भारत में पहली बार शुरू होगी सार्वजनिक रोपवे सेवा, वाराणसी में पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

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Photo of भारत में पहली बार शुरू होगी सार्वजनिक रोपवे सेवा, वाराणसी में पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा by Deeksha Agrawal

काशी भारत का सबसे ज्यादा देखे जाने वाले शहरों में से है। बनारस में हर साल लाखों की संख्या में पर्यटक आते हैं। इनमें भारतीय पर्यटक तो होते ही हैं लेकिन साथ में विदेश से भी बड़ी तादाद में लोगों का आना लगा रहता है। बनारस में, शुरू से, पर्यटन का स्तर ऊँचा रहा है जिसकी वजह से वाराणसी के नवीनिकरण और शहर में उच्च स्तरीय सुविधाओं पर काफी ध्यान दिया जा रहा है। बीते कुछ महीनों में काशी कॉरिडोर का निर्माण किया गया है और अब बनारस के नाम में एक और सुनहरा पंख जोड़ा जाने वाला है। जल्द ही बनारस में रोपवे की सुविधा उपलब्ध कराई जाने की प्लानिंग की जा रही है।

रविवार को वाराणसी डेवलपमेंट अथॉरिटी की वाइस प्रेसिडेंट ईशा दत्ता ने बताया कि मेक्सिको और बोलीविया के बाद भारत विश्व में तीसरा ऐसा देश होगा जहाँ सार्वजनिक यातायात के लिए रोपवे का इस्तेमाल किया जाएगा। दत्ता ने ये भी बताया कि बहुत ही जल्द वाराणसी में रोपवे बनाने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। योजना के मुताबिक इस रोपवे का प्रस्तावित रूट वाराणसी जंक्शन यानी कैंट रेलवे स्टेशन से गदौलिया के गिरजाघर चौराहे तक रखा गया है। इस रोपवे में कुल 220 केबल कार का इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है जिससे लगभग 4.2 किलोमीटर का रास्ता मात्र 15 मिनट में तय किया जा सकेगा।

मोक्षस्थली काशी में बनाए जाने वाले इस रोपवे की कुल लागत 424 करोड़ रूपए बताई जा रही है। हालांकि इस खर्च को केंद्र और राज्य सरकार के बीच बांटे जाने की बात है। डिविजनल कमिशनर दीपक अग्रवाल ने ये भी बताया कि हर केबल बार में 10 लोगों के बैठने की जगह होगी और हर कार के बीच 90 सेकंड का गैप रखा जाएगा। इस रोपवे में एक बार में तकरीबन 4,000 लोग सफर कर सकेंगे। योजना के अनुसार रोपवे का शुरुआती प्वॉइंट वाराणसी जंक्शन कैंट होगा, वहीं बीच में सजन, रथयात्रा और गिरजाघर चौराहे पर भी स्टॉप्स बनाए जाएंगे।

इस रोपवे का संचालन मुख्य रूप से रात के समय किया जाएगा। खास बात ये है कि ये प्रोजेक्ट भी पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के अंतर्गत बनाया जाएगा। यानी रोपवे सरकारी और निजी कंपनियाँ दोनों के अनुभवों और तकनीकों को मिलाकर बनाया जाएगा। ईशा दत्ता ने ये भी बताया कि रोपवे के लिए बनाए जाने वाले स्टेशनों पर काशी के इतिहास और संस्कृति से जुड़ी चीजें दर्शाई जाएंगी। इस प्रोजेक्ट के पायलट चरण में सभी स्टेशनों की ऊँचाई 11 मीटर रखी जाएगी और हर स्टेशन में स्वचालित सीढ़ी लगाए जाने की भी योजना बनाई गई है। हालांकि फाइनल प्रोजेक्ट में 45 मीटर ऊँचाई रखने का अनुमान लगाया जा रहा है।

कहा ये जा रहा है कि फाइनल प्रपोजल के लिए स्वीकृति मिल जाने के बाद, नवंबर 2021 में रोपवे का काम शुरू कर दिया जाएगा।

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