कला, किला और संस्कृति: वो रंग जिनमें सराबोर है राजस्थान की मिट्टी!

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घुमक्कड़ों की एक अलग ही दुनिया होती है। वो एक जगह को देखकर लौटते हैं और उनकी लिस्ट में अगला नया नाम जुड़ जाता है। वे इस दुनिया के हर रंग को देखना चाहते हैं और भारत तो वैसे भी सारे रंगों लेकर बैठा है। भारत का हर राज्य अपनी अनूठी विशेषता लेकर बैठा है लेकिन उन सबमें सबसे कलरफुल राज्य है, राजस्थान। इस राज्य की प्राचनीता ही इसकी पहचान हैं यहाँ के किले, लोकल नृत्य, गायन, व्यंजन। ये सब इस राज्य को रंगों से भरे रहते हैं। कई पुराने शहरों वाला ये प्रदेश कहीं नीला रंग ओढ़े है तो कहीं रेत की तरह गोल्डन है और कहीं तो अपनी विरासत में ही गुलाबी रंग समेटे हुए है।

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अगर आप घुमक्कड़ हैं तो राजस्थान के इन सारे रंगों को देखने जरूर आएँ। लेकिन आप उन रंगों को जानते भी हैं जो राजस्थान के महलों से लेकर गलियों तक पसरे हुए हैं। तो चलिए रंगों से सरोबार राजस्थान को देखते हैं।

वेशभूषा / पोशाक

कहा जाता है कि कुछ पग रखने पर ही आपका क्षेत्र बदल जाता है और किसी क्षेत्र की पहचान बोली से बाद में, वेशभूषा से पहले हो जाती है। आज के आधुनिक जीवन में सबसे वेस्टर्न कपड़ों में दिखाई देते हैं लेकन एक दौर था जब हर राज्य की पहचान उसकी वेशभूषा से ही होती थी। बाद में सब अपनी वेशभूषा छोड़ते गए लेकिन राजस्थान में घूमते हुए आपको एक विशेष पारंपरिक पोशाक नज़र आ ही जायेगी। कभी वो किसी बजुर्ग के साथ होती है तो कभी किसी कलाकार के साथ। राजस्थान के रंगों का दिलकश नजारा है ये वेशभूषा। इन चटक रंगों को देखने पर बहुत आकर्षण होता है तभी तो यहाँ की दुकानों से राजस्थानी कपड़े सबसे ज्यादा खरीदे जाते हैं।

राजस्थान में भी जगह-जगह के हिसाब से ये वेश-भूषा बदलती रहती है। यहाँ की राजशाही पोशाक तो निराली है ही, यहां की जनजातियों की वेशभूषा भी बेहतरीन है। राजस्थान में 100 से जनजातियाँ हैं और सबकी अपनी-अपनी वेशभूषा है। राजस्थानी औरतें कई प्रकार की पोशाक पहनती हैं, जैसे कि घाघरा, कंचली। घाघरा काफी लंबा होता है, इसमें कई वैरायटी भी होतीे हैं। कंचली उपर का भाग होता है, जो कई रंगो में मिल जाती है। इसके अलावा ओढ़नी, चुनरी भी राजस्थानी महिलाएं खूब पहनती है। राजस्थानी पुरूष तो पारंपरिक वेशभूषा में धोती, कुर्ता, अंगरखा और पायजामा पहनता है। रंगों में इनमें भी वैरायटी होती है और ये लोगों पर खूब फबते हैं। करीने से बनीं ये पोशाक राजस्थान एक अलग ही रंग हैं, जिनमें यहाँ के लोग बड़े फबते हैं। यहाँ के लोग ही नहीं पशु भी रंगीन पोशाकों में रहते हैं, खासकर यहाँ का ऊँट। आप राजस्थान आएँ और ऊँट को रंग-बिरंगी पोशाक में न देखें ये हो ही नहीं सकता। इसलिए तो राजस्थान को इतना कलरफुल कहा जाता है।

किले और महल

जब भी हम राजस्थान का नाम लेते हैं तो हमारे जेहन में राजपुताना राजाओं के चित्र घूमने लगते हैं। जिनके किलों और महलों की एक लंबी फेहरिस्त है। आप राजस्थान के किसी भी शहर में चले जाइए यहाँ एक ही शहर में कई शानदार किले मिल जाएँगे। इन किलों और महलों में गजब का आकर्षण हैं कुछ बहुत विशालकाय हैं और कुछ बेहद सुंदर। जयपुर का आमेर किला, जैसलमेर का जैसलमेर किला, जोधपुर का मेहरानगढ़ किला, चित्तौड़गढ़ का किला, बीकानेर फोर्ट, जयपुर के जयगढ़ और नाहरगढ़ किले। ये तो बस एक छोटी-सी लिस्ट है, इस राज्य में ऐसे ही अनगिनत किले हैं।

इन किलों में घूमते-घूमते यहाँ की विरासत और शौर्यता का पता चलता है। राजाओं की भव्य जीवनशैली के प्रमाण हैं ये किले। यहाँ के किले भव्यता देते हैं तो यहाँ के महल अपनी खूबसूरती के लिए जाने जाते हैं। जो आज भी उसी तरह हैं जैसे कभी राजाओं के जमाने में हुआ करते थे। राजस्थान के सबसे फेमस महलों में उदयपुर और जयपुर के सिटी पैलेस, उदयपुर का ही लेक पैलेस और जयपुर आमेर पैलेस है। किलों और महलों के अलावा राजस्थान के कुछ स्मारक ऐसे हैं जो बहुत फेमस हैं जैसे जयपुर का हवा महल, जो रानियों के लिए बनवाया गया था। इसके अलावा जयपुर में ही जंतर-मंतर हैं, अल्बर्ट हाॅल म्यूजियम है, जोधपुर का जसवंत थाड़ा है।

त्योहार और जश्न

त्योहार कहीं भी हों उसका उत्साह की अलग रहता है लेकिन जब देश के सबसे सुंदर राज्यों के त्योहार खुद को अलग ही स्तर पर ले जाते हैं। जिसके रंगों में आप ऐसे खोयेंगे कि बाकी सब कुछ भूल जाएँगे। राजस्थान की राजधानी जयपुर में जब तीज और गंगौर त्योहार होते हैं तो यहाँ आपको प्राचीन राजस्थान भी दिखता है और यहाँ की संस्कृति भी। राजस्थान की स्थानीय महिलाएँ इस त्योहार में लहरिया पोशाक पहनती हैं, अपने हाथ और पैरों में हीना बांधे रखती हैं, जो टूरिस्टों को बहुत भाता है। इन स्थानीय पोशाकों में राजस्थान के स्थानीय लोग शहर की गलियों में जुलूस निकालते हैं, जब ये फेस्टिवल होता है तो पूरा शहर रूक जाता है और इस त्यौहार में रंग में रंग जाता है।

वहीं राजस्थान का एक और फेस्टिवल बहुत फेमस है, पुष्कर मेला। पुष्कर मेला ऊँटों का व्यापारिक मेला है जहाँ व्यापार भी होता है और ऊँटों की प्रतियोगिता भी होती हैं। देश-विदेश से हजारों लोग इस मेले को देखने आते हैं। राजस्थान के इन फेस्टिवलों ने अपनी छाप दुनिया तक छोड़ी है। इन फेस्टिवलों में स्थानीय लोग आपस में घुलते-मिलते हैं। पुष्कर मेला, उर्स फेस्टिवल, हाथी फेस्टिवल, मेवाड़ फेस्टिवल, मारवाड़ फेस्टिवल और पतंग महोत्सव राजस्थान के सबसे फेमस फेस्टिवल है।

राजस्थानी खाना

राजस्थान के बारे में कहा जाता है यहाँ आएँ और यहाँ की थाली का स्वाद ना लें तो आपका राजस्थान टूर अधूरा है। राजस्थानी थाली बहुत सारे पकवान और व्यंजनों से मिश्रण होती है। इस थाली का स्वाद लज़ीज़ होता है लेकिन जो सोचते हैं कि पूरे राजस्थान में एक जैसी ही राजस्थानी थाली मिलती है तो वो गलत है। राजस्थान के अलग-अलग जगह पर अलग पकवानों से भरपूर रहती है राजस्थानी थाली। पश्चिमी और पूर्वी राजस्थान का मेन्यू बिल्कुल अलग-अलग होता है। राजस्थानी लज़ीज़ व्यंजनों को शब्दों में बयां करना बेहद मुश्किल है। उनके बारे में आप तभी जान पायेंगे जब इस थाली का स्वाद लेंगे। इसके बारे में तो इतना ही कहा जा सकता है ये व्यंजन उतने ही लजीज हैं जितने खूबसूरत यहाँ के महल।

राजस्थानी थाली के अलावा यहाँ का स्ट्रीट फूड भी काफी फेमस है, जो अपने आप में अनोखा और लाजवाब है। यहाँ का सबसे बेस्ट स्ट्रीट फूड है दाल, बाटी, चूरमा। इसके अलावा जोधपुर की मावा कचौड़ी, पुष्कर के मालपुआ, जयपुर की घेवर मिठाई और बीकानेर के रसगुल्ले बहुत फेमस हैं। इन सभी का स्वाद ले लेंगे तो आपकी यात्रा सफल हो जायेगी।

नृत्य और संगीत

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राजस्थान की अलग-अलग जगहों में जिस प्रकार की विविधता है, उसी प्रकार यहाँ के नृत्य में भी विविधता है। यहाँ के स्थानीय नृत्य में भावनाएँ और एक सधी हुई चाल होती है, जिसमें वहाँ की संस्कृति को दिखाने की कोशिश की जाती है। राजस्थान के मशहूर नृत्य घूमर, तरातलाई, मंजीरा और चारी हैं जो देखने में बेहद सुंदर और अनूठे लगते हैं। जिनको एक बार देखते हैं तो उसी में मग्न हो जाते हैं। राजस्थान सांस्कृतिक रूप से बहुत फेमस है, जहाँ की कला और संस्कृति व्यापक रूप से फैली हुई है। जो भारतीय जीवन शैली को दर्शाता है। गाँवों का लोकगीत सुनने में इतना मधुर होता है जो कानों को सुहाता है।

राजस्थान की महिलाएँ पानी लाने जाती हैं और शादी-ब्याह में जो गाती हैं उसे लोकगीत कहते हैं, जो उस दिन से जुड़ होते हैं। राजस्थान की संस्कृति उच्च श्रेणी के संगीत और अपनी अलग शैली के नृत्य के लिए जाना जाता है। राजस्थान की महिलायें जब पानी लेने जाती हैं उस समय वे जो संगीत गाती हैं, उस शैली को पनिहारी कहते हैं। इन स्थानीय संगीत में प्रेमियों के कुछ गीत हैं। इसके अलावा देवताओं, कबीर, सूरदास और मीराबाई के गीत गाये जाते हैं, जो राजस्थान के सांस्कृतिक महत्व को बताते हैं।

राजस्थान के रंगीन शहर

ऐसा राज्य जहाँ के प्रमुख शहर अपने आप में अनूठी विशेषता रखते हैं। यहाँ के कुछ शहर तो रंगों में घुले-मिले हैं जैसे कि पिंक सिटी जयपुर, ब्लू सिटी जोधपुर, गोल्डन सिटी जैसलमेर। शायद इसी वजह से ये राज्य सबसे रंगीन माना जाता है। ऐसा नहीं है कि राजस्थान के ये शहर पूरी तरह से ब्लू, पिंक और व्हाइट हैं। इन शहरों के प्राचीन स्मारकों और किलों में इन रंगों की छाया दिखती है। ब्लू सिटी जोधपुर के कुछ घर की नीले रंग से रंगे हुए हैं और गोल्डन सिटी जैसलमेर ऐसा लगता है जैसा देवताओं का कैनवास हो। इस राज्य के बारे में यही लगता है कि राजस्थान सबसे कलरफुल प्रदेश है, जहाँ सारे रंग बिखेर दिए गए हों। राजस्थान के ये रंग बेमिसाल हैं, जो यहां के किलों से लेकर, गलियों तक पसरा हुआ है।

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