गुजरात यात्रा का आखिरी दिन।

Tripoto
1st Sep 2022
Photo of गुजरात यात्रा का आखिरी दिन। by Lucky Goyal
Day 1

हर हर महादेव।
मेरे भारतवासियों कैसे हो।आशा करता हू आप सब लोग कुशल मंगल होंगे।आज मैं आप लोगो को अहमदाबाद का लोकल टूर करवाऊंगा।आज अहमदाबाद में हमारी गुजरात यात्रा का आखिरी दिन है।मैं आपको अहमदाबाद के कुछ फेमस पैलेस के बारे में बताऊंगा।हमारे पास सिर्फ आज शाम तक का ही टाइम था ये मान के चलिए शाम 6 pm तक हम लोग लोकल घूम सकते थे। क्यू की उसके बाद हमारी दिल्ली के लिए वापिसी की फ्लाइट थी। इसलिए हमने आज थोड़े टाइम में अहमदाबाद के 4 दार्शनिक स्थल देखने का प्रोग्राम बनाया। सुबह जल्दी उठ कर नहा कर ब्रेकफास्ट कर के हम आज अहमदाबाद को एक्सप्लोर करने के लिए निकल पड़े। हमने अपना सामान साथ में ले लिया था क्यू की इसके बाद हम लोग एयरपोर्ट पर ही जाने वाले थे। सबसे पहले हम लोग अहमदाबाद के सबसे प्रसिद्ध स्थान ऑटो वर्ल्ड विंटेज कार म्यूजियम गए।आज मैं आपको ऑटो वर्ल्ड विंटेज कार म्यूजियम अहमदाबाद के बारे में डिटेल में जानकारी दूंगा।जहां पर दुनिया की सबसे महंगी और दुर्लभ गाडियों का संग्रह आपको देखने को मिल जाएगा। ऑटो मोबाइल लवर के घूमने के लिए अहमदाबाद में मौजूद यह टूरिस्ट स्पॉट बेहद खास है।ऑटो वर्ल्ड विंटेज कार म्यूजियम अहमदाबाद शहर में सरदार पटेल रिंग रोड पर स्थित है ऑटो वर्ल्ड विंटेज कार म्यूजियम अहमदाबाद ही नहीं, बल्कि वर्तमान समय में देश के विभिन्न क्षेत्रों में भी काफी प्रसिद्ध है। इस म्यूजियम में प्राचीन दुर्लभ गाड़ियों का कलेक्शन है। इस म्यूजियम में 100 से भी अधिक प्राचीन दुर्लभ गाड़ियां मौजूद हैं। इस म्यूजियम में आपको रोल्स रॉयस, फोर्ड, मर्सिडीज बेंज और बी एम डबल्यू जैसी महंगी और दुर्लभ गाडियों को देख सकते हैं, जो काफी साल पुरानी हो गईं हैं और वर्तमान समय में इन गाड़ियों पर बैठ कर घूमना तो काफी दूर की बात है, इन्हें देखना भी नसीब नहीं होता। इस म्यूजियम में रखी गाड़ियों को आज भी चलाया जाता है, लेकिन इन गाड़ियों को अपनी पर्सनल लाइफ में इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इन सभी गाड़ियों को सिर्फ पर्यटकों के एंजॉय करने के लिए चलाया जाता है। इन कारों में पर्यटक बैठ कर काफी ज्यादा एंजॉय कर पाते हैं अहमदाबाद में मौजूद इस म्यूजियम का एंट्री टिकट और इन दुर्लभ कारों में बैठने के टिकट के बारे में आप नीचे पढ़ सकते हैं।
एंट्री टिकट (बच्चा) – ₹ 50
एंट्री टिकट (व्यस्क) – ₹ 100
विंटेज कार के फोटोग्राफी के लिए – ₹ 100
विंटेज कार में राइड करने के लिए – ₹ 1000
ऑटो वर्ल्ड विंटेज कार म्यूजियम को घूमने के बाद हमारा अगला डेस्टिनेशन गांधी आश्रम था।जैसा की आप सब लोग जानते है गांधी आश्रम वैसे तो काफी प्रसिद्ध है।लेकिन ferburary 2020 में हमारे primeminister नरेंद्र मोदी ओर अमेरिका के ex preident Donald Trump के कारण कुछ ज्यादा सुर्खियों में रहा। आज मैं गांधी आश्रम के बारे में जानकारी बताता हु। गांधी आश्रम, साबरमती नदी के किनारे पर स्थित है और इसे साबरमती आश्रम के नाम से भी जाना जाता है। इसकी स्थापना, 1917 में महात्मा गांधी द्वारा की गई थी। यह आश्रम, गांधी जी के दांडी मार्च के लिए विख्यात है, यही से गांधी जी ने नमक आंदोलन के लिए उठाए गए कदम दांडी मार्च की शुरूआत की थी। यह आश्रम, गांधी जी यादगार घटनाओं का संग्रह है।
उन्होने इसी आश्रम में कपड़ा को कातना और बुनना शुरू किया था। उन्होने इसी आश्रम में खादी को बनाया और उसका प्रसार किया। यहां की हर वस्तु गांधी जी के जीवन से जुड़ी हुई है। साबरमती आश्रम ही वो जगह थी जहां से महात्मा गांधी ने सत्याग्रह आंदोलन की शुरुआत की थी. सत्याग्रह का मूल अर्थ क्या है: "सत्याग्रह' का मूल अर्थ है सत्य के प्रति आग्रह (सत्य अ आग्रह) सत्य (सच) को पकड़े रहना और इसके साथ अहिंषा (Non-Violence) को मानना है. सत्याग्रह का मूल लक्षण ये है कि अन्याय का हमेशा विरोध (अन्याय के प्रति विरोध इसका मुख्या वजह था) करते हुए अन्यायी के प्रति शत्रुता नहीं रखना  मूल आश्रम की स्थापना मई 1915 में जीवनलाल देसाई (यहां से लगभग 10 किमी) के कोचरब बंगले में की गई थी, जो महात्मा गांधी के बैरिस्टर मित्र थे. इसे सत्याग्रह आश्रम का नाम दिया गया. महात्मा गांधी खेती और पशुपालन जैसी गतिविधियों को करना चाहते थे और उन्हें और जगह की जरूरत थी. 17 जून 1917 में, आश्रम को साबरमती नदी के तट पर छत्तीस एकड़ के क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया गया था साबरमती आश्रम में आप सुबह के आठ बजे से लेकर शाम के 6:30 तक आ सकते हैं.
इसके बाद हमने एक झलक अहमदाबाद की प्रसिद्ध साबरमती रिवरफ्रंट को देखा। टाइम की कमी के कारण हम उसको अच्छे से देख नही पाए।रोड क्रॉस करते टाइम ही उसको देखा था।वैसे भी शाम के टाइम ज्यादा मजा आता । हमारा अगला पड़ाव अडालज वाव था मुझे लगता है कम लोगो को ही इसके बारे में जानकारी होगी। कोई बात नही,मैं आपको इसका इतिहास बताता हु। हमारे प्राचीन काल का अद्भुत इतिहास है अगर आप लोग गुजरात अहमदाबाद जाते हो तो थोड़ा समय निकल कर आपको एक बार जरूर जाना चाहिए। आपको हमारी प्राचीन सभ्यता का पता चलेगा।ये स्थान बावड़ियों के नाम से भी प्रसिद्ध है।
गुजरात की सुंदर बावड़ियों में से एक अडालज वाव अहमदाबाद के उक्रार में 19 किलोमीटर दूर स्थित है। इसका निर्माण रानी रुदादेवी ने 1499 में अपने पति की याद में करवाया था, जो वाघेला साम्राज्य के प्रमुख वीरसिंह की पत्नी थीं। किंवदंती के अनुसार, 15वीं सदी में राणा वीरसिंह इस क्षेत्र पर शासन किया करते थे। उस समय यह इलाका दांडई देश के नाम से जाना जाता था। उनके साम्राज्य में हमेशा से ही पानी की किल्लत झेलनी पड़ती थी तथा उन्हें बारिश पर निर्भर रहना पड़ता था। तब राजा ने आदेश दिया कि इलाके में बड़ा एवं गहरा कुआं बनाया जाए। इससे पहले की कुएं का निर्माण कार्य पूरा होता पड़ोसी मुस्लिम शासक मोहम्मद बेगडा ने दांडई देश पर आक्रमण कर दिया, जिसमें वीरसिंह मारा गया। यद्यपि उसकी विधवा सती होना चाहती थी (उस समय यह प्रथा थी कि जिस महिला के पति की मृत्यु हो जाती थी, तब वह जलती चिता में भस्म हो जाती थी) किंतु बेगडा ने उसे ऐसा करने से रोक दिया और कहा कि वह उससे विवाह करना चाहता है। रानी ने एक शर्त पर उसकी बात मानी कि पहले वह कुएं का निर्माणकार्य पूरा करवाए। बेगडा ने उसकी शर्त मान ली और कुएं का निर्माण तय समय में हो गया। रानी के मन में कुछ और ही विचार आ रहे थे। सबसे पहले उसने प्रार्थना करते हुए पूरे कुएं की परिक्रमा की और फ़िर कुएं में छलांग लगा दी ताकि वह अपने पति से एकाकार हो सके। इस बावड़ी की विशेषता यह है कि इसके तीन प्रवेश द्वार उस मंच के नीचे जाते हैं जो 16 स्तंभां पर टिका हुआ है। सीढ़ियों वाले ये तीनों प्रवेश द्वार भूतल की ओर जाते हैं और ऊपर अष्टकोणीय छत बनी हुई है। सभी 16 स्तंभों के किनारों पर मंदिर बने हैं। यह बावड़ी पांच तल गहरी है। इस बावड़ी में इष्टदेवों के अलावा माखन निकालने के लिए मंथन करती महिलाओं से लेकर दर्पण में स्वयं को निहारतीं महिलाओं तक की आकृतियां उकेरी गई हैं। इस बावड़ी में श्रद्धालु एवं व्यापारी शरण लिया करते थे। ऐसा माना जाता है कि गांव वाले यहां पानी लेने तथा देवी-देवताओं की पूजा करने आते थे। वास्तुकला एवं पुरातात्विक विशेषज्ञों का मानना है कि अष्टकोणीय छत के कारण हवा व सूरज की रोशनी इसमें प्रवेश नहीं कर पाती। इस कारण बावड़ी के अंदर का तापमान बाहर की अपेक्षा अधिक ठंडा रहता है। यह वाव इंडो-इस्लामिक वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसमें जैन धर्म से संबंधित प्रतीक भी बने हुए हैं जो उस काल को दर्शाते हैं जब इसका निर्माण हुआ था। यहां पर कल्पवृक्ष (जीवन का पेड़) एवं अमी खुम्बोर (जीवन के जल वाला कटोरा) नक्काशी देखने लायक हैं, जो पत्थर की एक ही शिला पर उकेरे गए हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि कुएं के किनारे पर बनी नवग्रहों की छोटी आकृतियां इसकी बुरी आत्माओं से रक्षा करती हैं।
दोपहर की तपती धूप में अब हम लोग थक चुके थे। टाइम कम होने के कारण हम लोग कही ओर घूमने नहीं जा सकते थे इसलिए हमने अहमबादा के मॉल को घूमने का प्लान बनाया । थोड़ा आराम मिल जाएगा। वहा पर कुछ स्पोर्ट एक्टिविटी भी की। लगभग एक दो घंटे तक हमने मॉल को एक्सप्लोर किया । वहा पर हमने अपना लंच किया।उसके बाद 5 बजे के बाद हम लोग एयरपोर्ट आ गए ।
इस तरह मैंने अपनी गुजरात की यात्रा का संपूर्ण उल्लेख आपके साथ सांझा किया। जिसमें मैंने भगवान शिव के दो ज्योतिलिंग (सोमनाथ और नागेश्वर), द्वारका धाम एवं उसके आसपास के प्रमुख दार्शनिक स्थल, स्टेच्यू ऑफ यूनिटी, अहमदाबाद लोकल टूर इन सब को अपनी तरफ से अच्छे तरीके से आपके सामने प्रस्तुत किया है। मुझे पूरी उम्मीद है आपको मेरे ये यात्रा के से ब्लॉग पसंद आए है। अब मैं अपनी गुजरात यात्रा को यही पे समाप्त करता  हूं। अगर आपको कुछ वी जानकारी चाहिए हो तो आप मुझे कॉमेंट कर के पूछ सकते हो।
हर हर महादेव।

Photo of अहमदाबाद by Lucky Goyal
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Photo of अहमदाबाद by Lucky Goyal
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