिजली की भी व्यवस्था थी।

मैं और मेरे मित्र, चलती नाव पर फोटोग्राफी के साथ साथ इस नौका विहार का भरपूर आनंद ले रहे थे।

Somewhere on our way to Floating Village from Siem Reap

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

करीब 30 मिनट तक चलते चलते आगे एक जबरदस्त जंगल की शुरुआत हुई, इसके आसपास कोई जनजीवन का नामोनिशां नही था, बस जहाँ तक नजरें जा रही थी, जंगल और पानी ही दिखाई पड़ रहा था।

हम अपने बोट से उतर कर एक लकड़ी के बने प्लेटफॉर्म पर पहुँचे।

Top Deck of Floating Cafe

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

Floating Village

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

Floating Cafe, In Floating Village

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

Crocodile Resting in Floating Village Cafe Side Hut

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

ये प्लेटफॉर्म एक पानी पर तैरता हुआ कैफ़े था, यहां कॉफी, मैग्गी और अन्य खाद्य पदार्थों की बिक्री हो रही थी।

लेकिन अभी हमारा खाने पीने का बिल्कुल भी मन नही था।

हमने उस कैफ़े के ऊपरी सतह पर जा कर कुछ समय व्यतीत किया, थोड़ी बहुत फोटोग्राफी कर वापस अपने निर्धारित नाव पर वापसी के लिए लौट आए।

रास्ते में वापस अपने टुक टुक महोदय की तरफ़ आते हुए, हमारे नाव की बेल्ट 2-3 बार टूट गई, लेकिन नाविक ने हमें बिना बताए, आगे के पडाव पर उसे बदलने की ठानी थी।

लेकिन हमें उनके भाव से पता चल गया की कुछ तो गड़बड़ है।

फिर मित्र अखिलेश ने नाव की कमांड लेते हुए, नाविक महोदय को सहायता की और पड़ाव तक किसी तरह नाव को किनारे पर ले आये।

Akhilesh Taking Command of Boat

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

नाविक महोदय नाव से उतरे, अंदर गाँव में गये और एक नया बैल्ट ले कर लौट आए, बैल्ट बदल कर वापस मंज़िल की ओर चल दिए।

इस दौरान मित्र अखिलेश ने कई बार नाविक बन नाव की कमांड संभाली- इसीलिए मैं अखिलेश को एक जबरदस्त ड्राइवर कहता हूँ, जिसने पिछ्ले 5 सालों में मेरे साथ घूमते हुए हवाई जहाज छोड़कर बाँकी सभी बहनों को अति कुशलतापूर्वक चलाया है।

अब हम वापस अपने मंज़िल तक पहुंच गए थे, और हमें दूर हमारे टुक टुक चालक महोदय दिखाई दिए।

यहाँ पानी का स्तर थोड़ा कम था, और कुछ लोग किनारे से मछली पकड़ने में व्यस्त थे।

Folks Fishing near Boat Pick-up Point

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

हमने हमारे नाविक को बख्शीश दिया, और उनसे अलविदा कह अपने टुक टुक में सवार होकर वापस शहर की ओर चल पड़े।

अब तक मौसम बिगड़ने लगा था, बादल छा गए थे और किसी भी पल ज़ोरदार बरसात की प्रबल संभावना थी, इसलिए हमारे चालक महोदय तीव्र गति से हमें शहर की ओर ले जा रहे थे।

और हम अब विश्लेषण कर रहे थे, की ये फ्लोटिंग विलेज देखना कहीं घाटे का सौदा तो नहीं था, क्योंकि हमनें इसके लिए $84 ख़र्चे थे।

अभी हम मंथन कर ही रहे थे की जबरदस्त बारिश शुरू हो गई, हवा भी तेज चल रही थी, हमारे चालक महोदय ने टुक टुक एक किनारे लगाया, और टुक टुक को चारो तरफ से पर्दे निकाल कर बंद कर दिया, अब हम कम से कम भींग नही सकते थे, वैसे भी हमें भींगने में कोई आपत्ति नहीं थी क्योंकि आज अभी तक हमने स्नान नही किया था।

और आज देर शाम तक हॉस्टल के तरण ताल में स्नान करने का विचार था।

थोड़ी देर में ही हम Siem Reap शहर में प्रवेश कर गए थे।

अब हम सोच रहे थे, अपने टुक टुक चालक महोदय के विषय में जिन्होंने लगभग 2 घण्टों तक आने जाने के लिए टुक टुक चलाया था, और क़रीब 1 घंटा हमारी प्रतीक्षा भी की थी, और इसके बदले इन भाई साहाब को $5 ही मिलना था।

लेकिन हमने निर्णय लिया की हम कल अंगकोर वाट देखने भी इन्हीं के साथ जाएंगे और इन्हीं के साथ Siem Reap हवाई अड्डे तक भी इन्हीं के साथ जाएंगे।

आज के सफर के लिए कम से कम $6 अवश्य देंगे।

थोड़ी ही देर में हम सब अपने हॉस्टल पहुँच गए, हमने टुक टुक चालक महोदय को $6 देे कर पूछा, "Will you take us around Angkor Wat tomorrow Morning"?

वे सहर्ष स्वीकार करते हुए बोले, "OK, Morning 4:30 i will come here".

मैंने पूछा, "How Much"?

वे बोले, "$20".

मैंने कहा, "No, too Much, we will pay you $13 for Angkor Wat Trip and again in the evening from here to Airport".

पहले तो वे नही मान रहे थे, फ़िर मान गए।

हम टुक टुक से उतरे, और अपने कमरे में आए, कपड़े बदले और वापस हॉस्टल के तरण ताल में आ कर स्विमिंग, जम्पिंग, और अन्य मौजूद खेलों का आनंद लेने लगे।

Swimming Pool Of Funky Flashpacker Hostel

Photo of 10 दिवसीय थाईलैंड औऱ कंबोडिया यात्रा by बिहारी घुमक्कड़

आज फिर हमने गोरों से हिंदी, पंजाबी और भोजपुरी गीत बजबाये और उन सब को इन देशी धुनों पर नचाया भी।

ये मस्ती लगभग 7:30 बजे तक चली, फिर हम लोग अपने कमरे में आ कर, नाहा धो कर कपड़े पहने, और सीधा हॉस्टल के सामने वाले भारतीय रेस्टोरेंट में पहुंच गए।

पहले तो हमने 4 कप चाय मँगवाई, और फिर करीब 9:00 बजे भोजन मँगवाया औऱ भोजन कर के वापस अपने कमरे में विश्राम करने चले गए।

सोने से पहले हमने अपना सामान पैक किया, क्योंकि हमें 12:00 तक हॉस्टल छोड़ना था।

पाँचवाँ दिन 28 अगस्त 2019

Day 5

अंगकोर वाट मंदिर दर्शन और बैंगकॉक वापसी

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