भारत के हजारों साल पुराने प्रसिद्ध मंदिर, जिनकी वास्तुकला और कलाकृति ऐसी कि आप देखते ही रह जायेंगे

Tripoto
2nd May 2021
Photo of भारत के हजारों साल पुराने प्रसिद्ध मंदिर, जिनकी वास्तुकला और कलाकृति ऐसी कि आप देखते ही रह जायेंगे by Smita Yadav
Day 1

भारतीयों में आस्था और विश्वास की पकड़ इतनी मजबूत है कि वो इसके सहारे बड़ी से बड़ी बाधा को भी पार कर जाते हैं। भारत जहाँ कण कण में भगवान बसते हैं, जहाँ धर्म और आस्था को जीवन माना जाता है। यहाँ पर धार्मिक और तीर्थ स्थलों का यूँ तो अम्बार है और हर स्थल की कोई न कोई मान्यता है। मंदिरों के देश भारत में कई ऐसे प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर हैं जो आज भी अपनी भव्यता और महत्ता के लिए भक्तों और पर्यटकों के बीच प्रसिद्द हैं। इसी क्रम में आज मैं आपको रूबरू कराने जा रही हूं भारत के कुछ बेहद ही प्राचीन मन्दिरों से।

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भारत का सबसे प्राचीन मंदिर

आइए, आज उनमें से ही कुछ प्राचीन मन्दिरों के बारे में जानते हैं।

बृहदेश्वर मंदिर, तंजौर, तमिलनाडु

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तमिलनाडु के तंजौर में स्थित बृहदेश्वर मंदिर हिन्दुओं का प्रसिद्ध मंदिर है। जिसकी आस्था में लोग कोसो दूर से भी मीलों की दूरी तय करके यहाँ भगवान के दर्शन करने और भगवान के दरबार में हाजिरी लगाने आते हैं। यह अपने समय के विश्व के विशालतम संरचनाओं में गिना जाता था। यह मंदिर शिव को समर्पित है, और द्रविड़ियन कला का बेहतरीन उदाहरण पेश करता है। बृहदेश्वर मंदिर, मंदिर निर्माण की सर्वश्रेष्ठ परंपरा का अनूठा संगम है। जिसमें वास्तुकला, चित्रकला और अन्य संबद्ध कलाएं सम्मिलित हैं। यह कई परस्पर संबंधित संरचनाओं से बना है, जैसे कि नंदी मंडप, एक स्तंभित पोर्टिको और एक बड़ा हॉल। इसके शीर्ष की ऊंचाई 66 मीटर है। इस मंन्दिर का निर्माण कार्य 1003-1010 ई. के बीच चोल शासक राजाराज चोल प्रथम ने करवाया था।

कैलाशनाथ मंदिर, एलोरा, महाराष्ट्र

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एलोरा का कैलाश मन्दिर महाराष्ट्र के औरंगाबाद ज़िले में प्रसिद्ध ‘एलोरा की गुफ़ाओं' में स्थित है। यह प्राचीन भारतीय सभ्यता का जीवंत प्रदर्शन करता है। यह मंदिर दुनिया भर में एक ही पत्थर की शिला से बनी हुई सबसे बड़ी मूर्ति के लिए प्रसिद्ध है। इस मंदिर को तैयार करने में क़रीब 150 वर्ष लगे और लगभग 7000 मज़दूरों ने लगातार इस पर काम किया। बता दूं, यह मंदिर करीब 12000 हजार साल पुराना है।

लिंगराज मंदिर, भुवनेश्वर, ओडिशा

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लिंगराज मंदिर भुवनेश्वर का सबसे बड़ा मंदिर है। कई कारणों से मंदिर का विशेष महत्व है। यह शहर का सबसे पुराने मंदिरों में से एक है और इस मंदिर का निर्माण सोमवंशी राजा जजाति केशरि ने 11वीं शताब्दी में करवाया था। यह मंदिर भगवना शिव के एक रूप हरिहारा को समर्पित है और शहर का एक प्रमुख लैंडमार्क है। लिंगराज का विशाल मन्दिर अपनी अनुपम स्थापत्यकला के लिए प्रसिद्ध है। मन्दिर में प्रत्येक शिला पर कारीगरी और मूर्तिकला का चमत्कार है।

शोर मंदिर, महाबलीपुरम, तमिलनाडु

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चेन्नई से करीब 55 किलोमीटर दूर बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित शोर मंदिर को दक्षिण भारत के सबसे प्राचीनतम मंदिरों में माना जाता है। मान्यताओं के मुताबिक,इस मंदिर का निर्माण आठवीं शताब्दी में हुआ था। यह मंदिर द्रविड़ वास्तुकला का बेहतरीन नमूना है। यहाँ दरअसल तीन मंदिरों का एक समूह है। बीच में भगवान विष्णु का मंदिर है, जिसके दोनों तरफ शिव मंदिर हैं।

केदारनाथ मंदिर, उत्तराखंड

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केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड का सबसे विशाल शिव मंदिर है। उत्तराखंड में हिमालय पर्वत की गोद में केदारनाथ मन्दिर बारह ज्योतिर्लिंग में सम्मिलित होने के साथ चार धाम और पंच केदार में से भी एक हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव की सवारी नन्दी बैल की प्रतिमा मन्दिर के बाहर एक रक्षक के रूप में स्थित है। 1000 साल से भी ज्यादा पुराने इस मन्दिर को एक चतुर्भुजाकार मंच पर भारी पत्थरों को काट कर समान पटियाओं को मिलाकर बनाया गया है।

पुष्कर का ब्रह्मा मंदिर, राजस्थान

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पुष्कर राजस्थान में प्रसिद्ध तीर्थस्थान है। अजमेर से करीब 11 किलोमीटर दूर यहाँ ब्रह्मा का एक मंदिर है। मान्यताओं के मुताबिक, ब्रह्मा ने यहाँ आकर यज्ञ किया था। यहाँ कार्तिक पूर्णिमा को प्रसिद्ध पुष्कर मेला का आयोजन होता है।यह मंदिर मूल रूप से 14 वीं सदी में बनाया गया था। मंदिर में राजसी छवि वाले कमल पर विराजमान, ब्रहमा जी की चार मुख वाली मूर्ति स्‍थापित है जिसके बाएं तरफ उनकी युवा पत्‍नी गायत्री और दाएं तरफ सावित्री बैठी हैं।

बद्रीनाथ मंदिर, उत्तराखंड

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भारत के चार धामों में प्रमुख तीर्थ-स्थल बद्रीनाथ भगवान विष्णु के रूप समर्पित है। बद्रीनाथ उत्तर दिशा में हिमालय की उपत्यका में अवस्थित हिन्दुओं का मुख्य यात्राधाम माना जाता है। यह मंदिर अपनी वास्तुकला और पौराणिक कथाओं के साथ पूरी दुनिया में सुप्रसिद्ध है।

अंबरनाथ मंदिर, महाराष्ट्र

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यह मंदिर प्राचीन हिन्दू शिल्पकला की ज्वलंत मिसाल है। ग्यारहवीं शताब्दी के मध्य में बने अंबरनाथ शिव मंदिर के बारे में कहा जाता है ​कि इसके जैसा मंदिर पूरी दुनिया में और कहीं नहीं हैं। इसे 11वीं शताब्दी के मध्य में बनाया गया था। यहाँ पर वर्ष 1060 ई. का एक प्राचीन शिलालेख भी पाया गया है। इस अनोखे मंदिर को शिलाहाट नरेश मांबणि द्वारा निर्मित किया गया है। यह मंदिर वलधान नदी के तट पर है और इसके चारों ओर आम तथा इमली के पेड़ हैं।

सोमनाथ मंदिर, गुजरात

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सोमनाथ 12 ज्योतिर्लिंगों में सर्वप्रथम हैं। ज्यादातर श्रद्धालू जो 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन की योजना बनाते हैं, वे सोमनाथ से ही शुरुआत करते हैं। मान्यताओं के मुताबिक, इस मंदिर का निर्माण स्वयं चन्द्रदेव ने किया था। इस वैभवशाली मंदिर को इस्लामिक आक्रान्ताओं ने कई बार लूटा और तोड़ा। यह मंदिर इतना पुराना है कि इसका उल्लेख ऋग्वेद में भी मिलता है।

श्री वरदराजा पेरुमल मंदिर, तमिलनाडु

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श्री वरदराजा पेरुमल मंदिर तामिरभरणी नदी के तट पर स्थित है।इस मंदिर के मुख्य देवता या "मूलवर" वीरराघवन हैं और मंदिर की "उत्सव मूर्ति" श्री वरदराजा पेरूमल है, जिनके नाम पर इस मंदिर का नाम रखा गया है। इस मंदिर को सदियों पहले राजा कृष्णवर्मा ने बनवाया था। श्री वरदराजा पेरूमल के एक कट्टर अनुयायी थे। इस मंदिर के दर्शन करने से एक फलदायक अनुभव होता है।

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