Ajanta Caves 1/undefined by Tripoto
9:00 AM - 3:00 PM
8:00 AM - 5:00 PM except Mondays
Cave tours
Rs 10 for Indians, Rs 250 for foreigners and Rs 25 for cameras

Ajanta Caves

This is also a cave complex around Aurangabad unlike the Ellora Caves which are inside Aurangabad. These date back to 100 BC and are around 600 years older than the Ellora Caves. There is a huge horseshoe shaped rock which encompasses all thirthy Buddhist Chaityas and Viharas which have incredible sculptures and paintings on them which look much ahead of the time. The sculptures here apart from Buddhism represent exotic facts about the relationship between a man and his woman. The paintings and sculptures of men and women in various poses look extremely graceful and the popularity of Buddhism is evident here too. The standing statue of Sahyadri style Buddha is a remarkable attraction here. These caves were almost accidentally discovered in the 19th century by a group of British officers out for some survey here. The caves are now under the supervision of the archeological Survey of India.
Dr. Yadwinder Singh
अजंता की गुफाएं भारतीय कला के शानदार नमूने हैं| अजंता में बड़े बड़े पहाड़ो को काटकर बनाया गया है| अजंता की गुफाओं में बहुत सारे चित्र बनाए गए हैं| अजंता में आपको दो तरह की गुफाओं को देखने का मौका मिलेगा| एक तो स्तूप गुफा और दूसरी विहार गुफा | स्तूप गुफा में प्राथना की जाती थी और विहार गुफा में भिक्षु रहते थे| अजंता की गुफाओं में इनकी छत, दीवार पर अनेक चित्र बनाए गए हैं| इन चित्रों में महल, किसान, सम्राट, भिखारी आदि दिखाई देगें| इन चित्रों में पेड़, पौधे, जानवर आदि भी बने हुए हैं| 16 नंबर गुफा में दीवार पर मरती हुई राजकुमारी का चित्र है| गुफा नंबर 17 में भी शानदार चित्र बने हुए हैं| अजंता के चित्र हमें उस समय की जीवन शैली को दिखाते है| अजंता के चित्रों की रंग योजना बहुत सुंदर है| इस चित्र कला का महत्व इतना है कि इस चित्र शैली का नाम ही अजंता शैली पड़ गया है| पूरे एशिया महाद्वीप पर अजंता की कला का प्रभाव पड़ा| पंजाब के प्रसिद्ध घुमक्कड़ मनमोहन बावा जी जिनकी बहुत सारी किताबें भी लिखी हुई है घुमक्कड़ी के ऊपर | मनमोहन बावा जी ने अजंता, एलोरा और एलीफेंटा के बारे में कहा है अगर आप भारत में रहते हुए इन तीनों जगह पर नहीं जाते तो आप बदकिस्मत हो| तो दोस्तों आप भी भारतीय कला की इस शानदार कला को देखने जरूर जाना अजंता गुफाओं को देखने के लिए| मैं अजंता की गुफाओं को देखने के बाद औरंगाबाद के लिए रवाना हो गया| कैसे पहुंचे- अजंता की गुफाएं महाराष्ट्र के जलगांव से 60 किमी और औरंगाबाद से 100 किमी दूर है| आप इन दोनों शहरों से अजंता गुफाओं को देखने के लिए जा सकते हो|
Dr. Yadwinder Singh
मुझे होमियोपैथी डाक्टरी में मास्टर डिग्री करते समय महाराष्ट्र में आने जाने और रहने का मौका मिला| जब मैं पंजाब से जाता था तो मन में था कि महाराष्ट्र की ईतिहासिक जगहों की भी यात्रा की जाए| इसी तरह मैंने भारतीय कला के शानदार नमूने अजंता और एलोरा की गुफाओं को भी देख लिया| एक बार मैं पंजाब मेल रेलगाड़ी से महाराष्ट्र के मनमाड़ जा रहा था| मनमाड़ रेलवे स्टेशन सुबह तीन चार बजे के आसपास आता है उस दिन किसी वजह से पांच छह घंटे लेट चल रही थी| मुझे मनमाड़ से परभणी के लिए रेलगाड़ी पकड़नी थी | मेरी गाड़ी पहले से ही लेट चल रही थी तो मनमाड़ से मिलने वाली निकल जानी थी | मैंने रेलगाड़ी में बैठे ही मन बना लिया कयों न जलगांव उतर कर अजंता की गुफाओं को देखते हुए औरंगाबाद जाया जाए और फिर वहाँ से रात की बस लेकर सुबह अपने कालेज पहुँच जायूगा| इस तरह मेरी अजंता गुफाओं को घूमने के लिए कोई भी तैयारी नहीं थी बस रेलगाड़ी लेट होने की वजह से जलगांव उतर कर अजंता जाने का पलान बन गया| जलगांव से अजंता की गुफाओं की दूरी 60 किमी के आसपास है| जलगांव रेलवे स्टेशन पर उतर कर तैयार हो कर मैं महाराष्ट्र रोडवेज की सरकारी बस में बैठ कर अजंता की गुफाओं को देखने के लिए चल पड़ा| बस ने मुझे अजंता गुफाओं से दो किलोमीटर पहले एक मोड़ पर उतार दिया| दोपहर का समय था उस जगह पर पूरी बस में मैं और एक मराठी लड़का दो लोग ही उतरे थे| बस से उतर कर हम दोनों पैदल ही अजंता की गुफाओं की तरफ चल पड़े| हम दोनों दोस्त बन गए| वह भी जलगांव किसी काम से गया था और रास्ते में आते समय अजंता की गुफाओं को देखने जा रहा था| हम दोनों ने एक साथ ही अजंता की गुफाओं को घूमा था|
Ajinkya Redij
Left hotel at 7 am and reached Ajanta at around 10:30 am. Route was foggy for about 80% of the entire stretch with low road visibility. Link to the video is given in the comments below. The roads are very bad for the last 10 kms. Car parking and MTDC restaurant is available at the entrance. There is a government bus shuttle available every 15 mins from the entrance upto the caves. As per the local tourist guides, caves 1, 17 and 26 are not to be missed. From Ajanta, we left for Lonar at 2 pm and reached by around 5 pm. We had an overnight stay at our hotel. There is a MTDC resort available in Lonar.
Surbhi Somani
Ajanta caves is UNESCO World Heritage site located at 110 kms distance from Aurangabad, near Ajanta village has Buddhist rock cut caves and monasteries which is cherished for their wall paintings. It is one of the finest examples of ancient Indian art and Sculpture.Group of 30 caves were excavated from 2nd and 1st centuries BC that includes worship halls and monasteries depicting life, death and rebirth of Shakyamuni Gautam Buddha. These caves are carved into 75m long rock giving it a panaroma view.Timings- 9a.m. to 5p.m( Monday closed)Entry charges- Rs 10/-( Foreigners Rs 250/-)
The Ajanta paintings recount the life of Lord Buddha, including his previous earthly experiences and the Jataka tales. The caves are divided into two chronological phases, the early Buddhist caves (2nd century BCE to 1st century CE) and the Mahayana caves (5th century CE). Since Ajanta is located on the ancient trade route of Dakshinapatha, the early phase of Ajanta was funded mostly by traders. The second phase received patronage from the Vakatakas. Stories of these donors are inscribed and painted. The narrative murals about Lord Buddha, Avadana stories of Bodhisattva, Jataka stories and panels based on Mahayana themes from Vipulya Sutras are extremely interesting. The monasteries were in operation till 8th century CE but were lost and forgotten till 1819.