सोनभद्र: यूपी का ऐतिहासिक शहर, बनाएँ अपनी बकेट लिस्ट का हिस्सा

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Photo of सोनभद्र: यूपी का ऐतिहासिक शहर, बनाएँ अपनी बकेट लिस्ट का हिस्सा by Musafir Rishabh

भारत विविधताओं से भरा देश है। यहाँ हर थोड़ी दूर पर लोगों की भाषा और खानपान के तरीकों में बदलाव आ जाता है। ऐसा ही कुछ मामला भारत के जिलों और कस्बों में भी देखा जा सकता है। कुछ जगहें ऐसी हैं जिनमें इतिहास का खजाना भरा पड़ा है। तो कुछ जगहें ऐसी भी हैं जो एकदम आधुनिक युग के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं। मजे की बात ये है कि घुमक्कड़ी में इन दोनों ही प्रकारों का बढ़िया मिश्रण है। वैसे यदि आप असली भारत को देखना चाहते हैं तो आपको उन जगहों पर जाना चाहिए जिन्होंने भारत के इतिहास में भी अहम भूमिका निभाई है। ऐसी जगहों पर आपको बहुत कुछ नया सीखने को मिलता है जो शायद आपको किसी भी किताब में नहीं मिलेगा। यदि आप ऐसी ही किसी ऐतिहासिक जगह पर जाना चाहते हैं तो आपको यूपी के सोनभद्र का प्लान बनाना चाहिए।

सोनभद्र

सोनभद्र उत्तर प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा जिला है। विंध्य पर्वतमाला के साउथ ईस्ट हिस्से में स्थित ये जगह घूमने के लिए बेहद खास है। सोनभद्र का नाम यहाँ से होकर बहने वाली सोन नदी के ऊपर रखा गया है जो इस जिले की मुख्य नदी भी है। सोनभद्र का टूरिज्म का बड़ा हिस्सा इतिहास और पुराने कल्चर के इर्द-गिर्द पिरोया गया है। मशहूर पर्यटन स्थलों के नाम पर सोनभद्र में आपको ऐतिहासिक इमारतें, गौरवशाली किले और प्राचीन समय से चली आ रही गुफाएँ देखने के लिए मिलेंगी। आपको जानकर हैरानी होगी कि सोनभद्र भारत का अकेला ऐसा जिला है जो देश के चार राज्यों- मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार की सीमाओं से लगा हुआ है।

1. विजयगढ़ फोर्ट

यूपी के सोनभद्र जिले में स्थित ये किला 5वीं शताब्दी में कोल राजाओं द्वारा बनवाया गया था। इस किले तक आने के लिए आपको सोनभद्र जिले के रॉबर्ट्सगंज से मऊ कलन गाँव की ओर बढ़ना होता है। रॉबर्ट्सगंज से लगभग 30 किमी. दूर चलने के बाद आपको ये किला दिखाई देने लगेगा। 400 फीट ऊँचाई वाला ये किला चारों ओर से कैमूर पहाड़ियों की चट्टानों से घिरा हुआ है। इस किले की सबसे आकर्षक चीजों में यहाँ मिलने वाली मूर्तियाँ, पत्थरों पर की गई पेंटिंग और लिखावट शामिल है। इस किले में ऐसे 4 तालाब भी हैं जिनमें सालभर पानी बना रहता है। किले के नजदीक दो और कुंड हैं जिन्हें आपको देख लेना चाहिए। मीरा सागर और राम सागर किले से थोड़ी ही दूरी पर हैं। इन दोनों के बीच खूबसूरत रंग महल पैलेस है जहाँ आप पत्थरों पर की गई बढ़िया पेंटिंग देख सकते हैं।

2. रिहन्द डैम

रेणुकूट शक्तिनगर रोड के पीपरी में बना ये डैम भी सोनभद्र के मुख्य आकर्षणों में से एक है। ये बांध रेणुकूट से तकरीबन 5 मील की दूरी पर है। सोन और रिहंद नदियों के संगम से 46 किमी. दूर बना ये बांध देखने लायक है। इस बांध को सोन नदी की सहायक रिहंद के जलाशय गोविन्द बल्लभ पंत सागर झील पर बनाया गया है। इस बांध के पानी का इस्तेमाल ज्यादातर कृषि से जुड़े कामों के लिए किया जाता है। क्योंकि बांध की वजह से पानी की सप्लाई सालभर बनी रहती है इसलिए सोनभद्र और उसके आसपास के इलाकों में फसल में भी वृद्धि देखी जा रही है।

3. अघोरी फोर्ट

सोनभद्र जिले के चोपन से 10 किमी और रॉबर्ट्सगंज से 35 किमी. की दूरी पर स्थित ये किला असल में रेणुकूट रोड पर बना हुआ है। अघोरी फोर्ट सोनभद्र के सबसे महत्वपूर्ण और अधिक देखने जाने वाले दर्शनीय स्थलों में से एक है। एक समय पर खरवार शासकों के साम्राज्य के अंतर्गत आने वाला ये किला बाद में चंदेल राजवंश के पास आ गया था। इस किले को ट्राइबल फोर्ट के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि किले पर राज करने वाले आखिरी राजा आदिवासी समाज से जुड़े थे। किले के पास तीन नदियों का संगम होता है जिसमें विजुल, रेगु और सोन नदी शामिल हैं। किले के चारों ओर गड्ढे बनाए गए हैं जिससे इसको दुश्मनों के आक्रमण से बचाया जा सके। किले में दाखिल होने के लिए आपके पास दो रास्ते हैं। आप रिहंद नदी के रास्ते फेरी लेकर आ सकते हैं। दूसरा रास्ता ये कि आप सोन नदी वाली घाटी से ट्रेक करके भी इस किले तक पहुँच सकते हैं।

4. मुक्खा फाल्स

मुक्खा फाल्स रॉबर्ट्सगंज घोरावल मुखा दरी रोड पर स्थित है। ये झरना रॉबर्ट्सगंज से 55 किमी. और शिवद्वार से 15 किमी. की दूरी पर है। मुक्खा फाल्स सोनभद्र जिले के सबसे आकर्षक झरनों में से है जिसको देखने हर साल हजारों टूरिस्ट आते हैं। मुखा फॉल्स पिकनिक मनाने के लिए भी स्थानीय लोगों का पसंदीदा स्थान है। ये झरना देवी मंदिर और करिया ताल के पास है। बारिश के समय इस झरने को देखना मन को सुकून देने जैसा काम करता है। उस समय ये झरना पानी से भर जाता है। झमझम बहते झरने को देखने का सुख क्या होता है ये आपको सोनभद्र की मुक्खा फाल्स देखकर मालूम चल जाएगा।

कब जाएँ?

सोनभद्र यूपी जैसे मैदानी राज्य का हिस्सा है। इसलिए गर्मियों के मौसम में यहाँ आना वाकई थकान और उमस भरा हो सकता है। सोनभद्र घूमने के लिए सबसे सही समय सर्दियों का होता है। जनवरी, फरवरी और मार्च के महीनों में सोनभद्र घूमना सबसे बढ़िया समय रहता है। क्योंकि इस समय आपको गर्मी और तेज धूप की चिंता नहीं करनी पड़ेगी, इसलिए आप आराम से घूमने पर ध्यान दे सकते हैं। ठहरने के लिए आपको सोनभद्र में अलग अलग बजट में होटल और गेस्टहाऊस मिल जाएंगे। यहाँ 200 से 300 रुपए की रेंज में आपको रात बिताने का ठीक ठाक कमरा मिल जाएगा। सोनभद्र में किसी पांच सितारा लग्जरी होटल की उम्मीद ना करें तो बेहतर होगा।

कैसे पहुँचे?

सोनभद्र पहुँचने के लिए आपको बहुत ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। क्योंकि ये यूपी जैसे बढ़िया यातायात वाले राज्य का हिस्सा है इसलिए आप आसानी से सोनभद्र आ सकते हैं।

फ्लाइट से: यदि आप फ्लाइट लेकर सोनभद्र आना चाहते हैं तो मयुरपुर एयरपोर्ट सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है। हालांकि ये एयरपोर्ट प्राइवेट है और निजी उड़ानों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। बनारस का लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट सोनभद्र आने के लिए सबसे सही माध्यम होगा।

ट्रेन से: सोनभद्र आने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन मिर्जापुर स्टेशन है। यदि आप चाहें तो रॉबर्ट्सगंज स्टेशन और चोपन स्टेशन के रास्ते भी सोनभद्र आ सकते हैं। ये तीनों ही स्टेशन प्रयागराज, बनारस और कानपुर जैसे बड़े शहरों से अच्छी तरह जुड़े हुए हैं इसलिए आपको ट्रेन मिलने में कोई परेशानी नहीं आएगी।

वाया रोड: सोनभद्र बनारस से लगभग 90 किमी. की दूरी पर स्थित है। सोनभद्र आने के लिए आपको बनारस से आसानी से बसें मिल जाएंगी जिनपर सवार होकर आप सोनभद्र आ सकते हैं।

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