यदि आप उत्तराखंड चारधाम यात्रा की ट्रिप प्लानिंग कर रहे हैं, तो यह ख़बर आपके काम की है!

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प्रिय घुमक्कड़ों किसी भी यात्रा पर निकलने से पहले सबसे जरूरी काम जो एक यात्री को करना चाहिए वह यह है कि उस यात्रा से जुड़ी सभी जरूरी चीजों की सम्पूर्ण तैयारी जैसे यात्रा का शुरुआत पॉइंट, यात्रा पर किन-किन चीजों की जरूरत होगी और इस यात्रा को पूरा करने के लिए क्या कुछ जरूरी नियम-शर्तें, दिशा-निर्देश हैं या कुछ जरूरी डॉक्यूमेंट की जरूरत है अगर है तो उसकी समय से पूर्व तैयारी आदि। ऐसा करने से आपकी यात्रा सुखद, सुगम मनोरंजक और यादगार बन जाती है अन्यथा आपकी यात्रा एक निराशा से भर जाती है और आपको पछतावा होता है कि काश मैने समय पूर्व थोड़ी जानकारी इकठ्ठा कर ली होती और जरूरी दिशा-निर्देशों के साथ ही आवश्यक चीजों की तैयारी पूर्ण कर ली होती।

साथियों जैसा कि हमारा देश भारत एक आस्थावान देश है और यहां श्रद्धा और आस्था को सर्वोपरि रखा जाता है। इसी आस्था को और अधिक सुदृढ़, समृद्ध और जीवंत बनाने के लिए हर वर्ष यहां प्रायः हज़ारों-लाखों श्रद्धालु देश-विदेश में स्थित विभिन्न पवित्र धार्मिक स्थलों की यात्रा किया करते हैं। उत्तराखंड जिसे देवभूमि के नाम से जाना जाता है यानी कि वह स्थल जहां साक्षात देवताओं का निवास है, जहां देवता रमण करते हैं या आप कह सकते हैं वह स्थल जहां पृथ्वी का स्वर्ग है। देश में उत्तराखंड एक ऐसा ही प्रदेश है जहां हिमालय की सुदूर फैली पर्वत श्रृंखलाओं और दुर्गम पहाड़ियों के बीच स्थित पवित्र चार धाम बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री हिंदुओं के लिए बहुत ही पवित्र दिव्य तीर्थ-स्थल हैं और इन पवित्र स्थलों की यात्रा 'चार धाम' की यात्रा के रूप में जानी जाती है। हर हिन्दू का यह सपना होता है कि वह अपने जीवनकाल में एक बार इन दिव्य, पवित्र स्थलों का दर्शन अवश्य कर ले।

हर साल इन धामों के कपाट अप्रैल-मई महीने में श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खुल जाते हैं और अक्टूबर तक बंद हो जातें क्योंकि हिमालय का क्षेत्र होने के कारण इसके बाद यह क्षेत्र सफेद बर्फ की चादर के आग़ोश में लिपट कर ढक जाता है।

देश में पिछले 2 साल से कोरोना महामारी का प्रकोप होने के कारण यह यात्रा संचालित नहीं हो पाई थी जैसा मैंने ऊपर कहा कि चार धाम एक पवित्र यात्रा है और हिंदुओं के सबसे प्रमुख तीर्थस्थलों से एक है अतः श्रद्धालुओं को बेसब्री से इंतजार था कि कब चार धाम यात्रा पुनः बहाल होगी और वो इसका दर्शन कर सकें।

Credit : Internet both photo

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पर्यटकों के इंतज़ार की घड़ी हुई ख़त्म :-

वैसे तो चार धाम यात्रा के लिए मंदिरों के कपाट श्रद्धालुओं के लिए हर वर्ष अप्रैल-मई महीने में खुल जाते हैं किंतु कोरोना महामारी के चलते इस बार मंदिरों के कपाट- केदारनाथ 17 मई, बद्रीनाथ 18 मई, यमुनोत्री 14 मई और गंगोत्री के कपाट 15 मई को ही खुले जरूर थे पर इस बार आम श्रद्धालुओं और पर्यटकों को दर्शन की अनुमति नहीं थी। आम श्रद्धालुओं को इन धामों के दर्शन के लिए 18 सितम्बर से कुछ जरूरी नियम और शर्तों के साथ खोला गया। चूंकि कोरोना के कारण एकदम से एक साथ श्रद्धालुओं का भीड़ बढ़ना लाज़िमी था तो सरकार ने हाईकोर्ट के निर्देशानुसार नियमों और शर्तों के साथ यात्रा करने की अनुमति दी है। यात्रा करने के लिए पर्यटकों को ई-पास लेना जरूरी है जो कि थोड़ी जटिल प्रक्रिया है। यह दो चरणों में पूरी हो रही है। इसके लिए आपके पास RTPCR निगेटिव टेस्ट का रिपोर्ट 72 घंटे या उसके भीतर का होना चाहिए। 3 दिन से पहले या उससे अधिक पुराने रिपोर्ट मेनी नहीं होंगे। दूसरी शर्त है की पर्यटकों को ई-पास के लिए चारधाम देवस्थानं बोर्ड के पोर्टल के साथ ही देहरादून स्मार्ट सिटी के पोर्टल पर भी रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य है। एक साथ पोर्टल पर क्राउड बढ़ने से कभी-कभी पोर्टल काम करना बंद कर देता है और ई-पास मिलने में असुविधा हो रही है।

चारधाम यात्रा के पर्यटकों के लिए ख़ुशखबरी :-

इन असुविधाओं को दूर करने तथा पर्यटकों की यात्रा को सुखद, सुगम और यादगार बनाने के लिए उत्तराखंड सरकार अब कुछ नियमों और शर्तों को हटाने वाली है, इनमें छूट देने वाली है। उत्तराखंड सरकार अब जल्द ही किसी भी वक़्त देहरादून स्मार्ट सिटी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता को समाप्त कर देगी। सिर्फ़ इतना ही नहीं उत्तराखंड सरकार श्रद्धालुओं को एक और सौगात देने वाली है कि अब तक इन धामों में जो एक दिन में अधिकतम श्रद्धालुओं की निर्धारित संख्या है उसको भी बढ़ाने के लिए हाइकोर्ट में अपील करने का निर्णय लिया है ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु और पर्यटक दर्शन कर सकें और इस यात्रा का लाभ ले सकें।

इसके अलावा उत्तराखंड सरकार चारधाम यात्रा के चेकिंग पॉइंट पर चेकिंग के लिए क्यूआर कोड की व्यवस्था के साथ देवस्थानं बोर्ड के पोर्टल पर ई-पास पंजीकरण के लिए, बुकिंग के लिए और आधार कार्ड के लिए एक अलग से फ़ोन नंबर जारी करने जा रही है।

वर्तमान में एक दिन में चारधाम यात्रा के लिए निर्धारित पर्यटकों की संख्या :-

उत्तराखंड सरकार ने अभी तक चार धाम यात्रा के लिए प्रतिदिन यात्रियों के लिए जो अधिकतम संख्या निर्धारित कर रखी है वो इस प्रकार है---

1- बद्रीनाथ - अधिकतम पर्यटक संख्या 1000 प्रतिदिन

2- केदारनाथ - अधिकतम पर्यटक संख्या 800 प्रतिदिन

3- गंगोत्री - अधिकतम पर्यटक संख्या 600 प्रतिदिन

4- यमुनोत्री - अधिकतम पर्यटक संख्या 400 प्रतिदिन

चार धाम यात्रा से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी :-

1- कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए बच्चों, बीमार और अतिवृद्ध लोगों को यात्रा करने की अनुमति नहीं है।

2- गर्भगृह में पर्यटकों को जाने की अनुमति नहीं है या मूर्ति आदि को छूने की मनाही है।

3- यह यात्रा इस बार देर से चालू हुई अतः यात्रा नवम्बर के मध्य तक चलेगी।

4- इस यात्रा पर उन्हीं पर्यटकों या श्रद्धालुओं को अनुमति मिलेगी जिन्होंने अपना कोरोनारोधी टीके का दूसरा डोज़ कम से कम 15 दिन पहले लिया है।

5:- महाराष्ट्र, केरला, और आंध्रप्रदेश या उन राज्यों के पर्यटकों, श्रद्धलुओं जहां अभी भी कोरोना मरीजों की संख्या ज़्यादा है उन राज्यों के पर्यटकों को RTPCR की निगेटिव रिपोर्ट 72 घंटे जो कि 72 घंटे से ज़्यादा देरी का न हो उसे दिखाना ही पड़ेगा भले ही उन्हें कोरोनारोधी टीके की दोनों डोज़ लग चुका है। इन पर्यटकों के पास अगर RTPCR की नैगेटिव रिपोर्ट नहीं है तो इन्हें यात्रा करने की अनुमति नहीं मिलेगा।

जैसा कि आपने देखा या सुना होगा कि बहुत सारे पर्यटकों के पास ई-पास था फिर भी उन्हें चेकिंग पॉइंट से लौटा दिया गया उन्हें यात्रा करने नहीं दिया गया, उसका कारण यही हो सकता है कि या तो उनके टीके 15 दिन के भीतर अभी हाल ही में लगे हों या फिर वो इन राज्यों से हों जिनको दोनों टीके लगे हों परन्तु उनके पास RTPCR या कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट न हो।

उदास या मायूस होने की जरूरत नहीं :-

ऐसे सभी पर्यटक जिनकी दिली इच्छा था कि वो चार धाम की यात्रा इसी वर्ष पूर्ण करें पर जिन्हें भी अभी तक ई-पास नहीं मिल पाया है या वे लोग ऊपर में किसी भी जरूरी नियम और शर्तों के अभाव में यात्रा नहीं कर पाए उनके पास अभी भी मौका है इस यात्रा को पूरा करने का बस उन्हें इन आवश्यक नियम और शर्तों को यात्रा पर निकलने से पहले तैयारी कर लेनी है। तो इंतजार किस बात का घुमक्कड़ों करो अपनी तैयारी उठाओ अपना बैकपैक और झोला निकल पड़ो अपने अंदर में बसे प्रभु और अपने आराध्य इष्टदेवों का दीदार करने, उनका झलक पाने के लिए, उनका दिव्य दर्शन करने और उनको अपने ह्र्दय स्थल में सदैव बसाने के लिए। जाने अगले पल क्या हो तो अभी जीवन है और अभी यह सौभाग्य भी मिला है इसका पूरा लाभ लें अपनी धार्मिक और आध्यात्मिक तीर्थ यात्रा को पूर्ण कर पुण्य के भागी बनें और जीवन के चार परम पुरुषार्थों -- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को अर्जित करें। यही इस जीवन का सार है वैसे भी यह जीवन एक सतत चलायमान यात्रा है और आपको यात्रा पर ही तो निकलना है। एक ऐसी यात्रा जहां आप ख़ुद से जुड़ सकें, अपनी आध्यात्मि अंतर्यात्रा कर सकें अपने आराध्य को अपने हृदय के मन-मंदिर में सदा-सदा के लिए बसा लें।

हर हर महादेव..!!!

Happy Travelling ..!! #TripotoCommunity

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