भोपाल में बने इस अधूरे मंदिर में स्थित हैं,एशिया का अद्भुत सबसे ऊंचा शिवलिंग।

Tripoto
17th Jun 2021
Photo of भोपाल में बने इस अधूरे मंदिर में स्थित हैं,एशिया का अद्भुत सबसे ऊंचा शिवलिंग। by Walia Sachin
Day 1

भोजेश्वर मन्दिर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित भोजपुर नामक गाँव में बना एक मन्दिर है। इसे भोजपुर मन्दिर भी कहते हैं। यह मन्दिर बेतवा नदी के तट पर विन्ध्य पर्वतमालाओं के मध्य एक पहाड़ी पर स्थित है। मन्दिर का निर्माण एवं इसके शिवलिंग की स्थापना धार के प्रसिद्ध परमार राजा भोज (1010 - 1053 ई॰) ने करवायी थी। इस स्थल के मूल मन्दिर की स्थापना पाँडवों द्वारा की गई मानी जाती है। इसे "उत्तर भारत का सोमनाथ" भी कहा जाता है।

भारत का इकलौता प्राचीन सबसे बड़ा शिवलिंग

Photo of भोपाल में बने इस अधूरे मंदिर में स्थित हैं,एशिया का अद्भुत सबसे ऊंचा शिवलिंग। by Walia Sachin

मन्दिर की दीवारों पर बनीं खूबसूरत कलाकृतियां

Photo of भोपाल में बने इस अधूरे मंदिर में स्थित हैं,एशिया का अद्भुत सबसे ऊंचा शिवलिंग। by Walia Sachin

प्राचीन खण्डित एक प्रतिमा

Photo of भोपाल में बने इस अधूरे मंदिर में स्थित हैं,एशिया का अद्भुत सबसे ऊंचा शिवलिंग। by Walia Sachin

मन्दिर का सबसे बड़ा दरवाजा

Photo of भोपाल में बने इस अधूरे मंदिर में स्थित हैं,एशिया का अद्भुत सबसे ऊंचा शिवलिंग। by Walia Sachin

मन्दिर का इतिहास
यहाँ के शिलालेखों से ११वीं शताब्दी के हिन्दू मन्दिर निर्माण की स्थापत्य कला का ज्ञान होता है व पता चलता है कि गुम्बद का प्रयोग भारत में इस्लाम के आगमन से पूर्व भी होता रहा था। इस अपूर्ण मन्दिर की वृहत कार्य योजना को निकटवर्ती पाषाण शिलाओं पर उकेरा गया है। मन्दिर के बाहर लगे पुरातत्त्व विभाग के शिलालेख अनुसार इस मंदिर का शिवलिंग भारत के मन्दिरों में सबसे ऊँचा एवं विशालतम शिवलिंग है। इस मन्दिर का प्रवेशद्वार भी किसी हिन्दू भवन के दरवाजों में सबसे बड़ा है। मन्दिर के निकट ही इस मन्दिर को समर्पित एक पुरातत्त्व संग्रहालय भी बना है। शिवरात्रि के अवसर पर राज्य सरकार द्वारा यहां प्रतिवर्ष भोजपुर उत्सव का आयोजन किया जाता है।

पौराणिक मत के अनुसार
इस मत के अनुसार माता कुन्ती द्वारा भगवान शिव की पूजा करने के लिए पाण्डवों ने इस मन्दिर के निर्माण का एक रात्रि में ही पूरा करने का संकल्प लिया जो पूरा नहीं हो सका। इस प्रकार यह मन्दिर आज तक अधूरा है।

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