वायनाड : एक पवित्र स्थान

Tripoto
24th Mar 2018
Day 1

वायनाड केरल के बारह जिलों में से एक है जो कन्नूर और कोझिकोड जिलों के मध्य स्थित है। अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण यह एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। पश्चिमी घाट के हरे भरे पर्वतों के बीच स्थित वायनाड का प्राकृतिक सौन्दर्य आज भी अपने प्राचीन रूप में है। इस स्थान की प्रभावित करने वाली सुंदरता आपकी भूखी आँखों के लिए भोजन के समान है। अत: कोई आश्चर्यजनक बात नहीं है कि पर्यटक दूर दूर से प्रति वर्ष वायनाड आते हैं। इस स्थान पर कॉर्पोरेट जगत के लोग भी सप्ताहांत में आराम करने और तरोताजा होने के लिए बड़ी संख्या में आते हैं। वायनाड, वास्तव में शान्ति और संतुष्टि की खोज के लिए एक आदर्श स्थान है, अन्यथा ये तो आजकल जैसे हमारी ज़िन्दगी से गुम हो गई हैं।
प्रारंभ
वायनाड को भारत के नक़्शे पर 1 नवंबर 1980 में स्थान मिला और इसके बाद यह केरल के बारहवें जिले के रूप में स्थापित हुआ। इससे पहले यह स्थान मायकक्षेत्र के नाम से जाना जाता था जिसका अर्थ है माया की भूमि। मायकक्षेत्र पहले मायनाड बना और फिर इसे वायनाड के नाम से जाना जाने लगा।
वायनाड के आस पास के स्थान
अगर आप वायनाड में हैं तो एडक्कल गुफाएं, मीनमुट्ठी जलप्रपात, पुकूट झील जैसे स्थानों की यात्रा अवश्य करें।
एक स्थानीय किंवदंती के अनुसार इस स्थान का नाम दो शब्दों से उत्पन्न हुआ है, ‘वायल’ और ‘नाद’। जब इन दोनों शब्दों को जोड़ा जाता है तो इसका अर्थ होता है ‘धान के खेतों की भूमि’।
वायनाड शानदार पश्चिमी घाट पर प्रभावशाली रूप से खड़ा है जो विस्मयकारी रूप से प्रेरणादायक है विशेषकर मानसून के दौरान। बारिश के कारण पत्तियों के उपर जमी हुई सारी धूल बह जाती है और इस स्थान को एक स्वर्गीय गुणवत्ता मिलती है। ये घाट एक बड़े चमकते हुए पन्ने (पन्ना- एक हरे रंग का कीमती पत्थर) की याद दिलाते हैं। इस स्थान पर आप स्वयं अपनी परियों की कहानियां बना सकते हैं!
पुरातात्विक खोजों से यह पता चलता है कि वायनाड तीन हज़ार वर्ष पहले भी अस्तित्व में था। जंगलों में वन्य और मानव जीवन शांतिपूर्ण सद्भाव के साथ मौजूद था। ईसा मसीह के जन्म से दस हज़ार वर्ष पहले भी यह स्थान जीवन की हलचल से भरा हुआ था। नक्काशियां और लकड़ी पर बने हुए चित्र, जैसे कई सबूत इस दावे को सच्चा साबित करते हैं। इसलिए शताब्दियों के पश्चात वायनाड ने एक समृद्ध सांस्कृतिक इतिहास हासिल किया है। इस स्थान ने अठारहवीं शताब्दी में हुए हैदर अली का आक्रमण भी देखा है। इसके बाद इस स्थान पर कोट्टयम के शाही परिवार का शासन था। फिर अंगेजों ने इस स्थान पर सौ वर्षों तक राज्य किया। अंग्रेजों के शासन के दौरान वायनाड में चाय और कॉफ़ी की खेती प्रारंभ हुई। अंग्रेजों ने वायनाड के भीतर और इसके चारों ओर सडकें बनवाई जिससे यहाँ आसानी से पहुंचा जा सके। इस कारण बड़ी संख्या में लोगों को आकर यहाँ बसने में सहायता मिली। जो लोग एक नए और बेहतर अवसर की तलाश में यहाँ आये, वायनाड में आकर उनके सपने साकार हुए।
वायनाड के छुपे हुए खजाने
वायनाड के हरे भरे पर्वतों ने हमारे देश की कई प्राचीन जन जातियों को अपने अंदर अच्छी तरह छुपाया हुआ है। इन जनजातियों को बाहरी दुनिया के साथ मेलजोल में कोई दिलचस्पी नहीं है; वे हमेशा प्रकृति के साथ एकरूप होकर रहना चाहते हैं, और यह उचित ही है क्योंकि यदि आपने भी एक बार वायनाड नाम के इस चमकते रत्न को देख लिया तो आप भी इस जगह से दूर रहना नहीं चाहेंगे।
वायनाड पुरातात्विक रुचि का केंद्र बना जबसे इसके आस पास की गुफाओं में प्रागैतिहासिक काल में बनी हुई नक्काशियों की खोज हुई। ये नक्काशियां इस बात का प्रमाण है कि मध्य पाषाण युग में भी यह एक समृद्ध शहर था।
आज यह स्थान सुंदर दृश्यों का, खूबसूरत पहाडी ढलानों का, उप उष्णकटिबंधीय सवाना का, खुशबूदार वनस्पतियों का, घने जंगलों का और एक समृद्ध सांस्कृतिक इतिहास का दावा करता है। हालांकि, वायनाड ने आधुनिकता का भी खुली बाहों से स्वागत किया है। जंगलों के मध्य कई शानदार रिसॉर्ट्स हैं जो कि आयुर्वेदिक मालिश एवं आरामदायक स्पा की सेवाएं प्रदान करते हैं, जिनमें थके हुए पर्यटक अपने मन और शरीर को तारोताज़ा कर सकते हैं। अतः यह कहना उचित होगा कि वायनाड एक ऐसी जगह है जहाँ आधुनिक सुविधाओं एवं परंपरा का संगम, जीवन में एक न भूलने वाले अनुभव का एहसास कराता है।

Photo of वायनाड : एक पवित्र स्थान by Shareef
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