22% भारतीय सैलानी घर बैठे ही घूमने का ढोंग करते हैं, क्या आप भी इनमें से एक तो नहीं ? 

Tripoto

हफ्ते के बीच में बोरियत के मारे मैं काफ़ी देर तक इंस्टाग्राम खोल कर देखता रहा | देखते देखते ऐसा लगा जैसे मेरे सभी जानकार लोग छुट्टी मनाने गये हुए हैं | कुछ हिमाचल की बर्फ से पुतले बना रहे है तो कुछ लोग श्रीलंका में हाथियों के साथ खेल रहे हैं | इंस्टाग्राम पर ये सब देखते हुए मेरी आँखें मेरी एक दोस्त की तस्वीर पर टिक गयी जो पिछले 10 दिन से अपनी यात्राओं की लुभावनी तस्वीरें हफ्ते के बीच में बोरियत के मारे मैं काफ़ी देर तक इंस्टाग्राम खोल कर देखता रहा | देखते देखते ऐसा लगा जैसे मेरे सभी जानकार लोग छुट्टी मनाने गये हुए हैं | कुछ हिमाचल की बर्फ से पुतले बना रहे है तो कुछ लोग श्रीलंका में हाथियों के साथ खेल रहे हैं | इंस्टाग्राम पर ये सब देखते हुए मेरी आँखें मेरी एक दोस्त की तस्वीर पर टिक गयी जो पिछले 10 दिन से अपनी यात्राओं की लुभावनी तस्वीरें इंस्टाग्राम पर डाल रही थी | आख़िर लोग इतनी लंबी छुट्टियों पर कैसे चले जाते हैं ? इतना पैसा आता कहाँ से है ? गूगल पर ढूँढने पर मुझे वही जवाब मिला जिसके बारे में मैं सोच रहा थे : इनमे से 22 प्रतिशत झूठ बोलते हैं |

क्या आप सच में घूमने गये हैं या झूठ बोल रहे है?

Photo of 22% भारतीय सैलानी घर बैठे ही घूमने का ढोंग करते हैं, क्या आप भी इनमें से एक तो नहीं ?  1/1 by लफंगा परिंदा
तस्वीर का श्रेय : थॉमस वांचाएछत

मुझे पता है कि आपमें से अधिकांश लोग ये नहीं मानेंगे मगर मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि जाने अंजाने में आपने भी बिना गये ही छुट्टियों पर जाने का ढोंग किया है | मैं समझाता हूँ | अगर आप आस पास में ही वीकेंड में घूमने गये हैं मगर फिर भी आने वाले कम से कम 15 दिनों तक अपनी यात्रा की तस्वीरें लोगों को दिखाने वाले हैं तो आप घूमने का ढोंग कर रहे हैं | अगर आप गुरुवार का इंतज़ार सिर्फ़ इसलिए कर रहे हैं कि एक साल पहले की यात्रा की तस्वीर #थ्रोबैकथर्सडे के साथ लोगों को दिखाएँगे तो आप ढोंग कर रहे हैं | अगर आप अपनी पिछली छुट्टियों की कहानियाँ डाल रहे हैं मगर ये जता रहे हैं कि आप अभी घूमने गये हैं तो आप ढोंग कर रहे हैं | मुझे पता था कि आपने इन बातों को पढ़कर अपने आपको भी उन 22% झूठे लोगों की भीड़ में खड़ा पाया है और अब आप धीमे धीमे मुस्कुरा रहे हो |

क्या हम ज़्यादती नहीं कर रहे है?

हम आज ऐसे समय में जी रहे हैं जब घूमने फिरने को काफ़ी "कूल" माना जाता है और इसके पीछे काफ़ी पुख़्ता कारण भी है | घूमने फिरने से आप नये लोगों, संस्कृतियों और अनुभवों से रूबरू होते हैं जो एक इंसान के रूप में आपका एक नया पहलू उजागर करता है | आप चाहे खुद को करीब से जानना चाहें या किसी नई जगह को, घूमने फिरने से बेहतर कोई तरीका नहीं है | मगर आजकल घूमने फिरने के हौवे के चलते हम झूठमूठ ही किसी अनसुनी जगह की रोमांचक दास्तानें लोगों से बाँटते रहते हैं, जबकि असल में हम अपने घर में बिस्तर पर पड़े 'नेटफ्लिक्स' देख रहे होते हैं | तो नये अनुभवों के लिए अपने दिल के दरवाज़े खोलने के लिए घूमिये, ना की दूसरों के सामने शेखी बघारने या झूठ बोलने के लिए | घूमकर लौटने के बाद काफ़ी दिनों तक कहानियाँ और तस्वीरें इंस्टाग्राम पर डालना जायज़ है लेकिन ना घूमते हुए भी घूमने का दावा करना काफ़ी ग़लत बात है | अगर हरेक अपनी यात्राओं की कहानियों को लेकर ईमानदारी बरते तो हममे से कई लोग अनावश्यक की चिंता जिसे आजकल 'फोमो' या 'फियर ऑफ मिसिंग आउट' कहते हैं, से बच सकते हैं |

तो आइए सोशल मीडिया पर थोड़ा असली रहें और इसे एक प्रेरणा पाने का ज़रिया बनाएँ, ना कि झूठ का बाज़ार |

अगर आप अपनी पुरानी यात्रा की यादों को फिर से जीना चाहते हैं तो सोशल मीडिया पर झूठ दिखाने की बजाय अपने अनुभव ट्रिपोटो पर लिख दीजिए | आप यहाँ लिखना शुरू कर सकते हैं|

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