प्रकृति की गोद में किजीए, शिव औैर साई का दर्शन रांची

Tripoto
2nd Jan 2019
Photo of प्रकृति की गोद में किजीए, शिव औैर साई का दर्शन रांची by Pawan Singh Rahore
Day 1

नये साल में हर कोई हर्षोल्लास में रहना चाहता है. इसके लिए कोई ईश्वर की शरण में जाता है, तो कोई प्राकृतिक सौंदर्य का भरपूर लाभ उठाना चाहता है. राजधानी रांची भी अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए मशहूर है. घने जंगल, ऊंची पहाड़ी, चारों तरफ फैली हरियाली और कई जलप्रपात सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए काफी हैं. रांची जिला अंतर्गत देवगांव पंचायत के सरसा ग्राम में स्थित है साई मंदिर. सरसा गांव की खूबसूरत वादियों में बसे साई मंदिर में सालोंभर श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने आते हैं. गुरुवार और रविवार को यहां काफी भीड़ होती है. छह जनवरी, 23 अप्रैल और गुरु पूर्णिमा के मौके पर यहां विशेष कार्यक्रम का आयोजन होता है. 23 अप्रैल, 1994 को यहां साई धाम के निर्माण में स्थानीय रैयतों ने अपनी जमीन दी थी. मुख्य द्वार पर स्थित शिलापट्ट में जमीन दान करनेवालों के नाम लिखे हुए हैं. 35 एकड़ में फैले साई धाम की चारों तरफ शांति ही शांति मिलती है. मंदिर के आस-पास फूल के बगीचे और बागान हैं. बच्चों के खेलने के लिए झूले भी हैं. मुख्य मंदिर के अंदर साई बाबा की प्रतिमा है, जहां पूजा-अर्चना होती है. मंदिर के आसपास घास के मैदान हैं, जहां बैठ कर आप शांति महसूस कर सकते हैं. मंदिर के बनने से सरसा गांव की अर्थव्यवस्था में काफी सुधार आया है. जिन स्थानीय रैयतों ने अपनी जमीन दी थी, वो मंदिर की देखरेख में शामिल हैं. इसके अलावा मंदिर के सामने कई स्थानीय लोगों ने पूजा सामग्री की दुकान खोली है. मंदिर के बाहर लगभग बीस लोग सब्जी बेचते हैं. बाहरी सैलानियों के संपर्क में आकर ग्रामीणों के रहन-सहन में काफी सुधार हुआ है. साई मंदिर में रात में रुकने की भी व्यवस्था है, लेकिन खाने-पीने की व्यवस्था खुद से करनी होगी, हालांकि मंदिर में रात में हर रोज खाना बनता है. रात में रुकने के लिए एक कमरे के लिए 300 रुपये देने होंगे. रांची-गुमला मुख्य पथ पर स्थित बेड़ो प्रखंड मुख्यालय से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है साई धाम. यहां पहुंचने के लिए सबसे पहले बेड़ो पहुंचना होगा. बेड़ो से जामटोली जानेवाले रास्ते में 12 किलोमीटर अंदर जाने के बाद सरसा गांव में प्रवेश करते ही मंदिर में जाने के लिए द्वार बना हुआ है. यहां से बायें मुड़ कर सीधे साई मंदिर पहुंच सकते हैं. रांची से बेड़ो की दूरी लगभग 35 किलोमीटर है और वहां से साई मंदिर की दूरी लगभग 12 किलोमीटर है

Sai temple

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Parking and marketplace

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Hawan Kendra

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Park near sai temple

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Main entrance gate form road

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पौराणिक कथाओं को समेटे आपका इंतजार कर रहा घघारी धाम

लापुंग प्रखंड की देवगांव पंचायत में साई धाम के अलावा एक और दर्शनीय स्थल है घघारी धाम. यहां के हरे-भरे जंगल, छोटे पहाड़ और घघारी नदी का उद्गम स्थल सैलानियों को आकर्षित करता है. यहां देखने के लिए प्राचीन शिवलिंग है, जो तीन खंडों में बंटा हुआ है. इसके अलावा यहां हनुमान मंदिर और पार्वती माता का मंदिर भी है. अन्य दो मंदिरों का निर्माण कार्य यहां चल रहा है. बारिश के मौसम में यहां झरने से गिरता हुआ पानी काफी मनमोहक होता है. वैसे तो यहां पर श्रद्धालु सालों भर घूमने के लिए आते हैं, लेकिन 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन यहां मेला का आयोजन होता है. सावन महीने में भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने के लिए काफी संख्या में यहां श्रद्धालु आते हैं. यहां एक गुफा भी है, जो देखने लायक है.घघारी धाम शिव मंदिर के पुजारी तुलसीदास गोस्वामी बताते हैं कि वो कई दशकों से यहां पूजा करते आ रहे हैं. उनसे पहले उनके पूर्वज यहां पूजा करते थे. इस मंदिर में आनेवाले श्रद्धालु यहां से संतुष्ट होकर जाते हैं. उनकी मन्नतें यहां पूरी होती हैं. इस जगह की खासियत है कि यहां शांति का अनुभव होता है. पास में ही एक जंगल है, जिसे रामपुर जंगल के नाम से जाना जाता है. यहां आने के लिए सितंबर से लेकर फरवरी माह तक का महीना उपयुक्त माना जाता है. पिकनिक मनाने के लिए यह एक बेहतर जगह है, लेकिन ऊंचाई से पानी गिरने के कारण यहां का दृश्य काफी मनोरम लगता है. ऊंचाई से पानी गिरने के कारण नीचे काफी गहरा रहता है, इसलिए यहां नहाने से परहेज करें. खाने-पीने की काफी अच्छी व्यवस्था नहीं है. इसलिए अपना खाना खुद लेकर जायें. रात में ठहरने के लिए दो कमरे बने हैं, लेकिन सुविधाजनक नहीं है. पहाड़ और नदी होने के कारण यहां की जमीन काफी ऊंची-नीची है, इसलिए चलने-फिरने में सावधानी जरूर बरतें. यहां पहुंचने के लिए आपको रांची-गुमला मुख्य पथ होते हुए बेड़ो पहुंचना होगा. बेड़ो से 12 किलोमीटर दूर जामटोली जाने के रास्ते पर यह धाम मिलेगा. 

पौराणिक कथाओं को समेटे आपका इंतजार कर रहा घघारी धाम लापुंग प्रखंड की देवगांव पंचायत में साई धाम के अलावा एक और दर्शनीय स्थल है घघारी धाम. यहां के हरे-भरे जंगल, छोटे पहाड़ और घघारी नदी का उद्गम स्थल सैलानियों को आकर्षित करता है. यहां देखने के लिए प्राचीन शिवलिंग है, जो तीन खंडों में बंटा हुआ है. इसके अलावा यहां हनुमान मंदिर और पार्वती माता का मंदिर भी है. अन्य दो मंदिरों का निर्माण कार्य यहां चल रहा है. बारिश के मौसम में यहां झरने से गिरता हुआ पानी काफी मनमोहक होता है. वैसे तो यहां पर श्रद्धालु सालों भर घूमने के लिए आते हैं, लेकिन 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन यहां मेला का आयोजन होता है. सावन महीने में भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने के लिए काफी संख्या में यहां श्रद्धालु आते हैं. यहां एक गुफा भी है, जो देखने लायक है.घघारी धाम शिव मंदिर के पुजारी तुलसीदास गोस्वामी बताते हैं कि वो कई दशकों से यहां पूजा करते आ रहे हैं. उनसे पहले उनके पूर्वज यहां पूजा करते थे. इस मंदिर में आनेवाले श्रद्धालु यहां से संतुष्ट होकर जाते हैं. उनकी मन्नतें यहां पूरी होती हैं. इस जगह की खासियत है कि यहां शांति का अनुभव होता है. पास में ही एक जंगल है, जिसे रामपुर जंगल के नाम से जाना जाता है. यहां आने के लिए सितंबर से लेकर फरवरी माह तक का महीना उपयुक्त माना जाता है. पिकनिक मनाने के लिए यह एक बेहतर जगह है, लेकिन ऊंचाई से पानी गिरने के कारण यहां का दृश्य काफी मनोरम लगता है. ऊंचाई से पानी गिरने के कारण नीचे काफी गहरा रहता है, इसलिए यहां नहाने से परहेज करें. खाने-पीने की काफी अच्छी व्यवस्था नहीं है. इसलिए अपना खाना खुद लेकर जायें. रात में ठहरने के लिए दो कमरे बने हैं, लेकिन सुविधाजनक नहीं है. पहाड़ और नदी होने के कारण यहां की जमीन काफी ऊंची-नीची है, इसलिए चलने-फिरने में सावधानी जरूर बरतें. यहां पहुंचने के लिए आपको रांची-गुमला मुख्य पथ होते हुए बेड़ो पहुंचना होगा. बेड़ो से 12 किलोमीटर दूर जामटोली जाने के रास्ते पर यह धाम मिलेगा. 

View from Ghaghari dham

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Old shiv temple Ghaghari

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Cave with many stories

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View from top side

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Main gate from road

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Lord hanuman temple

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Wooden pool used in rainy season

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Road and forest view

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