लज़ीज़ बिरयानी की कहानी: भारत का स्वाद चखा देंगी ये 9 बिरयानी

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बिरयानी - स्वादिष्ट और रहस्मयी मसालों से बने इस चावल और गोश्त के मिश्रण का नाम सुनते ही मुँह में पानी भर आता है। जितना लज़ीज़ बिरयानी का स्वाद है उतना ही मज़ेदार है इसका इतिहास और उससे जुड़ी कहानियाँ।

कहते हैं कि, जब तुर्क-मंगोल विजेता, तैमूर अपनी सेना के साथ 1398 में भारत की सीमाओं पर पहुँचा तो यह पकवान उनकी सेना के युद्ध आहार का हिस्सा था। उसके सैनिक एक मिट्टी के बर्तन में चावल, मसाले और मांस के मिश्रण को भरकर एक गर्म गड्ढे में दबाकर पकाते थे ।

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मुग़ल युग के भोजन कक्षों में बिरयानी का काफी बोल बाला था। मुग़ल सम्राट, जो अपने भव्य जीवन शैली और विलासी स्वाद के लिए जाने जाते हैं, खुशबूदार चावल और नर्म गोश्त के साथ बनी एक अच्छी बिरयानी पसंद करते थे।

एक और कहानी बिरयानी के इतिहास को, भारत के दक्षिणी मालाबार कोस्ट की ओर ले चलती है। ‘उन सोरू’ नाम से चावल और मांस के एक मसालेदार मिश्रण का रिकॉर्ड तमिल साहित्य में पाया जाता है।

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इसी प्रकार एक कहानी में बिरयानी की खोज का श्रेय, शाहजहाँ की खूबसूरत रानी, मुमताज महल, को दिया जाता है। बताया जाता है कि उन्होनें अपने सैनिकों को कमज़ोर देखकर उनके पोषण के लिए चावल और मांस, दोनों को मिलाकर पकाने का आदेश दिया था।

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तब से लेकर अब तक, अलग-अलग क्षेत्रों में लोगों की पसंद के आधार पर बहुत सारे फेर बदल के बाद भी बिरयानी की फैन फॉलोइंग कम नहीं हुई है। अगर आप अपने क्षेत्र की बिरयानी को सर्वश्रेष्ठ घोषित करने का कोशिश करते हैं तो इस बात पर दूसरे क्षेत्रों के लोग लड़ाई तक करने को तैयार हो जाते हैं। इससे पता चलता है कि बिरयानी एक ऐसा व्यंजन है जो लोगों की भावनाओं के साथ जुड़ा हुआ है।

तो चलिए यहाँ हम आपको पूरे भारत में मशहूर अलग-अलग वेरायटी की बिरयानी की दावत पर ले चलते हैं।

हैदराबादी बिरयानी

हैदराबाद के निज़ामों की रसोई से आई हुई यह बिरयानी, बहुत मशहूर है। हैदराबादी बिरयानी दो टाइप की मिलती है - कच्ची और पक्की। कच्ची बिरयानी में गोश्त को मसाले और दही में मिलाकर रात भर मैरीनेट किया जाता है और फिर उसे चावल के साथ लेयर करके एक खास तापमान पर पकाया जाता है ।

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पक्की बिरयानी में मीट को कम समय के लिए मैरीनेट करके चावल से अलग पकाया जाता है। उसके बाद दोनों को लेयर करके ‘दम’ विधि द्वारा पकाया जाता है।

दम विधि में, मिट्टी के बर्तनों में बिरयानी को लेयर करके ढककन को आटे से सील बंद किया जाता है और धीमी आँच पर पकाया जाता है। हैदराबादी बिरयानी,सुगंधित केसर-स्वाद वाले चावल और तीखे गोश्त के साथ, मसालेदार सालन और रायते के साथ परोसी जाती है।

कोलकाता बिरयानी

अनोखे स्वाद से भरपूर, कोलकाता बिरयानी की कहानी एक उदासीन अतीत से जुड़ी हुई है। जब अवध के आखिरी नवाब, वाजिद अली शाह, को निर्वासित किया गया, तो उनके साथ उनके रसोइए भी थे।नवाब स्वादिष्ट भोजन के शौकीन थे पर आमदनी में कमी होने के कारण उनके शेफ थोड़े में ही गुज़ारा कर रहे थे।बिरयानी में महंगे गोश्त के बदले वह आलू डालने लगे और तब से आलू इस बिरयानी का हिस्सा बन गया।

गर्म मटकी में साबुत आलू को चिकन या मटन के साथ केसर और रोज़वॉटर डालकर, सफेद बासमती चावल में पकाया जाता है।सुनहरे कुरकुरे आलू और चावल के बीच में छिपा हुआ एक चमकदार अंडा देखकर मुँह में पानी आना तो स्वाभाविक है।

लखनवी बिरयानी

अवधी स्टाइल की विरासत से निकली लखनऊ की बिरयानी हल्के मसालों वाली होती है। इस नम बिरयानी को बनाने के लिए मसालों के साथ मीट के रस में तैयार किया जाता है। गोश्त को पहले आधा पकाते हैं और फिर चक्र फूल और दालचीनी आदि मसाले मिलाकर चावल के साथ लेयर करके दमपुख्तः स्टाइल में पकाया जाता है।

डिंडीगुल बिरयानी

डिंडीगुल थलापकट्टी बिरयानी की फैन फॉलोइंग भी 'थलाइवा' के बराबर ही है और इसका एक कारण भी है।

फेमस डिंडीगुल बिरयानी बनाने के लिए केवल घास चरने वाली कन्नीवडी बकरियों के मांस का ही उपयोग किया जाता है।अन्य बिरयानियों में मांस के बड़े टुकड़े डाले जाते हैं जबकि डिंडीगुल बिरयानी में मीट को छोटे क्यूब्स में काट कर डाला जाता है। जीरा सांबा चावल को तीखेपन का स्वाद देने के लिए दही और नींबू डालकर काली मिर्च के पत्तों के साथ मिलाया जाता है।शुक्र है कि मुँह की जलन को कम करने के लिए प्याज का रायता और बैंगन की ग्रेवी साथ में होती है।

थलासेरी बिरयानी

यह मीठी और दिलकश बिरयानी मुख्य रूप से केरल के मालाबार क्षेत्र की है।थलासेरी बिरयानी का स्वाद बहुत ही अलग है।इसमें बासमती चावल के बजाय, एक देसी किस्म 'खयमा' या 'जीराकसला' चावल का इस्तमाल किया जाता है। इस बिरयानी में खूब सारे जूसी चिकन विंग्स, खस्ता तले हुए प्याज, भुने हुए काजू, किशमिश, मालाबार मसाले और सौंफ का लाजवाब कॉम्बिनेशन होता है। ग्रेवी वाला मीट परोसने के समय ही चावल में मिलाया जाता है।

मेमनी बिरयानी

मेमनी बिरयानी उन लोगों के लिए एकदम सही है जो बहुत ज्यादा तीखा पसंद करते हैं। यह बेहद मसालेदार बिरयानी गुजरात-सिंध क्षेत्र के मेमन ट्राइब की ख़ासियत है। इस बिरयानी में रसदार लैंब चंक्स, कुरकुरे प्याज और आलू को दही में मिलाकर डाला जाता हैं। इसमें खाने का रंग डालने की भी ज़रुरत नहीं पड़ती क्योंकि यह काम तो इसमें डली हुई सब्जियां, मांस और चावल ही कर देते हैं।

अम्बुर बिरयानी

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आप जब भी तमिलनाडु जाएँ तो एक अनोखे स्वाद वाली अंबुर बिरयानी की एक प्लेट अवश्य खाएँ। इसमें मीट को दही में मैरीनेट किया जाता है और फिर धनिया और पुदीने के फ्लेवर के साथ बनाया जाता है। उसके बाद मीट को अन्य मसालों की मदद से पके हुए सीरगाी सांबा चावल में मिलाया जाता है। इस बिरयानी में चावल के मुकाबले मीट भी ज्यादा होता है जो माँसाहारियों के लिए एक प्लस पॉइंट है। अपने मुँह में अलग-अलग जायकों का अनुभव करने के लिए इसे एन्नई कथरीकई या बैंगन करी के साथ ट्राई करें।

ब्यारी बिरयानी

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मसालेदार मैंगलोर बिरयानी की यह वेरायटी कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ में ब्यारी मुस्लिम कम्युनिटी की स्पेशलिटी है । बिरयानी का नाम 'बयारा' या व्यापार शब्द से आया है।ट्रेडर्स और मर्चेंट्स द्वारा निर्मित इस बिरयानी में खूब सारा नारियल और मिर्च डाली जाती है। चावल में विशेष रूप से एक स्ट्रांग फ्लेवर होता है, क्योंकि उन्हें रात भर घी और मसालों में भिगोया जाता है। इस डिश में चिकन, मटन और सी फ़ूड का इस्तमाल किया जाता है।

ताहरी बिरयानी

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आप इस बिरयानी की एक प्लेट को बिना किसी मलाल के खा सकते हैं क्योंकि दूसरी बिरयानी की तरह ताहरी बिना मीट के बनाई जाती है। मीट के बजाय इसमें बहुत सारी सब्जियों का इस्तमाल किया जाता है। कई तरह के खुशबूदार मसालों के साथ गाजर और आलू का आमतौर पर अधिक उपयोग किया जाता है।

कहानियों के अनुसार, इस बिरयानी की शुरुआत मैसूर से हुई थी जब टीपू सुल्तान ने वेजीटेरियन हिंदुओं को अपने बहीखाते लिखने वालों के रूप में रखा था। उनके लिए बिरयानी का वेजीटेरियन विकल्प तैयार किया गया था जो आज भी वेजटेरियंस का पसंदीदा पकवान है। यह बिरयानी कश्मीर का एक लोकप्रिय स्ट्रीट फूड है।

सिंधी बिरयानी

सिंधी बिरयानी अपने तीखे और बोल्ड फ्लेवर के साथ पाकिस्तान के सिंध प्रांत से आई है। सिंधी बिरयानी को देखकर आप खाए बगैर नहीं रुक सकते, पर साथ में एक टिश्यू पेपर ज़रूर लेकर बैठें क्योंकि उसमें बारीक़ कटी हुई हरी मिर्च आपकी आँखों में पानी ला सकती है।

इस भरपूर स्वाद वाली बिरयानी को बनाने के लिए भुने हुए मेवे और मसाले, पुदीना, धनिया, प्याज और सूखे मेवे डाले जाते हैं। इस बिरयानी की एक विशेषता है कि एक नट्टी फ्लेवर के लिए इसमें आलूबुखारा और आलू भी डाला जाता है। ख़टास के लिए इसमें लेयरिंग के दौरान खट्टा दही मिलाया जाता है।

बॉम्बे बिरयानी

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मुंबईवासियों के जीवन का उत्साह उनकी बिरयानी में भी दिखाई देता है। टैंगी और स्वीट, बॉम्बे बिरयानी की हर चम्मच में स्वाद के फ्लेवर्स उभर कर आते हैं । चिकन या मटन के अलावा चावल के ढेर में मसालेदार तले हुए आलू ज़रूर होते हैं।

सूखे आलूबुखारे और केवड़ा वाटर (स्क्रू पाइन) डालने से बिरयानी में एक हल्का सा मीठा स्वाद भी आता है। मुंबई शहर की तरह यहाँ की बिरयानी भी आपका मन जीत लेगी।

भटकली बिरयानी

अगर आप कभी कर्नाटक के एक तटीय शहर भटकल की किसी शादी में गए हैं, तो संभावना है कि आपको भटकली बिरयानी की गर्मागर्म प्लेट परोसी गई होगी। इस शानदार पकवान का श्रेय फ़ारसी ट्रेडर्स को जाता है।

भटकली बिरयानी में मीट को खुशबुदार चावल के साथ लेयर करके प्याज और हरी मिर्च की पेस्ट में पकाया जाता है। उसके बाद उसमें कुछ और मिर्च, मसाले और करी पत्ते डाले जाते हैं । इस सबके बाद तैयार होती है प्याज और लहसुन के तीखे स्वाद वाली, नारंगी के साथ सफेद चावल की एक स्वादिष्ट मीट बिरयानी।

तो देर किस बात की है, आप इस भारत की इस विशाल थाली का स्वाद लेने की तैयार कर लें।आखिर इतनी सारी वैरायटी जो आपके सामने है।

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