विरासत-ए-खालसा संग्रहालय: भारतीय म्युज़ियम जिसने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड

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क्रिकेट हो या कबड्डी, गणित हो या विज्ञान ऐसा शायद ही कोई मैदान हो जहाँ हमारे देश भारत ने अपने झंडे न गाड़े हों। रिकॉर्ड बनाने की बात हो या तोड़ने की, भारत हर जगह अपना परचम लहराता है। अपने इसी गौरवशाली इतिहास की बदौलत एक बार फिर भारत का नाम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो गया है और इसकी अगुवाई की है पंजाब ने। पंजाब के आनंदपुर साहिब में बने विरासत-ए- खालसा संग्रहालय ने पूरे देश में सबसे ज़्यादा पर्यटकों को आकर्षित कर इस वर्ल्ड रिकॉर्ड को अपने नाम कर लिया है।

क्या रहा खास?

विरासत-ए-खालसा संग्रहालय में सबसे ज्यादा पर्यटकों की संख्या रिकॉर्ड की गई है और इसी वजह से ये संग्राहलय देश के सभी संग्रहालयों के बीच पहले पायदान पर अपनी जगह बना चुका है। कहा जाता है इस संग्रहालय में हर रोज़ 5000 लोग इतिहास को दोबारा जीवित होता हुआ देखने आते हैं। यानी अपने 7 साल के सफर में ही ये संग्रहालय अब तक 97 लाख पर्यटकों को पंजाब और खालसा संप्रदाय की वीरता की कहांनियाँ बयान कर चुका है।

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क्या है विरासत-ए- खालसा संग्रहालय?

इस संग्रहालय को 2011 में खालसा पंथ की 300वीं सालगिराह के मौके पर बनवाया गया था। खालसा पंथ सिख शूरवीरों का वो खास संप्रदाय है जिसे खुद सिखों के आखिरी धार्मिक गुरू - गुरू गोबिंद सिंह ने बनाया था। खालसा समुदाय के गठन वाले दिन को ही आज पंजाब समेत देश के उत्तरी इलाके में बैसाखी के रूप में मनाया जाता है।

6500 एकड़ के एरिया में फैला हुआ है ये संग्रहालय हस्तकला के साथ आधुनिक टेक्नोलॉजी के जरिए सिख धर्म और पंजाब की संसकृति के बारे में देश-विदेश से आए सैलानियों को रुबरू करवाता है। एक इज़राइली आर्किटेक्ट मोशे सफी द्वारा डिजाइन किया गया ये म्युजियम अपनी भव्यता और इतिहास के रंग में आपको भी रंग देगा।

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इस विशाल संग्रहालय में घूमते हुए आपको पता भी नहीं लगता कि कितनी आसानी और सरलता के साथ आप सिख इतिहास के 550 साल लंबे सफर को तय कर चुके हैं। इस संग्रहालय में कुल 27 गैलरी बनी हुई हैं जिन्हें दो भागों में बांटा गया है। पहला भाग आपको सिखों के पहले गुरू- गुरु नानक के वक्त से शुरू होकर सिखों की धार्मिक ग्रंथ- गुरूग्रंथ साहिब के स्थापित होने तक की कहानी बयान करता है। वहीं दूसरा भाग सफर को आगे बढ़ाते हुए बाबा बंदा सिंह बहादुर और महाराजा रंजीत सिंह के शौर्य की गाथाएं सुनाता है।

टिकट और दूसरी जानकारी

इस संग्रहालय को देखने के लिए वैसे तो कोई टिकट नहीं लगता , लेकिन अगर आप पूरे दिन यहां पर बिताना चाहते हैं या इस जगह पर किसी तरह की रिसर्च कर रहे हैं तो उसके लिए 100 रुपए देकर पूरे दिन का पास लेना जरूरी होता है।

ये संग्रहालय हफ्ते में 6 दिन खुला रहता है और आप सुबह 10 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक यहां घूम सकते हैं।

विरासत-ए- खालसा संग्रहालय हर सोमवार को व रहता है, साथ ही हर 24-31 जनवरी और 24-31 जुलाई के बीच इस संग्रहालय को मरम्मत के लिए बंद रखा जाता है।

ज्यादा जानकारी के लिए आप संग्रहालय की वेबसाइट पर भी जा सकते हैं

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कैसे पहुंचे?

इस वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर संग्रहालय तक रोड, रेल या हवाई यात्रा के जरिए आसानी से पहुँच सकते हैं।

रोड मार्ग- आनंदपुर साहिब चंड़ीगड़ से 80 कि.मी. की दूरी पर है जो आप 2 घंटे में तय कर सकते हैं। इसके लिए आप टैक्सी तो चुन ही सकते है या फिर राज्य परिवहन की बस से भी सफर कर सकते हैं जो अंतरराज्य बस टर्मिनल से चलती रहती हैं।

रेल- यहाँ पहुँचने के लिए आप चंड़ीगढ़ जनशताब्दी में बैठकर भी पहुंच सकते हैं जो आपको करीब 2 घंटे में आनंदपुर साहिब स्टेशन पर छोड़ती है।

हवाई यात्रा- चंड़ीगढ़ एयरपोर्ट शहर से 12 कि.मी. की दूरी पर है जिसके बाद आप बस, रेल या टैक्सी, किसी का भी इस्तेमाल कर इस संग्रहालय तक पहुँच सकते हैं।

क्या आप भी पुरी दुनिया में मशहूर इस संग्रहालय को देख चुके हैं। तो अपनी यात्रा के बारे में Tripoto पर लिखें और दूसरे यात्रियों को अपने अनुभव के बारे में बताएँ।

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