मियार घाटी: यहाँ मिलता है हिमाचल और लद्दाख का अद्भुत नज़ारा

Tripoto

चारों और फैले हरे मैदान और फूलों का कालीन ओढ़े जमीन और उसके साथ चलती बर्फीली नदी- ये है मियार घाटी! लाहौल-स्पीति जिले के उत्तर-पश्चिम में बसी ये घाटी 100 कि.मी. से ज्यादा के इलाके में फैली हुई है और यहाँ से आपको हिमाचल और लद्दाख दोनों का ही शानदार नज़ारा मिलता है। स्थानीय लोगों के बीच इसे वैली ऑफ फ्लॉवर्स के रूप में भी जाना जाता है, औ ये घाटी अभी तक ट्रेकर्स की नजरों से बची हुई है।ये 5-दिन का ट्रेक, मियार घाटी के आखिरी गाँव खंजर से शुरू होता है, जो शुक्टो से 30 मिनट की दूरी पर, गाँव से पहले आखिरी मोटरेबल पॉइंट है। आप इस ट्रेक पर घास के मैदान, फूलों की क्यारियाँ, पर्वत श्रंखालाएँ और बर्फीली चट्टानों को देख सकते हैं।

खंजर तक कैसे पहुँचे

खंजर तक पहुँचने के लिए आपको केलोंग से शुक्टो के लिए एचआरटीसी (हिमाचल रोडवेज ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन) बस लेनी होगी। शुक्टो से खंजर तक पहुँचने के लिए आपको आधे घंटे की पैदल यात्रा करनी होगी। आप मनाली से केलोंग पहुँच सकते हैं, दोनों स्थानों के बीच नियमित बसें चलती रहती हैं। आपको शुक्टो में रहना चाहिए, क्योंकि वहाँ बहुत सारे विकल्प उपलब्ध हैं।

ट्रेक का कठिनाई स्तर

मियार घाटी ट्रेक मध्यम कठिनाई का है। आप ज्यादातर विशाल घास के मैदानों पर ट्रेक करते हैं जो काफी आसान है, लेकिन यह तब मुश्किल हो जाता है जब आपको ग्लेशियल धाराओं को पार करने के लिए नदी के किनारों पर बोल्डर और मोराइन पर चलना पड़ता है।

ट्रेक का खर्च

यह ट्रेक सोलो किया जा सकता है, लेकिन इसमें मैदानी इलाकों से गुज़रने वाले बहुत सारे रास्ते हैं और अगर आपको अपना रास्ता ठीक से नहीं पता तो आप खो भी सकते हैं। इसलिए आप जहाँ ठहरें हों वहाँ से एक स्थानीय गाइड कर लें। यह आपके ट्रेक के लिए बहुत सहायक होगा। बिकट और थ्रिलोफिलिया जैसे आयोजक इस ट्रेक को ₹20,000 के बजट में कराते हैं, जिसमें सभी उपकरण, गाइड, कैंपऔर भोजन शामिल हैं।

ट्रेक का रास्ता

वैसे तो ट्रेक के लिए कोई निर्धारित रूट नहीं है, यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितनी दूर जाना चाहते हैं। कुछ लोग एक दिन में ट्रेक खत्म करते हैं, वे घाटी में 10 कि.मी. तक जाते हैं और वापस लौटते हैं। सबसे बढ़िया पॉइंट मियार ग्लेशियर के ठीक नीचे है जहाँ आप ग्लेशियर से बनी झीलों के पास ही कैंप लगा सकते हैं।

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कब करें ये ट्रेक

इस ट्रेक पर जाने का सबसे अच्छा समय जून से अक्टूबर तक है, साल के बाकी समय ये जगह बर्फ की मोटी चादर के नीचे छिप जाती है।

यात्रा कार्यक्रम

पहला दिन

शुक्तो - गुंबा

आप पहले दिन ही इस ट्रेक का पहला स्टॉप यानी खंजर घूम सकते हैं। असली ट्रेक खंजर के बाद ही शुरू होता है। आप एक नहर को पार कर ढोकसर के विशाल घास के मैदान तक पहुँचते हैं, वहाँ से आप ढोकसर नाला नाम की एक उप-नदी की ओर बढ़ते हैं। ट्रेक में ज्यादातर समतल जमीन पर चलना और कई नालों को पार करना शामिल है। कुछ समय चलने के बाद आपको एक स्तूप नज़र आएगा, इसका मतलब है कि आपने इस दिन के लिए ट्रेक का आधा भाग कर लिया है। इसके बाद आप कई घरों और खूबसूरत खेतों से गुज़रकर थानपट्टन की छोटी और सुंदर बस्ती में पहुँच जाएँगें। गुंबा तक पहुँचने के लिए आपको 20 मिनट और चलना होगा। गुंबा एक छोटा सा चारागाह है जहाँ आपको हर जगह नहरें और छोटे-छोटे पत्थरों की संरचनाएँ दिख जाएँगी।

दूसरा दिन

गुम्बा - जरडंग

गुंबा में अपने कैंपसाइट से आप कैसल पीक देख सकते हैं। यहाँ पर आप इस नज़ारे को अपनी आँखों के सामने हरे से सूखे भूरे रंग में बदलते हुए देख सकते हैं। आपको लगेगा कि आप लद्दाख के ज़ांस्कर क्षेत्र में हैं। आप इस पूरे रास्ते में याक, जंगली घोड़े और आसमान में पंख फैलाए गरुड़ों को देख सकते हैं। इस रास्ते की कुल दूरी 10 कि.मी. के आसपास है और आप इसे 3-4 घंटे की ट्रेक में कर सकते हैं।

तीसरा दिन

जरदुंग - फलपु

ज़रदुंग से अब आप 7 ग्लेशियर झीलों वाली जगहों की ओर बढ़ते हैं; लेकिन इन झीलों पर पहुँचने से पहले का रास्ता थोड़ा मुश्किल है क्योंकि आपको मोराइन पर चलते हुए कई झीलों को पार करना होता है। आप या तो इन झीलों पर डेरा डाल सकते हैं या फाल्पू तक ट्रेक कर वहाँ पर अपना कैंप लगा सकते हैं। ट्रेक को लगभग 3 घंटे में पूरा किया जा सकता है, अगर आप चाहें हैं तो आप ग्लेशियर के मुँह या शुरुआती हिस्से तक ट्रेक कर सकते हैं। यहाँ पहुँचने के लिए औऱ 2 घंटे का वक्त लगेगा, लेकिन यहाँ से मिलने वाला शानदार नज़ारा आपकी सारी थकान मिटा देगा।

चौथा दिन

फाल्पू - गुंबा

जिस रास्ते से आप ऊपर आए थे, उसी पर वापसी का ट्रेक भी करें, ये आसान भी होगा और आप आधे वक्त में सफर पूरा कर लेंगे। आप चाहें तो आप आगे तक भी ट्रेक कर सकते हैं और किसी भी पानी के स्रोत के पास अपना कैंप लगा सकते हैं।

पाँचवा दिन

गुम्बा - शुक्टो

अपने ट्रेक के इस अंतिम भाग में आप आखिरकार आप लोगों की बीच लौट जाते हैं, इसे पूरा करने में लगभग 3 घंटे लगेंगे।

यह पूरी तरह आप पर निर्भर करता है कि आप इस ट्रेक को कितने वक्त में खत्म करना चाहते हैं। यह ट्रेक3 दिनों में किया जा सकता है लेकिन आप चाहें तो इसे 4 या 5 दिनों में भी कर सकते हैं।

ट्रेकिंग के लिए ज़रूरी पैकिंग

ट्रेकिंग शूज़: अच्छी क्वालिटी के एंटी-स्किड और वाटरप्रूफ ट्रेक शूज़ कैरी करना बहुत जरूरी है क्योंकि रास्ता मुश्किल है।

बैकपैक: ट्रेक के लिए अपने सभी ज़रूरी सामानों को ले जाने के लिए 40-50 लीटर का बैग ज़रूरी है।

कपड़े: गर्मियों के लिए कुछ कपड़ों की लेयर के साथ कुछ ऊनी कपड़े रखें और सर्दियों में भारी वूलेन और थर्मल कपड़े ले जाएँ।

सामान: धूप का चश्मा, टोपी, सनस्क्रीन, मॉइस्चराइज़र और साबुन, तौलिया आदि।

आप यहाँ हिमालयन ट्रेक पर ले जाने वाली चीजों के बारे में विस्तार से पढ़ सकते हैं।

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