हिमाचल प्रदेश के वो ग्लेशियर, जहां पहुंचना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है

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Photo of हिमाचल प्रदेश के वो ग्लेशियर, जहां पहुंचना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है by Rishabh Dev

पश्चिमी हिमालय की गोद में बसा हिमाचल प्रदेश पहाड़ों और नदियों से घिरा हुआ है। हिमाचल प्रदेश में कई खूबसूरत और बेहतरीन जगहें हैं। हिमाचल प्रदेश प्रदेश को देवभूमि भी कहा जाता है। इसी देवभूमि पर ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों पर ग्लेशियर बनते हैं। ग्लेशियर हिमाचल प्रदेश की ख़ूबसूरती में और चांर चाँद लगा देते हैं। बहुत सारे लोग इन ग्लेशियरों तक जाने के लिए दुर्गम यात्रा करते हैं। कुछ ग्लेशियर तो ऐसी जगह पर हैं, जहाँ पहुँचना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हैं।

ग्लेशियर

पृथ्वी पर दो प्रकार के ग्लेशियर पाए जाते हैं। पहले अल्पाइन या घाटी में पाए जाने वाले ग्लेशियर और दूसरे पर्वतीय ग्लिशियर जो पर्वतीय चोटी पर पाए जाते हैं। ठंडे इलाक़ों में हर साल बर्फ़ जमी रहती है। बर्फ़बारी होने पर पहले से जमी हुई यह बर्फ़ जमने लगती है जिससे उनका घनत्व और अधिक बढ़ जाता है। ज़िससे छोटे-छोटे बर्फ़ के टुकड़े ग्लेशियर में बदलने लगते हैं। ग्लेशियर पिघलकर नदियों में पानी स्रोत का बन जाता है।

हिमाचल प्रदेश के ग्लेशियर:

बड़ा शिगड़ी ग्लेशियर

बड़ा शिगड़ी ग्लेशियर लाहौल में स्थित हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा ग्लेशियर है। इस ग्लेशियर की लंबाई 25 किमी. और चौड़ाई 3 किलोमीटर है। बड़ा शिगड़ी ग्लेशियर से चन्द्रा नदी को पानी मिलता है। बताया जाता है कि 1936 में बड़ा शिगड़ी ग्लेशियर ने चन्द्रा घाटी में तबाही मचाई थी जिससे इसी ग्लेशियर से चन्द्रताल झील का निर्माण हुआ था। आज बड़ी संख्या में लोग इस झील को देखने के लिए ही लाहौल आते थे।

2. लेडी ऑफ केलांग ग्लेशियर

लेडी ऑफ केलांग ग्लेशियर लाहौल स्पीति जिले में स्थित है। ये ग्लेशियर समुद्र तल से 6,061 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। इस ग्लेशियर का नामकरण अंग्रेज़ी महिला लेडी एलशेनडे द्वारा 100 साल पहले ब्रिटिश शासन के समय किया गया था। लेडी ऑफ केलांग ग्लेशियर साल भर बर्फ़ से ढंका रहता है। यह ग्लेशियर केलांग से आसानी से दिखाई देता है। रोमांच पसंद लोग इस ग्लेशियर की यात्रा पर जाना पसंद करते हैं।

3. सोनापानी ग्लेशियर

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लाहौल में एक और शानदार एवं खूबसूरत ग्लेशियर है जिसका नाम है, सोनापानी ग्लेशियर। सोनापानी ग्लेशियर कुल्टी नाले से लगभग 5 किमी. की दूरी पर लाहौल के पत्तन घाटी में स्थित है। इस ग्लेशियर का सर्वेक्षण दो बार किया जा चुका है। पहली बार ग्लेशियर का सर्वेक्षण 1906 में वालकर और पासकोइ ने किया था। दूसरी बार इसका सर्वेक्षण कुरियन एवं मुन्शी ने 1957 में किया था। इस शानदार ग्लेशियर तक पहुँचना आसान नहीं है। बड़े-बड़े ट्रेकर इस ग्लेशियर तक नहीं पहुँच पाते हैं।

4. चन्द्रा ग्लेशियर

आपने चन्द्रा नदी का नाम तो सुना ही होगा। चन्द्रा नदी चन्द्रा ग्लेशियर से बनती है। चन्द्रा ग्लेशियर बड़ा शिगड़ी ग्लेशियर से अलग होकर बन है। इसी चन्द्रा ग्लेशियर से चन्दा नदी और चन्द्रताल झील बनती है। चन्द्रा नदी भागा नदी से मिलती है जिससे चेनाब नदी बनती है। इस खूबसूरत ग्लेशियर को देखने की हसरत काफ़ी लोग रहते हैं। ऐसी वादियाँ और दुर्गम रास्ते आपको हर जगह नहीं मिलेंगे।

5. अन्य ग्लेशियर

इसके अलावा भी हिमाचल प्रदेश में कई सारे ग्लेशियर हैं। इनमें गेफांग ग्लेशियर, कुल्टी ग्लेशियर, मुक्किला ग्लेशियर, पेराद ग्लेशियर, मियार ग्लेशियर, दुधोन ग्लेशियर, पार्वती ग्लेशियर, व्यास कुंड ग्लेशियर, भड़हल ग्लेशियर, चन्द्रनाहन ग्लेशियर और गारा ग्लेशियर भी हैं। इनमें से कुछ ग्लेशियर तक पहुँचना तो नामुमिकन है लेकिन कई सारे ऐसे भी ग्लेशियर हैं जहां तक जाया जा सकता है और हिमालय के सबसे सुंदर नज़ारों को देखा जा सकता है।

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