पन्हाला: वीर मराठा शिवाजी से गहरा रिश्ता रखने वाला शहर जो घुमक्कड़ी के नए दरवाजे खोल देता है

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Photo of पन्हाला: वीर मराठा शिवाजी से गहरा रिश्ता रखने वाला शहर जो घुमक्कड़ी के नए दरवाजे खोल देता है by Deeksha Agrawal

एक घुमक्कड़ के अंदर नई जगह को टटोलने की इच्छा कभी खत्म नहीं होनी चाहिए। हमेशा ऐसी जगहों पर जाना चाहिए जहाँ आप अपने आप को अच्छे तरीके से जान सकें। कोई ऐसी जगह होनी चाहिए जो आपको बहुत करीब आकर बुदबुदाए और आप तुरंत उस जगह से जुड़ाव महसूस करने लगें। आमतौर पर ऐसी जगहें बहुत कम होती हैं। लेकिन यदि आप किसी ऐतिहासिक जगह पर जाएंगे तो आपको इन सभी गुणों का बेहतरीन तालमेल देखने के लिए मिलेगा। महाराष्ट्र का पन्हाला इन सभी पैमानों पर एकदम सटीक बैठता है। पन्हाला का प्राचीन इतिहास आज भी किसी ताजी गीली पेंटिंग की तरह आपके सामने आता है। वीर मराठा शिवाजी की धरती कहा जाने वाला ये शहर आपको जरूर देखना चाहिए।

पन्हाला

जिस जगह को एक समय पर मराठाओं की धरती कहा जाता था, आज वो महाराष्ट्र का छोटा लेकिन तेजी से विकसित होने वाला शहर बन चुका है। पन्हाला का इतिहास भारत में मराठाओं के दौर से शुरू होता है। जब शिवाजी में पन्हाला के किले को अपने साम्राज्य में जोड़ा था। 1673 से 1782 तक पन्हाला को राजधानी शहर होने का गौरव भी मिला हुआ था। कहा जाता है पन्हाला मराठाओं की सबसे पसंदीदा जगहों में से हुआ करता था। पन्हाला व्यापार के नजरिए से भी बहुत महत्वपूर्ण था। लेकिन 1827 में आए अंग्रेजों के दशक के दौरान पन्हाला की पूरी तस्वीर बदल गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में सड़कों के निर्माण के लिए लगभग 150 साल पुरानी दीवारों को तोड़ा था। इसलिए आज स्थित ये है कि पन्हाला का स्वर्णिम इतिहास महज कुछ टूटे-फूटे खंडहर में तब्दील हो गया है।

क्या देखें?

पन्हाला ऐतिहासिक नजरिए से हमेशा खास रहा है। यहाँ आपका सामना मराठाओं के दौर के कुछ रोचक तथ्यों और स्मारकों से होगा। हालांकि इनमें से कई जगहों पर आसानी से पहुँचा जा सकता है लेकिन इस बात के भी कोई दोराय नहीं है कि कुछ जगहों को देखने के लिए आपको खड़ी चढ़ाई भी करनी पड़ सकती है।

1. अंबरखाना

मशहूर राजा भोज के द्वारा बनवाया गया अंबरखाना असल में एक बहुत बड़ा भण्डारघर है। जिसको धन्य कोठार के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है इस भण्डार घर का निर्माण 11वीं शताब्दी के आसपास किया गया था। सबसे खूबसूरत बात ये है कि इतना पुराना होने के बावजूद ये जगह आज भी उतनी ही अहम है जितनी पहले के समय में हुआ करती थी। इस अंबरखाना में लगभग 100 टन अनाज सहेजा जा सकता है। ये जगह आज भी बखूबी इस्तेमाल की जाती है। आप यदि अंबरखाना देखने जाएंगे तो भण्डारघर के आसपास और भीतर किसानों से भेंट हो जाएगी। ये जगह दिखने में भले बहुत सुंदर ना हो लेकिन इसका इतिहास और सटीक उपयोग देखकर आप बहुत खुश होंगे।

2. तबक वन उद्यान और वाघ दरवाजा

पन्हाला की सबसे अच्छी बात है कि यहाँ आपको ढेर सारी हरियाली देखने के लिए मिलेगी। यहाँ ना पेड़ों को काटा जाता है और ना ही उन्हें किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाया जाता है। पन्हाला में पेड़ों को उनके प्राकृतिक रूप में रहने दिया जाता है। पन्हाला के पर्वतीय इलाकों में तो पेड़ों की अच्छी संख्या पाई जाती है ही लेकिन शहरीय क्षेत्र में भी ज्यादातर पार्क और बगीचों को इन्हीं पेड़ों के आसपास बनाया गया है। इनमें सबसे बढ़िया जगह है तबक वन उद्यान। इस उद्यान के दरवाजे, जिसको वाघ दरवाजा कहा जाता है, के ठीक पीछे वाली पहाड़ी को सीढ़ीनुमा आकार में काटा गया है। जो यहाँ आए टूरिस्टों को आगे के जंगलों में ले जाता है। इस उद्यान में बैठने वाली बेंच को भी पत्थरों को काटकर बनाया गया है। कुल मिलाकर इस उद्यान में वो सभी चीजें हैं जो इसको देखने लायक बनाती हैं।

3. संभाजी मंदिर, कलावंती महल और धरमकोठी

ये तीनों जगहें बनी तो एक दूसरे के ठीक अगल बगल हैं लेकिन जो एक चीज इन्हें अलग बनाती है वो है समय। संभाजी मंदिर पन्हाला के स्थानीय भगवान को समर्पित मंदिर है जिसकी बहुत मान्यता है। मंदिर काफी सुंदर और देखने लायक है। धरमकोठी का नाम ही इस जगह की पहचान करने के लिए काफी है। इस कोठी को देखना पुराने समय की यादों में खो जाने जैसा है। धरमकोठी वो जगह है जहाँ पहले के समय में भिक्षा दी जाती थी। कलावंती महल भी बाकी सभी जगहों जैसा शानदार है। इब्राहीम आदिलशाह के समय ये महल कभी नृत्य करने वाली कन्याओं का घर हुआ करता था। ये तीनों जगहें पुरानी जरूर हैं लेकिन इन सभी के पीछे की रोचक कहानियाँ आपको जरूर अच्छी लगेंगी।

4. सज्जा कोठी

11वीं शताब्दी में बनी इस कोठी की जितनी तारीफ की जाए कम होगी। बाकी कोठियों की तुलना में इस एक मंजिला कोठी की बात ही निराली है। इस कोठी की बनावट में पत्थरों का बेहतरीन काम किया गया है। कोठी की छत पर भी पत्थरों से झारोंखे बनाए गए हैं। छत पर जाने वाले सीढ़ियों में रेलिंग नहीं लगी है इसलिए कोठी में सावधानी बरतना बहुत जरूरी हो जाता है। ये कोठी एतिहासिक नजरिए से बेहद खास है। लेकिन यदि आपको फोटोग्राफी करना पसंद है तो उसके लिए भी ये बढ़िया जगह है। पुराना लेकिन शानदार आर्किटेक्चर इस जगह को देखने लायक बनाता है। आपकी पन्हाला यात्रा में इस कोठी का दीदार जरूर शामिल होना चाहिए।

कब जाएँ?

महाराष्ट्र की सभी जगहों की खासियत है कि आपको घूमने जाने के लिए किसी तय समय का इंतेज़ार नहीं करना होता है। आप अपने मन मुताबिक प्लान बनाकर घुमक्कड़ी का मजा लेने निकल सकते हैं। पन्हाला घूमने आने के लिए भी आप साल के किसी भी समय आ सकते हैं। यदि आप सबसे सटीक समय आना चाहते हैं तो आपको बारिश के मौसम में पन्हाला की सैर करने का प्लान बनाना चाहिए। मानसून की बारिश के बाद ये जगह कुछ अलग तरीके से चमक जाती है। आप सर्दियों में भी पन्हाला आ सकते हैं। आप ठंड की मखमली धूप एन्जॉय करते हुए घूम सकते हैं। पन्हाला में ठहरने के लिए आपको तमाम विकल्प मिल जाएंगे। आमतौर पर यहाँ के होटलों का किराया 400 रुपए से शुरू होता है। आप अपने बजट के मुताबिक किसी भी होटल या गेस्ट हाउस में ठहर सकते हैं।

कैसे पहुँचे?

पन्हाला आने के लिए आपको बहुत ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। यदि आप महाराष्ट्र के किसी शहर से पन्हाला आना चाहते हैं तो आप आराम से आ सकते हैं।

फ्लाइट से: यदि आप फ्लाइट से पन्हाला आना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको कोल्हापुर हवाई अड्डे पर आना होगा। कोल्हापुर एयरपोर्ट पन्हाला से केवल 25 किमी. की दूरी पर है। आप चाहें तो मुंबई के छत्रपति शिवाजी अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे की फ्लाइट भी ले सकते हैं। जो पन्हाला से 420 किमी. दूर है। दोनों एयरपोर्ट से आपको पन्हाला के लिए आराम से टैक्सी मिल जाएगी।

ट्रेन से: ट्रेन से आने के लिए आपको कोल्हापुर आना होगा। कोल्हापुर रेलवे स्टेशन पन्हाला के केवल 30 किमी. दूर है और महाराष्ट्र के अन्य बड़े शहर जैसे पुणे और मुंबई से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। कोल्हापुर में आप टैक्सी या लोकल बस लेकर पन्हाला आ सकते हैं।

वाया रोड: सड़क के रास्ते पन्हाला आने में भी आपको कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। देश के अन्य बड़े शहरों से पन्हाला के लिए आसानी से सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह की बसें मिल जाती हैं जो आपको सीधे पन्हाला पहुँचा देंगी।

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