जयपुर में दिखे जर्मनी के इस रोटल कॉन्सेप्ट से भारत को प्रेरणा लेनी चाहिए 

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रविवार की सुबह जब मैं जयपुर के सिटी पैलेस क्षेत्र में प्रवेश किया तो भीड़भाड़ भरे बाज़ार में मैं एक चटाखदार लाल रंग की बस देख कर भौचक्का रह गया | इस लाल बस को स्थानीय लोग और सैलानी दोनों ही मूड मूड कर देख रहे थे | इस बस का आकार कुछ अनोखा ही था | ये बस आग बुझाने वाली गाड़ी और सिटी टूर बस का मिला जुला रूप तो लग ही रही थी, साथ ही ये स्लीपर बस की तरह भी लग रही थी | कौतूहलवश मैं बस को पास से देखने के लिए आगे बढ़ा और मुझे ये यकीन भी था कि पर्यटन के नज़रिए से शायद ये बस धूम मचा देगी |

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ऐसा पहले आपने कभी नहीं देखा, रोलिंग होटल यानी रोटल, तस्वीर का श्रेय : अनातोली

रोटल : रोलिंग होटल

कनसेप्ट होटल और कैप्सूल होटल दुनियाभर में छाए हुए हैं | ये कनसेप्ट स्टे उन सैलानियों को आकर्षित करते हैं जो किसी जगह को वहाँ के प्राकृतिक प्रारूप में ही अनुभव करना पसंद करते हैं, ना की किसी 5 सितारा होटल के आरामदेह पिंजरे में जो हर जगह एक जैसा अनुभव ही देते हैं | दा जर्मन दास रोलेंड कंपनी को जयपुर में हाल ही में देखा गया था जिसने अपने रोटल के साथ पर्यटन के क्षेत्र में एक नया कदम रखा है | इस कंपनी ने कैप्सूल होटल के विचार को ना सिर्फ़ आगे बढ़ाया है बल्कि ऐसी यात्राओं को भी सम्मिलित किया है जो आपको शहर के साथ ही अलग अलग देश भी घुमाएँगी | रोटल की बात करें तो ये कस्टम मेड बस होती हैं जिसमें रसोई और शौचालय के साथ ही 20-40 सैलानियों के सोने की जगह भी होती है | ये रोटल लंबी यात्राओं के लिए बने होते हैं और पहाड़ी रास्तों के लेकर दलदल वाली ज़मीन से गुज़रने में भी सक्षम होते हैं | सोचिए आपने हफ़्तो के लिए एक बस में अपना डेरा जमा लिया है और हर रोज़ आप एक नई ज़मीन पर कदम रख रहे हैं, नये लोगों, नई भाषाओं और नये नज़ारों का मज़ा ले रहे हैं |

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सुनहरे रेगिस्तान में कैंपिंग कीजिए या अपने आरामदेह बंकर में सोइए | तस्वीर का श्रेय : मैग्नस मानसकी
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हर रास्ते को आराम से पार कर ले | तस्वीर का श्रेय : मैग्नस मानसकी

सैलानियों के जिस समूह से मैने बात की वे चार हफ्तों से लगातार सफ़र कर रहे थे और जर्मनी से शुरुआत करके इटली, ग्रीस, तुर्की, तुर्कमेनिस्तान और पाकिस्तान से होते हुए राजस्थान टूर के मज़े ले रहे थे | उन्होने मुझे बड़ी दिलचस्प कहानियाँ सुनाई | इस समूह ने ऐसी ऐसी जगह पर कैंपिंग की थी जो हम सिर्फ़ फिल्मों मे ही देख पाते हैं | समूह ने मुझे तस्वीरें दिखाई जिसमें वे कभी झीलों को पार कर रहे है, कभी घने जंगलों में कैंपिंग कर रहे है, कभी मध्यपूर्व के रेगिस्तान में घूम रहे हैं | तस्वीरें देख कर एक बात तो साफ है कि रोटल पर की गयी यात्रा ज़िंदगी में हमेशा याद रहती है | नई नई जगहों पर सूर्योदय और सूर्यास्त देखने के अलावा और एक सैलानी को और क्या चाहिए | इस समूह की यात्रा का कार्यक्रम काफ़ी रोमांचक था जिसके अंतर्गत अब अगला चेन्नई और गोवा की ओर घूमने जाना था, जिसके बाद वे जर्मनी के लिए हवाई जहाज़ पकड़ लेंगे |

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रोटल में मुस्कान बिखराते हुए | तस्वीर का श्रेय : वेर्नेर बेयर

भारत के अलावा दा दास रोलेंड चीन, वियतनाम, लाओस और मंगोलिया की रोड ट्रिप भी करवाता है | तो अगर आप जर्मन में बात कर सकते हैं और एशिया का ऐसा टूर करने को तैयार हैं जैसा कभी नहीं किया, तो आज ही रोटल में बैठिए | अगर आपको जर्मन नहीं आती तो आज से ही शुरू हो जाइए क्यूंकी हमने आपके हाथों में एक अतुलनीय अवसर रख दिया है | तो भारत में रोटल कनसेप्ट की शुरुआत करने के लिए तैयार हो जाइए |

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