कम बजट में करें दो ज्योतिर्लिंग और एक शक्तिपीठ के दर्शन, वह भी मात्र 2 दिन में

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भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंग पूरे देश में विस्तारित हैं। उत्तर में बाबा केदार के रूप में, पश्चिम में सोमनाथ महादेव के रूप में, पूर्व में बाबा वैद्यनाथ के रूप में और दक्षिण रामेश्वर के रूप में भगवान शिवशम्भू प्रतिष्ठित हैं। द्वादश ज्योतिर्लिंगों के नाम और उनका माहात्म्य इस मंत्र में दृष्टव्य है-

सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम् ।

उज्जयिन्यां महाकालम्ॐकारममलेश्वरम् ॥१॥

परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमाशंकरम् ।

सेतुबंधे तु रामेशं नागेशं दारुकावने ॥२॥

वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यंबकं गौतमीतटे ।

हिमालये तु केदारम् घुश्मेशं च शिवालये ॥३॥

एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः ।

सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति ॥४॥

जो व्यक्ति इन सभी ज्योतिर्लिंगों का स्मरण कर प्रात:-संध्या प्रणाम करता है, उसके सात जन्मों के पाप विनष्ट हो जाते हैं।

महाकालेश्वर मंदिर

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इन्हीं द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से दो ज्योतिर्लिंग मध्यप्रदेश में स्थित हैं। उज्जैन में परमपावनी शिप्रा नदी के तट पर स्थित हैं श्रीमहाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग और शिवतनया माँ नर्मदा के तट पर स्थित है ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग।

दिलचस्प बात यह है कि आप इन दोनों ज्योतिर्लिंगों के दर्शन दो दिन में आराम से कर सकते हैं और यदि समय कम हो और आप थोड़ी दौड़-भाग कर सकते हों तो दोनों ज्योतिर्लिंग के दर्शन एक दिन में भी किए जा सकते हैं। जानिए कैसे?

मुख्य मार्ग से मंदिर का दृश्य

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बाबा महाकाल का धाम उज्जैन

उज्जैन एक धार्मिक नगर है। यहाँ विभिन्न देवी-देवताओं के अनेकानेक मंदिर मौजूद हैं। सबसे प्रधान मंदिर है भगवान श्रीमहाकाल का। महाकाल मंदिर शताब्दियों पुराना है और स्कंद पुराण के अवंतिखंड में इस मंदिर और उज्जैन का प्रमुखता से वर्णन मिलता है। कविकुलशिरोमणि कालिदास ने अपने काव्य मेघदूतम में भी महाकाल मंदिर का ज़िक्र किया है। महाकाल मंदिर से निकट ही हरसिद्धि देवी का मंदिर है। इस स्थान पर भगवती सती की कोहनी आकर गिरी थी। यह स्थान भारतवर्ष देश के 52 शक्तिपीठों में से एक है।

हरसिद्धि मंदिर का दीपस्तम्भ

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कालभैरव मंदिर

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श्रीमहाकाल मंदिर जाएं तो मान्यता अनुसार सबसे पहले कालभैरव मंदिर दर्शन करने के लिए पहुंचें। जनश्रुति है कि भगवान महाकाल के द्वारपाल के रूप में कालभैरव कार्य करते हैं। इसलिए श्रीमहाकाल के दर्शन के पूर्व कालभैरव के दर्शन करने की मान्यता है। यह वही मंदिर है जहां पर कालभैरव को प्रसाद के रूप में मदिरा चढ़ाई जाती है।

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कैसे पहुंचें?

श्रीमहाकालेश्वर मंदिर दर्शन के लिए आप अपने शहर से उज्जैन के लिए ट्रेन या बस ले सकते हैं। उज्जैन रेल्वे स्टेशन का कोड है UJN और यह दिल्ली से राजस्थान के रास्ते दक्षिण भारत जाने वाली ट्रेनों का प्रमुख स्टॉप है। भोपाल से राजस्थान की ओर जाने वाली अधिकतर ट्रेन उज्जैन होकर गुज़रती हैं। बस से पहुंचना चाहते हैं तो उज्जैन का प्रमुख बस अड्‌डा नानाखेड़ा बस अड्‌डा है।

निकटतम विमानतल इंदौर में मौजूद है जो कि उज्जैन से 40-50 किमी की दूरी पर स्थित है।

रामघाट

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बजट यात्रा का सुझाव

आप इंदौर या उज्जैन जिस भी स्थान पर रूकना चाहें, रूक सकते हैं। दोनों ही स्थानों पर अच्छे और बजट होटल व धर्मशालाएँ यात्रियों के लिए उपलब्ध है। पहले दिन उज्जैन में श्रीमहाकालेश्वर, हरसिद्धि मंदिर, कालभैरव मंदिर, संदीपनी आश्रम, महाकाल लोक आदि का भ्रमण कर लें।

यदि आप इंदौर में रुकते हैं तो उज्जैन से वापिस इंदौर लौटकर यहाँ के रात्रिकालीन सराफा बाज़ार का लुत्फ़ उठा सकते हैं। इंदौर से उज्जैन के लिए सीधी बसें हर 10-15 मिनट में उपलब्ध होती हैं। बस का एक ओर से किराया 75 रुपए है।

शिप्रा नदी

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ॐकारेश्वर धाम की ओर

ॐकारेश्वर मंदिर माँ नर्मदा नदी के मध्य में एक टापू पर अवस्थित अति प्राचीन मंदिर है। यही वह स्थान है जहाँ पर आद्यगुरु शंकराचार्य ने दीक्षा ली थी और नर्मदा नदी के किनारे तप किया था। यहीं उन्होंने माँ नर्मदा की स्तुति में नर्मदाष्टकम स्तोत्र की रचना की थी। मुख्य मंदिर तक पहुँचने के लिए नर्मदा नदी को पार करके जाना पड़ता है क्योंकि मंदिर मध्य में एक टापू पर स्थित है। इस टापू पर्वत को ॐ पर्वत भी कहते हैं और लोग इस पर्वत की परिक्रमा भी करते हैं जो कि 5 किमी लम्बी है।

ओम्कारेश्वर मंदिर से नर्मदा नदी का दृश्य

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ॐ पर्वत नर्मदा नदी के मध्य में स्थित है और यह धारा को दो भागों में विभाजित करता है। यहाँ दो प्रमुख मंदिर है। पहला तो ॐकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर जो कि मध्य टापू पर स्थित है। मंदिर तक नाव या पैदल पुल से पहुँचा जा सकता है। यात्रीगण चाहें तो यहाँ पर नौकायान का लुत्फ़ भी उठा सकते हैं।

दूसरा मंदिर है ममलेश्वर जो कि नदी से कुछ दूर नगर में स्थित है। दोनों ही मंदिर प्राचीन है और भक्तजन दोनों ही मंदिरों का दर्शन लाभ लेते हैं। माँ नर्मदा की सुरम्य घाटी में बसा यह स्थान अनायास ही मनमोह लेता है। यहाँ नागर घाट, गौ घाट आदि घाटों पर यात्री स्नान भी कर सकते हैं।

ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दिव्य दर्शन

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कैसे पहुँचें?

ओम्कारेश्वर तक पहुँचने के लिए पर्याप्त साधन इंदौर और खंडवा शहर से उपलब्ध हैं जो कि दोनों विपरीत दिशा है। इंदौर से ॐकारेश्वर के लिए तीन इमली बस स्टैंड से नियमित बसें मिलती हैं। इंदौर से ॐकारेश्वर की दूरी 80 किमी है। चूँकि विंध्याचल पर्वत श्रेणी को पार करके नदी घाटी में ॐकारेश्वर मंदिर पहुंचना होता है इसलिए इस यात्रा में क़रीब ढाई से 3 घंटे का समय लग जाता है। बस का किराया 150 से 200 रुपए के बीच में रहता है।

सड़क मार्ग सुगम है और यात्री चाहें तो निजी गाड़ी से भी यहाँ पहुंच सकते हैं।

चाहें तो ॐकारेश्वर में रात्रि विश्राम कर सकते हैं। यहाँ पर सस्ते दामों में धर्मशालाएं मिल जाती हैं। या फिर सारा दिन भ्रमण करके आप वापिस इंदौर आ सकते हैं।

ओम्कारेश्वर बांध

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एक दिन में कैसे घूमें?

यदि आपके पास समय कम है और आप एक दिन में दोनों स्थानों पर दर्शन करने के इच्छुक हैं तो सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि आप बिल्कुल सुबह उज्जैन पहुँच जाएँ। उज्जैन में प्रात: दर्शन करके बस स्टैंड 10 से 11 बजे तक पहुँच जाएँ। यहाँ से आपको सीधी बस ॐकारेश्वर के लिए मिल सकती है या फिर आप इंदौर जाकर वहाँ से ॐकारेश्वर की बस पकड़ सकते हैं। उज्जैन से इंदौर की दूरी 45 मिनट और इंदौर से ॐकारेश्वर की दूरी लगभग ढाई घंटे मानें तो आप साढ़े तीन से 4 घंटे की यात्रा के बाद ॐकारेश्वर पहुँच सकते हैं। यानी आप उज्जैन से 12 बजे भी निकलें तो शाम 4 बजे तक आप ॐकारेश्वर पहुँच सकते हैं। यहाँ पर संध्या दर्शन के उपरांत यहीं विश्राम कर सकते हैं या शाम 7-8 बजे तक बस पकड़कर पुन: इंदौर लौट सकते हैं।

सैलानी टापू

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नदी पुल

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ममलेश्वर मंदिर की बाह्य दीवार

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