Harishchandragad Fort 1/undefined by Tripoto
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3 out of 4 attractions in Junnar

Harishchandragad Fort

One of the major attractions of the city of Ahmednagar, this is an ancient fort and a favourite of adventure lovers. This is mainly famous for the Konkan Kada which is like a challenge for trekkers and also the temples inside. The Harishchandra Temple inside is a favourite of tourists and the other temples here include the Nandi and Shivline Temple. This fort covers a large area and encompasses a number of other ancient buildings and palaces. The three peaks here are the Taramati, Rohidas and Harishchanra and the Taramati peak is the higehest one. The Harishchandragad Fort is on the Malshej Ghat banks of the Junnar Region. As you reach the top of the peak and stand in front of the fort, you will be able to enjoy the beautiful views of the Malshej Ghat, Jivdhan, Nane ghat, Kalsubai and many other places. So if you want to make your tour a little more thrilling then this is a must visit.
Harishchandragad TrekkingKumshet - Mula river - Pethechivaadi - Paachnai - Harishchandragad Trekking. Camped near the temple on the top.
After Enjoying our night got up in morning and witnessed the best ever view of sunrise from the top of the mountain. Got fresh and explored all the places on the harishchandragad which includes ganpati mandir, shiv mandir, small talav on top of the mountain and after exploring all this by 12.00 pm. we headed our journey back to bottom, started our trek while walking downwards  enjoyed going back with best beautiful memories 😍 and experience of staying in tents without  fan, lights that was so fabulous experience. After walking we reached the village by 3.00 pm in afternoon and had our lunch which was so yumiee 😋 After having our lunch we started our journey towards Thane by 4.00 pm and reached Thane by 9.00 pm in night. The Best Ever First Trekking Experience Was Just Amazing 😍 I hope you guys will do visit and share your experiences too.Thankyou ❤️
हरिश्चंद्रेश्वर का मंदिरयह मंदिर प्राचीन भारत में प्रचलित पत्थरों से मूर्तियों को तराशने की बेहतरीन कला का अद्भुत उदाहरण है। यह अपने बेस से लगभग 16 मीटर ऊंचा है। इस मंदिर के आसपास कुछ गुफाएँ और प्राचीन पानी की टंकियाँ हैं।  गंगा नदी को मंदिर के पास स्थित टैंकों में से एक कहा जाता है। मंदिर का शीर्ष उत्तर-भारतीय मंदिरों के साथ निर्माण जैसा दिखता है।  यहां हम कई कमरे देख सकते हैं, जिनमें एक विशिष्ट निर्माण दिखाई देता है। ये अच्छी तरह से तैयार किए गए पत्थरों को एक के ऊपर एक करके व्यवस्थित किए गए हैं। मंदिर के पास तीन मुख्य गुफाएँ हैं। मंदिर के पास स्थित कुंड पीने का पानी प्रदान करते हैं। थोड़ी ही दूर पर काशीतीर्थ नामक एक और मंदिर स्थित है। इस मंदिर की आकर्षक बात यह है कि इसे एक विशाल चट्टान से उकेरा गया है। चारों तरफ से प्रवेश द्वार हैं। मुख्य द्वार पर चेहरों की मूर्तियां हैं। ये मंदिर के पहरेदारों के चेहरे हैं। प्रवेश द्वार के बाईं ओर एक देवसेनागिरी शिलालेख है, जो संत चांगदेव के बारे में है।हरिशचन्द्रगड भारत के अहमदनगर जिले का एक पर्वतीय दुर्ग है। इसका इतिहास मलशेज घाट और कोठाले ग्राम से जुड़ा है। खिरेश्वर से 8 किमी की दूरी पर, भंडाराड़ा से 50 किमी, पुणे से 166 किमी और मुंबई से 218 किमी दूर, हरिश्चंद्रगढ़ महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित एक ऐतिहासिक पहाड़ी किला है। ... हरिश्चंद्रगढ़ महाराष्ट्र में ट्रेकिंग के लिए बहुत लोकप्रिय स्थान है। इस गड़ को ट्रेक्कर की पंढरी कहा जाता है।
लेकिन एक बार फिर मेरी नजर गूगल मैप पर गई। मोबाईल स्क्रीन देखकर मुझे एकदम से एकसाथ 2 झटके लगे। अव्वल तो यह कि हम रास्ता भटक गए थे और दूसरा यह कि नेटवर्क भी चला गया था। जिस रास्ते को सही समझकर हम सीधे चले जा रहे थे, वो हमें मंजिल के नजदीक ले जाने की बजाय किसी दुर्गम इलाके में ले जा रहा था। इस बात की भनक लगते ही हमने किसी से रास्ता पूछने की सोची। अच्छा, इस दौरान एक और बुरी बात यह हुई कि सुहाने सफर के सुरूर में पता ही नहीं चला कि कब हमारे 2 साथी आउट ऑफ संपर्क हो गए। मुसीबत का असली सबब यह था कि उन दोनों को यह नहीं पता था कि हमें जिस गांव जाना है, उसका नाम पाचनाई है। यही कारण था कि लोगों से सही रास्ता पूछते वक्त मेरे दिमाग में यह चल रहा था कि वो लोग अगर किसी से रास्ता पूछेंगे भी तो बताएंगे क्या कि कहां जाना है। सच में, यह सब सोच-सोचकर मुझे तेज सिरदर्द होने लग गया।
अब जब जाने का तय हो गया। तब इसके लिए मैंने अपने दोस्तों को तैयार करना शुरू किया। हरिश्चंद्र गढ़ की तस्वीरों को देखकर शुरुआत में तो 10-12 लोग तैयार हो गए थे। लेकिन बात जब ट्रैकिंग की आई तो मेरे आलसी दोस्तों ने एक-एक कर दगा देना शुरू कर दिया। ख़ैर, अंत में मेरे साथ मेरे 3 दोस्त हरिश्चंद्र गढ़ एडवेंचर का मजा लूटने और उसके लिए जरूरी मेहनत करने के लिए तैयार हो गए। 25 दिसंबर की सुबह करीब 8 बजे मैं और मेरे दोस्त कल्याण से हरिश्चंद्र गढ़ के बेस विलेज पाचनाई के लगभग 200 किलोमीटर लंबे सफर के लिए निकल गए। प्लान के मुताबिक हमें 9 बजे तक 30 किलोमीटर दूर बारवी डैम और फिर 11 बजे तक 90 किलोमीटर दूर मालशेज घाट पहुंचना था। प्लान के ही मुताबिक हम 9 बजे तक बारवी डैम पहुंच भी गए। डैम की अथाह-अनंत जलराशि को देखकर ऐसा भ्रम हो रहा था कि जैसे नीला आसमान जमीन पर उतर आया हो। हमने धरती पर उतर आए आसमान और उसके चारों तरफ फैले जंगल की हरियाली को देखते हुए चाय की चुस्कियों का आनंद लिया। इसके बाद हम बढ़ चले बारवी जगंल से होते हुए मुरबाड रोड की ओर। मुरबाड रोड हम लोगों को सीधे मालशेज घाट तक लेकर जाने वाला था।