Victoria Memorial Hall 1/undefined by Tripoto
11:00 AM - 3:00 PM
10:00 AM - 5:00 PM (park and museum timings), 6:00 PM - 8:00 PM (light and sound show), museum closed on Sundays, Mondays and Government holidays
Museum tours, picnics, photography, light and sound show
Rs 10 for Indians, Rs 150 for foreigners
All year
Families, Friends, Couples
3 out of 199 attractions in Kolkata

Victoria Memorial Hall

The Marble Memorial is a popular attraction in the whole world and people who come to Kolkata make sure they visit this place. The beautiful marble marble monument is built in Indo- Saracenic style with a blend of Mughal style opf architecture. This is also a symbol of British victory in India. The foundation was laid down in 1906 by the Prince of Wales and the building was built in the memory of Queen Victoria and also named after her. The memorial houses a beautiful museum which is also one of the most prominent if you want to know about the British Era. The whole complex covers a huge area and is surrounded by beautiful gardens which is also a popular picnic destination. Inside the museum you find photographs of people who had contributed in some way or the other towards the development of the state as well as the country. There are also a number of ancient artworks and weapons inside the museum. The light and sound show in the evenings is nerve wrecking as the sound of the British armies walking past behind you thrills you and the light work is done inside the memorial. It is like a time travel and is a place where people of all ages can enjoy.
Dwaipayan Saha
Victoria Memorial is a nostalgic place for Bengalis. Its a large marble building constructed between 1906 and 1921 dedicated to Queen Victoria of England. Now it has been converted to a museum under west bengal government. But definitely its worth to explore this place multiple times. This place is also known as lover's park 😊.  We spent a quality time there in evening. Different colors of lights made the palace looks like Arabian palaces.
Milind Prajapati
Victoria Memorial, named after Queen Victoria, is an elegant white marble structure surrounded by lush green gardens which together cover 64 acres of land. There are small beautiful structures spread throughout the garden and the best time to roam around here is in the evening when the memorial is lit up with numerous lights.
Rupali Choudhary
Went to the world famous Victoria Palace (stood in long line to get inside, but it was worth it) in the evening, it houses some of the oldest hand made paintings from the British Era. A few of the paintings were as large as the wall! Most parts of the palace depicted scenes, artefacts, audio-visuals and stories from the life of Netaji Subhash Chandra Bose. That was quite an experience.
Musafir Nizam
जब हम कोलकाता पहुँचे तो हमारा इरादा एक दिन में ही पूरा कोलकाता घूम लेने का था परंतु हम पहले दिन सोये रहे , या यूं  कहिए थकान मिटाते रहे , वाकई वो सफर काफी थकाने वाला था क्यो इसका मुझे आज तक पता नही चल पाया , हर चीज थकाने वाली थी , कई घंटों तक सोने के बाद शाम को हमे भूख लगी और हम वही पास की बिरयानी की दुकान पर जाकर बिरयानी खा आये । दो दिनों के बाद हम लोग विक्टोरिया मेमोरियल हॉल पहुँचे , वहाँ पहुँचे तो देखा कि हम एक घण्टा पहले ही वहाँ पहुँच गए है , फिर एक घण्टा वह हमने घूम कर गुजारा , मुझे भूख लगी थी सो मैंने एक बिस्कुट का पैकेट लिया और खाने लगा प्यास बुझाने के लिए एक कॉक की कैन ले ली कैन अपने दाम से 5 रुपये ज्यादा महंगा था सो मैंने इसके लिए बहस किया परंतु अब 5 रुपये की लिए बहस भाई को ठीक नही लगा और हम वहाँ गाड़ी पार्क करके फिर टिकट लेकर बाहर खड़े हो गये आखिर घंटो इंतेज़ार के बाद मेमोरियल का गेट खुल गया और लोग लाइन में अंदर जाने लगे हमने वहा की हर जगह देखी घूम कर क्योंकि विक्टोरिया इमारत की गेट अभी भी बंद थीं जो ग्यारह बजे खुलती है और अभी 10 बज रहा था फिर हमने वह बहुत सी फोटोज़ लिए जो आपको नीचे दिख रहे होंगे बाकी के फोटोज़ इस साइड पर आपको मिल जाएगी और इसकी शानदार प्रदर्शन की वीडियो आप यूट्यूब पर भी देख सकते है आपको बस मुसाफ़िर निज़ाम सर्च करना है और आप मेरी वीडिओज़ देख सकते है ,चलिए आगे बढ़ते है , फिर एक घण्टा कैसे बीता पता ही नही चला और फिर हमने अंदर शाही एंट्री ली और मैंने फटाक से फ़ोन निकाला और रेकॉर्डिंग शुरू कर दी इसकी भव्यता इसकी ज्यादा थी कि पूछिये मत , इसमे मौजूद प्रत्येक वस्तु प्राचीन तो थी ही इसके साथ ही ये महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की निशानियां थी , जो हमे उनको कार्य क्षमता दर्शाती है वहाँ की प्रत्येक वस्तु मुझे मेरे देश से जोड़ रही थी वही बगल में एक टेलीविजन जैसे पर्दे पर कदम कदम बढ़ाये जा संगीत इसमे और भी ज्यादा चार चांद लगा रही थी । मैं घंटो तक इसके हर एक गलियारों को रिकॉर्ड करता रहा , हर गेट के गार्ड ने हमे चेतावनी दी परंतु में नही रुका बस अपनो धुन में कदम बढ़ा रहा था , वैसे वो वीडियो इतनी शानदार नही बानी परंतु जानदार जरूर बनी है , आज भी उस वीडियो को देख के अंदर से एक अलग एहसास होता है मुझे अगर मेरे पुनः से कोलकाता जाना हुआ तो मैं एक बार फिरस विक्टोरिया मेमोरियल हॉल जाना चाहूंगा । बाकी आप लोग यूट्यूब चैनल पर वीडियो देखिये मुसाफ़िर निज़ाम आज के लिए आपसे विदा लेता हूं ।
Bharat Satyajit