पुलवामा: पहाड़ों के बीच बसी इस जगह पर मिलेगा कश्मीरी रियासत का असली स्वाद

Tripoto
Photo of पुलवामा: पहाड़ों के बीच बसी इस जगह पर मिलेगा कश्मीरी रियासत का असली स्वाद by Deeksha Agrawal

किसी जगह को अपनाने में कितना समय लगता है? शायद जब आप कई बार उस जगह पर आ जाते हैं तब आपको नई जगह भी अपनी-सी लगने लगती है। लेकिन कभी-कभी किसी एक जगह पर बहुत बार घूम लेने के बाद भी कुछ हिस्से ऐसे होते हैं जहाँ आप नहीं गए होते हैं। ये हिस्से एक चुप्पी की तरह होते हैं। आमतौर पर ये जगहें किसी फेमस टूरिस्ट डेस्टिनेशन में ही होती हैं लेकिन हमारी नजर से चूक जाती हैं। लेकिन ये जगहें इतनी शानदार होती हैं कि इनके कोने-कोने में खूबसूरती रिसती है। ऐसी ही जगह है पुलवामा।

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कश्मीर को धरती पर जन्नत कहा गया है। इसकी खूबसूरती को शब्दों में पिरोने के लिए बहुत सारी नज़्में भी लिखी गई हैं। कश्मीर में केवल गर्मियों में ही नहीं बल्कि सर्दियों में भी लोगों का खूब जमावड़ा रहता है। इतनी ठंड होने के बाद भी कश्मीर आने के लिए घुमक्कड़ों के कदम कभी नहीं ठिठकते हैं। अगर कुछ लाइनों में पुलवामा के बारे में कहें तो ये जगह देखने में बिल्कुल वैसी है जैसे पहाड़ों पर किसी ने चांदी का वर्क लगा दिया हो। कश्मीर घाटी के इन्हीं नजारों को जन्नत कहते हैं। अगर आप इस कश्मीरी रत्न के सौंदर्य के बारे में जानना चाहते हैं तो आपको ठंड के मौसम मेंं पुलवामा आना चाहिए।

पुलवामा

पुलवामा उत्तरी राज्य जम्मू-कश्मीर में बसा छोटा-सा शहर है। श्रीनगर से लगभग 30 किमी. दूर बसा ये शहर राज्य का 6वाँ सबसे बड़ा इलाका है। पुलवामा को "कश्मीर का आनंद" भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि ये पूरा इलाका इतना खूबसूरत है कि आपका मन मोह लेगा। सेब के बगीचे, झरने, प्राकृतिक झील और बेहतरीन दृश्यों वाले इस जिले को कश्मीर का चावल का कटोरा भी कहा जाता है। पहले के समय में पुलवामा को पनवांगाम या पुलगाम के नाम से जाना जाता था। कश्मीर के इस हिस्से पर 16वीं शताब्दी तक मुगलों का राज रहा जिसके बाद 19वीं शताब्दी में अफगानों ने इसपर कब्जा कर लिया। केसर की खेती के लिए मशहूर इस जगह के कोने-कोने में सुंदरता बसती है। इलाके की गुप्त पहाड़ियाँ और चमकदार झीलें पुलवामा की खूबसूरती का बखान करती हैं। पुलवामा कश्मीर घाटी के सबसे अद्भुत जगहों में से है जिसका एक बार दौरा करना तो बनता है।

क्या देखें?

प्राचीन झरने, बेहतरीन नजारे और अविश्वसनीय घाटियों वाले इस जिले में देखने के लिए बहुत कुछ है। एक बार आपने पुलवामा घूमना शुरू कर दिया तो यकीन मानिए आप अपने आप को रोक नहीं पाएंगे।

1. अहरबल झरना

झरना देखना हमेशा सुकूनदायी होता है। पुलवामा में कई सारे झरने हैं और उन सबमें सबसे खास है अहरबल झरना। ये झरना वेशु नदी पर बना हुआ है। पीर पंजाल पहाड़ों के घने देवदार पेड़ों से भरी घाटी में 25 मीटर की ऊँचाई से गिरता हुआ ये झरना देखने में बेहद खूबसूरत लगता है। ये झरना बहुत ऊँचा नहीं है लेकिन इसमें गिरते हुए पानी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। जिसकी वजह से अहरबल झरना कश्मीर घाटी के सबसे खूबसूरत झरनों में गिना जाता है। घने जंगल को चीरते हुए बहता हुए ये झरना पेड़ों के बीच चांदी की लकीर जैसा लगता है।

2. शिकारगाह

पुलवामा जिले के त्राल से 3 किमी. दूर पर बना ये पिकनिक स्पॉट बेहद खूबसूरत होने के साथ-साथ वन्यजीवों से भी भरा हुआ है। एक समय था जब जम्मू-कश्मीर के राजघरानों में ये जगह खूब पसंद की जाती थी। शिकारगाह की बदली हुई तस्वीर का श्रेय महाराजा हरि सिंह को जाता है जो जम्मू-कश्मीर राज्य के आखिरी राजा थे। महाराजा हरि सिंह को वनस्पतियों और जानवरों से काफी लगाव था जिसकी वजह से शिकारगाह में आज तरह-तरह के फूल और जानवर पाए जाते हैं। घने जंगलों और बर्फीली पहाड़ों के बीच बनी ये जगह वास्तुरवन और खेरवों के पहाड़ों के जंक्शन पर है।

3. पेयर मंदिर

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पुलवामा से 3 किमी. की दूरी पर स्थित ये मंदिर पेयर गाँव में है। स्थानीय लोगों के बीच इसे पेयक मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है इस मंदिर का निर्माण 10वीं शताब्दी में किया गया था। इस मंदिर की खास बात ये है कि पूरा मंदिर एकल पत्थर से उकेरा गया है। मंदिर का अनोखा आर्किटेक्चर अभी भी अपने प्राचीन अतीत की महिमा को बरकरार रखता है। घने जंगलों के बीच गहराई में बना ये मंदिर सचमुच में मन खुश कर देता है।

4. अवंतीश्वर मंदिर

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पुलवामा ऐतिहासिक और दर्शनीय नजारों का खूबसूरत मिश्रण है। इन्हीं ऐतिहासिक स्थलों में सबसे खास है अवंतीश्वर मंदिर। अवंतीश्वर मंदिर पुलवामा जिले के जौबरी गाँव में है। इस मंदिर का निर्माण राजा अवंति वर्मा ने 9वीं शताब्दी में करवाया था। झेलम नदी के किनारे बना ये मंदिर भगवान विष्णु और शिव को समर्पित है। इस मंदिर की बनावट इतनी सुंदर है कि पहली नजर मे आपका मन खुश हो जाएगा। ऐतिहासिक स्थल होने की वजह से इस मंदिर का रख-रखाव पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग करता है। मंदिर की दीवारों पर प्राचीन मिथकों और लोक कथाओं की नक्काशी की गई है। अगर आप पुलवामा आएँ तो इस खूबसूरत मंदिर को देखना बिल्कुल ना भूलें।

5. तरसार और मरसार झील

तरसार-मरसार ट्रेक कश्मीर घाटी के उन लोकप्रिय ट्रेकों में से है जो आपको घाटी के सबसे खूबसूरत और बेदाग हिस्सों में ले जाता है। तरसार और मरसार दो झीलें हैं जिनके नाम पर इस ट्रेक का नाम पड़ा है। इस ट्रेक को करके आप इन दोनों झीलों तक पहुँचते हैं और यकीन मानिए वो नजारा बेहद शानदार होता है। कश्मीर घाटी के अनंतनाग जिले के अरु में स्थित ये दोनों झीलें बादाम के आकार की हैं। दोनों झीलों के बीच में एक पहाड़ है जो इन्हें एक दूसरे से अलग करता है। झीलों के चारों तरफ कोल्हाई पहाड़ों का भव्य दृश्य है जो इस जगह की खूबसूरती और भी बढ़ा देता है। मरसार और तरसार झील दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान के करीब स्थित हैं और इन्हें जुड़वां बहनों के रूप में भी जाना जाता है। 3795 मीटर की ऊँचाई पर बनी इन दोनों झीलों की सबसे खास बात है उनकी लोकेशन। अरु कश्मीर घाटी की सबसे पुरानी और अनछुई जगह है जिसकी वजह से इन दोनों झीलों का महत्व बहुत बढ़ जाता है।

6. कुंगवट्टन

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कुंगवट्टन अहरबल झरने से 8 किमी. दूर बसी एक खूबसूरत जगह है। इस जगह के बारे में ज्यादा लोगों को नहीं मालूम है लेकिन अगर आप इलाके के किसी लोकल व्यक्ति के साथ हैं तो वो आपको इस आलीशान बुग्याल तक जरूर ले जाएगा। कुंगवट्टन 8400 मीटर की ऊँचाई पर बैठा बड़ा घास का मैदान है जो इंसानी हस्तक्षेप से दूर है। अगर आप कुंगवट्टन के घने जंगलों से आगे जाएँगे तो आसानी से महिनाग पहुँच सकते हैं।

7. जामा मस्जिद शोपियां

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पीर पंजाल के पार मुगल रोड पर जामा मस्जिद शोपियां मस्जिद कभी महत्वपूर्ण पड़ाव हुआ करता था। मुगल शासकों के समय में बनवाया गया ये मस्जिद उस समय कश्मीर आने-जाने वाले सभी मुगलों के लिए जरूरी ठहराव होता था। सभी मुगल शासक कश्मीर यात्रा के दौरान इसी मस्जिद में ठहरा करते थे। फिलहाल आज ये मस्जिद पुलवामा आने वाले सभी टूरिस्टों और घुमक्कड़ों के लिए प्रमुख आकर्षण बन चुका है।

8. असर शरीफ पिंजूरा

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पुलवामा में कई सारे धार्मिक स्थल हैं जिन्हें आपको देख लेना चाहिए। उन्हीं जगहों में से एक है असर शरीफ पिंजूरा का मस्जिद। पुलवामा के लोगों में इस मस्जिद को लेकर काफी मान्यता है। मुख्य शहर से 12 किमी. की दूरी पर बना ये मस्जिद हजरत मोहम्मद के अवशेषों को घर है जिसे खास मौकों पर लोगों के लिए प्रदर्शित किया जाता है।

9. कौंसारनाग झील

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पंजाल पहाड़ों के बीच और कश्मीर के दक्षिण में बसी ये झील पुलवामा के लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से है। 4000 मीटर की ऊँचाई पर होने के बावजूद कौंसार झील का पानी गर्मियों के मौसम में भी जम जाता है। इस झील को देखने के लिए आपको मुख्य शहर से 41 किमी. का सफर तय करना पड़ेगा। लेकिन इस दूरी को पूरा करने के बाद जब आप इस झील के मोहक नजारे देखेंगे तक आपकी सारी थकान दूर हो जाएगी।

कब जाएँ?

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पुलवामा हिमालय पर्वतमाला के बीच में बसा एक खूबसूरत जिला है। अच्छी बात ये है कि पहाड़ी इलाका होने के बावजूद पुलवामा का मौसम पूरे साल सुहावना बना रहता है। इसलिए यहाँ आने के लिए आपको किसी तय समय का इंतजार नहीं करना होता है। लेकिन अगर आप पुलवामा आने का सबसे सही समय तलाश रहे हैं तो आपको अप्रैल से अक्टूबर के बीच आना चाहिए। साल के इस समय घाटी की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। अगर आपको ठंडी हवा और बर्फीले मैदान पसंद हैं तो आपको दिसंबर से फरवरी के बीच पुलवामा आना चाहिए।

कहाँ ठहरें?

पुलवामा में ठहरने के लिए अनंत ऑप्शन्स हैं। यहाँ किफायती होमस्टे और गेस्टहाऊस से लेकर शानदार होटल तक सभी विकल्प मौजूद हैं। आप अपने बजट और कम्फर्ट के हिसाब से कोई भी ठिकाना चुन सकते हैं। अगर आप आधुनिक सुख सुविधाओं वाला ठिकाना चाहते हैं तो आप श्रीनगर के किसी पाँच सितारा होटल में भी ठहर सकते हैं।

कैसे पहुँचें?

पुलवामा आने के लिए आपके पास कई विकल्प हैं। आप फ्लाइट, रोड और ट्रेन में से किसी भी रास्ते पुलवामा पहुँच सकते हैं। पुलवामा आने के लिए सबसे पहले आपको श्रीनगर या जम्मू आना चाहिए।

फ्लाइट से: अगर आप फ्लाइट से पुलवामा आना चाहते हैं तो उसके लिए आपको श्रीनगर के शेख़-उल-आलम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आना होगा। श्रीनगर एयरपोर्ट पुलवामा से लगभग 37 किमी. की दूरी पर है। आप एयरपोर्ट से शेयर टैक्सी या प्राइवेट कैब लेकर आसानी से पुलवामा आ सकते हैं।

ट्रेन से: पुलवामा में कोई ट्रेन स्टेशन नहीं है। अवंतीपोरा स्टेशन, काकापोरा स्टेशन और पंपोर सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन हैं। दिल्ली से इन स्टेशनों के लिए कुछ स्पेशल ट्रेनें चलती हैं इसलिए आपको पहले से प्लानिंग कर लेनी चाहिए। इसके अलावा आप जम्मूतवी रेलवे स्टेशन से भी आसानी से पुलवामा आ सकते हैं। जम्मूतवी स्टेशन पुलवामा के करीब बना सबसे बड़ा स्टेशन है जो पुलवामा से 281 किमी. दूर है। जम्मू आने के लिए आपको देश के किसी भी कोने से ट्रेन मिल जाएगी।

रोड से: अगर आप फ्लाइट और ट्रेन के रास्ते ना आकर वाया रोड पुलवामा आना चाहते हैं तो उसमें भी आपको कोई दिक्कत नहीं आएगी। पुलवामा देश के सभी हिस्सों से अच्छी तरह जुड़ा हुए है। पुलवामा में बस टर्मिनल भी है इसलिए आपको कोई परेशानी नहीं होगी।

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