पार्टी, नाच-गाने और भीड़ भाड़ से दूर - गोवा का दूसरा पहलू !!! 

Tripoto
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मेरा घर तो दिल्ली में है, लेकिन पिछले कुछ महीनों से मैं बैंगलोर रहने लगी हूँ। बैंगलोर में रहने का फायदा वहाँ का बढ़िया मौसम तो है ही लेकिन उससे भी ज्यादा गोवा, हम्पी, चिकमंगलूर, ऊटी, कूर्ग इत्यादि स्थानों से उसकी निकटता है।पिछले सप्ताह मैंने गोवा जाने का फैसला किया है - वैसे भी मैं हर साल वहाँ जाती हूँ, लेकिन मानसून के समय कभी नहीं गयी।

बैंगलौर से गोवा रूट पर बहुत सारे प्राइवेट बस चालक हैं जिनमें हर रोज़ रेगुलर सीटर से लेकर ऐ/सी स्लीपर और वोल्वो सभी उपलब्ध हैं। किन्तु प्राइवेट टूर ऑपरेटरों के साथ मेरा अनुभव कुछ ख़ास न होने की वज़ह से ( यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव है ) मैं सरकारी बसों को ज्यादा पसंद करती हूँ क्योंकि उनके चालक अपने प्रस्थान और आगमन के समय को लेकर अधिक अनुशासित हैं और इज़्ज़त से पेश आते हैं।

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केम्पेगौड़ा स्टेशन

मैंने अपने लिए रात 8 बजे, केम्पेगौड़ा बस टर्मिनल से पणजी, गोवा के लिए चलने वाली कर्नाटक रोड ट्रांसपोर्ट की वोल्वो ए / सी बस में सीट को बुक किया।रात भर की यह यात्रा लगभग 12 घंटे लंबी होती है।

बस का एक तरफ का किराया - 1000 रु है ।( यदि आप वीक डे के दौरान यात्रा करते हैं तो शुल्क थोड़ा कम होता है)

पहला दिन --------

कानाकोना

शनिवार सुबह 6 बजे गोवा में मेरा पहला दिन - मनमोहक सूर्योदय मेरे सामने था, चारों ओर सब कुछ हरा भरा, बारिश से धुले जंगल ,दूर तक फैला समुद्र और बारिश की ओस और धुंध के बीच चमकता हुआ सूरज।दिल में बस जाने वाला अनुभव था।

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मैं कानाकोना पहुँच गयी। यह गोवा का सबसे दक्षिणी भाग है, जो पणजी से लगभग 2 घंटे की दूरी पर है।ठहरने के लिए कानाकोना में ही मुझे मेरे मित्र का अवकाश गृह मिल गया जिससे मेरा होटल का खर्च बच गया। 9 बजे विश्राम गृह पहुँचकर बिना कोई देरी किये मैंने कपड़े बदले और बीच की ओर अपना रुख किया।

आसपास घूमने के लिए: आप एक कार ( 600-800 रु ) या एक बाइक (150-300 रु ) किराए पर ले सकते हैं। ऑफ-सीज़न के कारण, बस स्टॉप या सड़कों पर शायद ही कोई टूरिस्ट दिखाई दे रहा था। उम्मीद है कि शायद कोई बीच पर मिल जाये।

दोपहर 12 बजे: घर पर भर पेट नाश्ते के बाद, मैं अपने पसंदीदा बीच, गलजीबाग पहुंची।यह दक्षिण गोवा में सबसे साफ़ सुथरी बीच है और इससे कम लोग ही परिचित हैं।किन्तु वहाँ पहुंचकर मायूसी का सामना करना पड़ा क्योंकि कोई भी शैक खुला नहीं था।ऑफ सीजन के कारण सब कुछ बंद था। उस बीच पर केवल मैं और बस एक लाईफ गार्ड था। तब उसने मुझे बताया कि यह बीच इन दिनों खाली है क्योंकि इस सीजन में समुद्र में उच्च ज्वार होने के कारण तैरना और आराम करना सुरक्षित नहीं है।यदि मैं तैरना चाहती हूँ तो उन्होंने मुझे शाम 4 बजे के आसपास पालोलेम बीच पर जाने का सुझाव दिया।

गलजीबाग़ बीच

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पालोलेम बीच

दोपहर 2 बजे मैं पालोलेम बीच के लिए चल पड़ी।लेकिन इस मानसून के मौसम में वहाँ भी 50 शैक में से सिर्फ 2 ही शैक खुले थे।उनकी मोनोप्ली और कोई अन्य विकल्प न होने के कारण शैक काफी महँगे पड़ते हैं। लेकिन एक बात का सुकून भी था कि इस समय यहाँ पर एक साफ सुन्दर बीच और केवल 20 -30 लोग ही हैं ।कोई भीड़ भाड़ नहीं है।

शाम 4 बजे: मैं समुद्र की ओर चल पड़ी, साफ आकाश, बड़ी बड़ी समुद्री लहरें और आसमान छूते नारियल के पेड़, मुझे यकीन हो चला था कि इस नए गोवा के साथ मुझे फिर से प्यार हो रहा है।

लेकिन रुकिए, यह भारत है !!! अचानक मुझे एहसास हुआ कि मैं जहाँ- जहाँ भी जा रही थी कुछ 4 - 5 युवक मेरा पीछा कर रहे थे।और में सोचने लगी कि क्या समुद्र भी महिलियों के लिए सुरक्षित नहीं है।क्या आप विश्वास कर सकते हैं ?

खैर मैंने काफी देर उन्हें नज़रअंदाज़ करने की कोशिश की, लेकिन फिर मैंने उनके खिलाफ लाइफ गार्ड से शिकायत करने का फैसला किया।मेरे आश्चर्य का ठिकाना न रहा जब एक पुलिसमैन को मैंने अपनी ओर आते हुए देखा और उन्होंने मुझ से पुछा कि "क्या वे आपको परेशान कर रहे हैं?", और मेरे ‘हाँ’ में जवाब देने पर, उन्होंने कहा "हम यह लाइफ गार्ड बूथ से नोटिस कर रहे थे, इसीलिए मैं अब आया था"।

उसने तुरंत सभी लफंगों को समुद्र से बाहर निकलने और बीच को तुरंत छोड़ने के लिए कहा, लेकिन उनकी अच्छी तरह पिटाई करने के बाद !!! बाद में मैंने कुछ चॉकलेट देकर लाइफ-गार्ड और पुलिस वाले को धन्यवाद दिया। गोवा पुलिस में मेरा विश्वास और बढ़ गया !

शाम 6 बजे - घर वापस जाने का समय। घर पर डिनर (चूंकि इस मौसम में गोवा में पार्टी करने के ज्यादा विकल्प नहीं होते ) इसलिए पार्टी एनिमल्स के लिए टिप: मानसून में गोवा न आएँ । बल्कि प्रकृति प्रेमियों के लिए यह मौसम सही है। इस समय गोआ एकदम शुद्ध प्राकृतिक रूप में होता है।

दूसरा दिन : मुझे दक्षिण गोवा के अनेक विशाल झरनों के बारे में बताया गया था जो मानसून के दौरान अपने पूरे चरम पर होते हैं।

कुसकेम वॉटरफॉल

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सुबह 11 बजे, मैं और मेरी सेविका की बेटियाँ वॉटरफॉल देखने के लिए रवाना हुईं। 3 झरने और लगातार बारिश, हम पूरी यात्रा में गीले थे।

लेकिन मेरे लिए ऐसा अनुभव पहली बार था, झरने के भीतर उतरना, तालाब में तैरना और मेरी पीठ पर 30 मीटर ऊँचाई से झरने का पानी गिरना मुझे एक्यूप्रेशर जैसी मसाज दे रहा था, भीगना बिलकुल भी बुरा नहीं लगा !!!

दूसरा दिन

कुसकेम वॉटरफॉल

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इतने लंबे समय तक गीला रहने के कारण मैं बिलकुल थक चुकी थी इसलिए पलोलेम बीच शैक पर जल्दी से डिनर करके घर वापस जाना चाहती थी।लेकिन रुकें !!

पलोलेम बीच

रात 8:30 बजे मौसम और ज्वार का हाल जानने के लिए अपना फ़ोन चेक किया तो मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा जब पता चला कि 10:45 पर हाई टाइड होगी। उस अवसर को मैं खोना नहीं चाहती थी इसलिए मैंने बीच पर ही इंतज़ार किया। रात 10 बजे तक हाई टाइडस ने पूरे बीच को घेर लिया था और लहरें शैक तक पहुँच गयी थीं। ऐसा नज़ारा मैं पहली बार देख रही थी। वहां के कुत्ते एक सुरक्षित स्थान ढूंढ़ने के लिए दौड़ने लगे और लगभग 10 कुत्ते जो मेरे आस पास थे, यह सोचकर वहीँ बैठे रहे मानों मैं उनका मसीहा हूँ जो उन्हें बचा लेगा ।

ठीक 10:45 पर, जैसे कि मौसम विभाग द्वारा भविष्यवाणी की गई थी, मैंने पालोलेम बीच पर अब तक का सबसे ऊँचा ज्वार देखा, मेरे शैक की सीढ़ियों को भी उसने छू लिया था और अब मुझे पता था कि वापस घर जाने का समय हो गया है इससे पहले कि मेरी कार तक जाने के लिए पैदल चलने की भी कोई जगह न बचे।

तीसरा दिन

तीसरा दिन :इससे पहले कि मैं 1900 बजे गोवा से वापस बैंगलोर रवाना होने के लिए वॉल्वो बस में बैठूं

जानिए मेरी गोवा यात्रा के आखिरी दिन का हाल -

मेरे पसंदीदा फ्रेंच टोस्ट और कॉफ़ी नाश्ते के बाद मैं फिर से पालोलेम बीच की ओर चल पड़ी, लेकिन फिर भी हाई टाइड थीं !!! यह क्या **** खैर मेरे फोन की वैदर रिपोर्ट ने मुझे सुझाव दिया कि लो टाइड शाम 4 बजे के बाद होगी, इसलिए मुझे तब तक इंतजार करना पड़ेगा।

टहलते हुए मैंने उस ओर चलना शुरू किया जहाँ बीच ख़त्म हो रही थी तो देखा वहाँ बहुत सारी नाव खड़ी हैं जबकि इस मौसम में तो बोटिंग और फिशिंग की अनुमति होती ही नहीं है।तभी एक मछुआरे ने आकर पूछा कि क्या मैं बैकवॉटर की बोटिंग करना चाहूँगी ! केरल में तो बैकवाटरस सुना था लेकिन गोवा में ? खैर, अपनी इच्छा का और अधिक विरोध न करते हुए मैं बोटिंग के लिए तैयार हो गयी और जिस चीज का मुझे इंतजार था वह मुझे मिल गया, गोवा का एक बिलकुल ही अलग स्वरुप ।

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शांत बैकवाटरस , अनगिनत केकड़ों के घर, एक -दूसरे को संतुलित करती हुई चट्टानें, चील और बाज़ तथा छोटी मछलियों को पकड़ती हुई बड़ी मछलियाँ ! वाह !! वह 1 घंटे की बोटिंग मंत्र-मुग्ध थी! वहाँ से लौटकर मैंने अपनी गोवा यात्रा समुद्र में तैरते हुए, लहरों के साथ खेल कर समाप्त की।अब बैंगलोर वापस जाने का समय नज़दीक आ रहा था इसलिए विश्राम गृह वापस जाकर फ्रेश होने और बैग पैक करने का टाइम आ गया था।

निष्कर्ष:

- अगर आप पार्टी और नाइट लाइफ की तलाश में हैं तो मानसून के दौरान गोवा न जाएँ ।

- अगर आप शांति और प्रकृति प्रेमी हैं, तो मानसून के दौरान गोवा जरूर जाएँ ।

- बैकवाटर्स की राइड अवश्य करनी चाहिए।

- वाटरफॉल्स का मज़ा लेना है तो भी मानसून के दौरान गोवा जाएँ।

- पर्याप्त कपड़े पैक करें क्योंकि अधिकतर समय आप गीले ही रहेंगे।

- मच्छर से बचाने वाली क्रीम ना भूलें ।

इस सप्ताहांत यात्रा में मेरा कुल खर्च: 5000 / रु हुआ जिसमें कि मेरा स्टे फ्री था। उस दृष्टि से थोड़ा महंगा है, लेकिन मेरी यात्रा इतनी मज़ेदार रही मानों सारा पैसा वसूल हो गया।

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यह आर्टिकल अनुवादित है, ओरिजिनल आर्टिकल के लिए यहाँ क्लिक करें: https://www.tripoto.com/trip/different-goa-no-parties-and-no-rock-n-roll-59786d97e7a6f

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