त्योहारों के साथ, अप्रैल में आया नया साल, कहाँ मनाएँ ये हैप्पी न्यू ईयर?

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हमारे देश में त्योहारों की कोई कमी नहीं है, हर महीने कहीं ना कहीं, कोई ना कोई किसी उत्सव का जश्न मना ही रहा होता है। और अप्रैल में तो मानों त्योहारों की झड़ी सी लग जाती है। कहीं नए साल की शुरूआत हो रही है, तो कहीं अच्छी फसल की खुशी में ढोल-ताशे तैयार हैं। अगर आप भी भारत के इन रंगों में रंगने का मौका ढूंढ रहे हैं, तो चलिए बताती हूँ हिंदू नव वर्ष की खुशी में मनाए जाने वाले त्योहार, जिनमें रम कर आप भारत का असली रूप देख सकते हैं।

1. बैसाखी- 14 अप्रैल

Photo of त्योहारों के साथ, अप्रैल में आया नया साल, कहाँ मनाएँ ये हैप्पी न्यू ईयर? 1/1 by Bhawna Sati

बैसाखी का त्योहार उत्तर भारत में ज़ोर- शोर से मनाया जाता है, खासकर पंजाब और हरियाणा में। इस दिन सौर कैलेंडर के हिसाब से नए साल की शुरूआत तो होती ही है, वहीं ये सभी किसानों के लिए बेहद अहम है। इस दिन किसान लोग भगवान का अच्छी फसल के लिए शुक्रिया अदा कर नाच-गाने और मेले के साथ धूम मचाते हैं। वहीं सिखों के लिए बैसाखी और भी खास है क्योंकि इसी दिन सिखों के दसवे गुरू- गुरू गोबिंद सिंह ने खालसा पंथ की नींव रखी थी।

कहाँ मनाएँ बैसाखी

Photo of अमृतसर, Punjab, India by Bhawna Sati

बैसाखी मनाने के लिए पंजाब से बेहतर कोई जगह नहीं है। इस मौके पर आपको गली-गली में 'जट्टा आई बैसाखी' की आवाज़ सुनाई देगी। अमृतसर की गलियाँ जहाँ मेलों के लिए दुल्हन सी सजा दी जाती है, वहीं स्वर्ण मंदिर हरमिंदर साहिब गुरुद्वारा इन सबमें दूर से ही चमकता है। साथ ही हर जगह से गुज़रते नगर किर्तन के मधुर भजन इस त्योहार में भक्ति का तड़का लगा देते हैं। अमृतसर घूमने के लिए बैसाखी से अच्छा वक्त शायद ही कोई हो।

2. रोंगाली बिहू- 14 अप्रैल- 21 अप्रैल

श्रेय: नैचुरल हॉलिडे इंडिया

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बैसाखी को ही भारत के उत्तर पूर्व में रोंगाली बिहू के तौर पर मनाया जाता है। एक हफ्ते तक चलने वाला ये त्योहार असामी नव वर्ष और वसंत ऋतु के स्वागत की खुशी मनाया जाता है। इस उत्सव में लोक नृत्य बिहू तो बड़ा आकर्षण होता ही है, साथ ही सातों दिन एक अलग परंपरा और जोश के साथ इसे हर घर में मनाया जाता है।

कहाँ मनाएँ रंगोली बिहू

उत्तर पूर्व के इस अहम त्योहार को मनाने के लिए असम पहुँचें। यहाँ आप लोगों को अपने गाय और बैलों को हल्दी लगाते और नहलाते दिखेंगे तो वहीं आप नए कपड़े पहन कर, हाथ में चावल में बनी बियर के साथ लोगों के साथ बिहू कर कदम थिरकाएँ।

तमिल पुथांडू- 14 अप्रैल

श्रेय: टेंपल कनेक्ट

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तमिल नव वर्ष की खुशनुमा शुरूआत करने के लिए मानाया जाता है तमिल पुथांडू। इस दिन लोग अपने घरों के सामने रंगोली बनाते हैं। साथ ही साल के पहले दिन की शुरूआत अचछी हो इसलिए सुबह उठते ही सभी शुभ चीजों को देखने का रिवाज़ है, इसलिए हर घर में एक थाली में सोना, चांदी, फल, फूल और पान के पत्ते सजाकर रखे जाते हैं, जिसे सुबह उठकर देखा जाता है।

कहाँ मनाएँ तमिल पुथांडू

Photo of तमिल नाडु, India by Bhawna Sati

वैसे तो इस दिन आपको पूरे तमिल नाडू में ही सजे हुए घर और मंदिर नज़र आ जाएँगे, लेकिन आप इस दिन तंजावूर में होने वाले बेहतरीन कार फेस्टिवल का हिस्सा बन सकते हैं या फिर मदुरई में मीनाक्षी मंदिर में चिथिराई त्योहार की भव्यता अनुभव कर सकते हैं।

4. विषू- 14 अप्रैल

जिस तरह तमिल नाडू में पुथांडू मनाया जाता है, उसी तरह केरल में विषू त्योहार मनाने का रिवाज़ है। घर को रंगोली और दूसरी शुभ चीजों से सजाया जाता है और लज़ीज़ पकवान बनाए जाते हैं। ये त्योहार भी मलयाली नए साल का अच्छा स्वागत करने के लिए ही रखा गया है।

कहाँ मनाएँ विषू

श्रेय: राहुल भासी

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केरल के किसी भी हिस्से में चले जाइए और आपको लोग नए नवेले कपड़ों में पटाखे जलाते हुए इस त्योहार का स्वागत करते दिख जाएँगे। और हाँ, विषू का स्वाद चखने के लिए होम स्टे चुनें तो ज्यादा बेहतर होगा क्योंकि इस दिन आपको नीम औऱ गुड़ से बनी कुछ अनोखा खाना जो खाने को मिलेगा।

5. राम नवमी- 14 अप्रैल

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राम नवमी पूरे उत्तर भारत में भगवान राम के जन्मदिन की खुशी में मनाई जाती है। 8 दिन के नवरात्रों के बाद 9वे दिन लोग अपना व्रत खोलते और छोटी-छोटी कन्याओं को भोजन कराते हैं। इस दिन आपको सुंदर सजे मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ दूर से ही नज़र आ जाएगी।

कहाँ मनाएँ राम नवमी

Photo of अयोध्या, Uttar Pradesh, India by Bhawna Sati

वैसे तो रामनवमी को देश के कई भागों में ज़ोर-शोर से मनाया जाता है लेकिन राम लला की जन्मभूमि अयोध्या में इस जश्न का रंग ही अलग होता है। सरयू नदी में शाही स्नान से दिन की शुरुआत कर मंदिरों में होते रंगा-रंग सत्संगों में शामिल हों या गलियों से गुज़रती भव्य झांकियों का हिस्सा बने, राम नवमी का असली मज़ा तो यहीं है।

तो आप कहाँ मना रहें हैं अपना ये नया साल?

अगर आप भी इस तरह की जानकारी या अनुभव रखते हैं तो उसे Tripoto परिवार के साथ बाँटें और अपनी कहानियाँ यहाँ लिखें।

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