
Misty wild home जो ट्रिपोटो का एक माइंडफुल रिट्रीट है जिस में stargaze, hike, एक दिन का ट्रेक, जालोरी पास शामिल है। यह पैकेज 2 रात और 3 दिन है, जिसकी कीमत 7500 रुपए है।
चलिए बात करते है इस ट्रेक की, कैसे करे, क्या चाहिए, कब जाए?
हिमाचल के जिभी के पास जिभी से लगभग 15 किलोमीटर है जालोरी पास जिसकी ऊंचाई है 10,500 फीट।
जालोरी पास से 2 ट्रेक जाते है एक रघुपुर फोर्ट का और एक सेरोलसर झील का।
रघुपुर ट्रेक 3 किलोमीटर का है जबकि सेरोलसर झील का 5 किलोमीटर का है। सेरोलसर ट्रेक बहुत आसान है । रघुपुर ट्रेक आसान तो है, मगर सेरोलसर से थोड़ा सा मुश्किल है, क्योंकि इस में 1.5किलोमीटर के बाद स्टीप ऊंचाई आ जाती है।
जालोरी पास पर एक प्राचीन मंदिर भी है। मंदिर के आस पास आप को शॉपिंग के लिए सामान मिल जाता है जैसे शाल, मफलर, टोपी, रूमाल, चेरी, खाने पीने के लिए स्नैक्स की दुकानें भी है जैसे मैगी, ऑमलेट, पराठे आदि।
ट्रेक करने के लिए हॉर्सराइडिंग भी कर सकते है, उसके लिए भी आप को यही से घोड़े मिल जाएंगे।
यहां से ही ट्रेक शुरू होता है।





रघुपुर ट्रेक की शुरुआत :
जालोरी पास जो कि 10,500 फीट की ऊंचाई पर है। वहीं से थोड़ा सा आगे चल कर दाई तरफ़ जो रास्ता नारकंडा की ओर जाता है , उसके दाई तरफ़ साइड में एक पगडंडी पर आप को एक साइन बोर्ड दिखाई देता है जिस पर लिखा होता है रघुपुर ट्रेक, बस इसी पगडंडी पर ही चलते रहना है, रास्ता पूरा visible है, ढूंढने में कोई समस्या नहीं आती है, सर्दी में पहले एक्सपर्ट ट्रैकर मार्किंग करते है, उस समय बर्फ ज्यादा होने के कारण रास्ता थोड़ा हाइड हो जाता है। मानसून में बारिश ज्यादा होने के कारण ट्रेक करना काफी मुश्किल हो जाता है।
इस लिए कोशिश करे इस ट्रेक को गर्मी में, सर्दी में जा फिर मानसून के बाद करे।
इस ट्रेक को करने से पहले आप के पास पानी की बोटल जरूर होनी चाहिए, कुछ खाने के लिए भी ले कर जाएं जैसे बिस्कुट, नमकीन। क्योंकि चलने से भूख लग सकती है, खास कर जो लोग पहली बार ट्रेक करते है।
हमारा भी यह पहला ट्रेक था, हमारे साथ ढाई साल (2.5 साल) की बेटी भी थी, उसका भी थोड़ा बहुत समान था, जो हम ने एक पीठू बैग में डाल लिया था, जिस से चलने में आसानी होती है।
हवा काफी तेज चलती है, कभी ठंड भी हो जाती है, इस लिए साथ में गर्म कपड़े, जैकेट, टोपी, windsheet, गुगल्स भी रखे।
अगर आप को बैलेंस बना कर चलने में तकलीफ है, आप किराए पर लाठी लेकर भी चल सकते है। वैसे तो यह ट्रेक आसान है, हम ने बिना लाठी के है इस ट्रेक को पार कर लिया था, हमारी छोटी बेटी ने भी इसे आसानी से खुद चल कर पर किया था।




ट्रेक का रेस्ट प्वाइंट :
वैसे तो आप कभी भी कहीं भी आराम करने के लिए रुक सकते है, मगर शुरुआत करने के बाद 1.5 किलोमीटर मतलब हॉफ रास्ते के बाद आप को थोड़ी खुली जगह जो मैदान जैसी है दिखाई देती है, खाने पीने की दुकानें भी मिल जाती है, फोटो खींचने वाले भी मिल जाते है।
इस जगह पर 5- 10 मिनट बैठ कर बर्फ से लदी ऊंची पर्वत की चोटी दिखाई देती है जो मनाली पार की है, जिनके ट्रेक मनाली से है जो काफी मुश्किल माने जाते है।
पल भर में मौसम बदल जाता है, कभी अचानक से तेज हवा चलने लगती है, कभी बादल हो जाते है, कभी धूप।
इस जगह तक का ट्रेक काफी आसान है, ज्यादा ऊंचाई नही है, सीधे सीधे ही चलना पढ़ता है। कभी कभी थोड़ी बहुत सीढ़ी एक जा दो आ जाती है।
देवदार, ओक के घने जंगल में ट्रेक करने का अलग ही मजा है।


हॉफ के आगे का ट्रेक :
1.5 किलोमीटर के बाद का ट्रेक मुश्किल ट्रेक माना जाता है, क्योंकि ऊंचाई एकदम से स्टीप आती है आगे चल कर तो पूरी स्टीप ऊंचाई हो जाती है ।
3 किलोमीटर का ट्रेक करने के बाद आप पहुंच जाएंगे पहाड़ के शिखर हिल टॉप पर। यहां पर पूरा बड़ा मैदान है। इस मैदान में अलग अलग खाने पीने की दुकानें है, वहां पर समान काफी महंगा मिलता है। क्योंकि पानी की बहुत समस्या है, पानी को नीचे से लेकर आते है, सभी समान नीचे से उपर लेकर आना पढ़ता है। इस लिए प्राइस भी बढ़ जाते है।
आप को हिल टॉप पर झूलने के लिए झूले मतलब पींघ दिखेगी। आप उस पर बैठ के झूटे ले सकते है वो भी फ्री में।
इस मैदान को पार करने के बाद रघुपुर किला आता है, इस मैदान में आप के साथ साथ सफेद फूल भी चलते रहते है, साथ साथ पहाड़ों के दृश्य भी बदलते रहते है।
काफी पहाड़ों पर जंगल की आग लगी हुई थी, वहां से धुआं उठता हुआ दिखाई दे रहा था।
हिल टॉप पर छोटे छोटे सफेद फूलों को बूटी बहुत सुंदर लग रही थी।
हिल टॉप पर चलते चलते बिलकुल लास्ट पर 3 स्टीप सीढ़ी जो पहाड़ में ही थी काफी ऊंची उसको चढ़ने के बाद आ जाते है रघुपुर किले के खंडर। जिसकी मजबूत दीवार जो बड़े बड़े पत्थरों से बनाई गई थी, आज भी वैसी की वैसी है जिस में झरोखे भी है जिस से गोलीबारी की जा सकती हो।
पानी को सुरक्षित करने के लिए खास लकड़ी की बावली भी है। ऐसी 2 बावली आज भी मौजूद है, जिसको टूरिस्ट के लिए बंद किया गया, आर्किलॉजिकल डिपार्टमेंट इस पर अपनी खोज कर रहा है।
इस किले में श्रृंगा ऋषि जो श्री राम जी की बहन शांता के पति थे, इन की काफी मानता है, का मंदिर भी बना है। पहाड़ के शिखर पर किनारे पर मजबूत दीवार पर चलते चलते एक पोल आता है जिस पर रघुपुर किले की ऊंचाई के बारे में लिखा मिलता है।
काफी समय गुजारा जा सकता ऐसी शांत जगह पर। वापिस आने का मन नहीं कर रहा था, मगर हमें काफी भूख भी लगी थी इस लिए हम कुछ समय गुजारने के बाद , इतिहास की बातें करते करते नीचे की ओर आने लगे।
मैगी और ब्रेड ऑमलेट उसके साथ चाय पी। कुछ समय झूला भी झूला। फिर हम वही पर बैठे रहे, कुदरत को देखते रहे। फिर हम पहाड़ को उतरते हुए नीचे आ गए, पहले हम हॉफ रास्ते पर रुके फिर जालोरी पास तक वापिस आ गए।
ऐसे हमारा यह पहला ट्रेक वो भी 2.5 साल के बच्चे के साथ बहुत ही शानदार रहा।














ट्रेक करने के लिए ज़रूरी बातें:
1. पानी की बोटल साथ में रखे।
2. गर्म कपड़े जैसे जैकेट, टोपी भी साथ रखे।
3. पैर में कंफर्टेबल जूते पहने।
4.सनग्लासेज भी रखे क्योंकि कभी बहुत तेज आंधी चलने लगती है।
5. जो लोग किसी बीमारी का शिकार हो, वो अपने डॉक्टर की सलाह और अपनी दवाई साथ लेकर आए।
6. साथ में कुछ हल्का फुल्का खाने के लिए रखे, जैसे बिस्कुट, नमकीन, चॉकलेट,टॉफी आदि क्योंकि कभी हमारी शुगर चलते चलते कम हो जाती है।
7. इस ट्रेक के लिए 4-5 घंटे लग सकते है इस लिए अपना नाश्ता करके आए।















