हेमकुंड साहिब यात्रा 2023 An Lifetime Experience

Tripoto
Photo of हेमकुंड साहिब यात्रा 2023 An Lifetime Experience by Ranjit Sekhon Vlogs

बहुत देर से हेमकुंड साहिब जाने की इच्छा दी लेकिन हर बार किसी न किसी कारण जा नहीं सके | इस बार हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा साहिब के खुलने की तारीख 20 मई थी , जैसे ही पता चला हमने हेमकुंड साहिब जाने के लिए ऋषिकेश की ट्रेन बुक करवा ली | आधी रात की ट्रेन थी हम दूसरे दिन सुबह ऋषिकेश पहुंच गए और भी काफी संगत आई हुई थी जो हेमकुंड गुरुद्वारा खुलने पर पहले ही दिन दर्शन के लिए जाना चाहती थी | हमने ऋषिकेश जा के गुरुद्वारा साहिब में कमरा ले लिया जो हमें 1100 रूपये में मिला दूसरे दिन वहां से गोबिंद घाट के लिए टैक्सी ली जो सुबह 6 वजे ऋषिकेश से चली और 1.30 पे गोबिंद घाट गुरद्वारे पहुंच गई |

हेमकुंड साहिब का इतिहास

हेमकुंड साहिब उत्तराखंड के चमोली जिले में एक सिख पूजा स्थल है। यह स्थान सिख धर्म के दसवें गुरु- श्री गुरु गोबिंद सिंह की पिछले जन्म के भक्ति की याद में है। गुरु जी ने स्वयं अपनी कृति 'दशम ग्रन्थ' में इस स्थान का उल्लेख किया है।

'हेमकुंड साहिब' नाम 'हेम' शब्द 'हिम' और 'कुंड' का अर्थ 'जलाशय या तालाब' से आया है, इसलिए इसका अर्थ है 'बर्फ का जलाशय'। ऐसा इसलिए है क्योंकि तीर्थ स्थल का स्थान बर्फ से ढके हिमालय के बीच है और इसके सामने 'कुंड' का पानी बर्फ की तरह ठंडा है।

हेमकुंड साहिब कैसे जाएं

हेमकुंड साहिब ट्रैक के लिए 3 स्टैप हैं सबसे पहले आपको हरिद्वार या ऋषिकेश आना होगा |

फिर ऋषिकेश या हरिद्वार से आपको गोबिंदघाट तक टैक्सी या बस से आना होगा | उसके आगे फिर शुरू होता है पैदल सफर जो पहले 10 किलोमीटर गोबिंदघाट से गोबिंद धाम और फिर 6 किलोमीटर गोबिंद धाम से गुरद्वारा हेमकुंड साहिब

गुरुद्वारा गोबिंद धाम के लिए ट्रैक पर जाने के लिए 2 वजे का लास्ट समय होता है इस लिए हमने जल्दी जल्दी में कपड़े बदले और जो ज्यादा सामान था उसे यहां गुरुद्वारा साहिब में जमां करवा दिया बाकि जो जरूरत का सामान था उसे साथ लेकर हम 2.30 पे ट्रैक के लिए निकल पड़े |

हमारे साथ 2 दिल्ली के लड़के भी साथ चल पड़े | टैक्सी का किराया शेरिंग में 1000 रूपये है और बस का 600 रुपये है | गोबिंद घाट से आगे 4 किलोमीटर और टैक्सी सेआप जा सकते हो जिसके 50 रूपये लगते हैं|

गोबिंद घाट से गोबिंद धाम

पुलना गांव से शुरू होता है आपका पैदल ट्रैक जो की 10 किलोमीटर का है , यह ट्रैक बहुत ही खूबसूरत है रास्ते में आपको लक्ष्मण गंगा नदी के साथ साथ चलना होता है | इस ट्रैक में आपको और भी बहुत संगत मिलती है जो गुरुद्वारा साहिब के दर्शन के लिए जाती है जिसमे आपको बच्चे बूढ़े और जवान सभी देखने को मिलेंगे | रास्ते में जगह जगह पर गुरुद्वारा ट्रस्ट के द्वारा शैलटर भी बनाये गए हैं यहां आप अगर बारिश आये तो रुक सकते हैं | इस ट्रैक पे आपको कुदरती नज़ारे देखने को मिलते हैं | चारों तरफ़ हरिआली ही हरिआली और विशाल पहाड़ों के बीच में से जाता यह ट्रैक |

इस ट्रैक में रास्ते में आपको लोकल लोगों के द्वारा बनाई गई कुछ छोटी छोटी दुकानें भी मिलेंगी यहां से आप खाने पीने का सामान जैसे चाय , मैगी बिस्किट आदि खा सकते हैं | गोबिंद घाट से गोबिंद धाम गुरुद्वारा तक पहुंचने के लिए आपको 4-5 घंटे लगते हैं बाकि आपके चलने पे है के आप कितना चल सकते हो |

हमारे साथ वाले लड़के बहुत धीरे चल रहे थे जिस कारण हमें गोबिंद धाम पहुंचते काफी अँधेरा हो गया , इस रास्ते पे भालू आदि जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है ऐसी लिए 2 वजे के बाद ऊपर जाने की इज़ाज़त नहीं है | गोबिंद धाम आकर हमने गुरुद्वारा साहिब में बैड ले लिए जो हॉस्टल के जैसे बंक बैड होते हैं यहाँ एक बैड पे आप 4 लोग सो सकते हैं | ये बैड और कंबल आपको यहां गुरुद्वारा साहिब के तरफ से फ्री मिलते हैं लेकिन अगर आपको कमरा लेना हो तो वो पेड होता है | यहां बहुत ठण्ड होती है इस लिए आप अपने साथ गर्म कपड़े और रेनकोट वगैरा जरूर लेकर आएं | रहने खाने का इंतज़ाम यहां गुरुद्वारा साहिब की और से बहुत बढ़िया है |

गोबिंद धाम से गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब

अगले दिन का ट्रैक 6 किलोमीटर का है यह ट्रैक पहले 10 किलोमीटर से भी ज्यादा मुश्किल है क्योंकि यहां से एक तो चढ़ाई तीखी हो जाती है और दूसरा आधा रास्ता पूरा बर्फ़ से भरा हुआ है |

हमने आपने ट्रैक सुबह 5 वजे से शुरू किया , बहुत सी संगत हमारे साथ जा रही थी क्योंकि पहले दिन दर्शन करने का लोगों में बहुत उत्साह था |

गुरुद्वारा साहिब से निकलते ही आगे घोड़े खचर वाले भी बहुत थे जो 1500 रूपये में आगे ग्लेशियर तक यहां से बर्फ़ शुरू होती है वहां तक लेकर जाते हैं |

इसके बिना कुछ लोग अपनी पीठ पर बनी टोकरी में बिठा कर बच्चों , बज़ुर्गों और बीमार लोगों को लेकर जाते हैं लेकिन उनका किराया 3000 -4000 रूपये होता है जो सही भी है क्योंकि उनको अपनी पीठ पर उठा के पैदल चला होता है जो के बहुत मुश्किल काम है | लेकिन हमने पैदल ही जाने का फैसला किया |

हम पहले दिन ही गए थे इस लिए अभी बर्फ़ बहुत ही ज्यादा थी | पहले तीन किलोमीटर के बाद पैर जगह जगह फिसलने लगे वैसे तो आर्मी के जवानों ने बर्फ़ को काट के बहुत अच्छा रास्ता बनाया हुआ था लेकिन फिर भी चलने में बहुत दिक्क्त हो रही थी | आखिरकार गिरते फिसलते हम 11 वजे गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब पहुंच गए | गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब से जो नज़ारा है वो आपको शब्दों में बताना मुश्किल है चरों तरफ़ बर्फ़ ही बर्फ़ दिखाई देती है |

जिधर देखो सफेद चादर सी नज़र आती है और इस बर्फ के बीच में बना यह खूबसूरत सा गुरुद्वारा साहिब |

पहले दिन के कारण आज यहां गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश होना था इस लिए फौजी बैंड के साथ फूलों के बरसात के साथ गुरुद्वारा साहिब में गुरु साहिब का प्रकाश किआ गया | सारे परबत बोले सो निहाल , सत श्री अकाल के जयकारों के साथ गूँज उठे | हमने भी माथा टेका और कीर्तन श्रवण किया |

सरोवर पूरी तरह जमां हुआ था सिर्फ एक जगह पे खोद के एक गड्डा जैसे बनाया हुआ था यहां पे सब लोग इशनान कर रहे थे |

सारी जगह बर्फ़ से ढकी होने के बाद , इतनी कठिन जगह भी सेवदारों के गरमा गर्म खिचड़ी और चाय का लंगर लगाया हुआ था | इतनी ऊंचाई पर यहां चारों तरफ बर्फ़ ही बर्फ़ थी इस कड़कड़ाती ठंड में खिचड़ी खाने का अलग ही मज़ा था | मौसम खराब होने वाला था स्पीकर में बाबा जी ने बोल दिया के सभी संगत जल्दी से वापसी का सफ़र शुरू कर दे क्योंकि बर्फ़बारी शुरू होने वाली है |

यह गुरुद्वारा बहुत ऊंचाई पे होने के कारण यहां रहने की इजाजत नहीं है आपको दर्शन करके 2-3 वजे तक वापसी गोविन्द धाम आना होता है , लेकिन कुछ लोग समय से माथा टेक के सीधा गोबिंद घाट भी वापिस आ जाते हैं क्योंकि चढ़ने से वापसी आना आसान होता है | हमारा यह सारा ही सफर बहुत मज़ेदार रहा बहुत से लोगों से मिले , कुदरत के साथ रहने , सुबह शाम पहाड़ों में गुज़ारने का एक अलग ही मज़ा है |

अगर आप भी ट्रैकिंग के शौकीन हैं और कुदरती नज़ारों को देखना चाहते हैं तो हेमकुंड साहिब की यात्रा जरूर करें लेकिन याद रहे इसके लिए आपको शरीरक और मानसिक रूप से मज़बूत होना पड़ेगा | यात्रा करने से एक महीना पहले से सैर और दौड़ना शुरू कर दें तांकि आपका शरीर मज़बूत हो | बाकि आपको अगर कोई दिक्क्त हो तो आप घोडा या टोकरी में बैठ के जा सकते हैं | इसके बिना यहां पे हैलीकाप्टर के सर्विस भी है जिस में आप गोबिंद घाट से गोबिंद धाम तक 3200 रूपये में जा सकते हो |

तो यह था हमारा हेमकुंड साहिब का सफर अगर आप इसके बारे में और जानकारी चाहते हैं तो इस पुरे सफ़र का विडिओ आप मेरे YouTube चैनल Ranjit Sekhon Vlogs पे देख सकते हो |

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