बस, पैदल और 6500 रुपए: 7 दिनों में ऐसे किया दिल्ली से स्पीति का सफर

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Photo of बस, पैदल और 6500 रुपए: 7 दिनों में ऐसे किया दिल्ली से स्पीति का सफर by Rishabh Dev

हर घूमने वाले की बकेट लिस्ट में हिमाचल प्रदेश जरूर होता है। मेरी लिस्ट में भी कई शानदार जगहें थीं लेकिन जा ही नहीं पा रहा था। पहाड़ों के नाम पर हर बार मैं उत्तराखंड चला जाता था। इस बार मैंने ठान लिया कि हिमाचल प्रदेश जाना है। मैंने अपनी हिमाचल यात्रा के लिए स्पीति को चुना। इस सफर में मेरा एक दोस्त भी साथ था। दिल्ली से स्पीति की 7 दिन की यात्रा हमने साथ की और मेरा खर्चा आया 6,500 रुपए। हिमाचल की ये बजट यात्रा काफी शानदार रही।

दिन 1

दिल्ली से हिमाचल

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हम शाम 6 बजे आईएसबीटी कश्मीरी गेट पर थे। हम दिल्ली से रामपुर बुशहर जाने वाले थे। मैंने रोडवेज बस में पहले से ही ऑनलाइ बुकिंग कर ली थी। अपने तय समय पर बस चल पड़ी। दिल्ली से निकलते-निकलते 1 घंटा लग गया। रात 10 बजे अंबाला के पास में नीलखेड़ी के एक ढाबे पर बस रूकी। बस में बैठी सवारियों ने खाना खाया और हमारी बस फिर से चल पड़ी। सुबह 4 बजे शिमला पहुँचे। 8 पहुँचे कुमारसेन और सुबह 10 बजे हम रामपुर बुशहर पहुँचे। लगभग 15 घंटे की यात्रा के बाद हम हिमाचल प्रदेश में थे।

खर्च:

बस का टिकट: 800 रूपए।

दिन 2

रामपुर बुशहर

रामपुर बुशहर में हमने मोनेस्ट्री के पास एक सस्ता-सा कमरा ले लिया और फिर उसके बाद रामपुर बुशहर की गलियों में घूमने लगे। हम सबसे पहले रामपुर बुशहर के भूतेश्वर मंदिर गए। उसके बाद हम श्रीजानकी माई गुफा मंदिर गए। इसके बाद रामपुर बुशहर से गुजरने वाली सतलुज नदी के किनारे गए।

नदी किनारे से रामपुर बुशहर और भी खूबसूरत लग रहा था। पानी वाकई में बहुत ठंडा था। रामपुर बुशहर में ही मैंने पहली बार थुकपा का स्वाद लिया। शाम के समय हम यहाँ की छोटी-सी मोनेस्ट्री देखने गए। हम रात में जल्दी सो गए क्योंकि अगले दिन हमें सुबह 4 बजे उठना था।

खर्चा:

कमरा: 600 रूपए

थुकपा: 50 रूपए

डिनर: 70 रुपए।

दिन 3

रामपुर से कल्पा

अगले दिन हम सुबह 4 बजे उठे और तैयार होकर बस स्टैंड की ओर चल पड़े। हमें 5 बजे रिकांगपिओ वाली बस पर जाना था। रामपुर बुशहर बस अड्डे पर एकदम सन्नाटा था। हमें बस मिल भी गई और 5 बजे रिकांगपिओ के लिए चल भी पड़ी। सुबह 7 बजे हम बधाल पहुँचे। बधाल के बाद बस के कंडक्टर ने सबसे आगे वाली सीट मुझे दे दी। अब मुझे खूबसूरत नजारे अच्छे तरह से दिखाई देने वाले थे।

कुछ देर बाद हम किन्नौर वैली में प्रवेश कर गए। किन्नौर में घुसते ही नजारे और भी खूबसूरत हो गए। हमने पहाड़ से काटकर बनाई गई रोड को देखा। इस सड़कों को बीआरओ ने बनाया है। लगभग 9 बजे हम रिकांगपिओ पहुँच गए। यहाँ हमने एक दुकान पर नाश्ता किया और फिर बस स्टैंड के बाहर कल्पा की बस का इंतजार करने लगे। बस से हम लोग चुगलिंग पहुँचे।

खर्चा:

बस टिकट: 235 रुपए

नाश्ता: 60 रुपए

कल्पा

चुगलिंग आगे बस नहीं जा रही थी तो हम लोग स्थानीय लोगों की गाड़ी से कल्पा के सुसाइड प्वाइंट तक पहुँचे। सुसाइड प्वाइंट कल्पा की सबसे खूबसूरत जगहों में से एक है। इस जगह को देखने के बाद हम पैदल-पैदल कल्पा पहुँचे। यहाँ हमने एक शानदार लेकिन बजट वाला होटल लिया। जहाँ से शानदार नजारा दिखाई दे रहा था। पूरे दिन हम कल्पा में इन नजारों को देखते हुए टहलते रहे। रात में खाना खाते समय पता चला कि श्यामशरण नेगी यहीं पर रहते हैं।

खर्चा:

बस टिकट: 20 रुपए

कमरा किरायाः 800 रुपए

लंच: 150 रुपए

डिनर: 150 रुपए।

दिन 4

रिकांगपिओ

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कल्पा में सुबह-सुबह उठकर श्यामशरण नेगी के घर गए। श्यामशरण नेगी आजाद भारत के पहले आम चुनाव में पहला वोट डालने वाले व्यक्ति हैं। उनकी उम्र 105 साल हो चुकी है। हम लगभग आधे घंटे नेगी जी के घर पर रहे। श्यामशरण नेगी को सुनाई कम देता है लेकिन अच्छे से बोल लेते हैं। नेगीजी से मुलाकात करने के बाद हम पैदल-पैदल चीनी मार्केट पहुँचे। यहाँ पर हमने एक गोंपा और नाग मंदिर देखा। यहीं से हमें रिकांगपिओ वाली बस मिल गई।

रिकांगपिओ में हमने एक बेहद की सस्ता होटल लिया। रिकांगपिओ में हम चन्द्रिका मंदिर देखने गए। चन्द्रिका मंदिर कोठी में है। लोगों से पूछते-पूछते हम मंदिर पहुँच गए। मंदिर में फोटोग्राफी करना मना था इसलिए हमने बिना कैमरे के पूरा मंदिर घूमा था। मंदिर का परिसर काफी बड़ा था और मंदिर भी काफी पुराना था। इस मंदिर के सामने की भैरों मंदिर है। भैरों मंदिर बाहर से बंद था इसलिए हम वापस लौट आए।

खर्चा:

बस का किराया: 20 रुपए

नाश्ता: 50 रुपए

लंच: 100 रुपए।

दिन 5

रिकांगपिओ से नाको

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हम सुबह-सुबह रिकांगपिओ बस स्टैंड पर बैठ गए। बस में काफी भीड़ थी और मुझे बस की सबसे आखिरी सीट मिली। कुछ ही देर में बस चल पड़ी। ये बस काजा जा रही थी लेकिन हमें तो नाको ही जाना था। रास्ते में बस स्पीलो नाम की जगह पर रूकी। उसके बाद बस फिर से चल पड़ी। खाब के बाद रास्ते और नजारे दोनों की बदल गए। मैंने इतना घुमावदार रास्ता पहले कभी नहीं देखा था। ऐसा लग रहा था कि बस धड़क रही है।

पहाड़ बेहद ऊंचे-ऊंचे थे लेकिन यहाँ घास को नामोंनिशान नहीं था। बिना हरियाली के भी पहाड़ खूबसूरत लग सकते हैं, ये मैंने इस सफर में ही जाना। ऐसे ही धड़कते हुए बस चलती रही और हम शानदार नजारों को देखते रहे। सुबह 9:30 बजे बस नाको पहुँच गई। यहाँ बस कुछ देर रूकती है लेकिन हमारी मंजिल तो नाको ही थी। हम नाको गांव में गए और एक सस्ता-सा कमरा ले लिया।

खर्चा:

बस का किराया: 240 रुपए

नाश्ता: 50 रुपए

नाको

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अब हमें नाको को अच्छे से घूमना था। हम जिस जगह पर रूके थे, वहाँ चारों तरफ खेत थे। हम अपना सामान रखकर नाको गांव की ओर चल पड़े। गांव के बीच में ही नाको लेक है। बेहद खूबसूरत और शांत लेक को देखने के बाद हम नाको गोंपा को देखने के लिए आगे बढ़ गए। यहाँ से पूरा नाको दिखाई दे रहा था। इसके बाद हमने नाको मोन्स्ट्री देखी।

शाम के समय हमें शानदार सनसेट देखना था। इसके लिए हमने एक लंबा ट्रेक करने का सोचा। हमारी इस यात्रा में ट्रेकिंग कहीं भी शामिल नहीं थी लेकिन हम ट्रेकिंग कर रहे थे। काफी लंबे और कठिन सफऱ के बाद हम नाको की सबसे ऊंचाई वाली जगह पर पहुँचे। इतना खूबसूरत सूर्यास्त मैंने पहले कभी नहीं देखा था। ये वाकई में एक शानदार नजारा था। हम वापस अपने कमरे पर आकर सो गए।

खर्चा:

नाको में कमरा: 600 रुपए

खाना: 150 रुपए

दिन 6

नाको से काजा

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अगले दिन सुबह 8 बजे हम नाको बस स्टैंड पहुँच गए। अब हमें काजा जाना था। बस आई 10 बजे। हम उसी में बैठ गए। हमने सोचा था कि काजा हम लगभग 2 बजे तक पहुँच जाएंगे लेकिन हम गलत थे। नाको से काजा तक का रास्ता वाकई में खतरनाक था। रास्ते में हमें धनकर गेट भी मिला। लंबे सफर के बाद हम शाम 4 बजे काजा पहुँचे। यहाँ हम एक मडहाउस में रूके।

शाम के समय हम काजा घूमने के लिए निकल पड़े। सबसे पहले हम बौद्ध स्टैच्यू के पास पहुँचे। उसके बाद मोनेस्ट्री देखी। रात को हम बुलेट रेंट वाली दुकान पर पहुँचे। यहाँ हमने कल के लिए बुलेट बुक कर ली। अब हमें अगले दिन रोमांचक सफर पर निकलना था।

खर्चा:

बस का किराया: 200 रुपए

नाश्ता: 50 रुपए

मडहाउस: 500 रुपए

दिन 7

स्पीति का सफर

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सुबह 8 बजे हमने बुलेट ली और निकल पड़े स्पीति के सफर पर। सबसे पहले हमें जाना था, लांग्जा। कुछ देर तक तो रास्ता अच्छा था लेकिन कच्चा रास्ता आते ही सब गड़बड़ हो गया। रास्ता बहुत ही खराब था। हम बिल्कुल आराम-आराम से जा रहे थे। हम गिरते-पड़ते लांगजा पहुँचे। लांगजा में एक बेहद ऊंची बौद्ध प्रतिमा है। इसे देखने के बाद हम निकल पड़े हिक्किम की ओर।

लांगजा से हिक्किम कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर है। लगभग 20 मिनट में हम हिक्किम पहुँच गए। हिक्किम में दुनिया की सबसे ऊंचाई पर स्थित पोस्ट ऑफिस है। इस जगह को देखने के बाद हम कोमिक की ओर बढ़ गए। कुछ ही देर में हम कोमिक पहुँच गए। यहाँ हमने मोन्स्ट्री देखी। जिसके बाद हम उसी रास्ते से काजा वापस आए। हमारे पास समय था इसलिए हम धनकर मोनेस्ट्री देखने के लिए निकल पड़े। वहाँ से हम शाम 7 तक काजा आ गए। रात में हमने अगले दिन के लिए बस की टिकट ली और अगले दिन मनाली फिर दिल्ली वापस आ गए। दिल्ली से स्पीति का 7 दिन का सफर ऐसा रहा कि कभी नहीं भूल पाऊंगा।

खर्चा

बुलेट रेंट: 1200 रुपए

मडहाउस: 500 रुपए।

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