VADODRA गुजरातियों का वैभव जाने से पहले एक बार ज़रूर पढ़े ! #indiain5k #bestoftravel 

Tripoto
10th Nov 2018
Photo of VADODRA गुजरातियों का वैभव जाने से पहले एक बार ज़रूर पढ़े ! #indiain5k #bestoftravel by Afsarul haq

कुदरत की कलाकारी, सुन्दर भव्य इमारतें, गरबा नृत्य की अनूठी प्रस्तुति, जिन्हे देखने के लिए देश व दुनिया से बड़ी संख्या में लोग आते है। इन दिनों यह शहर " स्टैचू ऑफ़ यूनिटी " के कारण ख़ास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जिसके बारे में कहा जा रहा है की यह भविष्य में पर्यटन को एक अच्छा आयाम देगी।

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वडोदरा एक वक़्त तक गायकवाड राजघराने की रियासत थी कहते है गायकवाड राजघराना अपनी रियासत के उद्दार के लिए बहुत सजग था इसमें सबसे पहले जो नाम आता है वो है यहाँ के तृतीय महाराजा सयाजीराव गायकवाड इस घराने ने वक़्त को समझते हुए न सिर्फ अंग्रेजों से मित्रतापूर्ण सम्बन्ध रखे, बल्कि अपनी प्रजा के लिए भी बहुत सारे काम किये, जैसे – महिला शिक्षा, विधवा विवाह, वित्तीय सुधार, बैंक ऑफ़ बड़ोदा की स्थापना आदि !

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लक्ष्मी विलास पैलेस के अंदर का दृश्य
Day 1

शहर की पहचान : लक्ष्मी विलास पैलेस को अगर वडोदरा की पहचान कहा जाए तो गलत नही होगा सूर्यास्त के सुनहरे उजाले में डूबा यह महल अपने राजसी वैभव की पहचान बरक़रार रखे हुए है। इस शानदार पैलेस का निर्माण 1890 में महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ ने करवाया था। डिज़ाइन बनाने की ज़िम्मेदारी अँगरेज़ आर्किटेक्ट चार्ल्स मंट को दी गयी थी। लक्समी विलास पैलेस इंडो - सारसेनिक रिवाइवल आर्किटेक्चर में बनी एक ऐसी संरचना है, जिसे दुनिया के आलिशान महलों में शुमार किया जाता है। इस पैलेस की नींव 1880 में राखी गयी थी और इसका निर्माण कार्य 1890 में पूरा हुआ। इस महल की संरचना में राजस्थानी, इस्लामिक और विक्टोरियन आर्किटेक्चर का अनोखा संगम देखने को मिलता है।

नजरबाग पैलेस

नज़रबाग़ पैलेस का एक दृश्य !

Photo of Nazar Baug Palace, Bajwada, Chhipwad, Vadodara, Gujarat, India by Afsarul haq

गायकवाड़ राजवंश के शासन के दौरान यहाँ के राजसी ठाट देखते ही बनते थे। इसका एक उदाहरण हमें देखने को मिलता है नजरबाग पैलेस में , जिसे मल्हार राव गायकवाड़ ने सन 1721 में बनवाया था। कहा जाता है कि यहाँ राज परिवार के कीमती सामान और सोने के हथियार रखे जाते थे। यहाँ 125 कैरेट का विशाल हीरा भी हुआ करता था। यह भी कहा जाता है की यहाँ रखी सोने की बन्दूंकों को वज़न 100 किलोग्राम तक होता था।

Day 2

गायकवाड़ वडोदरा गोल्फ क्लब

गोल्फ खेलने के शौकीनों के लिए यहाँ मौजूद है गायकवाड़ वडोदरा गोल्फ क्लब, जिसे महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ के पौत्र महाराजा प्रताप सिंह ने 1930 में स्थापित किया था। शुरू में यह गोल्फ कोर्स विदेशी मेहमानो के लिए ही बनाया गया था। आज़ादी के बाद 1990 में इसका पुनर्निर्माण करके आम लोगों के लिए खोल दिया गया।

पश्चिम भारत का सबसे बड़ा पार्क

यहाँ एक चिड़ियाघर है, जिसे महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ ने 1879 में आम जनता को समर्पित किया था। यह अभ्यारण शहर के बीचोंबीच में 113 अकड़ में फैला है। इस पार्क में 98 प्रकार की वनस्पतियों और 167 प्रकार के जीव - जंतु पाए जाते है। यह पश्चिम भारत का सबसे बड़ा पार्क है। यहाँ संघ्रालय , फ्लावर क्लॉक , टॉय ट्रैन आदि का भी आनंद ले सकते है।

सुरसागर लेक

सूरसागर नदी का दृश्य

Photo of Sur Sagar Lake, Mandvi, Vadodara, Gujarat by Afsarul haq

वडोदरा के लोग सूरसागर लेक को चंदन तालाब भी कहते है। इस लेक के ठीक मध्य में भगवान् शिव की 120 फ़ीट ऊँची मूर्ति है। इस लेक के चारों और बैठने की उत्तम व्यवस्था है। यह जगह शाम के वक़्त और भी सुहानी लगती है। आप यहाँ बोटिंग भी कर सकते है। यह स्थानीय लोगो का पसंदीदा पिकनिक स्पॉट है।

Day 3

वडोदरा या बड़ौदा

रात के समय जगमाता वडोदरा

Photo of Gujarat, India by Afsarul haq

वडोदरा को अक्सर लोग बड़ौदा के नाम से भी पुकारते है। दरअसल, आज का वडोदरा पुराने ज़माने का बड़ौदा। दोनों एक ही है। पहले इसे बड़ौदा के नाम से ही जाना जाता था। इसका यह नाम पड़ने के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है। कहते है की यहाँ पर बड़ के पेड़ बड़ी तादाद में पाए जाते थे ,इसलिए इसे बड़ोधरा कहा जाने लगा यानी ऐसी धरा, जहाँ बहुत सारे बड़ (बरगद) के पेड़ हों। इस तरह इस सहर का नाम बड़ौदा और बाद में वडोदरा हो गया।

गरबे के दीवाने इसे भी जाने

गरबा नृत्य में झूमते लोग

Photo of Vadodara, Gujarat, India by Afsarul haq

हर वर्ष नवरात्र के दिनों में गरबा खेलने यहाँ लाखों लोग जमा होते है। पूरे वडोदरा में जगह - जगह गरबा के लिए विशेष पंडाल सजाये जाते है। यहाँ का "यूनाइटेड गरबा " पूरी दुनिया में जान जाता है। एक समय में 40 से 45 हज़ार लोगों द्वारा गरबा नृत्य करने के लिए यूनाइटेड गरबा का नाम गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी आ चूका है।

सेव उसाल और टमटम का स्वाद

अहमदाबाद के माणिक चौक की तरह आपको वडोदरा में रात्रि बाजार मिलेगा। अगर आप स्ट्रीट फ़ूड के शौक़ीन है तो यह जगह आपको ज़रूर पसंद आएगी। अगर आपको चटपटा खाना पसंद है तो वडोदरा में सेव उसाल ज़रूर खाएं। यहाँ सियाजी विश्विद्यालय के आसपास आपको बहुत सारे खाने - पीने के स्टाल मिल जाएंगे। यहाँ की पुदीने वाली चाय पीना बिलकुल मत भूलें। वडोदरा में गुजरती खाने तो आपको मिलेंगे ही साथ में यहाँ महाराष्ट्र के खाने की भी वैराइटी मिल जाएगी। यहाँ पोहा , दाबेली , मसल पाँव , मठिया आदि भी शौक से खाये जाते है।

Day 4

रौनक बाजार की

ग्राहकों के इंतज़ार में बैठा स्थानीय दूकानदार

Photo of Vadodara, Gujarat, India by Afsarul haq

वडोदरा का सबसे पुराना  बाजार है न्याय मंदिर, जिसे राजमाता ने बनवाया था। पूर्व में यहाँ न्यायलय होने के कारण इसका यह नाम पड़ा। यहाँ एक और प्रसिद्द मार्किट है, जिसका नाम खंडेराव मार्किट है। कहते है इस बाजार में जन्म से लेकर मृत्यु तक का हर सामान मिलता है। इस बाजार का निर्माण ही राजपरिवार ने ही करवाया था। वडोदरा का बड़ा बाजार है अलकापुरी जहाँ से आप बड़े - बड़े ब्रांड्स की चीज़े खरीद सकते है। नवरात्र के समय अगर आप वडोदरा आएंगे तो मंगल बाजार में गरबा वस्त्र के बाजार सजे मिलेंगे। यहाँ से आप गुजरती पारंपरिक परिधान खरीद सकते है। यह शहर अपनी प्रिंटेड फैब्रिक के लिए भी मशहूर है। सिल्क और कॉटन दोनों ही प्रकार के कपड़ों पर ख़ास तरह की छपाई की जाती है।

कुछ रोचक तथ्य ----

यह गुजरात का तीसरा सबसे बड़ा शहर है , जो कि राज्य की सांस्कृतिक राजधानी कहलाता है।

यह शहर विश्वामित्री नदी के तट पर स्थित है।

लक्समी विलास पैलेस में तसवीरें क्लिक करना मना है। यह एक प्राइवेट पैलेस है, जिसे देखने के लिए 150 रुपये का टिकट लगता है।

भारत की पहली नैरोगैज रेलवे लाइन 1862 में 33 किलोमीटर लम्बी दभोई - मियागाम लाइन बड़ौदा स्टेट ने चलवाई थी।

बड़ोदरा पैलेस के बारे में कहा जाता है कि यह लंदन में स्थित बकिंघम पैलेस से तीन गुना बड़ा है।

कैसे पहुंचे ---

यहाँ का नज़दीकी हवाई अड्डा वडोदरा एयरपोर्ट है जिसकी दूरी शहर से करीब 6 किलोमीटर है।

वडोदरा रेलवे स्टेशन देश के रेलमार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है आप यहाँ कहीं से भी आ सकते है।

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