पंजाबी खानों और गानों के दीवानों! आओ आपको सीधा पंजाब ही ले चले

Tripoto

काफ़ी निराशाजनक बात है कि यूँ तो पंजाब सांस्कृतिक रूप से काफ़ी संपन्न और जगप्रसिद्ध है मगर फिर भी ये सैलानियों में इतना मशहूर नहीं है | यहाँ ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण स्मारक भी हैं तो अमृतसर की मशहूर कुल्चा स्ट्रीट भी है | पंजाब में घूमने फिरने और अनुभव करने के लिए इतना कुछ है कि अगर आप आज तक यहाँ नहीं आए है तो घाटा आपका ही है |

तो इससे पहले की आप पंजाब को अनदेखा करके कहीं और यात्रा की योजना बना लें, आपके लिए लेकर आए हैं पंजाब में की जा सकने वाली गतिविधियाँ |

इतिहास प्रेमियों के लिए

1947 में भारत पाकिस्तान के बँटवारे से पहले पंजाब भारत का सबसे बड़ा राज्य था क्यूंकी इसका एक बड़ा भाग सीमा के उस पार पाकिस्तान में था | भारत में देखें तो इस राज्य में सिखों की सबसे ज़्यादा आबादी भी पाई जाती है | पंजाब की ज़मीन, यहाँ के शासकों और आवाम के लंबे चौड़े इतिहास का गुणगान करने के लिए विस्तृत विवरण की ज़रूरत होगी जो मैं शब्दों में नहीं कर सकती | तो शब्दों में समझने की बजाय आइए पंजाब के प्रसिद्ध स्मारकों की सैर करें जो आपको पंजाब का इतिहास बेहतर रूप से बयान कर पाएँगी |

गोबिंद गढ़ किला

कहाँ: अमृतसर

18वीं शताब्दी में एक स्थानीय सरदार द्वारा बनवाया गया ये किला पंजाब के सबसे पुराने किलों में से एक है | यह 1900 के दशक के प्रारंभ में महाराजा रणजीत सिंह द्वारा जीत लिया गया और फिर इसका पुनर्निर्माण करवाया गया और इसका नामकरण सिखों के गुरु गोविंद सिंघ जी की तर्ज़ पर रख दिया गया | यह किला स्वर्ण मंदिर से मात्र 2.5 किलोमीटर दूर है और यहाँ तक स्थानीय यातायात के साधनों से आराम से पहुँचा जा सकता है |

किला मुबारक

कहाँ: पटियाला

भटिंडा के बीच में भारत का सबसे पुराना किला मौजूद है जो आज भी जीवित है | किला मुबारक 90-110 ईस्वी के बीच किसी समय बनाया गया था | रज़िया सुल्तान द्वारा लोकप्रिय किए गये इस किले का इतिहास पाषाण काल तक जाता है | इस ज़मीन से खुदाई के दौरान हाथ से बनाए गये औज़ार जैसे पत्थर की कुल्हाड़ी आदि मिले हैं | यह किला पटियाला बस स्टैंड से मात्र 3 किलोमीटर दूर है और यहाँ तक स्थानीय यातायात के साधनों से आराम से पहुँचा जा सकता है |

शीश महल

कहाँ: पटियाला

पंजाब के सबसे प्रसिद्ध कला संरक्षक महाराजा नरिंदर सिंह ने शीश महल का निर्माण करवाया था जो दुनिया भर से जमा की गयी कलाकृतियों के प्रभावशाली संग्रह के कारण जाना जाता है | ये जगह किला मुबारक परिसर का ही हिस्सा है और एक म्यूज़ियम भी है जहाँ आपको 19वीं शताब्दी में पंजाब के शाही ठाट बाट की झलक देखने को मिलती है |

लोधी किला

कहाँ: लुधियाना

सतलज के तट पर स्थित लोधी किला 500 साल पहले मुगल सम्राट सिकंदर लोधी द्वारा बनवाया गया था। अब ये किला खंडहर से ज़्यादा और कुछ नहीं है लेकिन अभी भी इतिहास प्रेमी लोग यहाँ आते हैं | लोधी किले तक पहुँचने के लिए लुधियाना में कहीं से भी ऑटो ले लीजिए | शहर में यातायात व्यवस्था खराब है इसलिए आपको खुद ड्राइव करके जाने की सलाह नहीं दूँगी |

Photo of पंजाबी खानों और गानों के दीवानों! आओ आपको सीधा पंजाब ही ले चले 2/6 by लफंगा परिंदा
कपूरथला का जगत्जीत पैलेस, श्रेय : ग्राहम बियर्ड्स

एलिसी पैलेस

कहाँ: कपूरथला

कपूरथला को पंजाब के सबसे शाही शहर के रूप में जाना जाता है। ये पटियाला के शाही परिवार का घर तो है ही, साथ ही कपूरथला में वास्तुकला के एक से एक नायाब नमूने भी देखने को मिलते हैं | यहाँ जगत जी पैलेस है जो अब सैनिक स्कूल में तब्दील किया जा चुका है और एलिसी पैलेस जिसका नाम पैरिस के एक महल के नाम पर रखा गया है | कपूरथला पहुँचे तो सार्वजनिक यातायात का साधन ले लें जो आपको आसानी से मिल जाएगा |

सभ्यता के शौकीनों के लिए

पंजाब की सभ्यता से ही यहाँ का खाना और गाने निकले हैं जिसे पूरा भारत इतना पसंद करता है | लेकिन पंजाब की संस्कृति में एकजुटता, भाईचारा और सांप्रदायिक सद्भाव की गहरी भावना है जिसे लोग अक्सर अनदेखा कर देते हैं | पंजाब मे कुछ ऐसी जगहें है जहाँ जाएँगे तो दिल से पंजाबी होने के अहसास को जी लेंगे |

होला मोहल्ला महोत्सव

कहाँ: रोपड़

इस साल का होला मोहल्ला महोत्सव 13 मार्च को मनाया जाएगा तो उस समय तक पंजाब जाकर इस शानदार सिख महोत्सव का हिस्सा बनें | ये महोत्सव रोपड़ में आनंदपुर साहिब गुरुद्वारा मैदान में तीन दिनों तक बड़े पैमाने पर मनाया जाता है| कहा जाता है कि सिख समुदाय को मजबूत करने के लिए गुरु गोबिंद सिंह द्वारा होला मोहल्ला शुरू किया गया था। इस बारे में और पढ़ें |

किला रायपुर

कहाँ: लुधियाना

प्यार से ग्रामीण ओलंपिक कहे जाने वाले इस महोत्सव को हर साल फ़रवरी के महीने में किला रायपुर लुधियाना में मनाया जाता है | यह महोत्सव कई ग्रामीण खेलों जैसे तिरिनजेन, किकली, गीता पाथर, खिड़ू, कोकला छपकी, चिचो चिच गनेरियन और कबड्डी को जनता के सामने लाता है | पंजाब और उत्तरी भारत के अन्य राज्यों के खिलाड़ी किला रायपुर में हिस्सा लेने को अपना सौभाग्य मानते हैं |

पंजाब के खेतों में ठहरना

पंजाब के खेतों में रुकने यानी फार्मस्टे का चलन बढ़ गया है। पूरे भारत और दुनिया के सैलानी भारत के इस कृषि प्रधान राज्य में कृषि जीवन का अनुभव करने में रुचि रखते हैं। पंजाब में फार्मस्टे के लिए कई बजट और लक्जरी विकल्प उपलब्ध हैं। सिट्रस कंट्री फार्म, पंजाबियत और प्रकृति फार्म कुछ विश्वासीय और सबसे ज़्यादा जाए जाने वाले फार्मस्टे में से एक है |

धार्मिक और अध्यात्मिक लोगों के लिए

पंजाब को भारत में सबसे अधिक धर्मनिरपेक्ष राज्यों में से एक माना जाता है, क्योंकि सिख

धर्म दूसरे धर्मों की तुलना में काफ़ी धर्म निरपेक्ष है | सिख धर्म के अलावा अन्य प्रमुख धर्मों जैसे इस्लाम, ईसाई और हिंदू धर्म के अनुयायी भी पंजाब में रहते हैं | पंजाब में कई मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे हैं, लेकिन इनमें से कुछ ऐसे हैं जिन्हें आपको अपनी अगली यात्रा के दौरान ज़रूर देखना चाहिए |

मुक्तेश्वर मंदिर

कहाँ: पठानकोट

पंजाब जाएँ तो पठानकोट में स्थित मुक्तेश्वर मंदिर ज़रूर जाएँ क्यूंकी यहाँ के स्थानीय श्रद्धालू मानते हैं कि यहाँ माँगी हुई मुराद ज़रूर पूरी होती है | कहा जाता है कि मंदिर की स्थापना पांडवों ने माता चिंतपूर्णी की पूजा करने के लिए की थी। मंदिर पठानकोट से सिर्फ 22 किमी दूर है और राष्ट्रीय राजमार्ग 20 से यहाँ आसानी से पहुंचा जा सकता है।

हरमंदिर साहिब

कहाँ: अमृतसर

सिख धर्म के सबसे पवित्र गुरुद्वारे अमृतसर में स्थित श्री हरमंदिर साहिब की स्थापना 1577 में सिखों के चौथे गुरु राम दास द्वारा की गई थी। मंदिर का विस्तार बाद के वर्षों में महाराजा रणजीत सिंह द्वारा किया गया था, जो ताउम्र इस गुरुद्वारे में माथा टेकने आते थे | श्री हरमंदिर साहिब की यात्रा के लिए अमृतसर पहुंचें और गुरुद्वारे के लिए एक ऑटो लें।

सेंट मैरी कैथेड्रल

कहाँ: जालंधर

जालंधर के रोमन कैथोलिक सूबा के बिशप की सीट सेंट मैरी कैथेड्रल शहर के छावनी क्षेत्र में स्थित है। 1847 में जालंधर में बने सेंट मेरीज कैथेड्रल पंजाब में अवश्य जाना चाहिए। जालंधर पहुँचने के बाद माल रोड की ओर जाने के लिए एक ऑटो पकड़ लें जहाँ से चर्च जाना बड़ा आसान है |

मूरिश मस्जिद

कहाँ: कपूरथला

ये मस्जिद मोरोक्को के माराकेश में स्थित ग्रांड मॉस्क से प्रेरित है | महाराजा जगत्जीत सिंघ द्वारा निर्मित ये मस्जिद पंजाब में धर्म निरपेक्षता का प्रतीक है | मूरिश मस्जिद कपूरथला के पास जालंधर रेलवे स्टेशन है | वहाँ से कोई भी सार्वजनिक यातायात का साधन मिल जाता है |

आनंदपुर साहिब

कहाँ: रोपड़

रोपड़ शहर में बहुत सारे गुरुद्वारे हैं और ये सिखों के लिए भारत में सबसे पवित्र जगहों में से एक है | आनंदपुर साहिब एक विशाल गुरुद्वारा परिसर है जहाँ प्रसिद्ध होला मोहल्ला उत्सव का भी आयोजन होता है। पंजाब के सभी प्रमुख शहरों से रोज़ बसें आनंदपुर साहिब आती हैं।

भोजन प्रेमियों के लिए

भारत में बहुत सारे लोगों के लिए पंजाब का मतलब ही बढ़िया खाना है और हो भी क्यूँ ना! इस शहर में बहुत सदियों से मुगलई खाने में बेहतरी की जा रही है |

यहाँ तक की किसानों का मुख्य भोजन जैसे सरसों का साग और मक्‍के की रोटी भी उत्तर भारत के परिवारों में काफ़ी प्रसिद्ध है | अगर पंजाब का इतिहास, सभ्यता और धर्म आपको अपनी ओर आकर्षित नहीं करता तो यहाँ का भोजन ज़रूर करेगा | 

अगर आप खाने पीने के शौकीन हैं तो पंजाब के ये रेस्तराँ आपको ज़रूर खुश कर देंगे |

आहूजा लस्सी

कहाँ: ढाब खटीकान, हिंदू कॉलेज के पास, हाथी गेट, अमृतसर

ज़रूर चखें: केसर लस्सी

अमृतसर में भरवाँ दा ढाबा

कहाँ: अमृतसर नगर निगम के पास, टाउन हॉल, अमृतसर

ज़रूर चखें: सरसो दा साग मक्के दी रोटी के साथ

कुलचा लैंड

कहाँ: शॉप नंबर 53 कुंदन नगर, बैक साइड सिंह सभा गुरुद्वारा, मॉडल टाउन एक्सटेंशन, लुधियाना

ज़रूर चखें: पनीर कुलचा अमृतसरी लस्सी के साथ

लुधियाना में अमन चिकन

कहाँ: शास्त्री नगर के पास, रेलवे क्रॉसिंग, पखोवाल रोड, जगजीत नगर, लुधियाना

ज़रूर चखें: बटर चिकन

चावला चिकन ट्रीट

कहाँ: स्को -1, पटियाला - 147001, 22 फाटक

ज़रूर चखें: चिकन तंदूरी

पाल ढाबा

कहाँ: एससीओ नंबर 151-152 सेक्टर 28 डी, चंडीगढ़

ज़रूर चखें: मटन में सब कुछ!

क्या आप कभी पंजाब गये हैं ? अपनी यात्रा का कार्यक्रम ट्रिपोटो पर पर अपने साथी सहयात्रियों के साथ बाँटें और सभी को अपनी रोमांचक यात्रा के किस्से पढ़ने दें |

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