यादों में बस गया देश का दिल...

Tripoto
30th Jan 2020
Photo of यादों में बस गया देश का दिल... by Pankaj Ghildiyal

जहाँ हर क्षेत्र में खानपान और कला के अलग-अलग रंग बसते हों, जहाँ दिनभर पानी की लहरों को देखते रहना भी किसी उत्सव जैसा लगे, दो अलग-अलग संस्कृतियों के संगम में डुबकी लगाने का अवसर, जहाँ कोई हाथ से जाने नहीं देना चाहे, वह है देश के दिल में स्थित मध्य प्रदेश। यहाँ के कुछ खूबसूरत पर्यटक स्थलों की सैर करा रहे हैं पंकज घिल्डियाल।

मध्य प्रदेश के पर्यटक स्थलों को देखने की हमारी योजना अचानक ही बनी थी और इस खूबसूरत सफर की शुरुआत हुई इंदौर शहर से। साफ-सफाई और खानपान को लेकर इस शहर के बारे में पहले से ही काफी कुछ सुन रखा था। और जैसा सुना था, वैसा पाया भी। इस शहर के चौराहों से गुज़रते हुए किसी भागमभाग का एहसास नहीं होता। एक अलग ही शांति महसूस हुई यहाँ। पूछने पर लोग बताते हैं कि शहर के प्रशासन का जिम्मा महिलाओं के हाथ है और महिलाएँ जानती हैं कि अपने घर को कैसे साफ-सुथरा रखना है। वैसे साफ-सफाई को लेकर यहाँ लोग ज्यादा जागरूक दिखे। जगह-जगह रखे बड़े-बड़े कूड़ेदान भी इसके गवाह थे। शहर की गलियों को देख ऐसा लगा, जैसे यहाँ कोई नाला है ही नहीं, क्योंकि उन पर जहाँ तक नज़र पड़ी, हरे-भरे पौधों ही नज़र आए। नालों को ढकने का यह अंदाज भी मुझे अच्छा लगा। शहर की दीवारों पर विज्ञापनों के पोस्टर भी ना के बराबर दिखें। हाँ, इसकी जगह मन को लुभाने वाली वॉल पेंटिंग्स हर जगह नज़र आती हैं, जो छात्रों द्वारा बनाई गई हैं। यहाँ करीब हर 300 मीटर पर शौचालय के बोर्ड नज़र आ ही जाते हैं। खास बात यह है कि ये सभी शौचालय एप से जुड़े हैं। आप कोई भी फीडबैक दें, उस पर एक्शन भी तुरंत होता है। आप समझ सकते हैं कि यह शहर खानपान के साथ-साथ आखिर साफ-सफाई के मामले में भी अव्वल कैसे बना।

हनुवंतिया द्वीप को मध्य प्रदेश का स्विट्जरलैंड क्यों कहा जाता है, यह उसे देखने के बाद ही मुझे एहसास हुआ। असल में इंदिरा सागर बांध के बैक वाटर में बना यह टापू अंतरराष्ट्रीय स्तर का टूरिस्ट आईलैंड है, जो खंडवा के पास स्थित है। नर्मदा की लहरों के बीच इस टापू पर पर्यटकों के लिए सभी सुविधाएँ मौजूद हैं। चारों तरफ समुद्र की तरह फैले इस कुदरती नज़ारे को निहारना दिल को काफी सुकून देता है। यहाँ सैर के लिए क्रूज, वॉटर स्कूटर, मोटर बोट के अलावा वुडन कॉटेज और रेस्तरां की भी सुविधा है।

ढेर सारी वॉटर एक्टिविटीज के अलावा यहाँ एयर राइड का भी मज़ा लिया जा सकता है। यहाँ ठहरने के लिए खूबसूरत लग्जरी टेंट उपलब्ध हैं, तो दूसरी तरफ पर्यटकों के आराम के लिए आकर्षक गार्डन और बीच भी बनाए गए हैं। कॉटेज का फ्रंट नर्मदा की तरफ है, जहाँ बैठकर आप समुद्र के समान हिलोरें मारती नर्मदा के पानी को निहार सकते हैं।

शहर की खूबसूरती देखते हुए हम पहुँचे कांच मंदिर, जो पूरी तरह कांच और मीनाकारी से बना है। यह एक जैन मंदिर है, जिसे पारंपरिक वास्तुकला शैली में बनाया गया है। मंदिर की दीवारों और छतों को कलात्मक ढंग से कटे हुए कांच से सजाया गया है, जिनमें जैन ग्रंथों में निहित शिक्षाओं को भी चित्रित किया गया है। मंदिर की यही खूबसूरती पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। यहाँ के गाइड जय तिवारी ने बताया, ‘प्राचीन समय में इसके लिए कांच बेल्जियम से मंगाया गया था। कांच की वजह से आपका रिफ्लेक्शन ऊपर से नीचे हर जगह दिखाई देता है।’ कांच मंदिर के अलावा यहाँ का भव्य लाल बाग पैलेस भी देखने लायक है। यह वही जगह है, जहाँ पिछले साल रिलीज हुई ‘कलंक’ फिल्म की शूटिंग हुई थी। यूरोपियन और इस्लामी वास्तुकला की झलक लिए इस पैलेस की नक्काशी बेहद ही खूबसूरत है। यहाँ की इटालियन पेंटिंग भी खास हैं।

और आखिर में हम पहुँचे खजराना गणेश मंदिर, जो इस शहर की पहचान बन चुका है। कहा जाता है कि 1735 में होलकर वंश की महारानी अहिल्याबाई ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। खैर, मंदिर जब भी बना हो, मगर मंदिर के अंदर की लाइटिंग अरेजमेंट लोगों को अपनी तरफ खास आकर्षित करती है। अगर आप कैमरा लेकर यहाँ पहुँचे हैं, तो ज़रूर निराश होंगे, क्योंकि मुख्य द्वार पर खड़े गार्ड इसे आपको अंदर लेकर नहीं जाने देंगे। हस्तशिल्प पसंद है, तो यहाँ आपको खरीदारी का बढ़िया विकल्प मिल सकता है।

हनुवंतिया के दिलकश नज़ारे

महेश्वर यानी अहिल्याबाई होल्कर की नगरी। यहाँ अहिल्या फोर्ट में प्रवेश करते ही गुलाबी चुनरी लिए अहिल्याबाई की बड़ी मूर्ति दिखती है। वैसे तो यहाँ परिसर में बहुत से मंदिर हैं, लेकिन शिव मंदिर मुख्य है। इसे अहिल्येश्वर शिवालय कहते हैं। अहिल्याबाई शिव भक्त थीं और नर्मदा पर उनकी अपार आस्था भी। इसलिए आज भी यहाँ के घाट पर शिवलिंग की कतार देखी जा सकती है। महेश्वर में आप कहीं भी जाएँ, नर्मदा आपकी आँखों से कभी ओझल नहीं होती। यहाँ कुछ शानदार रिजॉर्ट्स भी हैं, जहाँ ज्यादातर विदेशी सैलानी रुके हुए थे। सूर्योदय के वक्त घाट पर उनका सूर्य को जल चढ़ाना व हर-हर महादेव की जयघोष के साथ डुबकी लगाना, वाकई रोमांचित करने वाला पल था।

मांडू के राजसी महल

हमारी यात्रा का अगला पड़ाव था मांडू। हरे-भरे घने जंगल और नर्मदा के खूबसूरत तट ही हैं, जो मांडू को खास बनाते हैं। मांडू का जहाज महल भी हैरान करने वाला था। जब आप जहाज महल को एक खास दूरी से देखते हैं, तो ऐसा लगता है मानो तालाब के बीच में कोई सुंदर जहाज तैर रहा हो। यहाँ के गाइड मोहम्मद खान ने बताया कि महल की दीवारें कुछ झुकी होने के कारण यह हवा में झूलते हिंडोले जैसा दिखता है, इसलिए इसे ‘हिंडोला महल’ के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ अशरफी महल भी है, जिसका निर्माण होशंगशाह खिलजी के उत्तराधिकारी मोहम्मद खिलजी ने इस्लामिक मदरसे के रूप में किया था। इसकी वास्तुकला भी पर्यटकों को खास आकर्षित करती है। वैसे मांडू में ज्यादातर पर्यटक मॉनसून के समय आते हैं, क्योंकि इस मौसम में मांडू की खूबसूरती चरम पर होती है।

मेडिटेशन सेंटर ओंकारेश्वर-ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग

भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, जिस जगह पर स्थित है, वहाँ नर्मदा नदी बहती है। पहाड़ी के चारों ओर नदी के बहने से यहाँ ‘ऊँ ’ का आकार बनता है, जो बेहद आकर्षक लगता है। जब आप यहाँ मोटरबोट से परिक्रमा करते हुए दो नदियों के संगम पर पहुँचते हैं, तो वह दृश्य और भी अद्भुत लगता है। मंदिर में प्रवेश करने की हमारी बारी भी आ चुकी थी। हमें बताया गया था कि कोली (मंदिर प्रवेश से ठीक पहले का स्थान) से गर्भगृह की ओर बढ़ने पर दहलीज के ऊपर पैर रखना शुभ नहीं होता है। इसलिए हमने भी वही किया, जैसा पंडितों ने हमें बताया। हमने सबसे पहले ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए, फिर उसके ठीक ऊपर मां पार्वती की प्रतिमा की ओर देखा। मंदिर के प्रांगण में ना सिर्फ शिवजी का जलाभिषेक किया, बल्कि कुछ मिनटों तक मेडिटेशन का कभी ना भूलने वाला अनुभव भी लिया। ओंकारेश्वर में ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के साथ ही ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग भी है। इनके बारे में कहा जाता है कि पर्वतराज विंध्य की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर, देवताओं और ऋषियों ने भगवान शिव से प्रार्थना की थी कि वे विंध्य क्षेत्र में स्थिर होकर निवास करें। इसके बाद वहाँ स्थित एक ही ओंकारलिंग दो स्वरूपों में बंटा, जिसमें से एक को ‘ममलेश्वर’ के नाम से जाना जाता है।

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