मेरा और मेरी सखी का देवगढ़ आगमन

Tripoto
3rd Jan 2022

मेरी यात्रा तो परसो ही शुरू हो गई थी । मैं सूरत से देवगढ़ के लिए रवाना हुई । journey तो अच्छी रही लेक़िन रास्ते मे थोड़ी सी परेशानी हुई थी but overall journey अच्छी रही , ठंडी के दिनों में बस से सफर । सर्द रात, ठंडी हवा , खिड़कियों पर जमी ओस और ठंडी ठंडी खिड़कियां । थोड़ी सी ठिठुरन के साथ वो सफर बहुत यादगार रहा ।

कल दिनांक 2 जनवरी 2022 को सुबह करीब 8 बजे में देवगढ़ पहुँच गई । हमेशा की तरह पापा मेरा इंतज़ार करते वही bus stand पर खड़े थे । पापा के साथ मे घर आ गई , घर भी मेरे आने से ख़ुश था।  मम्मी, बड़ी मम्मी, बड़े पापा सब से मिलकर बहुत अच्छा लगा । आते ही आराम से मस्त सोफे पर बैठना और ठंड के दिन है तो blanket में बराबर pack हो कर बैठने का आनंद ही कुछ और है ।

अब मैं घर आई हूँ तो बिना photo लिए मेरा कोई दिन कैसे शुरू हो सकता है तो आते ही मम्मी बड़ी मम्मी के साथ ek selfie तो बनती हैं । ना कोई चिंता ना कोई काम बैठे बैठे 9 बज गए , आज कही जाना था तो जल्दी तैयार होना था

Oppps sorry बताना तो रह गया । जिस दोस्त (सखी / बहन) का मैं पिछले एक महीने से इंतज़ार कर रही थी आज वो भी आने वाली है तो हमे सामने लेने जाना था ।

मेरी दोस्त जिसका नाम जागृति था हमने बचपन से अब तक साथ साथ अपनी सारी बाते share की हैं । हम दोनों बहन से कुछ कम नही थे । "Sister from another Mother"
हर बात एक दूसरे से बताना , पूछे बिना कोई काम नही करना । मस्ती , मज़ाक , जगड़े सब कुछ । पायल और जागृति ।

बस अब बात थोड़ी अलग है मेरी शादी हो गई है और जागृति ने अपना अलग रास्ता चुन लिया था - संयम का रास्ता । जागृति ने दीक्षा ले ली और संयम पथ पर आगे बढ़ गई । अब जागृति किसी की बेटी किसी की बहन और मेरी सखी जागृति नही हैं , अब वो "महासती जयंकरा श्री जी मा.सा" बन गए है ।

"राम गुरुवर ने मन में तेरे ऐसी ज्योत जगाई हैं,
उपाध्याय प्रवर ने मन में तेरे ऐसी आस बढ़ाई है...
जागृत हो कर आज तूने एक कदम बढ़ाया हैं,
मोह माया सब त्याग कर तु वैरागी कहलाई हैं...
राग द्वेष की जगह अब कितनी समता तुझमे समाई हैं...
चेहरे पर तेरे ये तेज देख सारी दुनिया हरसाई हैं...
औगा हाथ में लिए देखो ये साध्वी कैसे मुस्काई हैं...
वाणी में संयम जीतना उतनी सुंदर इनकी वाणी हैं...
"पायल" सी छनकती आज दृढ़ता इनमें समाई हैं...
आज सीखाने सबको संयम तूने संयम अपनाया हैं...
धन्य हो कर वंदना अरज़ करते हैं आज तुमको,
अपनी जागृति से जयंकरा कहलाई हैं..."

कैसा संजोग बना था आज मेरा और मेरे बहन मा.सा का एक ही दिन देवगढ़ में आगमन हुआ । हम सब 9:30 बजे तैयार हो गए हमे मा.सा को लेने उनके सामने जाना था । मा.सा. साँगावास से विहार कर देवगढ़ से 4 km दूर कुण्डेली गाँव पहुँचे थे । जब मैंने मा. सा को देखा उनके चेहरे पर क्या तेज था एक अलग ही चमक थी उनकी निगाहों में । उनका रूप और दमक रहा था । हम कुण्डेली गाँव से मा.सा के साथ पैदल ही देवगढ़ आए थे । रास्ते भर में कितने कंकर कांटे और कच्ची सड़क थी उस पर नंगे पैर चलना बहुत मुश्किल होता है , लेकिन संयम लिए हुए साधु साध्वी जी के लिए ये सब तो सामान्य है । उनके लिए तो क्या कांटे और क्या फूल सब एक ही है । 3 महासतिया जी मा.सा के साथ हम सब लोग ।

हम देवगढ़ पहुँच गए मा.सा के साथ साथ मारू दरवाज़ा से main market होते हुए कोतवाली चौराया से बड़े गणेश जी होते हुए बड़ी होली के स्थान 11 बजे समता भवन पहुँचे । रविवार था तो साथ साथ समता साखा भी हो गई बाद में सामुहिक वंदना कर मांगलिक पाठ सुन हम सब अपने अपने घर लौट आए ।
कल का दिन मेरे लिए बहुत special था ।

#पायल पोखरना कोठारी

Photo of मेरा और मेरी सखी का देवगढ़ आगमन by Payal Pokharna Kothari