Bijli Mahadev Temple 1/undefined by Tripoto
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4 out of 19 attractions in Kullu

Bijli Mahadev Temple

This is an interesting temple in the Kullu Valley and is surrounded by places such as the Buntur Valley. The reason behind the mysterious name is the fact that the shivalinga inside the temple breaks down with the effect of Lightening or bijli and is then again joined with a local adhesive on a special day. The charred pieces lying inside the temple are due to the fire that catches due to intensive lightening. Apart from the temple, the deodar forests and the rolling greenery are also mesmerizing views.
भारत में ऐसे कई मंदिर हैं, जहां कोई न कोई चमत्कार होते रहते हैं। ऐसा ही एक मंदिर है बिजली महादेव मंदिर, भगवान शिव का यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में स्थित है। कुल्लू शहर व्यास और पार्वती नदी के संगम के पास बसा है। यह जगह समुद्र सतह से 2,450 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इस मंदिर के लिए माना जाता है कि यह घाटी एक विशालकाय सांप का एक रूप है जिसका वध भगवान शिव ने किया था। यहां पर जिस स्थान पर शिवलिंग की स्थापना की गई है वहां हर साल बिजली गिरती है, जिसके चलते शिवलिंग पूरी तरह से खंडित हो जाता है। उस खंडित शिवलिंग को मंदिर के पुजारी ने मक्खन एकत्रित करके वापस जोड़ा, जो बाद में रहस्मय रुप से ठोस हो गया। कहते हैं यहां पहले कुलांत नामक दैत्य रहता था। दैत्य कुल्लू से अजगर का रूप धारण कर मंडी की घोग्घरधार से होता हुआ लाहौल स्पीति से मथाण गांव आ गया। दैत्य अजगर कुण्डली मार कर व्यास नदी के प्रवाह को रोक कर इस जगह को पानी में डुबोना चाहता था। उसका उद्देश्य यह था कि यहां रहने वाले सभी जीव-जंतु पानी में डूब कर मर जाएंगे। भगवान शिव कुलांत के इस विचार से से चिंतित हो गए। तब भगवान शिव ने उस राक्षस अजगर को अपने विश्वास में लिया। शिव ने उसके कान में कहा कि तुम्हारी पूंछ में आग लग गई है। इतना सुनते ही जैसे ही कुलांत पीछे मुड़ा तभी शिव ने कुलान्त के सिर पर त्रिशूल वार कर दिया। प्रहार से कुलांत मारा गया। कुलांत के मरते ही उसका शरीर एक विशाल पर्वत में बदल गया। उसका शरीर धरती के जितने हिस्से में फैला हुआ था वह पूरा की पूरा क्षेत्र पर्वत में बदल गया। कुल्लू घाटी का बिजली महादेव से रोहतांग दर्रा और उधर मंडी के घोग्घरधार तक की घाटी कुलान्त के शरीर से निर्मित मानी जाती है। किंवदंती है कि कुलांत से ही कुलूत और इसके बाद कुल्लू नाम पड़ा। कुलांत दैत्य के मरने के बाद शिव ने इंद्र से कहा कि वे 12 वर्ष में एक बार इस जगह पर बिजली गिराया करें। हर 12 वर्ष में यहां आकाशीय बिजली गिरती है। इस बिजली से शिवलिंग चकनाचूर हो जाता है। शिवलिंग के टुकड़े एकत्रित करके शिवजी का पुजारी मक्खन से जोड़कर स्थापित कर लेता है। कुछ समय बाद पिंडी अपने पुराने स्वरूप में आ जाती है।
Alp Expeditions
Introduction:Bijli Mahadev Is Lord Shiva's Temple Situated At The Top Of Hill Purely Dedicated To The Temple. Temple Is Located At An Altitude of 2.460m And It Is Around 22 km Away From Main Kullu Town. Temple Has An Important Part In The Lives Of People Of Kullu And They Have Immense Devotion On Their Deity. The Mountain Is Covered With Thick Deodar Forest And Near The Temple There Is Huge Ground Which Is Part Of The Temple. The Area Near The Temple Is Solely Of Deity. During Monsoon Season Every Year Lighting Strikes The Shiv Linga Situated Inside The Temple Which Breaks And Next Day The Priest Reattaches The Broken Pieces Using Butter. And Then Fair Is Organised In The Temple Where Devotes From All Around The Area Comes To Pray To Lord Shiva.
Tanuja Verma
Reached at 9 pm to my friends camp. Next day went for ‘Bijli Mahadev Trek’.
Piyush Thakur
And after this mesmerizing beauty. You will find a beautiful Shiva Temple (Bijli Mahadev). You will litterly feel that vibe.
Saurabh Bhadwal