Sarnath 1/undefined by Tripoto
November- May
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September - May
Couples, Friends, Families
4 out of 84 attractions in Varanasi

Sarnath

Sarnath is an ancient city which is situated near the meeting point of holy river Ganges and the Gomti River. When Lord Buddha had attained enlightenment in Bodh Gaya, he is said to have come down over here and preached his first sermon which was about the middle path of Nirvana. When the followers of Buddha increased even after his death, there were many monasteries and stupas built here. In the th Century when the Chinese traveller Xuang Dan came, there was a 100 ft stupa of Lord Buddha and was the most important seat of Buddhism. Later the Muslims attacked this place and ransacked all the stupas and Sarnath disappeared magically to be found again by British archeologists in the 19th Century. The city was again revived and the ruined structures of the Buddhists are still found here and the Sarnath Deer Park which is the place where the First Sermon was preached is remarkable. It is still one of the four most important seats of Buddhism worship. People come here more during the Buddha Purnima or when his death anniversary is marked.
Avishek Patro
We went to Kashi Vishwanath temple around 9 am in the morning because we had paid 450INR for Rudrabhishek, but you should go early morning if you want to avoid too much crowd. After that we had Kachori and Jalebi for breakfast in Kachori Gali which is near Vishwanath temple . We returned to our hotel and around 3pm we booked an auto and went to Sarnath .The auto took around 400INR. We returned from Sarnath around 6pm and went to Assi Ghat for Ganga Arti and spent the rest of our evening sitting near the bank of Ganga and sipping tea.
BEAUTIFUL SARNATHROAD TRIP FROM BANARAS TO SARNATH
Jhelum Kaushal
વારાણસીની ભાગોળે આવેલું આ ગામ ભારતનાં રાષ્ટ્રીય ચિહ્ન માટે પ્રખ્યાત છે. બૌધ્ધ ધર્મનું મહત્વનું સ્થાન એવા સારનાથમાં સમ્રાટ અશોકે અશોક સ્તંભ બંધાવ્યો હતો અને ત્યાર પછી બુધ્ધના શરણમાં ગયા હતા. ભારતીય પુરાતત્વ ખાતાએ અહીં એક મોટું મ્યુઝિયમ બનાવીને તેમાં ઓરિજનલ રાષ્ટ્રીય ચિહ્ન સાચવ્યું છે. અમે ગયા તે દિવસે શુક્રવાર હતો એટલે મ્યુઝિયમ બંધ હતું. અમે મ્યુઝિયમ સિવાય આસપાસના રમણીય સ્થળો માણ્યા જેમાં વિશાળ બગીચા વચ્ચે બૌધ્ધ મંદિર, બુધ્ધની પ્રતિમા, તેમજ રાષ્ટ્રીય ચિહ્નની પ્રતિકૃતિ ખૂબ જ આકર્ષક રીતે રાખવામાં આવ્યા છે.
Er Utsal Chaudhary
वैसे तो सारनाथ के बारे में लगभग सब लोगों को अच्छे से पता होगा। लेकिन फिर भी इसकी खूबसूरती कभी कम नही होती आप चाहे जितनी बार देख कर आओ। यहाँ बुद्ध भगवान का मंदिर और स्तूप काफी लोकप्रिय हैं।
Mrityunjay Mishra
दलाई लामा के भारत आने से पहले 1955 में भारत में स्थापित सबसे पुराना तिब्बती मंदिर है ।  मिट्टी से बनी विशालकाय बुद्ध प्रतिमा है।  कई अन्य छोटी मूर्तियाँ और अन्य कलाकृतियाँ हैं।  यह एक सुंदर शांत जगह है और बहुत दयालु और मैत्रीपूर्ण लामाओं द्वारा प्रबंधित किया जाता है।यह एक बाहत ही शांत जगह है । चायनीज मंदिर से इसकी दूरी महज 500 मीटर है।  सारनाथ संग्रहालय के लगभग 2 किमी की दूरी पर स्थित यह स्थान दिव्य शांति प्रदान करता है।  सारनाथ में मंदिरों का दौरा करें और आप उनमें से लगभग सभी में मौन और शांति पाएंगे।  कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप अपने जीवन से कितने परेशान या निराश हैं, ये मंदिर आपको समय के लिए उन सभी को दूर ले जाने की गारंटी देते हैं।  यदि आप वाराणसी या सारनाथ की यात्रा कर रहे हैं, तो यह देखने के लिए भी जरूर चाहिए।मंदिर अंदर से बहुत ही खूब सूरत है । अगर आप एक सोलो ट्रेवलर है और आपको पीस फूल जगहों पर जाना अच्छा लगता है तो आप यहां जाकर कुछ समय बिल्कुल रिलॉक्स बिल्कुल शांति से बिता सकते है मुझे यहां आना पसंद है।हमारी यात्रा के दौरान मंदिर के भीतर बैठा भिक्षु बहुत ही मिलनसार था और उसने हमारे साथ अच्छी बातचीत की, भले ही हमने वहाँ बहुत कम समय बिताया हो। लेकिन  उन्होंने बौद्ध धर्म के इतिहास से हमें अवगत कराया । मैं आपको सजेस्ट करूँगा की आप जब भी किसी मंदिर चर्च या मस्जिद जाए तो वहां के धर्म अनुयायी है आप उनसे जरूर बात करे । वो आपको वहां के इतिहास और वहा की संस्कृति से आपको अवगत कराएंगे । thanks